जब भी तुम्हें यह लगे कि “मुझसे नहीं होगा”, उस क्षण अपनी आँखें बंद कर माँ-बाप के चेहरे को याद करो, जिन्होंने तुम्हें इस संसार में भेजते समय उम्मीदों का दीपक जलाया था। उनके लिए तुम कोई साधारण बच्चा नहीं, बल्कि सबसे होशियार, सबसे अनमोल रत्न हो। जब कभी किसी परीक्षा में असफलता हाथ लगती है, तब भी तुम्हारी माँ यही कहती है कि “बेटा, तुम तो होशियार थे, शायद परीक्षा में ही कोई भूल-चूक हो गई होगी, इसलिए तुम्हें नहीं लिया गया।” सोचो, उस माँ के सामने तुम कैसे कह दोगे कि “माँ, मुझसे नहीं होगा”? सत्य यह है कि जब तक तुम अपने माता-पिता का ऋण नहीं चुका देते, जब तक उनके त्याग और सम्मान को इस समाज में ऊँचाई नहीं दिला देते, तब तक तुम्हारी सबसे बड़ी हार वहीं है। इसलिए आज से यह संकल्प लो कि कभी भी अपने होंठों से यह शब्द न निकलें कि “मुझसे नहीं होगा”, क्योंकि तुम्हारे हर प्रयास में ही उनके सपनों की रोशनी छिपी है।
दीपेश जांगिड झुंझुनू ✍️❤️
दीपेश जांगिड झुंझुनू ✍️❤️
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