प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी आज सिर्फ़ पढ़ाई नहीं,
एक मानसिक युद्ध है।
किताबें साथ होती हैं,
पर दिल अक्सर खाली महसूस करता है।
न कोई संबल देने वाला,
न कोई समझने वाला—
और मन एक अजीब से कुएँ में गिरा हुआ लगता है…
ठीक अभिमन्यु की तरह,
जो चक्रव्यूह में घुस तो गया,
लेकिन बाहर निकलने का रास्ता अकेले ही खोज रहा था।
मनोविज्ञान कहता है—
अकेलापन (Loneliness) मन को तोड़ता है,
लेकिन एकांत (Solitude) मन को बनाता है।
इसलिए...
अकेलेपन को तोड़ना है,
लेकिन एकांत को कभी छोड़ना मत
क्योंकि यही एकांत तुम्हें विजेता बनाएगा,
यही तुम्हारा सबसे बड़ा हथियार बनेगा।🫧
एक मानसिक युद्ध है।
किताबें साथ होती हैं,
पर दिल अक्सर खाली महसूस करता है।
न कोई संबल देने वाला,
न कोई समझने वाला—
और मन एक अजीब से कुएँ में गिरा हुआ लगता है…
ठीक अभिमन्यु की तरह,
जो चक्रव्यूह में घुस तो गया,
लेकिन बाहर निकलने का रास्ता अकेले ही खोज रहा था।
मनोविज्ञान कहता है—
अकेलापन (Loneliness) मन को तोड़ता है,
लेकिन एकांत (Solitude) मन को बनाता है।
इसलिए...
अकेलेपन को तोड़ना है,
लेकिन एकांत को कभी छोड़ना मत
क्योंकि यही एकांत तुम्हें विजेता बनाएगा,
यही तुम्हारा सबसे बड़ा हथियार बनेगा।🫧
🔥58❤24😘2
जब लक्ष्य बहुत पास होता है,
तब डर सबसे ज्यादा शोर मचाता है।
जिसने तुमसे कहा “नौकरी लगना इम्पॉसिबल है”
वह चाहे कोई भी हो
उसने भविष्य नहीं देखा
उसने सिर्फ़ अपना डर तुम्हारे मन में डाल दिया
और याद रखो दूसरों का डर या उनकी बातें
जब मन में बैठ जाती हैं
तो हमारी ऊर्जा चूसने लगती हैं
सच तो यह है डर तभी आता है
जब तुम दरवाज़े, यानी सफलता के
बहुत क़रीब खड़े होते हो
इसलिए आज बस मन से इतना कहो
“जो होगा, देखा जाएगा
मैं आज अपना सर्वश्रेष्ठ दूँगा।”
तब डर सबसे ज्यादा शोर मचाता है।
जिसने तुमसे कहा “नौकरी लगना इम्पॉसिबल है”
वह चाहे कोई भी हो
उसने भविष्य नहीं देखा
उसने सिर्फ़ अपना डर तुम्हारे मन में डाल दिया
और याद रखो दूसरों का डर या उनकी बातें
जब मन में बैठ जाती हैं
तो हमारी ऊर्जा चूसने लगती हैं
सच तो यह है डर तभी आता है
जब तुम दरवाज़े, यानी सफलता के
बहुत क़रीब खड़े होते हो
इसलिए आज बस मन से इतना कहो
“जो होगा, देखा जाएगा
मैं आज अपना सर्वश्रेष्ठ दूँगा।”
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आपको सबसे कठिन लड़ाई लड़नी है और तब
तक संघर्ष करने से पीछे नहीं हटना है, जब तक कि आप अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच जाते हैं।
आप इस लड़ाई को किन हथियारों के बल पर लड़ेंगे ? वे हैं
– जीवन में एक महान उद्देश्य रखें, निरंतर ज्ञान को प्राप्त करते रहें और अपनी महान् उपलब्धि को पाने के लिए कड़ी मेहनत करें तथा दृढ़ बने रहें।🎯
तक संघर्ष करने से पीछे नहीं हटना है, जब तक कि आप अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच जाते हैं।
आप इस लड़ाई को किन हथियारों के बल पर लड़ेंगे ? वे हैं
– जीवन में एक महान उद्देश्य रखें, निरंतर ज्ञान को प्राप्त करते रहें और अपनी महान् उपलब्धि को पाने के लिए कड़ी मेहनत करें तथा दृढ़ बने रहें।🎯
🏆34❤15😘4
मुझे पता है कि तुम थके हुए हो, मैं भी हूँ
मुझे पता है कि तुम शारीरिक और भावनात्मक
रूप से निचुड़ चुके हो, मैं भी हूँ
लेकिन जानते हो क्या, हमें चलते रहना है
किसी के लिए नहीं बल्कि अपने लिए
अपने पिछले स्वयं के लिए
जिसे हमने अपने भविष्य को स्वयं से मिलाने
का वादा किया था
क्योंकि कभी–कभी जो व्यक्ति हम पर भरोसा
करे वो हमें खुद बनना पड़ता है।
मुझे पता है कि तुम शारीरिक और भावनात्मक
रूप से निचुड़ चुके हो, मैं भी हूँ
लेकिन जानते हो क्या, हमें चलते रहना है
किसी के लिए नहीं बल्कि अपने लिए
अपने पिछले स्वयं के लिए
जिसे हमने अपने भविष्य को स्वयं से मिलाने
का वादा किया था
क्योंकि कभी–कभी जो व्यक्ति हम पर भरोसा
करे वो हमें खुद बनना पड़ता है।
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कोई वजह इतनी बड़ी नहीं कि जिंदगी
अर्थहीन हो जाए, खुद को संभाले रखने का
दायित्व खुद का ही होता है,
किसी के भरोसे मत बैठो कि तुम्हारे सपनों
के टुकड़े वो आकर समेटेगा, ऐसा नहीं होगा
तुम्हे खुद ही खुद को संभालना सीखना होगा,
नहीं सीखोगे तो ऊंचाइयों पे नहीं नीचे पड़े हुए ही दिखोगे।
अर्थहीन हो जाए, खुद को संभाले रखने का
दायित्व खुद का ही होता है,
किसी के भरोसे मत बैठो कि तुम्हारे सपनों
के टुकड़े वो आकर समेटेगा, ऐसा नहीं होगा
तुम्हे खुद ही खुद को संभालना सीखना होगा,
नहीं सीखोगे तो ऊंचाइयों पे नहीं नीचे पड़े हुए ही दिखोगे।
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पुरुष को हमेशा एक स्त्री का साथ चाहिए
फिर वो चाहे मन्दिर हो या संसार
मंदिर में कृष्ण के साथ --> राधा
राम के साथ --> सीता
शंकर के साथ --> पार्वती
सुबह से रात तक मनुष्य को
अपने हर काम में
एक स्त्री की
आवश्यकता होती ही है.
