❤️I. A. S. Officer❤️
सिविल सर्विसेज की तैयारी करने से पहले इस एग्जाम की फिलोसफी को समझना बहुत जरुरी है
क्योंकि दिन-रात पढना, अच्छी कोचिंग जाना या सैकड़ों किताबें पढना इस एग्जाम में सफलता की गारंटी नहीं है
सफल व्यक्ति का भाषण ना सुनें – तैयारी करने वाले सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे हर सफल व्यक्ति का भाषण बड़े गौर से सुनते हैं और उसे कॉपी करने की कोशिश करते हैं जो बहुत घातक साबित होता है क्योंकि सफल व्यक्ति कभी भी पूरी ईमानदारी से अपनी पढ़ाई का तरीका नहीं बताता
वह हर चीज़ को बढ़ा- चढ़ाकर बताता है क्योंकि वह अपने आप को दूसरों से विशेष दिखाना चाहता है
हम जो देखते, सुनते और पढ़ते हैं वह हमेशा सही नहीं होता – इसलिए किसी की बात को सुनकर उसपर आँख करके विश्वास मत करो ...ना ही उसकी कॉपी करो
जो लोग कहते हैं कि उन्होंने 5 साल तक 18-18 घंटे मेहनत की तब IAS बन पाए हैं ...उनपर दया करो ...क्योंकि मुझे लगता है अगर किसी व्यक्ति को इस एग्जाम को क्लियर करने में इतना समय लगा तो उससे बड़ा गधा इस दुनिया में और कोई नहीं हो सकता
जबसे नया पैटर्न आया है यह परीक्षा इतनी आसान हो गई है कि अब 45% अंक लाने पर IAS टॉप कर जाते हैं और 38% मार्क्स आ जाने पर आपका IAS बनना पक्का होता है
कभी आपने सोचा कि लोग इस परीक्षा में इतना कम स्कोर क्यों कर पाते हैं ...ध्यान रखिये कि सिलेबस बनाने वाले ना तो मूर्ख हैं और ना ही आपके दुश्मन हैं ....अगर आप कम स्कोर कर रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि आप इस एग्जाम को समझ ही नहीं पाए हैं
ये पक्का है कि UPSC आपकी मदद करने के लिए ही बैठा है ... पर सवाल यह है कि आप अपना हाथ आगे बढ़ा पा रहे हैं या नहीं
कुछ समय से लगातार यह हौआ बनाया जा रहा है कि सिविल सर्विसेज एक बहुत ही मुश्किल और कठिन एग्जाम है ....और यह हौआ बनाने में मार्केट फोर्सेज का सबसे ज्यादा योगदान हैं ताकि डरकर आप कोचिंग क्लासेज ज्वाइन करो....और सैकड़ों किताबें खरीदो
ग्रेजुएट राजा से बड़ा होता है- याद रखिये आप ‘स्नातक’ हैं पर आजकल आप स्नातक की मर्यादा की रक्षा नहीं कर पाते ...उपनिषद में एक सन्दर्भ है कि जब किसी स्नातक की सवारी निकलती थी तो राजा अपनी सवारी सड़क के किनारे रोककर स्नातक को रास्ता देते थे
यदि आप में स्नातक हैं तो आपको सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए किसी की मदद की जरुरत नहीं है
पर आजकल परेशानी यह है कि लोग केवल परीक्षा में अंक लाने के लिए पढ़ते हैं कुछ सीखने के लिए .....मेरा दावा है कि अगर आपको अपनी 12 वीं तक की पूरी पढ़ाई याद है तो कोई भी आपको सिविल सर्विसेज क्वालीफाई करने से नहीं रोक सकता
सिविल सर्विसेज के एग्जाम में 12 वीं तक का ज्ञान व एक ग्रेजुएट की विचार क्षमता का परीक्षण किया जाता है
इस परीक्षा में आपसे वही पूंछा जाता है जिसकी अपेक्षा एक सामान्य व्यक्ति से की जा सकती है
हर काम को करने से पहले अपने आप से यह सवाल पूँछिये कि आप यह काम क्यों कर रहे हैं
सिविल सर्विसेज की तैयारी में ‘ध्येय’ महत्वपूर्ण है ना कि वहां पहुँचने का तरीका ...इसलिए तैयारी का कोई तरीका सटीक नहीं है ...आपकी नज़र ध्येय पर होनी चाहिए रास्ता अपने आप बनता जाता है
IAS ज्ञान की परीक्षा नहीं है – सिविल सर्विसेज में आपका ज्ञान नहीं जांचा जाता बल्कि आपमें वह काबिलियत देखि जाती है जो एक सिविल सेवक में होना चाहिए
