असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
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किसी प्रक्रिया को अधिक समय तक लटकाए रखना अत्यंत पीड़ा दायक होता है श्रीमान जी पुलिस विभाग में कार्यरत रहे हैं तो इस तत्व से भली भांति अवगत होंगे कि अपराधी को भी जब फांसी दी जाती है और उसके प्राण नहीं निकलते हैं तो उसके पैरों को पड़कर खींच दिया जाता है जिससे उसे पीड़ा से मुक्ति मिल सके असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51 की स्थिति फांसी पर लटके हुए व्यक्ति जैसी हो गई है क्योंकि निगरानी समिति के गठन के चलते दखल माफिया असेस्शन प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51 में सफल नहीं हो पाया है और यह इनके कारण परीक्षा को रद्द करवाना चाहता है अब श्रीमान जी असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51 का साक्षात्कार कार्यक्रम जारी करने में देरी करके साक्षात्कार हेतु सफल छात्रों को पीड़ा दे रहे हैं
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