जब भी ज़िंदगी आपको पटक दे
या पीछे ढकेल दे,
तो समझ जाना एक बड़ी छलांग
लगाने का वक़्त आ गया है.🍂🌿
या पीछे ढकेल दे,
तो समझ जाना एक बड़ी छलांग
लगाने का वक़्त आ गया है.🍂🌿
👍39❤2
🍂
एक वक्त गुजरा है,
एक गुजारना बाकी है,
कुछ बिगडा है,
कुछ सुधारना बाकी है..!!
एक वक्त गुजरा है,
एक गुजारना बाकी है,
कुछ बिगडा है,
कुछ सुधारना बाकी है..!!
🙏28👍11❤2🥰2
🤷 लोग क्या कहेंगे.....🤷♂
पहले दिन हंसेंगे
दूसरे दिन मजाक उड़ाएंगे
और तीसरे दिन भूल जाएंगे
इसलिए लोगों की परवाह मत करो।
करो वो जो उचित हो
जो तुम चाहते हो
जिसमे तुम खुश हो
याद रखना जिंदगी तुम्हारी है
लोगों की नहीं।।
╭─❀⊰ 𝐉𝐨𝐢𝐧 📚
👉 @iasipsmotivation
पहले दिन हंसेंगे
दूसरे दिन मजाक उड़ाएंगे
और तीसरे दिन भूल जाएंगे
इसलिए लोगों की परवाह मत करो।
करो वो जो उचित हो
जो तुम चाहते हो
जिसमे तुम खुश हो
याद रखना जिंदगी तुम्हारी है
लोगों की नहीं।।
╭─❀⊰ 𝐉𝐨𝐢𝐧 📚
👉 @iasipsmotivation
👍31❤5🤩1
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
सपनों को पूरा करने की कोशिश मैं खूब करती हूं पढ़ने का मन तो नहीं करता फिर भी मैं खूब पढ़ती हूं जानती हूं कि और कोई चारा नहीं यही बस यही सहारा है आज यह भले कष्ट ही लगे पर कल सुनहरा भविष्य हमारा है। 💯🏆
╭─❀⊰ 𝐉𝐨𝐢𝐧 📚
👉 @iasipsmotivation
╭─❀⊰ 𝐉𝐨𝐢𝐧 📚
👉 @iasipsmotivation
❤41👍10🥰4🔥2
दिसंबर और जनवरी
एक अंत है, एक शुरुआत
जैसे रात से सुबह, सुबह से रात
एक में याद है, दूसरे में आस
एक को है तजुर्बा, दूसरे को विश्वास
एक अंत है, एक शुरुआत
जैसे रात से सुबह, सुबह से रात
एक में याद है, दूसरे में आस
एक को है तजुर्बा, दूसरे को विश्वास
❤38🔥2👍1
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
पढ़ाई करने में दिक्कते आए...
तो समझो कि ये तैयारी ..
आपको और मज़बूत बना रही है।
╭─❀⊰ 𝐉𝐨𝐢𝐧 📚
👉 @iasipsmotivation
तो समझो कि ये तैयारी ..
आपको और मज़बूत बना रही है।
╭─❀⊰ 𝐉𝐨𝐢𝐧 📚
👉 @iasipsmotivation
👍36❤5
✍
आज प्रत्येक घर में परस्पर द्वेष, संघर्ष, दुःख और अशांति का जो वातावरण है उसका एक ही कारण है और वह है प्रेम का अभाव। आग को आग नहीं बुझाती पानी बुझाता है। पशु -पक्षी भी प्रेम की भाषा समझते हैं। प्रेम वो इत्र है जिसकी खुशबू कभी समाप्त नहीं होती। आनंद दो, आनंद लो और आनंद में जियो, यही बुद्धिमत्ता का लक्षण है।
आज प्रत्येक घर में परस्पर द्वेष, संघर्ष, दुःख और अशांति का जो वातावरण है उसका एक ही कारण है और वह है प्रेम का अभाव। आग को आग नहीं बुझाती पानी बुझाता है। पशु -पक्षी भी प्रेम की भाषा समझते हैं। प्रेम वो इत्र है जिसकी खुशबू कभी समाप्त नहीं होती। आनंद दो, आनंद लो और आनंद में जियो, यही बुद्धिमत्ता का लक्षण है।
❤41👍1
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
“कोई भी कठिन लक्ष्य सामने हो तो बस एक बार अपने आप से ज़रूर बोले “यह आसान है।“ उसी समय समस्याएं बौनी हो जायेगीं।”🌹✨
╭─❀⊰ 𝐉𝐨𝐢𝐧 📚
👉 @iasipsmotivation
╭─❀⊰ 𝐉𝐨𝐢𝐧 📚
👉 @iasipsmotivation
🔥28❤7👍2
मेहनत तो हर फ़ील्ड में करनी पड़ेगी दोस्त ......बेकार पड़े रहने से तो लोहे में भी ज़ंक लग जाता है
👍41❤8
🔴"अपने माता पिता का सम्मान करने के 35 तरीके !!
