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❤2🔥1
कहानी नॉर्मलाइजेशन की...
1. प्रतियोगी परीक्षा की अधिसूचना (Notification) जारी हुई।
परीक्षा एजेंसी: सभी उम्मीदवारों को सूचित किया जाता है कि परीक्षा अलग-अलग शिफ्ट में होगी। पास होने (कट-ऑफ) के लिए 144 अंक आवश्यक हैं।
(शिफ्ट A के छात्र, शिफ्ट B के छात्र, शिफ्ट C के छात्र)
2. सभी छात्रों ने अपनी तैयारी के अनुसार परीक्षा दी।
(शिफ्ट A, शिफ्ट B, शिफ्ट C के छात्र पेपर हल करते हुए)
3. परीक्षा का परिणाम (रॉ स्कोर / Raw Score) आया...
शिफ्ट A का छात्र: 157 अंक
शिफ्ट B का छात्र: 57 अंक
शिफ्ट C का छात्र: 42 अंक
4. 157 अंक पाने वाले छात्र को पूरा भरोसा था कि उसका सिलेक्शन पक्का है!
छात्र: अब तो नौकरी/सीट हमारी ही है!
5. लेकिन परीक्षा एजेंसी (Exam Agency) की घोषणा...
परीक्षा एजेंसी: 157 अंक मिलने के बावजूद इस छात्र का सिलेक्शन नहीं हो सकता। इनके लिए पासिंग मार्क्स का मानदंड बढ़ाकर 200 अंक कर दिया गया है।
6. छात्र ने पूछा...
छात्र: मेरे पास 144 से ज्यादा यानी 157 अंक हैं। फिर मेरा सिलेक्शन क्यों नहीं?
7. एजेंसी का उत्तर...
परीक्षा एजेंसी: आपने जिस शिफ्ट में परीक्षा दी, वहां का पेपर बहुत आसान था। इसलिए आपके लिए कट-ऑफ का मानदंड 200 अंक किया गया।
बोर्ड: आपके लिए कट-ऑफ = 200 अंक
8. तो फिर 57 और 42 अंक वाले छात्रों का सिलेक्शन कैसे हुआ?
परीक्षा एजेंसी: उन्होंने जिस शिफ्ट में परीक्षा दी, वहां का पेपर बहुत कठिन, पेचीदा और डरावना था। इसलिए उनके लिए कट-ऑफ का मानदंड कम किया गया और उन्हें सिलेक्शन का मौका दिया गया।
बोर्ड: उनके लिए कट-ऑफ = बहुत कम
9. 157 अंक पाने वाले छात्र का सवाल...
छात्र: अगर मैं भी उस कठिन शिफ्ट में बैठता तो अच्छे नंबर लाता, लेकिन आपने हमें पहले तो यह नहीं बताया कि आसान पेपर आने पर हमारे नंबरों की वैल्यू कम हो जाएगी!
10. परीक्षा एजेंसी का उत्तर...
परीक्षा एजेंसी: अंतिम नियम हम पहले नहीं बताते... परिणाम आने के बाद सभी शिफ्टों के औसत (Average) और कठिनता के स्तर के अनुसार तय करते हैं।
11. छात्र का गुस्सा...
छात्र: ये कैसे नियम हैं?
परीक्षा एजेंसी: इसी को तो कहते हैं — नॉर्मलाइजेशन (Normalisation)!
नियम पहले स्पष्ट नहीं... परिणाम के बाद जटिल फॉर्मूले से सब बदल दिया जाए तो उसी को कहते हैं — नॉर्मलाइजेशन!
1. प्रतियोगी परीक्षा की अधिसूचना (Notification) जारी हुई।
परीक्षा एजेंसी: सभी उम्मीदवारों को सूचित किया जाता है कि परीक्षा अलग-अलग शिफ्ट में होगी। पास होने (कट-ऑफ) के लिए 144 अंक आवश्यक हैं।
(शिफ्ट A के छात्र, शिफ्ट B के छात्र, शिफ्ट C के छात्र)
2. सभी छात्रों ने अपनी तैयारी के अनुसार परीक्षा दी।
(शिफ्ट A, शिफ्ट B, शिफ्ट C के छात्र पेपर हल करते हुए)
3. परीक्षा का परिणाम (रॉ स्कोर / Raw Score) आया...
शिफ्ट A का छात्र: 157 अंक
शिफ्ट B का छात्र: 57 अंक
शिफ्ट C का छात्र: 42 अंक
4. 157 अंक पाने वाले छात्र को पूरा भरोसा था कि उसका सिलेक्शन पक्का है!
छात्र: अब तो नौकरी/सीट हमारी ही है!
5. लेकिन परीक्षा एजेंसी (Exam Agency) की घोषणा...
परीक्षा एजेंसी: 157 अंक मिलने के बावजूद इस छात्र का सिलेक्शन नहीं हो सकता। इनके लिए पासिंग मार्क्स का मानदंड बढ़ाकर 200 अंक कर दिया गया है।
6. छात्र ने पूछा...
छात्र: मेरे पास 144 से ज्यादा यानी 157 अंक हैं। फिर मेरा सिलेक्शन क्यों नहीं?
7. एजेंसी का उत्तर...
परीक्षा एजेंसी: आपने जिस शिफ्ट में परीक्षा दी, वहां का पेपर बहुत आसान था। इसलिए आपके लिए कट-ऑफ का मानदंड 200 अंक किया गया।
बोर्ड: आपके लिए कट-ऑफ = 200 अंक
8. तो फिर 57 और 42 अंक वाले छात्रों का सिलेक्शन कैसे हुआ?
