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भाग्यशाली वे नहीं होते
जिन्हें सब कुछ अच्छा मिलता है,
बल्कि वे होते हैं
जिन्हें जो मिलता है,
उसे वो अच्छा बना लेते हैं।
चलने वाले पैरों में भी
कितना फर्क होता है।
एक आगे तो एक पीछे
लेकिन न तो आगे वाले को
अभिमान होता है और
न ही पीछे वाले का अपमान
क्योंकि उन्हें पता होता है कि
कुछ ही समय में यह स्थिति
बदलने वाली है,
इसी को जीवन कहते हैं।
जिन्हें सब कुछ अच्छा मिलता है,
बल्कि वे होते हैं
जिन्हें जो मिलता है,
उसे वो अच्छा बना लेते हैं।
चलने वाले पैरों में भी
कितना फर्क होता है।
एक आगे तो एक पीछे
लेकिन न तो आगे वाले को
अभिमान होता है और
न ही पीछे वाले का अपमान
क्योंकि उन्हें पता होता है कि
कुछ ही समय में यह स्थिति
बदलने वाली है,
इसी को जीवन कहते हैं।
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UPSC की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए 5 सटीक टिप्स.
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वह अपने जीवन में बहुत कामयाब इंसान बनना चाहता है,
लेकिन वह परीक्षा से केवल एक दिन पहले पढ़ता है।
लेकिन वह परीक्षा से केवल एक दिन पहले पढ़ता है।
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🌸मैं और मेरा अस्तित्व 🌸
मेरा खालीपन ही मेरी ताकत है,
ये मुझे हमेशा याद दिलाता है, की इस कमी को मुझे पूरा करना है...
मेरे अपनों द्वारा किया मेरा अपमान आज भी याद है मुझे..!!
वो अपमान किया गया सिर्फ एक कारण से की "लडकी हूँ मैं"!!
हमेशा कहा गया मुझसे की तुम्हारी जगह लडका होता तो अच्छा होता..
उस वक्त मेरे दिल के हजारों टुकडे़ हो चुके थे!!
समाज के मुँह पर 'म्हारी छोरी छोरों से कम है के' ये बोलने वाले लोग अकसर लडकियों को याद दिलाते है की आज भी तुम बोझ ही हो...
हमें कहा जाता है की तुम्हारी जगह लड़का होता तो कुछ काम करता..
काम तो हम भी करते है, चाहें खुद के खेत में हो या दुसरों के खेत मैं, भरी दोपहर में, मगर उसे काम न समझकर हमारा कर्तव्य समझा जाता है....
हरबार हमें हर चीज के लिये टोका जाता है, और टोकने वाला और कोई नहीं एक औरत ही होती है, बस यहीं विडंबना है हमारी ..
हमारी पिछली पिढी हमें भी उनके जैसा बनाना चाहती है...
21 वी सदी में आ गये हम मगर इनकी सोच छोटी ही रह गयी..!!
हम लडकियों को तो जन्म से ही नकारा जाता है,
शायद हमारा जन्म होना ही एक कलंक हैं..
मैंने खुद सुना है, अक्सर किसी स्री को पहला बच्चा अगर लडका हो तो, औरतें कहती है की अच्छा हुआ की पहला लडका हो गया, अब दुसरी बार कुछ भी हो जाये कोई फर्क नहीं पडता ...
वहीं अगर लडकी हो तो कहते है की पहला लडका ही होना चाहिए था...
कितना दोगला है ये समाज!!
एक स्त्री के जन्म को अभिशाप बना दिया है !!
बस इसी चक्र को तोडना है मुझे,
कुछ पल खुद के लिये भी चुराने हैं!!
खुद की कामयाबी से खुद को साबित करना है..!!
और यहीं सिखाना है अपनी अगली पिढी को.!!
फिर चाहें वो लडका हो या लडकी...
✍️Trupti 🕊
मेरा खालीपन ही मेरी ताकत है,
ये मुझे हमेशा याद दिलाता है, की इस कमी को मुझे पूरा करना है...
मेरे अपनों द्वारा किया मेरा अपमान आज भी याद है मुझे..!!
वो अपमान किया गया सिर्फ एक कारण से की "लडकी हूँ मैं"!!
हमेशा कहा गया मुझसे की तुम्हारी जगह लडका होता तो अच्छा होता..
उस वक्त मेरे दिल के हजारों टुकडे़ हो चुके थे!!
समाज के मुँह पर 'म्हारी छोरी छोरों से कम है के' ये बोलने वाले लोग अकसर लडकियों को याद दिलाते है की आज भी तुम बोझ ही हो...
हमें कहा जाता है की तुम्हारी जगह लड़का होता तो कुछ काम करता..
काम तो हम भी करते है, चाहें खुद के खेत में हो या दुसरों के खेत मैं, भरी दोपहर में, मगर उसे काम न समझकर हमारा कर्तव्य समझा जाता है....
हरबार हमें हर चीज के लिये टोका जाता है, और टोकने वाला और कोई नहीं एक औरत ही होती है, बस यहीं विडंबना है हमारी ..
हमारी पिछली पिढी हमें भी उनके जैसा बनाना चाहती है...
21 वी सदी में आ गये हम मगर इनकी सोच छोटी ही रह गयी..!!
हम लडकियों को तो जन्म से ही नकारा जाता है,
शायद हमारा जन्म होना ही एक कलंक हैं..
मैंने खुद सुना है, अक्सर किसी स्री को पहला बच्चा अगर लडका हो तो, औरतें कहती है की अच्छा हुआ की पहला लडका हो गया, अब दुसरी बार कुछ भी हो जाये कोई फर्क नहीं पडता ...
वहीं अगर लडकी हो तो कहते है की पहला लडका ही होना चाहिए था...
कितना दोगला है ये समाज!!
एक स्त्री के जन्म को अभिशाप बना दिया है !!
बस इसी चक्र को तोडना है मुझे,
कुछ पल खुद के लिये भी चुराने हैं!!
खुद की कामयाबी से खुद को साबित करना है..!!
और यहीं सिखाना है अपनी अगली पिढी को.!!
फिर चाहें वो लडका हो या लडकी...
✍️Trupti 🕊
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😁
मैं आईएएस एग्ज़ाम का इंटरव्यू दे रहा था, वह बीए कर रही थी,
मैं इंटरव्यू दे रहा था, वो आईएस प्रीलिम्स में फेल हो रही थी।
मैं इंटरव्यू दे रहा था, वह भी अब इंटरव्यू दे रही थी।
मैं फिर आईएएस प्री में बैठ रहा था, वह मसूरी में ट्रेनिंग के लिए जा रही थी।'
इसे कहते हैं भाग्य का होना और भाग्य ही का रोना।
(मैं अभी भी परिक्षा ही दे रहा हूँ 😅🥹😶🌫)
मैं आईएएस एग्ज़ाम का इंटरव्यू दे रहा था, वह बीए कर रही थी,
मैं इंटरव्यू दे रहा था, वो आईएस प्रीलिम्स में फेल हो रही थी।
मैं इंटरव्यू दे रहा था, वह भी अब इंटरव्यू दे रही थी।
मैं फिर आईएएस प्री में बैठ रहा था, वह मसूरी में ट्रेनिंग के लिए जा रही थी।'
इसे कहते हैं भाग्य का होना और भाग्य ही का रोना।
(मैं अभी भी परिक्षा ही दे रहा हूँ 😅🥹😶🌫)
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