मैटर सुनने वाला जज अच्छा नहीं है। खराब जज की कोर्ट में मैटर लगना भी दुर्भाग्य होता है। कुछ जज केस को खारिज करने के लिए कुख्यात होते हैं।
हालांकि हुआ कुछ नहीं है सिवाय इसके कि सरकार को सुनने के लिए 21 जुलाई तारीख दे दी गई है।
सरकार क्या करेगी क्योंकि सरकार तो हाईकोर्ट में स्वीकार कर चुकी है कि 28 विषयों में गड़बड़ी का कोई साक्ष्य नहीं है।
सरकार अगर हाईकोर्ट से असहमत होती तो उसे सुप्रीमकोर्ट जाना चाहिए था लेकिन सरकार तो नहीं गई
चूँकि सरकार रेस्पॉन्डेंट है तो सरकार तो हाईकोर्ट के जजमेंट का बचाव करेगी
ये जज लोग भी आपस में एक दूसरे से चिढ़ रखते हैं
जजमेंट के नीचे जज का नाम देखकर ही उसे डिसमिस कर देते हैं
यहाँ मुद्दा यह है कि सरकार ही नौकरी नहीं देना चाहती है
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परीक्षा के साल भर बाद परीक्षा रद्द करना यही बताता है कि सरकार खुद भर्ती को पूरा नहीं करना चाहती है
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अनपढ़ आदमी सत्ता में होगा तो यही सब देखने को मिलता है
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रिटायर आदमी नौकरी कर रहा है और जिनकी नौकरी की उम्र है उनकी भर्ती पूरी नहीं कर रहे हैं
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तुम क्या सोचते हो भ्रष्टाचार नहीं हुआ होगा? बस तुम्हें पता नहीं है। पिछली भर्ती में तो जाँच हुई तो 18 लोग पकड़ में आ गए थे।
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नेता न्यायपालिका दोनों युवाओं का उल्लू बना रहे हैं।
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जज को यह नहीं दिखाई पड़ रहा है कि भर्ती चार साल में क्यों पूरी नहीं हुई है?
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अब वह लोग भी कोर्ट पहुँच जाएँ जिन्होंने एग्जाम को छोड़ दिया है
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28 विषयों की परीक्षा को ही अनुमति नहीं देनी चाहिए थी।
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28 विषयों की परीक्षा की अनुमति भी दे दी लेकिन ओएमआर का मूल्यांकन नहीं होगा
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इन मूर्खों के लिए कुछ कहना समय बर्बाद करना है
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