हम अक्सर कहते हैं-“समय लगेगा…
पर सच यह है, समय नहीं लगता- दिशा गलत होती है।
जब लक्ष्य स्पष्ट हो, रणनीति सही हो,
और प्रयास अनुशासन के साथ हो,
तो कम समय में भी बड़ा बदलाव संभव है।
बाहर की दुनिया में जो सफलता दिखती है,
वह अचानक नहीं आती,
उसके पीछे छुपा होता है निरंतर प्रयास,
सही योजना और धैर्य से जिया गया जीवन।
यही बात विद्यार्थियों पर भी लागू होती है
सालों का समय नहीं,
सही दिशा में किया गया रोज का छोटा प्रयास
आपको आगे ले जाता है।
जब आपका लक्ष्य स्पष्ट होता है,
तो दिमाग भटकता नहीं,
बल्कि पूरी ऊर्जा उसी दिशा में लगाने लगता है।
इसलिए समय का इंतजार मत करो,
खुद को तैयार करो-
क्योंकि सफलता समय से नहीं,
तुम्हारी रणनीति और अनुशासन से तय होती है।
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पर सच यह है, समय नहीं लगता- दिशा गलत होती है।
जब लक्ष्य स्पष्ट हो, रणनीति सही हो,
और प्रयास अनुशासन के साथ हो,
तो कम समय में भी बड़ा बदलाव संभव है।
बाहर की दुनिया में जो सफलता दिखती है,
वह अचानक नहीं आती,
उसके पीछे छुपा होता है निरंतर प्रयास,
सही योजना और धैर्य से जिया गया जीवन।
यही बात विद्यार्थियों पर भी लागू होती है
सालों का समय नहीं,
सही दिशा में किया गया रोज का छोटा प्रयास
आपको आगे ले जाता है।
जब आपका लक्ष्य स्पष्ट होता है,
तो दिमाग भटकता नहीं,
बल्कि पूरी ऊर्जा उसी दिशा में लगाने लगता है।
इसलिए समय का इंतजार मत करो,
खुद को तैयार करो-
क्योंकि सफलता समय से नहीं,
तुम्हारी रणनीति और अनुशासन से तय होती है।
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"जब भी कोई मदद मांगे,
तो कर देनी चाहिए।
शायद उसने पहले
भगवान से प्रार्थना की
हो और भगवान ने
उसे आपके पास भेजा
हो...."
🙏🌺
तो कर देनी चाहिए।
शायद उसने पहले
भगवान से प्रार्थना की
हो और भगवान ने
उसे आपके पास भेजा
हो...."
🙏🌺
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चार दिन बाज के ना उड़ने से
आसमान कबूतरों का नहीं होता.!! ✅
आसमान कबूतरों का नहीं होता.!! ✅
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“कॉकरोच और बेरोज़गार”
अँधेरों में जीते दोनों,
रोशनी से डराए जाते हैं।
एक दीवारों में कुचला जाता,
एक सपनों में मरवाए जाते हैं।
कॉकरोच को लोग गंदगी कहते,
बेरोज़गार को “निकम्मा” बोलते हैं।
दोनों का अपराध बस इतना—
ये व्यवस्था के नीचे डोलते हैं।
वो भी रातों में जागता है,
ये भी करवट बदलता रहता है।
एक रोटी के टुकड़ों खातिर,
एक नौकरी की ख़ातिर बहता है।
कॉकरोच मारने को चप्पल उठती,
इन पर ताने रोज़ उछाले जाते।
“कुछ करता क्यों नहीं?” के पत्थर,
सीने पर हर रोज़ मारे जाते।
दोनों को सब घृणा से देखें,
कोई दर्द नहीं समझ पाता।
एक नाली में छुप जाता है,
एक भीड़ में खो सा जाता।
लेकिन सुन लो ऐ सत्ता वालों,
इतिहास यही दोहराता है—
जब इंसान को कीड़ा समझोगे,
वक्त सिंहासन खा जाता है।
बेरोज़गार कॉकरोच नहीं हैं,
ये टूटे हुए अरमान हैं।
इनकी आँखों में जलते अब भी
कल के हिंदुस्तान हैं।
डॉ.अवधेश कुमार जौहरी
अँधेरों में जीते दोनों,
रोशनी से डराए जाते हैं।
एक दीवारों में कुचला जाता,
एक सपनों में मरवाए जाते हैं।
कॉकरोच को लोग गंदगी कहते,
बेरोज़गार को “निकम्मा” बोलते हैं।
दोनों का अपराध बस इतना—
ये व्यवस्था के नीचे डोलते हैं।
वो भी रातों में जागता है,
ये भी करवट बदलता रहता है।
एक रोटी के टुकड़ों खातिर,
एक नौकरी की ख़ातिर बहता है।
कॉकरोच मारने को चप्पल उठती,
इन पर ताने रोज़ उछाले जाते।
“कुछ करता क्यों नहीं?” के पत्थर,
सीने पर हर रोज़ मारे जाते।
दोनों को सब घृणा से देखें,
कोई दर्द नहीं समझ पाता।
एक नाली में छुप जाता है,
एक भीड़ में खो सा जाता।
लेकिन सुन लो ऐ सत्ता वालों,
इतिहास यही दोहराता है—
जब इंसान को कीड़ा समझोगे,
वक्त सिंहासन खा जाता है।
बेरोज़गार कॉकरोच नहीं हैं,
ये टूटे हुए अरमान हैं।
इनकी आँखों में जलते अब भी
कल के हिंदुस्तान हैं।
डॉ.अवधेश कुमार जौहरी
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यदि आप अपनी स्थिति को बदलने का प्रयास भी नहीं करते हैं, तो इसके बारे में शिकायत भी न करें।✨
यदि आप अपनी स्थिति को बदलने का प्रयास भी नहीं करते हैं, तो इसके बारे में शिकायत भी न करें।✨
💯43❤10🕊6
♦️ UPSC प्रारंभिक परीक्षा के हॉल टिकट (Admit Card) पहली बार हर उम्मीदवार को ईमेल द्वारा भी भेजे गए हैं। 🙏
👉 लिंक: https://upsc.gov.in/e-admit-cards
कल होने वाली #UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए सभी परीक्षार्थियों को ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाई! 💐💐
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कल होने वाली #UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए सभी परीक्षार्थियों को ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाई! 💐💐
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एक घोंसला कैसे बनता है
एक तिनका देख के याद आया
पहले तो थी एक सोच आई
घर तो फिर सोच के बाद आया
एक सोच पे है मीनार बना....
#WorldHistory
एक तिनका देख के याद आया
पहले तो थी एक सोच आई
घर तो फिर सोच के बाद आया
एक सोच पे है मीनार बना....
#WorldHistory
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