जो पढ़ते हैं वह आगे कभी काम नहीं आता – IAS की तैयारी के लिए आप जो भी विषय पढ़ते हैं चयनित हो जाने के बाद वो कहीं काम नहीं आते .....अगर कुछ काम आता है तो वह है आपकी स्किल्स ....इसीलिये यह परीक्षा आजकल ज्ञान की जगह व्यक्तित्व की परीक्षा बन गई है
UPSC के किसी फॉर्म में आपसे ये कभी नहीं पूंछा जाता कि आपने कौन सी किताबें पढी हैं या आप दिन में कितने घंटे पढ़ते थे ......बल्कि यह पूंछा जाता है कि आपकी हाबीज क्या हैं क्योंकि आपकी हाबीज ही आपके व्यक्तित्व की पहचान हैं
ज्ञानी व्यक्ति बहुत बुरे प्रशासक होते हैं – जो व्यक्ति बहुत ज्ञानी होते हैं वो सामान्यतः अच्छा प्रशासन अन्हीं चला पाते इसलिए यह परीक्षा सबसे ज्यादा ज्ञानी लोगों की खोज करने के लिए नहीं है
ज्ञानी ही चाहिए होते तो यूनिवर्सिटी टॉपर को ही सीधे IAS बना देते – कितना आसान था UPSC के लिए भी ...अगर उन्हें देश के सबसे ज्ञानी लोगों को IAS बनाना होता तो वे परीक्षा कराने की वजाय सीधे हर यूनिवर्सिटी के टॉपर को ही IAS बना देते
अनपढ़ अकबर देश का सबसे अच्छा प्रशासक था – अकबर तो बिलकुल पढ़ा लिखा नहीं था पर उसके शासन को देश के सबसे बेहतरीन प्रशासन के लिए जाना जाता है ...यहाँ तक कि उस समय देश के सबसे बेहतरीन विद्वान् भी उसके नवरत्नों में शामिल थे और अकबर उनके ज्ञान का प्रशासन चलाने में इस्तेमाल करता था ......क्योंकि अकबर में प्रशासनिक क्षमता अच्छी थी
Keep smiling 😊while studying 📚
सिविल सर्विसेज की तैयारी करने से पहले इस एग्जाम की फिलोसफी को समझना बहुत जरुरी है
क्योंकि दिन-रात पढना, अच्छी कोचिंग जाना या सैकड़ों किताबें पढना इस एग्जाम में सफलता की गारंटी नहीं है
सफल व्यक्ति का भाषण ना सुनें – तैयारी करने वाले सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे हर सफल व्यक्ति का भाषण बड़े गौर से सुनते हैं और उसे कॉपी करने की कोशिश करते हैं जो बहुत घातक साबित होता है क्योंकि सफल व्यक्ति कभी भी पूरी ईमानदारी से अपनी पढ़ाई का तरीका नहीं बताता
वह हर चीज़ को बढ़ा- चढ़ाकर बताता है क्योंकि वह अपने आप को दूसरों से विशेष दिखाना चाहता है
हम जो देखते, सुनते और पढ़ते हैं वह हमेशा सही नहीं होता – इसलिए किसी की बात को सुनकर उसपर आँख करके विश्वास मत करो ...ना ही उसकी कॉपी करो
जो लोग कहते हैं कि उन्होंने 5 साल तक 18-18 घंटे मेहनत की तब IAS बन पाए हैं ...उनपर दया करो ...क्योंकि मुझे लगता है अगर किसी व्यक्ति को इस एग्जाम को क्लियर करने में इतना समय लगा तो उससे बड़ा गधा इस दुनिया में और कोई नहीं हो सकता
जबसे नया पैटर्न आया है यह परीक्षा इतनी आसान हो गई है कि अब 45% अंक लाने पर IAS टॉप कर जाते हैं और 38% मार्क्स आ जाने पर आपका IAS बनना पक्का होता है
कभी आपने सोचा कि लोग इस परीक्षा में इतना कम स्कोर क्यों कर पाते हैं ...ध्यान रखिये कि सिलेबस बनाने वाले ना तो मूर्ख हैं और ना ही आपके दुश्मन हैं ....अगर आप कम स्कोर कर रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि आप इस एग्जाम को समझ ही नहीं पाए हैं
ये पक्का है कि UPSC आपकी मदद करने के लिए ही बैठा है ... पर सवाल यह है कि आप अपना हाथ आगे बढ़ा पा रहे हैं या नहीं