1. उनकी उपस्थिति में अपने फोन को दूर रखो.
2. वे क्या कह रहे हैं इस पर ध्यान दो.
3. उनकी राय स्वीकारें.
4. उनकी बातचीत में सम्मिलित हों.
5. उन्हें सम्मान के साथ देखें.
6. हमेशा उनकी प्रशंसा करें.
7. उनको अच्छा समाचार जरूर बताएँ.
8. उनके साथ बुरा समाचार साझा करने से बचें.
9. उनके दोस्तों और प्रियजनों से अच्छी तरह से बोलें.
10. उनके द्वारा किये गए अच्छे काम सदैव याद रखें.
11. वे यदि एक ही कहानी दोहरायें तो भी ऐसे सुनें जैसे पहली बार सुन रहे हो.
12. अतीत की दर्दनाक यादों को मत दोहरायें.
13. उनकी उपस्थिति में कानाफ़ूसी न करें.
14. उनके साथ तमीज़ से बैठें.
15. उनके विचारों को न तो घटिया बताये न ही उनकी आलोचना करें.
16. उनकी बात काटने से बचें.
17. उनकी उम्र का सम्मान करें.
18. उनके आसपास उनके पोते/पोतियों को अनुशासित करने अथवा मारने से बचें.
19. उनकी सलाह और निर्देश स्वीकारें.
20. उनका नेतृत्व स्वीकार करें.
21. उनके साथ ऊँची आवाज़ में बात न करें.
22. उनके आगे अथवा सामने से न चलें.
23. उनसे पहले खाने से बचें.
24. उन्हें घूरें नहीं.
25. उन्हें तब भी गौरवान्वित प्रतीत करायें जब कि वे अपने को इसके लायक न समझें.
26. उनके सामने अपने पैर करके या उनकी ओर अपनी पीठ कर के बैठने से बचें.
27. न तो उनकी बुराई करें और न ही किसी अन्य द्वारा की गई उनकी बुराई का वर्णन करें.
28. उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में शामिल करें.
29. उनकी उपस्थिति में ऊबने या अपनी थकान का प्रदर्शन न करें.
30. उनकी गलतियों अथवा अनभिज्ञता पर हँसने से बचें.
31. कहने से पहले उनके काम करें.
32. नियमित रूप से उनके पास जायें.
33. उनके साथ वार्तालाप में अपने शब्दों को ध्यान से चुनें.
34. उन्हें उसी सम्बोधन से सम्मानित करें जो वे पसन्द करते हैं.
35. अपने किसी भी विषय की अपेक्षा उन्हें प्राथमिकता दें.
माता - पिता इस दुनिया में सबसे बड़ा खज़ाना हैं..!!
यह मेसेज हर घर तक पहुंचने मे मदद करे तो बड़ी कृपा होगी मानव जाति का उद्धार संभव है यदि ऊपर लिखी बातों को जीवन में उतार लिया तो। सबसे पहले भगवान, गुरु माता पिता ही है हर धर्म में इस बात का उल्लेख है...
1. उनकी उपस्थिति में अपने फोन को दूर रखो.
2. वे क्या कह रहे हैं इस पर ध्यान दो.
3. उनकी राय स्वीकारें.
4. उनकी बातचीत में सम्मिलित हों.
5. उन्हें सम्मान के साथ देखें.
6. हमेशा उनकी प्रशंसा करें.
7. उनको अच्छा समाचार जरूर बताएँ.
8. उनके साथ बुरा समाचार साझा करने से बचें.
9. उनके दोस्तों और प्रियजनों से अच्छी तरह से बोलें.
10. उनके द्वारा किये गए अच्छे काम सदैव याद रखें.
11. वे यदि एक ही कहानी दोहरायें तो भी ऐसे सुनें जैसे पहली बार सुन रहे हो.
12. अतीत की दर्दनाक यादों को मत दोहरायें.
13. उनकी उपस्थिति में कानाफ़ूसी न करें.
14. उनके साथ तमीज़ से बैठें.
