असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
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वह जो नौकरी कर रहे थे उनसे टेट पास करने के लिए कह दिया गया तो आंदोलन छिड़ गया और यहाँ जो इंटरव्यू के लिए पास हुए हैं उनसे कह दिया गया है कि फिर से परीक्षा दो।
यह सरकार नौकरी नहीं देना चाहती और सरकार की इसी मंशा पर आयोग काम करता है इसलिए टीजीटी पीजीटी की तिथि घोषित होती रही किंतु परीक्षा नहीं हुई और छात्रों को परीक्षा तिथि देकर शांत कर दिया गया। असिस्टेंट प्रोफेसर की जो परीक्षा गलती से करा ली गई थी उसे भी रद्द कर दिया गया। सरकार रोजगार देना चाहती तो यह तीनों परीक्षाएं कब का हो चुकी होती।
रिटायर को अध्यक्ष बना दिया गया है उससे समझ लीजिए कि सरकार शिक्षा आयोग को लेकर कितनी गंभीर है। जब आपको अपने पसंद का व्यक्ति ही अध्यक्ष बनाना था तो विज्ञापन निकालकर समय निकालने की क्या आवश्यकता थी? 25 सितंबर को ही उनको आयोग में भेज दिया जाता और अगले दो महीना में पिछले साल ही असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा फिर से कर ली जाती। कहने का अर्थ है कि सरकार अपने हितों को तो देख रही है किंतु छात्रों के हितों से उसे कोई मतलब नहीं है। परीक्षा को रद्द भी किया गया है तो 9 महीने बाद और उसके बाद भी अध्यक्ष कहते हैं कि जादू की छड़ी नहीं है कि तुरंत परीक्षा कर लेंगे तो जिसके पास जादू की छड़ी है उसे अध्यक्ष बनने देते। अध्यक्ष की नियुक्ति ही सिफारिश से हो रही है तो संस्था ईमानदारी से कार्य करेगी या सरकार के इशारों पर चलेगी?
मेधावी छात्र किन परिस्थितियों में अपना जीवन जी रहा है इससे सरकार को और आयोग को कोई मतलब नहीं है।
सभी का यह कर्तव्य होना चाहिए कि परीक्षा यथाशीघ्र संपन्न हो जाए और नियुक्ति मिल जाए किंतु यहाँ छात्र आपस में ही एक दूसरे का खून पीने पर उतारू है
सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए कि आयोग परीक्षा कैलेंडर जारी कर दे
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अन्यथा अन्य छात्र पोर्टल खुलवाने के लिए आंदोलन शुरू कर देंगे
असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51 इंटरव्यू शेड्यूल के लिए आशा करते हैं अपने हाईकोर्ट में रिट कर दी होगी और कितना अच्छा हो अगर हाईकोर्ट सरकार को इंटरव्यू कराने का आदेश जारी कर दे किंतु हमारी जिन वकीलों से बात हुई है उनके अनुसार ऐसा होना बहुत कठिन है।
सरकार का जवाब आने में ही महीना भर निकल जाएगा। यह बहुत लंबा प्रोसीजर है इसलिए जो भी छात्र गंभीर हैं वह आयोग से परीक्षा तिथि की माँग करके यथाशीघ्र परीक्षा करा लें वही ज्यादा ठीक रहेगा अन्यथा आयोग और सरकार की इच्छा कि नौकरी नहीं देनी है वही पूरी होगी।
हाई कोर्ट मैं सरकारी वकील यही कहेंगे कि हम परीक्षा फिर से करा रहे हैं तो जो छात्र हाईकोर्ट गए हैं वह तभी इस बात को कहें कि साढ़े तीन साल बीत चुके हैं इसलिए सरकार को समयबद्ध Time Bound भर्ती कराने का आदेश कर दिया जाए और हाई कोर्ट के जज ऐसा कर भी देंगे तो यह भर्ती अगले कुछ महीनो में पूरी हो जाएगी।
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In the High Court, the government lawyers will say that we are conducting the examination again, then the students who have gone to the High Court should only say that three and a half years have passed, hence the government should be ordered to conduct time bound recruitment and even if the High Court judge does so, then this recruitment will be completed in the next few months.