कुछ समय से लगातार यह हौआ बनाया जा रहा है कि सिविल सर्विसेज एक बहुत ही मुश्किल और कठिन एग्जाम है ....और यह हौआ बनाने में मार्केट फोर्सेज का सबसे ज्यादा योगदान हैं ताकि डरकर आप कोचिंग क्लासेज ज्वाइन करो....और सैकड़ों किताबें खरीदो
ग्रेजुएट राजा से बड़ा होता है- याद रखिये आप ‘स्नातक’ हैं पर आजकल आप स्नातक की मर्यादा की रक्षा नहीं कर पाते ...उपनिषद में एक सन्दर्भ है कि जब किसी स्नातक की सवारी निकलती थी तो राजा अपनी सवारी सड़क के किनारे रोककर स्नातक को रास्ता देते थे
यदि आप में स्नातक हैं तो आपको सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए किसी की मदद की जरुरत नहीं है
पर आजकल परेशानी यह है कि लोग केवल परीक्षा में अंक लाने के लिए पढ़ते हैं कुछ सीखने के लिए .....मेरा दावा है कि अगर आपको अपनी 12 वीं तक की पूरी पढ़ाई याद है तो कोई भी आपको सिविल सर्विसेज क्वालीफाई करने से नहीं रोक सकता
सिविल सर्विसेज के एग्जाम में 12 वीं तक का ज्ञान व एक ग्रेजुएट की विचार क्षमता का परीक्षण किया जाता है
इस परीक्षा में आपसे वही पूंछा जाता है जिसकी अपेक्षा एक सामान्य व्यक्ति से की जा सकती है
हर काम को करने से पहले अपने आप से यह सवाल पूँछिये कि आप यह काम क्यों कर रहे हैं
सिविल सर्विसेज की तैयारी में ‘ध्येय’ महत्वपूर्ण है ना कि वहां पहुँचने का तरीका ...इसलिए तैयारी का कोई तरीका सटीक नहीं है ...आपकी नज़र ध्येय पर होनी चाहिए रास्ता अपने आप बनता जाता है
IAS ज्ञान की परीक्षा नहीं है – सिविल सर्विसेज में आपका ज्ञान नहीं जांचा जाता बल्कि आपमें वह काबिलियत देखि जाती है जो एक सिविल सेवक में होना चाहिए
जो पढ़ते हैं वह आगे कभी काम नहीं आता – IAS की तैयारी के लिए आप जो भी विषय पढ़ते हैं चयनित हो जाने के बाद वो कहीं काम नहीं आते .....अगर कुछ काम आता है तो वह है आपकी स्किल्स ....इसीलिये यह परीक्षा आजकल ज्ञान की जगह व्यक्तित्व की परीक्षा बन गई है
UPSC के किसी फॉर्म में आपसे ये कभी नहीं पूंछा जाता कि आपने कौन सी किताबें पढी हैं या आप दिन में कितने घंटे पढ़ते थे ......बल्कि यह पूंछा जाता है कि आपकी हाबीज क्या हैं क्योंकि आपकी हाबीज ही आपके व्यक्तित्व की पहचान हैं
ज्ञानी व्यक्ति बहुत बुरे प्रशासक होते हैं – जो व्यक्ति बहुत ज्ञानी होते हैं वो सामान्यतः अच्छा प्रशासन अन्हीं चला पाते इसलिए यह परीक्षा सबसे ज्यादा ज्ञानी लोगों की खोज करने के लिए नहीं है
ज्ञानी ही चाहिए होते तो यूनिवर्सिटी टॉपर को ही सीधे IAS बना देते – कितना आसान था UPSC के लिए भी ...अगर उन्हें देश के सबसे ज्ञानी लोगों को IAS बनाना होता तो वे परीक्षा कराने की वजाय सीधे हर यूनिवर्सिटी के टॉपर को ही IAS बना देते
अनपढ़ अकबर देश का सबसे अच्छा प्रशासक था – अकबर तो बिलकुल पढ़ा लिखा नहीं था पर उसके शासन को देश के सबसे बेहतरीन प्रशासन के लिए जाना जाता है ...यहाँ तक कि उस समय देश के सबसे बेहतरीन विद्वान् भी उसके नवरत्नों में शामिल थे और अकबर उनके ज्ञान का प्रशासन चलाने में इस्तेमाल करता था ......क्योंकि अकबर में प्रशासनिक क्षमता अच्छी थी
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Aaj ka $truggle🤞
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Kal ka sukoon hai❤️🤗
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ORIGINS OF UPSC