15. उनके विचारों को न तो घटिया बताये न ही उनकी आलोचना करें.
16. उनकी बात काटने से बचें.
17. उनकी उम्र का सम्मान करें.
18. उनके आसपास उनके पोते/पोतियों को अनुशासित करने अथवा मारने से बचें.
19. उनकी सलाह और निर्देश स्वीकारें.
20. उनका नेतृत्व स्वीकार करें.
21. उनके साथ ऊँची आवाज़ में बात न करें.
22. उनके आगे अथवा सामने से न चलें.
23. उनसे पहले खाने से बचें.
24. उन्हें घूरें नहीं.
25. उन्हें तब भी गौरवान्वित प्रतीत करायें जब कि वे अपने को इसके लायक न समझें.
26. उनके सामने अपने पैर करके या उनकी ओर अपनी पीठ कर के बैठने से बचें.
27. न तो उनकी बुराई करें और न ही किसी अन्य द्वारा की गई उनकी बुराई का वर्णन करें.
28. उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में शामिल करें.
29. उनकी उपस्थिति में ऊबने या अपनी थकान का प्रदर्शन न करें.
30. उनकी गलतियों अथवा अनभिज्ञता पर हँसने से बचें.
31. कहने से पहले उनके काम करें.
32. नियमित रूप से उनके पास जायें.
33. उनके साथ वार्तालाप में अपने शब्दों को ध्यान से चुनें.
34. उन्हें उसी सम्बोधन से सम्मानित करें जो वे पसन्द करते हैं.
35. अपने किसी भी विषय की अपेक्षा उन्हें प्राथमिकता दें.
माता - पिता इस दुनिया में सबसे बड़ा खज़ाना हैं..!!
यह मेसेज हर घर तक पहुंचने मे मदद करे तो बड़ी कृपा होगी मानव जाति का उद्धार संभव है यदि ऊपर लिखी बातों को जीवन में उतार लिया तो। सबसे पहले भगवान, गुरु माता पिता ही है हर धर्म में इस बात का उल्लेख है...
❤35👍25👏3
🌿माली प्रतिदिन पौधों में पानी देता है।
मगर फल सिर्फ मौसम में ही आता है,
🍁इसीलिये जीवन में धैर्य रखें
प्रत्येक चीज अपने समय पर होगी, 🍁
प्रतिदिन बेहतर काम करें समय
पर फल जरूर मिलेगा !
#Good_Morning 😊😍☺️
मगर फल सिर्फ मौसम में ही आता है,
🍁इसीलिये जीवन में धैर्य रखें
प्रत्येक चीज अपने समय पर होगी, 🍁
प्रतिदिन बेहतर काम करें समय
पर फल जरूर मिलेगा !
#Good_Morning 😊😍☺️
❤29💯9👍4
चार-युग और उनकी विशेषताएं....
"युग" शब्द का अर्थ होता है एक निर्धारित संख्या के वर्षों की काल-अवधि। जैसे सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग आदि ।
यहाँ हम चारों युगों का वर्णन करेंगें। युग वर्णन से तात्पर्य है कि उस युग में किस प्रकार से व्यक्ति का जीवन, आयु, ऊँचाई, एवं उनमें होने वाले अवतारों के बारे में विस्तार से परिचय देना। प्रत्येक युग के वर्ष प्रमाण और उनकी विस्तृत जानकारी कुछ इस तरह है .....