परीक्षा एजेंसी: उन्होंने जिस शिफ्ट में परीक्षा दी, वहां का पेपर बहुत कठिन, पेचीदा और डरावना था। इसलिए उनके लिए कट-ऑफ का मानदंड कम किया गया और उन्हें सिलेक्शन का मौका दिया गया।
बोर्ड: उनके लिए कट-ऑफ = बहुत कम
9. 157 अंक पाने वाले छात्र का सवाल...
छात्र: अगर मैं भी उस कठिन शिफ्ट में बैठता तो अच्छे नंबर लाता, लेकिन आपने हमें पहले तो यह नहीं बताया कि आसान पेपर आने पर हमारे नंबरों की वैल्यू कम हो जाएगी!
10. परीक्षा एजेंसी का उत्तर...
परीक्षा एजेंसी: अंतिम नियम हम पहले नहीं बताते... परिणाम आने के बाद सभी शिफ्टों के औसत (Average) और कठिनता के स्तर के अनुसार तय करते हैं।
11. छात्र का गुस्सा...
छात्र: ये कैसे नियम हैं?
परीक्षा एजेंसी: इसी को तो कहते हैं — नॉर्मलाइजेशन (Normalisation)!
नियम पहले स्पष्ट नहीं... परिणाम के बाद जटिल फॉर्मूले से सब बदल दिया जाए तो उसी को कहते हैं — नॉर्मलाइजेशन!
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Forwarded from QUOTES DIARIESS..❤️✨
दर्द छुपाना सीख गया हूँ, क्योंकि हर बार अपना दर्द बताया... लोगों ने उसे मज़ाक या कमजोरी समझ लिया। अब मुस्कुराना ही आसान लगता है। ❤️🩹☺️
Good morning Dosto..🌱🌞
Ki haaal chaaal....??🍃
Telegram📩: @quotesdiariess
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❤36👏3
शिव सब देख रहे हैं... संघर्ष भी, तकलीफ़ें भी, और मेरी खामोश कोशिशें भी। हर अंधेरी रात के बाद सवेरा ज़रूर होगा। 🕉️❤️☘️🔱📿
Telegram: @quotesdiariess
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☝️जीवन में सफ़लता पाने का एक राज है
जो कुछ करना है वक्त उसका आज है
‘आत्मविश्वास’ नही देखता कितने तूफ़ान है
तेज बारिश और तूफानों में उड़ने वाला बाज है ! 🧚♀✨
जो कुछ करना है वक्त उसका आज है
‘आत्मविश्वास’ नही देखता कितने तूफ़ान है
तेज बारिश और तूफानों में उड़ने वाला बाज है ! 🧚♀✨
मोह माया तुम्हे अपनी तरफ बुलाएगी लेकिन ध्यान रखना तुम्हारी मेहनत ही मंजिल दिलाएगी। 🔥❤36🤣2
रिसर्च से पता चला है पढ़ाई के बाद रिवीजन
ना करने की वजह से ज्यादातर लोगों
को पढ़ा हुआ केवल 60 % ही याद रहता है
📚📚🌺
ना करने की वजह से ज्यादातर लोगों
को पढ़ा हुआ केवल 60 % ही याद रहता है
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❤29🎉14👍5💯2
🍃 चन्द्रगुप्त ने पुछा 🍃
🍃 चाणक्य ने कहा 🍃
अगर किस्मत
पहेले ही लिखी जा चुकी है तो,
कोशिश कर के क्या मिलेगा?🍃 चाणक्य ने कहा 🍃
क्या पता किस्मत में लिखा हो की,
कोशिश करने से ही मिलेगा!👌39👍15❤10🫡4
❇️देश और राजनीतिक सोच
जब हम किसी एक राजनीतिक दल से दिल से जुड़ जाते हैं, तो हमारी सोच निष्पक्ष नहीं रह पाती और हमारा दिमाग एक खास पैटर्न पर काम करने लगता है। दरअसल, इंसान का स्वभाव है कि वह जिस समूह या नेता को पसंद करता है, उसे अपनी पहचान का हिस्सा मान लेता है। इसके बाद हमारा दिमाग पुष्टिकरण पूर्वाग्रह (Confirmation Bias) का शिकार हो जाता है, जिसका मतलब है कि हम केवल वही खबरें और बातें देखना-सुनना पसंद करते हैं जो हमारी पसंदीदा पार्टी की तारीफ करती हों, भले ही वे सच न हों। वहीं दूसरी तरफ, विरोधी दल के अच्छे कामों को भी हमारा दिमाग तुरंत खारिज कर देता है क्योंकि उन्हें सही मानने से हमारी पुरानी धारणा को ठेस पहुंचती है। आज के दौर में सोशल मीडिया भी लगातार एक ही तरह के वीडियो दिखाकर हमारे विचारों के चारों तरफ एक अदृश्य दीवार बना देता है, जिससे व्यक्ति अपनी पार्टी की गलतियों का भी बचाव करने लगता है।
ऐसी कट्टर मानसिकता वाले लोगों की वजह से देश में सही-गलत का पैमाना बदल जाता है; समाज में आपसी भाईचारे की जगह नफरत और दूरियां बढ़ने लगती हैं। जब जनता काम और विकास के बजाय सिर्फ पार्टी देखकर वोट देने लगती है, तो सरकारें भी जनता के प्रति बेपरवाह हो जाती हैं। नतीजा यह होता है कि देश बुनियादी मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में पिछड़ जाता है और एक कमजोर तथा आपस में बंटा हुआ समाज बनता है।
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