प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह भारत के रेलवे इतिहास में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
🚆🇮🇳 अंदर से ऐसी दिखती है भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन!
🔹 ट्रेन की प्रमुख विशेषताएँ: ✅ 10 कोच वाली आधुनिक यात्री ट्रेन
✅ लगभग 2600 यात्रियों की बैठने की क्षमता
✅ ऑटोमैटिक दरवाजे और आरामदायक सीटें
✅ डीसी एयर कंडीशनिंग और आधुनिक सुविधाएं
✅ हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित, जिससे केवल पानी और भाप का उत्सर्जन होगा, प्रदूषण नहीं।
📍 रूट: जींद – सोनीपत (हरियाणा)
📏 एक तरफ दूरी: लगभग 89 किलोमीटर
🔄 दैनिक संचालन: दो चक्कर लगाकर करीब 356 किलोमीटर का सफर तय करेगी।
यह ट्रेन भारत के ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन और स्वच्छ ऊर्जा आधारित भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन ट्रेनें संचालित हो रही हैं।
#HydrogenTrain #IndianRailways #PMModi #ModiHaiToMumkinHai #viralvideoシ 🚄🇮🇳
🚆🇮🇳 अंदर से ऐसी दिखती है भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन!
🔹 ट्रेन की प्रमुख विशेषताएँ: ✅ 10 कोच वाली आधुनिक यात्री ट्रेन
✅ लगभग 2600 यात्रियों की बैठने की क्षमता
✅ ऑटोमैटिक दरवाजे और आरामदायक सीटें
✅ डीसी एयर कंडीशनिंग और आधुनिक सुविधाएं
✅ हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित, जिससे केवल पानी और भाप का उत्सर्जन होगा, प्रदूषण नहीं।
📍 रूट: जींद – सोनीपत (हरियाणा)
📏 एक तरफ दूरी: लगभग 89 किलोमीटर
🔄 दैनिक संचालन: दो चक्कर लगाकर करीब 356 किलोमीटर का सफर तय करेगी।
यह ट्रेन भारत के ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन और स्वच्छ ऊर्जा आधारित भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन ट्रेनें संचालित हो रही हैं।
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वाह दीदी वाह
Varanasi News: वाराणसी के चौबेपुर थाना परिसर में तैनात महिला उपनिरीक्षक द्वारा एक महिला की पिटाई का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। करीब आठ सेकेंड के वायरल वीडियो में महिला उपनिरीक्षक एक महिला को लगातार कई थप्पड़ मारती दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद डीसीपी वरुणा ने आरोपी महिला दरोगा को निलंबित कर दिया।
Varanasi News: वाराणसी के चौबेपुर थाना परिसर में तैनात महिला उपनिरीक्षक द्वारा एक महिला की पिटाई का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। करीब आठ सेकेंड के वायरल वीडियो में महिला उपनिरीक्षक एक महिला को लगातार कई थप्पड़ मारती दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद डीसीपी वरुणा ने आरोपी महिला दरोगा को निलंबित कर दिया।
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Media is too big
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बच्चे के बेबाक अंदाज ने जीत लिया दिल, तुरन्त काम करवाने को मजबूर हो गए डीएम
लखीमपुर। लखीमपुर खीरी में रहने वाला एक 8वीं का छात्र शनिवार को तहसील दिवस में पहुंचा। उसके घर पर चाचा चाची ने ताला डाल रखा है। मां लोगों के घरों में काम करती है। बच्चे ने बेबाक अंदाज में डीएम से कहा कि उसके घर का ताला खुलवाया जाए।
डीएम ने कोतवाल से कहा कि बच्चे का काम देख लो। बच्चे ने तुंरत जवाब दिया, दिखावा नहीं, कहिए ताला खुलवा दे। ये लोग कमीशन दे दो बस
लखीमपुर। लखीमपुर खीरी में रहने वाला एक 8वीं का छात्र शनिवार को तहसील दिवस में पहुंचा। उसके घर पर चाचा चाची ने ताला डाल रखा है। मां लोगों के घरों में काम करती है। बच्चे ने बेबाक अंदाज में डीएम से कहा कि उसके घर का ताला खुलवाया जाए।
डीएम ने कोतवाल से कहा कि बच्चे का काम देख लो। बच्चे ने तुंरत जवाब दिया, दिखावा नहीं, कहिए ताला खुलवा दे। ये लोग कमीशन दे दो बस
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General studies & current affairs DSSSB TGT ,PGT, PRT ,बिहार शिक्षक भर्ती लेटेस्ट अपडेट
बच्चे के बेबाक अंदाज ने जीत लिया दिल, तुरन्त काम करवाने को मजबूर हो गए डीएम लखीमपुर। लखीमपुर खीरी में रहने वाला एक 8वीं का छात्र शनिवार को तहसील दिवस में पहुंचा। उसके घर पर चाचा चाची ने ताला डाल रखा है। मां लोगों के घरों में काम करती है। बच्चे ने बेबाक…
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"आईएएस रिंकू सिंह की इस चिट्ठी ने ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा रखा है.. 6 पन्नों में सरकारी सिस्टम कि बखिया उधेड़ दी है उन्होंने.. ये चिट्ठी सबको जरूर पढ़नी चाहिए.."
