जब हम पहले ट्विटर पर रोजाना लिखते थे तो उस समय हमारे ट्वीट लाखों में व्यू होते थे और हजारों में लाइक होते थे जिसका कुछ प्रमाण नीचे स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं।
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कोई जरूरी नहीं है कि किसी संस्था से जुड़कर ही आप जीविकोपार्जन करें। ज्ञानी व्यक्ति जहाँ भी लिखता है उसका सम्मान होता है।
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सूचनार्थ, आप अपने उसी नाम से हमें ऊपर दिए गए ईमेल आईडी पर मेल करें जिस नाम से आप हमारे इस चैनल पर जुड़े हुए हैं जिससे ईमेल को देखने के बाद जरूरत होने पर हम आपसे टेलीग्राम पर बात कर सकें।
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पिटिशन रीफाइल हुई है फिर भी डिफेक्ट में है। ₹2300 कोर्ट फी जमा नहीं की है। इसमें कुछ नहीं होना है। जिनका इंटरव्यू कॉल हुआ है वह आयोग और सरकार पर जल्दी इंटरव्यू के लिए दबाव बनाएँ।
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मैटर सुनने वाला जज अच्छा नहीं है। खराब जज की कोर्ट में मैटर लगना भी दुर्भाग्य होता है। कुछ जज केस को खारिज करने के लिए कुख्यात होते हैं।
हालांकि हुआ कुछ नहीं है सिवाय इसके कि सरकार को सुनने के लिए 21 जुलाई तारीख दे दी गई है।
सरकार क्या करेगी क्योंकि सरकार तो हाईकोर्ट में स्वीकार कर चुकी है कि 28 विषयों में गड़बड़ी का कोई साक्ष्य नहीं है।
सरकार अगर हाईकोर्ट से असहमत होती तो उसे सुप्रीमकोर्ट जाना चाहिए था लेकिन सरकार तो नहीं गई
चूँकि सरकार रेस्पॉन्डेंट है तो सरकार तो हाईकोर्ट के जजमेंट का बचाव करेगी
ये जज लोग भी आपस में एक दूसरे से चिढ़ रखते हैं
जजमेंट के नीचे जज का नाम देखकर ही उसे डिसमिस कर देते हैं
यहाँ मुद्दा यह है कि सरकार ही नौकरी नहीं देना चाहती है
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परीक्षा के साल भर बाद परीक्षा रद्द करना यही बताता है कि सरकार खुद भर्ती को पूरा नहीं करना चाहती है
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