हमसे जितना होता है दूसरों के लिए उतना कर देते हैं क्योंकि परोपकार करना सबसे उत्तम कार्य है बाकी सूचना देने के लिए हमें किसी ने नियुक्त नहीं किया है। हर कोई चाहता है कि परीक्षा स्थल की सूचना शीघ्र मिल जाए इसलिए हमने सूचना देना अपना कर्तव्य समझा।
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असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
7-8 अप्रैल तक जनपद की सूचना आ जाएगी।
इस पोस्ट पर क्लिक करके उसकी डेट देख सकते हैं। यह हमने 29 मार्च को लिखा था। तो जैसा लिखा था 7-8 अप्रैल तो 7 अप्रैल को विषयवार सूचना आ गई और 8 अप्रैल को जनपद का पता चल गया। इसे इंटूशन कहते हैं। जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति से व्यक्ति में इंटूशन क्षमता होती है। अब यह अलग बात है वह कितना बता रहा है अथवा नहीं बता रहा है किंतु उसे भविष्य का स्पष्ट पूर्वानुमान रहता है यह तय है।
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आयोग की साइट पर प्रवेश पत्र उपलब्ध हैं। परीक्षा समय ठीक वही दिया गया है जो 8 दिन पहले सूचित किया गया था। इस विषय में हमने थोड़ी देर पहले आयोग को एक ट्वीट भी किया था और समस्या समाधान होने पर उस ट्वीट को हटा दिया गया। जय श्री कृष्ण!
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आयोग ने ऊपर नोटिस में कहा है कि उन्हें अभी उच्च न्यायालय का आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने पर कार्यवाही होगी।
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क्या वायरल वीडियो झूठा है? आयोग ने कहा है कि उन्हें न्यायालय का आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से 5 विषय और 28 विषय की बात कही गई है। आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि जब तक उन्हें न्यायालय का आदेश प्राप्त नहीं होगा परीक्षा यथावत रहेगी।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय आ गया है। 28 विषयों की ओएमआर का मूल्यांकन नहीं होगा। ऐसी स्थिति में परीक्षा देने से क्या लाभ है? अतः आप सभी से निवेदन है कि आयोग के ट्विटर हैंडल पर जाकर आयोग से कहें कि 28 विषयों की परीक्षा को स्थगित करने की कृपा करे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग को केवल दागी पाँच विषयों की ओएमआर का मूल्यांकन करने का आदेश दिया है। 28 विषयों के छात्रों को अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। आयोग के ट्विटर हैंडल पर जाकर अपनी बात लिखिए कि जब हाईकोर्ट ने ही ओएमआर के मूल्यांकन से मना कर दिया है तो परीक्षा लेने का कोई औचित्य नहीं है।
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इसका हिंदी भावार्थ यही है कि 28 विषयों की ओएमआर का मूल्यांकन नहीं होगा। 28 विषयों का पुराना रिजल्ट ही मान्य होगा। ऐसी स्थिति में 28 विषयों के छात्रों को क्यों अनावश्यक दौड़ाया जा रहा है।
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असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
यह प्रश्न हमेशा अनुत्तरित रहेगा कि अगर असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51की परीक्षा में भ्रष्टाचार हुआ था तो परीक्षा परिणाम देने की क्या आवश्यकता थी जबकि सरकार ने एक निगरानी समिति का गठन किया था और उस निगरानी समिति की देखरेख में ही मूल्यांकन कार्य संपन्न…
5 अप्रैल को की गई पोस्ट का परीक्षा से पहले उत्तर मिल गया है।
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हमने कितने वीडियो बनाए थे।
कुछ याद है? अगर आपने हमारे वीडियो देखे होंगे तो हमने हर वीडियो में कितना जोर देकर यह बात कही थी कि इस परीक्षा को योगी जी भी रद्द नहीं कर सकते। हमने यह तक कहा था कि इस परीक्षा को मोदी जी भी रद्द नहीं कर सकते। तो क्या हमारी बात झूठ हो जाती? असंभव।
बस समय की बात थी और जैसा आपने देखा परीक्षा से पहले परीक्षा रद्द करने का सरकार का निर्णय पूरी तरह से गलत सिद्ध हो चुका है।
दूसरी बात यह है कि क्या आयोग 28 विषयों की ओएमआर का मूल्यांकन कर सकता है तो इसका उत्तर है कदापि नहीं क्योंकि वर्तमान परीक्षा हाईकोर्ट के डबल बेंच के निर्णय के अधीन हो रही है इसलिए क्योंकि वर्तमान में अन्य किसी कोर्ट का कोई निर्णय नहीं है तो आयोग किसी भी स्थिति में इन 28 विषयों की ओएमआर का मूल्यांकन नहीं करेगा। एक बात और कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी तो इसका उत्तर है कदापि नहीं क्योंकि हाईकोर्ट ने अपने जजमेंट में स्वयं इसका उल्लेख किया है कि सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है कि जितना खराब है उतना ही हटाया जाएगा बाकी को रखा जाएगा।
कुल मिलाकर परीक्षा को रद्द करने का सरकार का निर्णय गलत था। यह उन जाँच संस्थाओं के मुँह पर एक थप्पड़ है जिन्होंने परीक्षा रद्द होने का विरोध नहीं किया था। अब 28 विषयों की परीक्षा भले हो रही है किंतु उसका कोई अर्थ नहीं है। इन 28 विषयों का वही रिजल्ट मान्य होगा जो 4 सितंबर 2025 को घोषित हुआ था। जय श्री कृष्ण!
कुछ याद है? अगर आपने हमारे वीडियो देखे होंगे तो हमने हर वीडियो में कितना जोर देकर यह बात कही थी कि इस परीक्षा को योगी जी भी रद्द नहीं कर सकते। हमने यह तक कहा था कि इस परीक्षा को मोदी जी भी रद्द नहीं कर सकते। तो क्या हमारी बात झूठ हो जाती? असंभव।
बस समय की बात थी और जैसा आपने देखा परीक्षा से पहले परीक्षा रद्द करने का सरकार का निर्णय पूरी तरह से गलत सिद्ध हो चुका है।
दूसरी बात यह है कि क्या आयोग 28 विषयों की ओएमआर का मूल्यांकन कर सकता है तो इसका उत्तर है कदापि नहीं क्योंकि वर्तमान परीक्षा हाईकोर्ट के डबल बेंच के निर्णय के अधीन हो रही है इसलिए क्योंकि वर्तमान में अन्य किसी कोर्ट का कोई निर्णय नहीं है तो आयोग किसी भी स्थिति में इन 28 विषयों की ओएमआर का मूल्यांकन नहीं करेगा। एक बात और कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी तो इसका उत्तर है कदापि नहीं क्योंकि हाईकोर्ट ने अपने जजमेंट में स्वयं इसका उल्लेख किया है कि सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है कि जितना खराब है उतना ही हटाया जाएगा बाकी को रखा जाएगा।
कुल मिलाकर परीक्षा को रद्द करने का सरकार का निर्णय गलत था। यह उन जाँच संस्थाओं के मुँह पर एक थप्पड़ है जिन्होंने परीक्षा रद्द होने का विरोध नहीं किया था। अब 28 विषयों की परीक्षा भले हो रही है किंतु उसका कोई अर्थ नहीं है। इन 28 विषयों का वही रिजल्ट मान्य होगा जो 4 सितंबर 2025 को घोषित हुआ था। जय श्री कृष्ण!
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