आईएएस रिंकू सिंह राही जालौन में एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात हैं.. कुछ दिन पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.. किसी तरह वो बवाल शांत हुआ तो अब उन्होंने चिट्ठी लिखकर एक दूसरा बवाल खड़ा कर दिया है..
आईएएस रिंकू सिंह की इस चिट्ठी से साफ है कि सरकारी सिस्टम में ईमानदारी से काम करना कितना मुश्किल है..
वो लिखते हैं, आम जनता के हित और सरकारी कामों की निरंतरता के लिए मैंने कई मौकों पर व्यक्तिगत मान्यताओं और अंतरात्मा के प्रतिकूल व्यावहारिक संतुलन अपनाने का प्रयास किया.. विधायक गौरी शंकर वर्मा के सामने डीएम ने आदेश दिया की तहसील क्षेत्र में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामले में कोई कार्रवाई न की जाए..
इस आदेश की उपेक्षा की जगह मैंने बीच का रास्ता निकालते हुए सिर्फ प्राप्त शिकायतों पर ही नियमानुसार कार्रवाई शुरू की.. नतीजा ये हुआ कि शिकायतें बढ़ने लगीं.. और शिकायतों का फर्जी निस्तारण होने लगा..
रिंकू सिंह लिख रहे हैं कि जनपद की रैंक ऊपर रखने के लिए आईजीआरएस और एंटी भू माफिया के मामलों का फर्जी निस्तारण स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया.. इसका भी रास्ता मैंने निकाला, लेकिन मना कर दिया गया..
कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम से अवैध कब्जे की जांच को लेकर ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन ने साजिश करके विवाद किया जिसके चलते मेरा तबादला कर दिया गया..
उन्होंने लिखा, ईमानदार पृष्ठभूमि वाले अधिकारी को जब ऐसे परिणाम का सामना करना पड़ सकता है तो अन्य अधिकारी और कर्मचारियों की स्थिति तो और भी चुनौती पूर्ण हो सकती है.
रिंकू सिंह ने पहले भी कहा था, काम नहीं तो वेतन नहीं.. अपने पत्र में उन्होंने लिखा, एसडीएम न्यायिक के तौर पर कोर्ट में उन्हें 2 घंटे काम करना होता है.. कोर्ट के बाहर फाइल्स को समझने और कानूनी कार्य करने के लिए चार घंटे और लग जाते हैं.. अगर रोज काम के 8 घंटे माने जाए तो भी यह 50 फीसदी ही है..
उन्होंने लिखा कि अभी वो आधा ही काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें वेतन भी आधा ही दिया जाए..
रिंकू सिंह ने डीएम के जनता दर्शन की भी पोल-पट्टी खोली है..
उन्होंने लिखा कि जनता दर्शन में डीएम साहब के साथ बैठना होता है.. हालांकि, डीएम साहब शिकायतों के निस्तारण का दिखावा ही करते हैं जिससे अंतर्मन को ठेस पहुंचती है.. इसलिए डीएम साहब के साथ जनता दर्शन में समय गुजारना खुद को धोखा देना है..
उन्होंने पत्र में लिखा है कि जब नौकरी के शुरुआती दौर में ही एक तहसील जैसे छोटे से प्रशासनिक क्षेत्र में नियमित एसडीएम के रूप में काम करने का मौका नहीं मिल रहा है तो आगे क्या मौके मिलेंगे!! वर्तमान हालात ऐसे है कि भविष्य में सीडीओ, नगर आयुक्त, डीएम जैसे पदों के लिए मेरी उपयोगिता के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकते हैं.
उन्होंने लिखा कि डीएम साहब ने मुझे एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात किया है, अगर मुझसे कोई गलती हुई हो.. जिसके लिए मैं जिम्मेदार हूं तो मुझे नियमानुसार दंडित किया जाए.. और दंड की कार्रवाई पूरी होने के बाद अगर संभव हो तो उन्हें सीखने के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग के समान और पर्याप्त मौके उपलब्ध कराने के लिए जालौन की किसी तहसील में नियमानुसार एसडीएम के पद पर तैनाती के निर्देश दें..
अगर कोई तैनाती संभव न हो तो मेरा कैडर बदलने के लिए अनुमति और संस्तुति प्रदान करें..
