अगर आपने खुली आंखों से आईएएस बनने का सपना देखा है और आपने उस सपने को पूरा करने का जोश लगन और जुनून है। अगर आप देश दुनिया के घटनाक्रम के प्रति जागरूकता रखते हैं। अपने देश व समाज के प्रति सरोकार और संवेदना का भाव है तो जुड़ जाइए अपने इस सपने को पंख लगाने के लिए उम्मीदों का आसमान आपकी प्रतीक्षा कर रहा है।
Join 👉 @iasipsmotivation
Join 👉 @iasipsmotivation
🔥31❤8
आत्मसम्मान कैसे बढ़ाएं (HOW TO RESPECT YOURSELF)
(1) उनके पीछे भागना बंद करें जो आपकी परवाह नहीं करते।
(2) किसी के सामने भीख मांगना या मिन्नतें करना बंद करें।
(3) जरूरत से ज्यादा बोलना बंद करें।
(4) जब लोग आपका अनादर करें, तो तुरंत उसी समय उनका डटकर सामना करें।
(5) दूसरों के घर का खाना या उनका अहसान उतना ही लें, जितना आप उन्हें वापस लौटा सकें।
(6) कुछ लोगों के यहाँ बार-बार जाना कम करें, खासकर तब जब वे आपके यहाँ कभी नहीं आते।
(7) खुद पर निवेश करें। खुद को खुश रखना सीखें।
(8) दूसरों के बारे में इधर-उधर की गॉसिप (चुगली) सुनना या उसमें शामिल होना बंद करें।
(9) बोलने से पहले सोचें। लोग आपको कितनी अहमियत देंगे, इसका 80% हिस्सा इस बात पर निर्भर करता है कि आपके मुंह से क्या निकलता है।
(10) हमेशा अपने बेहतरीन रूप में दिखें। वैसे ही कपड़े पहनें, जैसी आप दूसरों से खुद के लिए इज्जत चाहते हैं।
(11) एक कामयाब इंसान बनें। अपने लक्ष्यों को हासिल करने में व्यस्त रहें।
(12) अपने समय की कीमत समझें और उसकी इज्जत करें।
(13) ऐसे किसी भी रिश्ते में न रहें जहाँ आपको सम्मान और कद्र न मिले। वहाँ से तुरंत बाहर निकल जाएं।
(14) खुद पर पैसे खर्च करना सीखें। जब आप खुद की कद्र करेंगे, तभी लोग भी आप पर खर्च करना सीखेंगे।
(15) कभी-कभी खुद को थोड़ा दुर्लभ (Scarce) बनाएं, हर वक्त हर किसी के लिए उपलब्ध न रहें।
(16) लेने वाले से ज्यादा हमेशा देने वाले (मदद करने वाले) बनें।
(17) जहाँ आपको आमंत्रित न किया गया हो, वहाँ कभी न जाएं। और जहाँ बुलाया गया हो, वहाँ जरूरत से ज्यादा देर न रुकें।
(18) लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार करें, जिसके वे हकदार हैं।
(19) जब तक किसी पर आपका पैसा बकाया न हो, तब तक किसी को भी सिर्फ दो बार कॉल करना काफी है। अगर वे आपकी कद्र करते हैं, तो वे खुद आपको वापस कॉल करेंगे।
(20) आप जो भी काम करते हैं, उसमें माहिर बनें। अपने क्षेत्र में सबसे बेहतरीन बनें।
(1) उनके पीछे भागना बंद करें जो आपकी परवाह नहीं करते।
(2) किसी के सामने भीख मांगना या मिन्नतें करना बंद करें।
(3) जरूरत से ज्यादा बोलना बंद करें।
(4) जब लोग आपका अनादर करें, तो तुरंत उसी समय उनका डटकर सामना करें।
(5) दूसरों के घर का खाना या उनका अहसान उतना ही लें, जितना आप उन्हें वापस लौटा सकें।
(6) कुछ लोगों के यहाँ बार-बार जाना कम करें, खासकर तब जब वे आपके यहाँ कभी नहीं आते।
(7) खुद पर निवेश करें। खुद को खुश रखना सीखें।
(8) दूसरों के बारे में इधर-उधर की गॉसिप (चुगली) सुनना या उसमें शामिल होना बंद करें।