The origin of the Public Service Commission in India is found in the First Dispatch of the Government of India on the Indian Constitutional Reforms on the 5th March, 1919 which referred to the need for setting up some permanent office charged with the regulation of service matters.
The Royal Commission on the superior Civil Services in India was set up under the chairmanship of Lord Lee of Fareham by the British Government in 1923.
With equal numbers of Indian and British members, the Lee commission submitted its report in 1924, recommending setting up of a Public Service Commission.
The Lee Commission proposed that 40% of future entrants should be British, 40% Indians directly recruited, and 20% Indians promoted from the provincial services.
This led to the establishment of the first Public Service Commission on 1 October 1926 under the chairmanship of Sir Ross Barker.
It was set up under the provisions of the Government of India Act, 1919.
Merely a limited advisory function was granted to the Public Service Commission and the leaders of the freedom movement continually stressed on this aspect, which then resulted in the setting up of a Federal Public Service Commission under the Government of India Act, 1935.
The Federal Public Service Commission became the Union Public Service Commission (UPSC) after independence, which was given the status of a constitutional body upon the enforcement of the Constitution of India on 26 January 1950.
The origin of the Public Service Commission in India is found in the First Dispatch of the Government of India on the Indian Constitutional Reforms on the 5th March, 1919 which referred to the need for setting up some permanent office charged with the regulation of service matters.
The Royal Commission on the superior Civil Services in India was set up under the chairmanship of Lord Lee of Fareham by the British Government in 1923.
With equal numbers of Indian and British members, the Lee commission submitted its report in 1924, recommending setting up of a Public Service Commission.
The Lee Commission proposed that 40% of future entrants should be British, 40% Indians directly recruited, and 20% Indians promoted from the provincial services.
This led to the establishment of the first Public Service Commission on 1 October 1926 under the chairmanship of Sir Ross Barker.
It was set up under the provisions of the Government of India Act, 1919.
Merely a limited advisory function was granted to the Public Service Commission and the leaders of the freedom movement continually stressed on this aspect, which then resulted in the setting up of a Federal Public Service Commission under the Government of India Act, 1935.
The Federal Public Service Commission became the Union Public Service Commission (UPSC) after independence, which was given the status of a constitutional body upon the enforcement of the Constitution of India on 26 January 1950.