उन्होंने चिट्ठी में लिखा कि जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक 22 जुलाई 2026 से उन्हें आधा वेतन ही दिया जाए..
#ias #SDM #officer #jalaun #bureaucrats #bureaucracy #Governance #government #system #UttarPradesh #letters
आईएएस रिंकू सिंह राही जालौन में एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात हैं.. कुछ दिन पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.. किसी तरह वो बवाल शांत हुआ तो अब उन्होंने चिट्ठी लिखकर एक दूसरा बवाल खड़ा कर दिया है..
आईएएस रिंकू सिंह की इस चिट्ठी से साफ है कि सरकारी सिस्टम में ईमानदारी से काम करना कितना मुश्किल है..
वो लिखते हैं, आम जनता के हित और सरकारी कामों की निरंतरता के लिए मैंने कई मौकों पर व्यक्तिगत मान्यताओं और अंतरात्मा के प्रतिकूल व्यावहारिक संतुलन अपनाने का प्रयास किया.. विधायक गौरी शंकर वर्मा के सामने डीएम ने आदेश दिया की तहसील क्षेत्र में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामले में कोई कार्रवाई न की जाए..
इस आदेश की उपेक्षा की जगह मैंने बीच का रास्ता निकालते हुए सिर्फ प्राप्त शिकायतों पर ही नियमानुसार कार्रवाई शुरू की.. नतीजा ये हुआ कि शिकायतें बढ़ने लगीं.. और शिकायतों का फर्जी निस्तारण होने लगा..
रिंकू सिंह लिख रहे हैं कि जनपद की रैंक ऊपर रखने के लिए आईजीआरएस और एंटी भू माफिया के मामलों का फर्जी निस्तारण स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया.. इसका भी रास्ता मैंने निकाला, लेकिन मना कर दिया गया..
कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम से अवैध कब्जे की जांच को लेकर ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन ने साजिश करके विवाद किया जिसके चलते मेरा तबादला कर दिया गया..
उन्होंने लिखा, ईमानदार पृष्ठभूमि वाले अधिकारी को जब ऐसे परिणाम का सामना करना पड़ सकता है तो अन्य अधिकारी और कर्मचारियों की स्थिति तो और भी चुनौती पूर्ण हो सकती है.
रिंकू सिंह ने पहले भी कहा था, काम नहीं तो वेतन नहीं.. अपने पत्र में उन्होंने लिखा, एसडीएम न्यायिक के तौर पर कोर्ट में उन्हें 2 घंटे काम करना होता है.. कोर्ट के बाहर फाइल्स को समझने और कानूनी कार्य करने के लिए चार घंटे और लग जाते हैं.. अगर रोज काम के 8 घंटे माने जाए तो भी यह 50 फीसदी ही है..
उन्होंने लिखा कि अभी वो आधा ही काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें वेतन भी आधा ही दिया जाए..
रिंकू सिंह ने डीएम के जनता दर्शन की भी पोल-पट्टी खोली है..
उन्होंने लिखा कि जनता दर्शन में डीएम साहब के साथ बैठना होता है.. हालांकि, डीएम साहब शिकायतों के निस्तारण का दिखावा ही करते हैं जिससे अंतर्मन को ठेस पहुंचती है.. इसलिए डीएम साहब के साथ जनता दर्शन में समय गुजारना खुद को धोखा देना है..
उन्होंने पत्र में लिखा है कि जब नौकरी के शुरुआती दौर में ही एक तहसील जैसे छोटे से प्रशासनिक क्षेत्र में नियमित एसडीएम के रूप में काम करने का मौका नहीं मिल रहा है तो आगे क्या मौके मिलेंगे!! वर्तमान हालात ऐसे है कि भविष्य में सीडीओ, नगर आयुक्त, डीएम जैसे पदों के लिए मेरी उपयोगिता के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकते हैं.
उन्होंने लिखा कि डीएम साहब ने मुझे एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात किया है, अगर मुझसे कोई गलती हुई हो.. जिसके लिए मैं जिम्मेदार हूं तो मुझे नियमानुसार दंडित किया जाए.. और दंड की कार्रवाई पूरी होने के बाद अगर संभव हो तो उन्हें सीखने के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग के समान और पर्याप्त मौके उपलब्ध कराने के लिए जालौन की किसी तहसील में नियमानुसार एसडीएम के पद पर तैनाती के निर्देश दें..
अगर कोई तैनाती संभव न हो तो मेरा कैडर बदलने के लिए अनुमति और संस्तुति प्रदान करें..
उन्होंने चिट्ठी में लिखा कि जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक 22 जुलाई 2026 से उन्हें आधा वेतन ही दिया जाए..
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