"सत्ययुग"
यह प्रथम युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है -
इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 17,28,000 वर्ष होती है ।
इस युग में मनुष्य की आयु – 1,00,000 वर्ष होती है ।
मनुष्य की लम्बाई – 32 फिट (लगभग) [21 हाथ]
सत्ययुग का तीर्थ – पुष्कर है ।
इस युग में पाप की मात्र – 0 विश्वा अर्थात् (0%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 20 विश्वा अर्थात् (100%) होती है ।
इस युग के अवतार – मत्स्य, कूर्म, वाराह, नृसिंह (सभी अमानवीय अवतार हुए) है ।
अवतार होने का कारण – शंखासुर का वध एंव वेदों का उद्धार, पृथ्वी का भार हरण, हरिण्याक्ष दैत्य का वध, हिरण्यकश्यपु का वध एवं प्रह्लाद को सुख देने के लिए।
इस युग की मुद्रा – रत्नमय है ।
इस युग के पात्र – स्वर्ण के है ।
"त्रेतायुग"
यह द्वितीय युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –
इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 12,96,000 वर्ष होती है ।
इस युग में मनुष्य की आयु – 10,000 वर्ष होती है ।
मनुष्य की लम्बाई – 21 फिट (लगभग) [ 14 हाथ ]
त्रेतायुग का तीर्थ – नैमिषारण्य है ।
इस युग में पाप की मात्रा – 5 विश्वा अर्थात् (25%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 15 विश्वा अर्थात् (75%) होती है ।
इस युग के अवतार – वामन, परशुराम, राम (राजा दशरथ के घर)
अवतार होने के कारण – बलि का उद्धार कर पाताल भेजा, मदान्ध क्षत्रियों का संहार, रावण-वध एवं देवों को बन्धनमुक्त करने के लिए ।
इस युग की मुद्रा – स्वर्ण है ।
इस युग के पात्र – चाँदी के है ।
"द्वापरयुग"
यह तृतीय युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –
इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 8.64,000 वर्ष होती है ।
इस युग में मनुष्य की आयु - 1,000 होती है ।
मनुष्य लम्बाई – 11 फिट (लगभग) [ 7 हाथ ]
द्वापरयुग का तीर्थ – कुरुक्षेत्र है ।
इस युग में पाप की मात्रा – 10 विश्वा अर्थात् (50%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 10 विश्वा अर्थात् (50%) होती है ।
इस युग के अवतार – कृष्ण, (देवकी के गर्भ से एंव नंद के घर पालन-पोषण), बुद्ध (राजा के घर)।
अवतार होने के कारण – कंसादि दुष्टो का संहार एंव गोपों की भलाई, दैत्यो को मोहित करने के लिए ।
इस युग की मुद्रा – चाँदी है ।
इस युग के पात्र – ताम्र के हैं ।
"कलियुग"
यह चतुर्थ युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –
इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 4,32,000 वर्ष होती है ।
इस युग में मनुष्य की आयु – 100 वर्ष होती है ।
मनुष्य की लम्बाई – 5.5 फिट (लगभग) [3.5 हाथ]
कलियुग का तीर्थ – गंगा है ।
इस युग में पाप की मात्रा – 15 विश्वा अर्थात् (75%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 5 विश्वा अर्थात् (25%) होती है ।
इस युग के अवतार – कल्कि (ब्राह्मण विष्णु यश के घर) ।
अवतार होने के कारण – मनुष्य जाति के उद्धार अधर्मियों का विनाश एंव धर्म कि रक्षा के लिए।
इस युग की मुद्रा – लोहा है।
इस युग के पात्र – मिट्टी के है।
"युग" शब्द का अर्थ होता है एक निर्धारित संख्या के वर्षों की काल-अवधि। जैसे सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग आदि ।
यहाँ हम चारों युगों का वर्णन करेंगें। युग वर्णन से तात्पर्य है कि उस युग में किस प्रकार से व्यक्ति का जीवन, आयु, ऊँचाई, एवं उनमें होने वाले अवतारों के बारे में विस्तार से परिचय देना। प्रत्येक युग के वर्ष प्रमाण और उनकी विस्तृत जानकारी कुछ इस तरह है .....
"सत्ययुग"
यह प्रथम युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है -
इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 17,28,000 वर्ष होती है ।
इस युग में मनुष्य की आयु – 1,00,000 वर्ष होती है ।
मनुष्य की लम्बाई – 32 फिट (लगभग) [21 हाथ]
सत्ययुग का तीर्थ – पुष्कर है ।
इस युग में पाप की मात्र – 0 विश्वा अर्थात् (0%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 20 विश्वा अर्थात् (100%) होती है ।
