कट ऑफ के साथ परीक्षा परिणाम जारी। अध्यक्ष जी बहुत ईमानदार हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट डिवीजन बेंच ने वंशिका यादव के जजमेंट का उल्लंघन किया है। वंशिका यादव के जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने रीएग्जाम की अनुमति नहीं दी थी किंतु यहाँ पर इलाहाबाद हाईकोर्ट डिवीजन बेंच ने रीएग्जाम की अनुमति देकर सरकार के पक्ष में ही अपना निर्णय दिया था किंतु छात्रों के वकील इस बात को समझ नहीं पाए अन्यथा उसी समय यह कह देते कि जब ओएमआर चेक नहीं होगी तो परीक्षा कराने का आर्डर क्यों दे रहे हैं और वंशिका यादव के जजमेंट का उल्लंघन क्यों कर रहे हैं। जज सरकार का ही फेवर करते हैं यह सिद्ध हो गया है। सरकार को हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट का कोई डर नहीं है इसलिए सभी विषयों का परीक्षा परिणाम भी जारी कर दिया गया है।
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अभी सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता बंधु से बात हुई है। 28 विषयों का पुराना परीक्षा परिणाम ही मान्य होगा।
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पाँच अन्य विषयों के संबंध में भी बात हुई जिसकी कल सुनवाई हुई है। उनका कहना है जब गड़बड़ी करने वाले 19 अभ्यर्थी पकड़े जा चुके हैं तो अन्य अभ्यर्थियों को कैसे दंडित किया जा सकता है।
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सावधान, जैसा हमारा विश्वास है कि सरकार ने अपने लोगों को भरने के लिए परीक्षा को रद्द किया था और अब नया नियम ओएमआर शीट को नष्ट करने को लेकर आए हैं तो बहुत संभव है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले इंटरव्यू लेकर फाइनल रिजल्ट देकर ओएमआर शीट को नष्ट कर दिया जाए। प्रश्न है जब मैटर सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है तो योगिया सरकार क्यों घोड़े पर चढ़कर भर्ती को रौंद रही है?
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हाईकोर्ट डिवीजन बेंच का जजमेंट आज भी अपनी जगह कायम है। सुप्रीम कोर्ट ने उसे रद्द नहीं किया है लेकिन सरकार अपने चहेतों को इतनी जल्दी नौकरी देना चाहती है कि उसे कोर्ट की कोई परवाह ही नहीं है। यह मामला हाईकोर्ट में ही निपट गया होता अगर डिवीजन बेंच ने रीएग्जाम को allow नहीं किया होता।
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खुलेआम बदमाशी चल रही है।
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जब गड़बड़ी का कोई साक्ष्य ही नहीं है तो पास छात्र को किस आधार पर नयी परीक्षा देने के लिए कह सकते हैं।
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जब योगिया सरकार ने हाईकोर्ट में स्वीकार कर लिया है कि 28 विषयों में गड़बड़ी का कोई साक्ष्य नहीं है तो सुप्रीमकोर्ट में कैसे कहेगी कि पूरी परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी और इसलिए पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया।
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सरकार सुप्रीम कोर्ट में बहस से भाग रही है या कहिए कि बच रही है।
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जब भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए निगरानी समिति बना दी गई थी तो परीक्षा कैसे रद्द हुई? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अगर भ्रष्टाचार हुआ था तो परीक्षा परिणाम क्यों दिया गया? इसका भी जवाब किसी के पास नहीं है। एक ईमानदार अध्यक्ष से त्यागपत्र लेकर चहेते के लिए नियम तक बदल दिए गए। क्यों? अब ओएमआर नष्ट करेंगे जिससे कोई साक्ष्य ही न रहे।
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पुराने रिजल्ट में सरकार के चहेते फेल हो गए थे तो परीक्षा के साल भर बाद नई परीक्षा का तमाशा किया गया है। अगर सरकार ईमानदार होती तो डिवीजन बेंच के फैसले के बाद परीक्षा नहीं लेती बल्कि सुप्रीम कोर्ट से डिवीजन बेंच के फैसले पर स्टे ऑर्डर लेकर परीक्षा कराती। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया जिससे पता चलता है कुछ जुगाड़ू हैं जिन्हें सरकार सीधे प्रोफेसर बनाना चाहती है। इसलिए डिवीजन बेंच के फैसले के बाद भी ओएमआर चेक करके रिजल्ट दिया गया है।
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प्रश्न है निगरानी समिति क्या आयोग में घास छील रही थी?