(9) बोलने से पहले सोचें। लोग आपको कितनी अहमियत देंगे, इसका 80% हिस्सा इस बात पर निर्भर करता है कि आपके मुंह से क्या निकलता है।
(10) हमेशा अपने बेहतरीन रूप में दिखें। वैसे ही कपड़े पहनें, जैसी आप दूसरों से खुद के लिए इज्जत चाहते हैं।
(11) एक कामयाब इंसान बनें। अपने लक्ष्यों को हासिल करने में व्यस्त रहें।
(12) अपने समय की कीमत समझें और उसकी इज्जत करें।
(13) ऐसे किसी भी रिश्ते में न रहें जहाँ आपको सम्मान और कद्र न मिले। वहाँ से तुरंत बाहर निकल जाएं।
(14) खुद पर पैसे खर्च करना सीखें। जब आप खुद की कद्र करेंगे, तभी लोग भी आप पर खर्च करना सीखेंगे।
(15) कभी-कभी खुद को थोड़ा दुर्लभ (Scarce) बनाएं, हर वक्त हर किसी के लिए उपलब्ध न रहें।
(16) लेने वाले से ज्यादा हमेशा देने वाले (मदद करने वाले) बनें।
(17) जहाँ आपको आमंत्रित न किया गया हो, वहाँ कभी न जाएं। और जहाँ बुलाया गया हो, वहाँ जरूरत से ज्यादा देर न रुकें।
(18) लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार करें, जिसके वे हकदार हैं।
(19) जब तक किसी पर आपका पैसा बकाया न हो, तब तक किसी को भी सिर्फ दो बार कॉल करना काफी है। अगर वे आपकी कद्र करते हैं, तो वे खुद आपको वापस कॉल करेंगे।
(20) आप जो भी काम करते हैं, उसमें माहिर बनें। अपने क्षेत्र में सबसे बेहतरीन बनें।
🔥22❤15👍5🕊2
Happy Teacher's Day🌺🙏
सभी साथियों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!
आदर्शों की मिसाल बनकर
बाल जीवन संवारता शिक्षक,
सदाबहार फूल-सा खिलकर
महकता और महकाता शिक्षक,
नित नए प्रेरक आयाम लेकर
हर पल भव्य बनाता शिक्षक,
संचित ज्ञान का धन हमें देकर
खुशियां खूब मनाता शिक्षक,
""शिक्षक की गोद में ही निर्माण और प्रलय दोनों पलते हैं,,,,
अतः शिक्षक कभी साधारण नही होता।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
सभी साथियों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!
👍18❤14🔥4
जिस पल का इंतजार अनगिनत भक्त पूरे वर्ष करते हैं… वह पावन क्षण फिर आ गया है - बप्पा आ गए हैं।
श्री गणेशाय नमः ❤️
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥”
बप्पा के दर्शन मात्र से मन श्रद्धा और आनंद से भर उठता है।
उनके श्रीचरणों में यही प्रार्थना है कि उनकी कृपा हर घर में सुख, शांति, समृद्धि और नई आशा लेकर आए और जीवन के सभी विघ्न दूर हों।
गणपति बप्पा मोरया!
मंगलमूर्ति मोरया! 🙏🏻🌺
श्री गणेशाय नमः ❤️
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥”
बप्पा के दर्शन मात्र से मन श्रद्धा और आनंद से भर उठता है।
उनके श्रीचरणों में यही प्रार्थना है कि उनकी कृपा हर घर में सुख, शांति, समृद्धि और नई आशा लेकर आए और जीवन के सभी विघ्न दूर हों।
गणपति बप्पा मोरया!
मंगलमूर्ति मोरया! 🙏🏻🌺
🙏39❤12👏6
किसी ने एक बार कहा था,❤️
क्या यह सच नहीं है?
"यदि आप जो चाहते हैं उसके लिए त्याग नहीं करते हैं, तो जो आप चाहते हैं वह त्याग बन जाता है।"क्या यह सच नहीं है?