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प्रभावी रीडिंग (पाठन) यूपीएससी आईएएस परीक्षा में सफल होने के लिये महत्वपूर्ण कौशलों मे से एक है। अध्ययन के दौरान यह हमारी एक आदत बन जाती है क्योंकि आप जितना अधिक पढ़ते हैं, आप उतने ही सफल और प्रभावी पाठक बन जाते हैं। यूपीएससी आईएएस उम्मीदवारों को पढ़ने की आदत को तैयारी के एक भाग के तौर नहीं बल्कि एक आदत के रूप में लेना चाहिए, जिससे आप के भीतर विभिन्न विषयों की व्यापक समझ का विकास होता है।📚😇
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सिक्ख गुरू ..........
🌿 गुरू नानक देव जी - 1469 - 1539 ई. ( संगत का सकल्प , लंगर की संस्था )
🌿 गुरू अंगद देव जी - 1504 - 1552 ई. ( गुरू मुखी लिपि को लोकप्रिय बनाना , लंगर प्रथा का विस्तार , उदासी मत का खण्डन , गोइंदवाल साहिब की स्थापना )
🌿 गुरू अमरदास जी - 1479 - 1574 ई. ( गोइंदवाल साहिब में बाऊली का निर्माण , मंजी प्रथा )
🌿 गुरू रामदास जी - 1534 - 1581 ई. ( रामदासपुरा की स्थापना , मसन्द प्रथा का आरम्भ , अकबर के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध )
🌿 गुरू अर्जुन देव जी - 1563 - 1606 ई. ( हरिमन्दिर साहिब का निर्माण , तरनतारन की स्थापना , करतारपुर एवं हरगोबिन्द पुर की स्थापना , आदि ग्रन्थ साहिब का संकलन , अमृतसर की स्थापना )
🌿 गुरू हरिगोबिन्द जी - 1595 - 1645 ई. ( मीरी तथा पीरी तलवारें धारण करना , अकाल तख्त का निर्माण )
🌿 गुरू हर राय - 1630 - 1661 ई. ( दारा की सहायता )
🌿 गुरू हरकृष्ण - 1656 - 1664 ई. ( बाबा - बकाला का उच्चारण )
🌿 गुरू तेग बहादुर जी - 1621 - 1675 ई. ( कश्मीरी पण्डितों की पुकार पर .... बलिदान ( हिंद की चादर ..... भी कहा जाता है )
🌿 गुरू गोबिन्द सिंह - 1666 - 1708 ई. ( खालसा पंथ का सृजन ......
जापु साहिब , बचित्र नाटक , जफरनामा , चण्डी दी वार , अकाल उस्तति प्रमुख रचनाएं
( Note ...... Most important )
🌿 गुरू नानक देव जी - 1469 - 1539 ई. ( संगत का सकल्प , लंगर की संस्था )
🌿 गुरू अंगद देव जी - 1504 - 1552 ई. ( गुरू मुखी लिपि को लोकप्रिय बनाना , लंगर प्रथा का विस्तार , उदासी मत का खण्डन , गोइंदवाल साहिब की स्थापना )
🌿 गुरू अमरदास जी - 1479 - 1574 ई. ( गोइंदवाल साहिब में बाऊली का निर्माण , मंजी प्रथा )
🌿 गुरू रामदास जी - 1534 - 1581 ई. ( रामदासपुरा की स्थापना , मसन्द प्रथा का आरम्भ , अकबर के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध )
🌿 गुरू अर्जुन देव जी - 1563 - 1606 ई. ( हरिमन्दिर साहिब का निर्माण , तरनतारन की स्थापना , करतारपुर एवं हरगोबिन्द पुर की स्थापना , आदि ग्रन्थ साहिब का संकलन , अमृतसर की स्थापना )
🌿 गुरू हरिगोबिन्द जी - 1595 - 1645 ई. ( मीरी तथा पीरी तलवारें धारण करना , अकाल तख्त का निर्माण )
🌿 गुरू हर राय - 1630 - 1661 ई. ( दारा की सहायता )
🌿 गुरू हरकृष्ण - 1656 - 1664 ई. ( बाबा - बकाला का उच्चारण )
🌿 गुरू तेग बहादुर जी - 1621 - 1675 ई. ( कश्मीरी पण्डितों की पुकार पर .... बलिदान ( हिंद की चादर ..... भी कहा जाता है )
🌿 गुरू गोबिन्द सिंह - 1666 - 1708 ई. ( खालसा पंथ का सृजन ......