पढ़ते समय --> विद्या
फिर --> लक्ष्मी
और अंत में --> शाँति
दिन की शुरुआत --> ऊषा के साथ,
दिन की समाप्ति --> संध्या से होती है.
किन्तु काम तो --> अन्नपूर्णा के
लिये ही करना है
रात यानी --> निशा के समय भी
निंदिया रानी
सोने के बाद --> सपना
मंत्रोच्चार के लिये --> गायत्री
ग्रंथ पढ़ें तो --> गीता
👇 मंदिर में भगवान के सामने 👇
वंदना, पूजा, अर्चना
आरती, आराधना
और ये सब भी ...
केवल --> श्रद्धा के साथ.
अंधेरा हो तो --> ज्योति
लड़ाई लड़ने जायें तो -->
जया और विजया
बुढ़ापे में --> करुणा वो भी
--> ममता के साथ.
गुस्सा आ जाए, तब --> क्षमा
इसीलिए तो धन्य है --> स्त्री जाति👸
जिसके बगैर पुरुष🤵 अधूरा है।
🙏नारी शक्ति को प्रणाम🙏
फिर वो चाहे मन्दिर हो या संसार
मंदिर में कृष्ण के साथ --> राधा
राम के साथ --> सीता
शंकर के साथ --> पार्वती
सुबह से रात तक मनुष्य को
अपने हर काम में
एक स्त्री की
आवश्यकता होती ही है.
पढ़ते समय --> विद्या
फिर --> लक्ष्मी
और अंत में --> शाँति
दिन की शुरुआत --> ऊषा के साथ,
दिन की समाप्ति --> संध्या से होती है.
किन्तु काम तो --> अन्नपूर्णा के
लिये ही करना है
रात यानी --> निशा के समय भी
निंदिया रानी
सोने के बाद --> सपना
मंत्रोच्चार के लिये --> गायत्री
ग्रंथ पढ़ें तो --> गीता
👇 मंदिर में भगवान के सामने 👇
वंदना, पूजा, अर्चना
आरती, आराधना
और ये सब भी ...
केवल --> श्रद्धा के साथ.
अंधेरा हो तो --> ज्योति
लड़ाई लड़ने जायें तो -->
जया और विजया
बुढ़ापे में --> करुणा वो भी
--> ममता के साथ.
गुस्सा आ जाए, तब --> क्षमा
इसीलिए तो धन्य है --> स्त्री जाति👸
जिसके बगैर पुरुष🤵 अधूरा है।
🙏नारी शक्ति को प्रणाम🙏
❤89🕊14👏11👍7💯3
"कई बार हमारी हार का कारण हमारी मेहनत नहीं,
हमारी ज़ुबान होती है।"
लोग आपकी योजनाएँ सुनते नहीं
वे उन्हें तोड़ने के रास्ते ढूँढ़ते हैं
इसलिए अपनी चाल, अपने सपने और अपनी रणनीति
जरूरत से पहले किसी को मत बताइए
मनोविज्ञान कहता है
मौन आपकी ऊर्जा की रक्षा करता है
और गोपनीयता आपकी सफलता की
गूंगा शेर भी जंगल का राजा होता है
और मुँह बंद रखने वाली मछली जाल में नहीं फँसती।
हमारी ज़ुबान होती है।"
लोग आपकी योजनाएँ सुनते नहीं
वे उन्हें तोड़ने के रास्ते ढूँढ़ते हैं
इसलिए अपनी चाल, अपने सपने और अपनी रणनीति
जरूरत से पहले किसी को मत बताइए
मनोविज्ञान कहता है
मौन आपकी ऊर्जा की रक्षा करता है
और गोपनीयता आपकी सफलता की
गूंगा शेर भी जंगल का राजा होता है
और मुँह बंद रखने वाली मछली जाल में नहीं फँसती।
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