❤35🎉12💯10👍7
📱 मोबाइल की लत के 10 गंभीर नुकसान ⚠️
1. 📉 अटेंशन स्पैन का घटना: रील्स और शॉर्ट्स देखने से लंबे समय तक गहराई से पढ़ने की क्षमता बहुत कम हो जाती है।
2. 🤯 इन्फॉर्मेशन ओवरलोड: दिनभर फालतू डेटा देखने से दिमाग थक जाता है और पढ़ाई की जरूरी चीजें याद नहीं रहतीं।
3. ⚡ डोपामाइन एडिक्शन: फोन दिमाग को तुरंत मजे का आदी बना देता है, जिससे मेहनत वाले कामों में मन नहीं लगता।
4. 🧠 डिसीजन फटीग: लगातार स्क्रीन स्क्रॉल करने से मानसिक ऊर्जा खत्म होती है और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है।
5. ⏳ समय की भारी बर्बादी: "सिर्फ 5 मिनट" के चक्कर में फोन कब आपके कीमती 2 घंटे चुरा लेता है, पता ही नहीं चलता।
6. 😴 नींद का चक्र खराब होना: रात में फोन की... ब्लू-लाइट से नींद का हार्मोन रुक जाता है, जिससे अनिद्रा और सुस्ती रहती है।
7. 👀 आँखों पर बुरा असर: लगातार स्क्रीन देखने से आँखों में सूखापन, जलन, धुंधलापन और लगातार सिरदर्द बना रहता है।
8. 🩻 पोस्चर की समस्या: घंटों गर्दन झुकाकर फोन चलाने से रीढ़ की हड्डी और गर्दन में दर्द (Text Neck) होने लगता है।
9. 👥 सोशल आइसोलेशन: वर्चुअल दुनिया में डूबे रहने के कारण लोग अपनों से कट जाते हैं और अकेलापन बढ़ता है।
10. 📉 एंजाइटी और हीन भावना: सोशल मीडिया पर दूसरों की नकली 'परफेक्ट लाइफ' देखकर खुद से तुलना करना और तनाव में आना।
---
💡 सोचिए और संभलिए:
"तकनीक अगर नौकर बनकर रहे तो हमारा जीवन बदल देती है, लेकिन अगर यह मालिक बन जाए तो हमारी पूरी जिंदगी और हमारे बड़े सपनों को धीरे-धीरे खत्म कर देती है। समय रहते जागिए और अपनी स्क्रीन के मालिक खुद बनिए!" 🚀
1. 📉 अटेंशन स्पैन का घटना: रील्स और शॉर्ट्स देखने से लंबे समय तक गहराई से पढ़ने की क्षमता बहुत कम हो जाती है।
2. 🤯 इन्फॉर्मेशन ओवरलोड: दिनभर फालतू डेटा देखने से दिमाग थक जाता है और पढ़ाई की जरूरी चीजें याद नहीं रहतीं।
3. ⚡ डोपामाइन एडिक्शन: फोन दिमाग को तुरंत मजे का आदी बना देता है, जिससे मेहनत वाले कामों में मन नहीं लगता।
4. 🧠 डिसीजन फटीग: लगातार स्क्रीन स्क्रॉल करने से मानसिक ऊर्जा खत्म होती है और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है।
5. ⏳ समय की भारी बर्बादी: "सिर्फ 5 मिनट" के चक्कर में फोन कब आपके कीमती 2 घंटे चुरा लेता है, पता ही नहीं चलता।
6. 😴 नींद का चक्र खराब होना: रात में फोन की... ब्लू-लाइट से नींद का हार्मोन रुक जाता है, जिससे अनिद्रा और सुस्ती रहती है।
7. 👀 आँखों पर बुरा असर: लगातार स्क्रीन देखने से आँखों में सूखापन, जलन, धुंधलापन और लगातार सिरदर्द बना रहता है।
8. 🩻 पोस्चर की समस्या: घंटों गर्दन झुकाकर फोन चलाने से रीढ़ की हड्डी और गर्दन में दर्द (Text Neck) होने लगता है।
9. 👥 सोशल आइसोलेशन: वर्चुअल दुनिया में डूबे रहने के कारण लोग अपनों से कट जाते हैं और अकेलापन बढ़ता है।
10. 📉 एंजाइटी और हीन भावना: सोशल मीडिया पर दूसरों की नकली 'परफेक्ट लाइफ' देखकर खुद से तुलना करना और तनाव में आना।
---
💡 सोचिए और संभलिए:
"तकनीक अगर नौकर बनकर रहे तो हमारा जीवन बदल देती है, लेकिन अगर यह मालिक बन जाए तो हमारी पूरी जिंदगी और हमारे बड़े सपनों को धीरे-धीरे खत्म कर देती है। समय रहते जागिए और अपनी स्क्रीन के मालिक खुद बनिए!" 🚀
❤27
क्रांति का उद्देश्य मनुष्यों द्वारा मनुष्यों
के शोषण को रोकना है।
— शहीद भगत सिंह
के शोषण को रोकना है।
— शहीद भगत सिंह
❤41🏆4👍1
✅अपने समय का महत्व और बढ़ता हुआ स्वार्थ