जापु साहिब , बचित्र नाटक , जफरनामा , चण्डी दी वार , अकाल उस्तति प्रमुख रचनाएं
( Note ...... Most important )
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Success Story: 12वीं में हुआ था फेल, गर्लफ्रेंड का मांगा साथ और फिर बन गया IPS
मनोज शर्मा जिस लड़की से प्यार करते थे शुरुआत में उससे दिल की बात भी नहीं कह सके थे. उन्हें डर था वो ये कह न दे 12वीं फेल हो. इसलिए फिर पढ़ाई शुरू की.
IPS Success Story: आप हर दिन सक्सेस स्टोरी के जरिए एक ऐसी हस्ती से रूबरू होते हैं, जिसने देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में कामयाबी पाई हो. हर हस्ती की कहानी संघर्ष के अलग-अलग पायदान को बयां कर प्रेरित करती है. आज की सक्सेस स्टोरी के जरिए मिलिए मनोज शर्मा से. मनोज की कहानी से आप जानेंगे, हम एक बार कुछ ठान लें तो उसे कर पाने का हर नामुमकिन रास्ता भी पार कर जाते हैं. मनोज 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर से IPS ऑफिसर हैं.
शुरुआती पढ़ाई
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में जन्मे मनोज 12वीं तक पढ़ाई में मामूली छात्र रहे. वे नौवीं, दसवीं और 11वीं में थर्ड डिवीजन से पास हुए. 12वीं में नकल नहीं कर पाए तो फेल हो गए थे. एक वीडियो इंटरव्यू के जरिए उन्होंने बताया, उनका प्लान 12वीं में जैसे-तैसे पास होकर, टाइपिंग सीखकर कहीं न कहीं जॉब ढूंढने का था. उन्होंने 12वीं की परीक्षा में नकल करने का भी पूरा प्लान बना रखा था. लेकिन एसडीएम ने स्कूल में सख्ती की और नकल नहीं होने दी. तब मनोज को लगा ऐसा पॉवरफुल आदमी कौन है जिसकी बात सब मान रहे हैं. उन्हें भी ऐसा ही बनना है.
एसडीएम से पहली मुलाकात
12वीं में फेल होने के बाद मनोज अपने भाई के साथ टेंपो चलाते थे. एक दिन टेंपो पकड़ गया. एसडीएम से मिलकर टेंपो छुड़ाने की बात करनी थी. मनोज उनसे मिलने तो गए लेकिन टेंपो छुड़वाने की बात करने की बजाय ये पूछा, आपने तैयारी कैसे की. तय कर लिया, अब यही बनेंगे.
अपने घर ग्वालियर वापस आए. पैसे की तंगी थी. खाना तक न होने का वक्त भी देखा. फिर लाइब्रेरियन कम चपरासी का काम मिला. कवियों या विद्वानों की सभाओं में बिस्तर बिछाने, पानी पिलाने का काम भी किया. तैयारी शुरू की. एसडीएम ही बनना था लेकिन तैयारी धीरे-धीरे उच्च लेवल की करने लगे.
12वीं फेल का ठप्पा
12वीं फेल का ठप्पा पीछा नहीं छोड़ता था. जिस लड़की से प्यार किया, उससे भी दिल की बात न कह सके. डर था वो ये कह न दे 12वीं फेल हो. इसलिए फिर से पढ़ाई शुरू की. संघर्ष कर दिल्ली आए. पैसों की जरूरत थी. बड़े घरों में कुत्ते टहलाने का काम मिला. 400 रुपये प्रति कुत्ता खर्च मिलता था.
