असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
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चूँकि सरकार रेस्पॉन्डेंट है तो सरकार तो हाईकोर्ट के जजमेंट का बचाव करेगी
पता है क्या होता है
ये जज लोग भी आपस में एक दूसरे से चिढ़ रखते हैं
जजमेंट के नीचे जज का नाम देखकर ही उसे डिसमिस कर देते हैं
यहाँ मुद्दा यह है कि सरकार ही नौकरी नहीं देना चाहती है
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परीक्षा के साल भर बाद परीक्षा रद्द करना यही बताता है कि सरकार खुद भर्ती को पूरा नहीं करना चाहती है
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अनपढ़ आदमी सत्ता में होगा तो यही सब देखने को मिलता है
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रिटायर आदमी नौकरी कर रहा है और जिनकी नौकरी की उम्र है उनकी भर्ती पूरी नहीं कर रहे हैं
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तुम क्या सोचते हो भ्रष्टाचार नहीं हुआ होगा? बस तुम्हें पता नहीं है। पिछली भर्ती में तो जाँच हुई तो 18 लोग पकड़ में आ गए थे।
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नेता न्यायपालिका दोनों युवाओं का उल्लू बना रहे हैं।
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जज को यह नहीं दिखाई पड़ रहा है कि भर्ती चार साल में क्यों पूरी नहीं हुई है?
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अब वह लोग भी कोर्ट पहुँच जाएँ जिन्होंने एग्जाम को छोड़ दिया है
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28 विषयों की परीक्षा को ही अनुमति नहीं देनी चाहिए थी।
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28 विषयों की परीक्षा की अनुमति भी दे दी लेकिन ओएमआर का मूल्यांकन नहीं होगा
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इन मूर्खों के लिए कुछ कहना समय बर्बाद करना है
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16-17 अप्रैल 2025 को ली गई परीक्षा में मात्र 18 लोग गड़बड़ी में पकड़े गए हैं लेकिन इस परीक्षा के फेल हुए कैंडिडेट्स पुनर्परीक्षा के आधार पर नया रिजल्ट चाहते हैं। जब सरकार यह मान चुकी है कि 18 के अलावा अन्य कोई गड़बड़ी नहीं किया है फिर भी इन्हें नया रिजल्ट चाहिए जिससे इनका काम बन जाए। ये सभी धूर्त फेसबुक पर सक्रिय हैं।
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पाँच अन्य विषयों के पास छात्रों ने भी पिटिशन डाली हुई हुई और उनकी बात भी सही है कि जब गड़बड़ी वाले केवल 18 हैं तो उन्हें क्यों फिर से परीक्षा देनी पड़ रही है।
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अब एक पिटिशन 28 विषयों के वह छात्र भी डाल दें जिन्होंने री-एग्जाम को छोड़ दिया था।
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