आज के आधुनिक और भागदौड़ भरे युग में लोगों के भीतर स्वार्थ की भावना बहुत तेजी से बढ़ी है। आजकल लोग अक्सर सिर्फ अपना काम निकलवाने के लिए दूसरों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे समय में, यदि हम हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहें और अपना खुद का जरूरी काम छोड़कर उनके पीछे भागते रहें, तो अंत में हमारे हाथ सिर्फ निराशा ही लगती है। अपना अमूल्य समय ऐसे लोगों पर बर्बाद करना अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारने जैसा है। दूसरों की मदद करना एक अच्छी आदत है, लेकिन ऐसा करते समय यह देखना भी बेहद जरूरी है कि सामने वाला व्यक्ति आपके इस अहसान की कद्र करता है या नहीं। जब तक हम खुद अपने समय और अपने काम की कीमत नहीं समझेंगे, तब तक यह दुनिया भी हमें सम्मान नहीं देगी। इसलिए, अपनी प्राथमिकताओं को पहचानना, अपना कीमती समय केवल सही लोगों को ही देना और स्वार्थी लोगों से समय रहते दूरी बना लेना ही आज के समय की सबसे बड़ी समझदारी है।
आज के आधुनिक और भागदौड़ भरे युग में लोगों के भीतर स्वार्थ की भावना बहुत तेजी से बढ़ी है। आजकल लोग अक्सर सिर्फ अपना काम निकलवाने के लिए दूसरों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे समय में, यदि हम हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहें और अपना खुद का जरूरी काम छोड़कर उनके पीछे भागते रहें, तो अंत में हमारे हाथ सिर्फ निराशा ही लगती है। अपना अमूल्य समय ऐसे लोगों पर बर्बाद करना अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारने जैसा है। दूसरों की मदद करना एक अच्छी आदत है, लेकिन ऐसा करते समय यह देखना भी बेहद जरूरी है कि सामने वाला व्यक्ति आपके इस अहसान की कद्र करता है या नहीं। जब तक हम खुद अपने समय और अपने काम की कीमत नहीं समझेंगे, तब तक यह दुनिया भी हमें सम्मान नहीं देगी। इसलिए, अपनी प्राथमिकताओं को पहचानना, अपना कीमती समय केवल सही लोगों को ही देना और स्वार्थी लोगों से समय रहते दूरी बना लेना ही आज के समय की सबसे बड़ी समझदारी है।
❤30🔥5👌2
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
"तू थक गया ? तो याद कर वो दिन…
जब अफसर बनने का सपना आंखों में पहली बार चमका था!
तू आज रुकेगा तो लोग हँसेंगे,
मगर तू आज लड़ेगा तो कल पूरा सिस्टम सलाम करेगा!" ✨🔥
जब अफसर बनने का सपना आंखों में पहली बार चमका था!
तू आज रुकेगा तो लोग हँसेंगे,
मगर तू आज लड़ेगा तो कल पूरा सिस्टम सलाम करेगा!" ✨🔥
🎉28❤13👍12🔥2
जब भी तुम्हें यह लगे कि “मुझसे नहीं होगा”, उस क्षण अपनी आँखें बंद कर माँ-बाप के चेहरे को याद करो, जिन्होंने तुम्हें इस संसार में भेजते समय उम्मीदों का दीपक जलाया था। उनके लिए तुम कोई साधारण बच्चा नहीं, बल्कि सबसे होशियार, सबसे अनमोल रत्न हो। जब कभी किसी परीक्षा में असफलता हाथ लगती है, तब भी तुम्हारी माँ यही कहती है कि “बेटा, तुम तो होशियार थे, शायद परीक्षा में ही कोई भूल-चूक हो गई होगी, इसलिए तुम्हें नहीं लिया गया।” सोचो, उस माँ के सामने तुम कैसे कह दोगे कि “माँ, मुझसे नहीं होगा”? सत्य यह है कि जब तक तुम अपने माता-पिता का ऋण नहीं चुका देते, जब तक उनके त्याग और सम्मान को इस समाज में ऊँचाई नहीं दिला देते, तब तक तुम्हारी सबसे बड़ी हार वहीं है। इसलिए आज से यह संकल्प लो कि कभी भी अपने होंठों से यह शब्द न निकलें कि “मुझसे नहीं होगा”, क्योंकि तुम्हारे हर प्रयास में ही उनके सपनों की रोशनी छिपी है।
दीपेश जांगिड झुंझुनू ✍️❤️
दीपेश जांगिड झुंझुनू ✍️❤️
❤39🙏4💯3