बिना फीस एडमिशन, लड़की का साथ
विकास दिव्यकीर्ति नाम के शिक्षक ने बिना फीस एडमिशन दिया. पहले अटेंप्ट में प्री क्लीयर किया. लेकिन दूसरे, तीसरे अटेंप्ट तक प्यार में था. जिस लड़की से प्यार करता था उससे कहा कि तुम हां करो, साथ दो तो दुनिया पलट सकता हूं. फिर चौथे अटेम्प्ट में यूपीएससी की परीक्षा 121वीं रैंक के साथ पास कर आईपीएस बना. बता दें कि मनोज ग्वालियर से पोस्ट-ग्रैजुएशन करने के बाद पीएचडी भी पूरी कर चुके हैं.
मनोज शर्मा पर अनुराग पाठक ‘12th फेल, हारा वही जो लड़ा नहीं’ शीर्षक से किताब लिख चुके है. अनुराग ने एक इंटरव्यू में कहा, इनकी कहानी लिखने के पीछे बच्चों को प्रेरित करने का उद्देश्य है. बता दें कि 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर से आईपीएस बने मनोज मुंबई में एडिशनल कमिश्रनर ऑफ वेस्ट रीजन के पद पर तैनात हैं.
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😊 Stay motivated😊
मनोज शर्मा जिस लड़की से प्यार करते थे शुरुआत में उससे दिल की बात भी नहीं कह सके थे. उन्हें डर था वो ये कह न दे 12वीं फेल हो. इसलिए फिर पढ़ाई शुरू की.
IPS Success Story: आप हर दिन सक्सेस स्टोरी के जरिए एक ऐसी हस्ती से रूबरू होते हैं, जिसने देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में कामयाबी पाई हो. हर हस्ती की कहानी संघर्ष के अलग-अलग पायदान को बयां कर प्रेरित करती है. आज की सक्सेस स्टोरी के जरिए मिलिए मनोज शर्मा से. मनोज की कहानी से आप जानेंगे, हम एक बार कुछ ठान लें तो उसे कर पाने का हर नामुमकिन रास्ता भी पार कर जाते हैं. मनोज 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर से IPS ऑफिसर हैं.
शुरुआती पढ़ाई
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में जन्मे मनोज 12वीं तक पढ़ाई में मामूली छात्र रहे. वे नौवीं, दसवीं और 11वीं में थर्ड डिवीजन से पास हुए. 12वीं में नकल नहीं कर पाए तो फेल हो गए थे. एक वीडियो इंटरव्यू के जरिए उन्होंने बताया, उनका प्लान 12वीं में जैसे-तैसे पास होकर, टाइपिंग सीखकर कहीं न कहीं जॉब ढूंढने का था. उन्होंने 12वीं की परीक्षा में नकल करने का भी पूरा प्लान बना रखा था. लेकिन एसडीएम ने स्कूल में सख्ती की और नकल नहीं होने दी. तब मनोज को लगा ऐसा पॉवरफुल आदमी कौन है जिसकी बात सब मान रहे हैं. उन्हें भी ऐसा ही बनना है.
एसडीएम से पहली मुलाकात
12वीं में फेल होने के बाद मनोज अपने भाई के साथ टेंपो चलाते थे. एक दिन टेंपो पकड़ गया. एसडीएम से मिलकर टेंपो छुड़ाने की बात करनी थी. मनोज उनसे मिलने तो गए लेकिन टेंपो छुड़वाने की बात करने की बजाय ये पूछा, आपने तैयारी कैसे की. तय कर लिया, अब यही बनेंगे.
अपने घर ग्वालियर वापस आए. पैसे की तंगी थी. खाना तक न होने का वक्त भी देखा. फिर लाइब्रेरियन कम चपरासी का काम मिला. कवियों या विद्वानों की सभाओं में बिस्तर बिछाने, पानी पिलाने का काम भी किया. तैयारी शुरू की. एसडीएम ही बनना था लेकिन तैयारी धीरे-धीरे उच्च लेवल की करने लगे.