इस युग के अवतार – मत्स्य, कूर्म, वाराह, नृसिंह (सभी अमानवीय अवतार हुए) है ।
अवतार होने का कारण – शंखासुर का वध एंव वेदों का उद्धार, पृथ्वी का भार हरण, हरिण्याक्ष दैत्य का वध, हिरण्यकश्यपु का वध एवं प्रह्लाद को सुख देने के लिए।
इस युग की मुद्रा – रत्नमय है ।
इस युग के पात्र – स्वर्ण के है ।
"त्रेतायुग"
यह द्वितीय युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –
इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 12,96,000 वर्ष होती है ।
इस युग में मनुष्य की आयु – 10,000 वर्ष होती है ।
मनुष्य की लम्बाई – 21 फिट (लगभग) [ 14 हाथ ]
त्रेतायुग का तीर्थ – नैमिषारण्य है ।
इस युग में पाप की मात्रा – 5 विश्वा अर्थात् (25%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 15 विश्वा अर्थात् (75%) होती है ।
इस युग के अवतार – वामन, परशुराम, राम (राजा दशरथ के घर)
अवतार होने के कारण – बलि का उद्धार कर पाताल भेजा, मदान्ध क्षत्रियों का संहार, रावण-वध एवं देवों को बन्धनमुक्त करने के लिए ।
इस युग की मुद्रा – स्वर्ण है ।
इस युग के पात्र – चाँदी के है ।
"द्वापरयुग"
यह तृतीय युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –
इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 8.64,000 वर्ष होती है ।
इस युग में मनुष्य की आयु - 1,000 होती है ।
मनुष्य लम्बाई – 11 फिट (लगभग) [ 7 हाथ ]
द्वापरयुग का तीर्थ – कुरुक्षेत्र है ।
इस युग में पाप की मात्रा – 10 विश्वा अर्थात् (50%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 10 विश्वा अर्थात् (50%) होती है ।
इस युग के अवतार – कृष्ण, (देवकी के गर्भ से एंव नंद के घर पालन-पोषण), बुद्ध (राजा के घर)।
अवतार होने के कारण – कंसादि दुष्टो का संहार एंव गोपों की भलाई, दैत्यो को मोहित करने के लिए ।
इस युग की मुद्रा – चाँदी है ।
इस युग के पात्र – ताम्र के हैं ।
"कलियुग"
यह चतुर्थ युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –
इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 4,32,000 वर्ष होती है ।
इस युग में मनुष्य की आयु – 100 वर्ष होती है ।
मनुष्य की लम्बाई – 5.5 फिट (लगभग) [3.5 हाथ]
कलियुग का तीर्थ – गंगा है ।
इस युग में पाप की मात्रा – 15 विश्वा अर्थात् (75%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 5 विश्वा अर्थात् (25%) होती है ।
इस युग के अवतार – कल्कि (ब्राह्मण विष्णु यश के घर) ।
अवतार होने के कारण – मनुष्य जाति के उद्धार अधर्मियों का विनाश एंव धर्म कि रक्षा के लिए।
इस युग की मुद्रा – लोहा है।
इस युग के पात्र – मिट्टी के है।
👍16🥰13❤3
मैं बहता पानी हूं लोग मेरा रास्ता बदल सकते हैं
पर मेरी मंजिल
नहीं..
पर मेरी मंजिल
नहीं..
👍37❤16🔥2
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय। सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा॥
•°•┈┈•••༻︎︎"🌺"༺•••┈┈•°•
🌹✨@iasipsmotivation ✨🌹
•°•┈┈•••༻︎︎"🌺"༺•••┈┈•°•
•°•┈┈•••༻︎︎"🌺"༺•••┈┈•°•
🌹✨@iasipsmotivation ✨🌹
•°•┈┈•••༻︎︎"🌺"༺•••┈┈•°•
❤36👍7🙏5👏4
जिनके ऊपर जिम्मेदारियों
का बोझ होता है, उनको
"रुठने" और "टूटने" का
हक नही होता..!
📌
का बोझ होता है, उनको
"रुठने" और "टूटने" का
हक नही होता..!
📌
❤45👏1
😊
सवाल उठेंगे.....मजाक उड़ेगा.....
कोई हँस देगा हमारे हौसलों पर
जरूरी ये है....
कि आखरी हंसी हमारी हो।
सुप्रभात
𝐉𝐨𝐢𝐧 📚❤️
@iasipsmotivation
सवाल उठेंगे.....मजाक उड़ेगा.....
कोई हँस देगा हमारे हौसलों पर
जरूरी ये है....
कि आखरी हंसी हमारी हो।
सुप्रभात
𝐉𝐨𝐢𝐧 📚❤️
@iasipsmotivation
❤43👍8🔥1
.
जिसे हम हिंदू धर्म कहते हैं, वह वास्तव में सनातन धर्म है, क्योंकि यह अन्य सभी को गले लगाता है।
किसी धर्म का अपमान न करे
हरे कृष्णा 🙏🌹
𝐉𝐨𝐢𝐧 📚❤️
@iasipsmotivation
जिसे हम हिंदू धर्म कहते हैं, वह वास्तव में सनातन धर्म है, क्योंकि यह अन्य सभी को गले लगाता है।
किसी धर्म का अपमान न करे
हरे कृष्णा 🙏🌹
𝐉𝐨𝐢𝐧 📚❤️
@iasipsmotivation
❤43👍4