12वीं फेल का ठप्पा
12वीं फेल का ठप्पा पीछा नहीं छोड़ता था. जिस लड़की से प्यार किया, उससे भी दिल की बात न कह सके. डर था वो ये कह न दे 12वीं फेल हो. इसलिए फिर से पढ़ाई शुरू की. संघर्ष कर दिल्ली आए. पैसों की जरूरत थी. बड़े घरों में कुत्ते टहलाने का काम मिला. 400 रुपये प्रति कुत्ता खर्च मिलता था.
बिना फीस एडमिशन, लड़की का साथ
विकास दिव्यकीर्ति नाम के शिक्षक ने बिना फीस एडमिशन दिया. पहले अटेंप्ट में प्री क्लीयर किया. लेकिन दूसरे, तीसरे अटेंप्ट तक प्यार में था. जिस लड़की से प्यार करता था उससे कहा कि तुम हां करो, साथ दो तो दुनिया पलट सकता हूं. फिर चौथे अटेम्प्ट में यूपीएससी की परीक्षा 121वीं रैंक के साथ पास कर आईपीएस बना. बता दें कि मनोज ग्वालियर से पोस्ट-ग्रैजुएशन करने के बाद पीएचडी भी पूरी कर चुके हैं.
मनोज शर्मा पर अनुराग पाठक ‘12th फेल, हारा वही जो लड़ा नहीं’ शीर्षक से किताब लिख चुके है. अनुराग ने एक इंटरव्यू में कहा, इनकी कहानी लिखने के पीछे बच्चों को प्रेरित करने का उद्देश्य है. बता दें कि 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर से आईपीएस बने मनोज मुंबई में एडिशनल कमिश्रनर ऑफ वेस्ट रीजन के पद पर तैनात हैं.
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दर्द, गम, डर जो भी है, बस तेरे अंदर है। खुद के बनाए पिंजरे से निकलकर देख, तू भी एक सिकंदर है।।
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जुबान सुधर जाए
तो जीवन सुधरने में
वक़्त नहीं लगता..!
कामयाबी सुबह के
जैसी होती है,
मांगने पर नही जागने
पर मिलती है..!
🙇♂ जय श्री कृष्णा 🙇♂
🙏 सुप्रभात 🙏
तो जीवन सुधरने में
वक़्त नहीं लगता..!
कामयाबी सुबह के
जैसी होती है,
मांगने पर नही जागने
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Merry Christmas 🎄 🎁
🌺🌸जय श्री कृष्णा
🌺🌸जय श्री कृष्णा
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Merry Christmas Day की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।...
बाबू सोना टोना मोना को gift देने से पहलेे...
एक gift अपने माता पिता को भी आपकी अपनी कामयाबी का gift जरूर देना। ❤️
बाबू सोना टोना मोना को gift देने से पहलेे...
एक gift अपने माता पिता को भी आपकी अपनी कामयाबी का gift जरूर देना। ❤️
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🌳
UPSC exam requires consistent hard work and if you do that the rank is yours.
𝐉𝐨𝐢𝐧📚👇
꧁☆*@iasipsmotivation*☆꧂
हां मैं कर सकता हूं।
🌺😇
UPSC exam requires consistent hard work and if you do that the rank is yours.
𝐉𝐨𝐢𝐧📚👇
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हर एक काम आसान है केवल आपके अंदर से आवाज आनी चाहिए कि,हां मैं कर सकता हूं।
🌺😇
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"One day you'll look back and realize that you worried too much about things that don't really matter."💯📚
जिस चीज में दिल लगे ना
उसमे जान लगा दो !!🔥
नसीब के आगे झुकूंगी नही,
बेशक हार का सामना होगा,
लेकिन हार कर भी रूकूंगी नही।
❤50👍11🔥2
जब तक तुम्हारे दिल में है नारी
कैसे करोगे प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ❤️✌️
Recipe for success:
• Study while others are sleeping
• Work while others are loafing
• Prepare while others are playing
• Take action while others are wishing
✨
कैसे करोगे प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ❤️✌️
Recipe for success:
• Study while others are sleeping
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