काजीरंगा नेशनल पार्क की निदेशक सोनाली घोष को केंटन आर मिलर अवॉर्ड मिला। वह यह पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय हैं। यह सम्मान राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित क्षेत्र में इनोवेशन के लिए दिया जाता है। इसे वर्ल्ड कमीशन ऑन प्रोटेक्टेड एरिया की ओर से प्रदान किया जाता है।
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UPSSSC PET RESULT UPDATE: यूपी पीईटी रिजल्ट पर आई बड़ी अपडेट, यहां से कर सकेंगे चेक...
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ExamRoom
UPSSSC PET RESULT UPDATE: यूपी पीईटी रिजल्ट पर आई बड़ी अपडेट, यहां से कर सकेंगे चेक - ExamRoom
कब जारी होगा UPSSSC PET RESULT
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अपने दिए हुए प्रश्नों का उत्तर नहीं बना पा रही हैं
5 दिन हो गए PCS परीक्षा हुए अभी तक Answer Key नहीं जारी हुई😁😁
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HTET 2025 की विज्ञप्ति 20 नवंबर, 2025 को जारी की जायेंगी।
धन्यवाद
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Official ans key Uppcs 2025.pdf
11.2 MB
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UP : नोएडा में IPS अधिकारी शिवांशु राजपूत पर उनकी पत्नी डॉ. कृति सिंह ने गंभीर आरोप लगाकर FIR दर्ज कराई है
◆ शिकायत में उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों को भी शामिल किया है
◆ उन्होंने दहेज उत्तपीड़न, घरेलू हिंसा और अन्य अपराधों को लेकर शिकायत की है
◆ उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि उनके पति के अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध हैं
◆ शिकायत में उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों को भी शामिल किया है
◆ उन्होंने दहेज उत्तपीड़न, घरेलू हिंसा और अन्य अपराधों को लेकर शिकायत की है
◆ उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि उनके पति के अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध हैं
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क्या सोच रहे हो - घर जाऊं या ना जाऊं?
बार-बार मिल रही असफलता से हर वर्ष जिस बात के इंतजार में रहते हैं कि अगले वर्ष इस त्यौहार को अच्छे से मनाएंगे, कुछ करके दिखाएंगे। लेकिन होता क्या है? वही एक और असफलता। और इसी के साथ एक के बाद एक मिल रही असफलताओं ने तुम्हें अवसाद से ग्रसित कर दिया है।
तुम वर्तमान पल को जीना भूल गए हो। भविष्य की चिंता तुम्हें खा रही है। तुम अपनी वर्तमान स्थिति से निकलना चाहते हो। लेकिन भविष्य की चिंता तुम्हें निकालने नहीं देती। यह भविष्य की चिंता वर्तमान में तुम्हें एक और चिंता में उलझाए हुए है।
भविष्य की चिंता को कुछ समय के लिए साइड करो। वर्तमान की चिंता पर काम करो।
वर्तमान की चिंता यानी अपने आसपास के लोगों से कटाव और अकेलेपन से तुम जूझ रहे हो। ऐसे में अपनों से दूर भागना, अपने आप को अकेलेपन का शिकार बनना - यह हमारी समस्या का समाधान नहीं।
भारत ऐसा देश है जहां हर त्योहार-उत्सव ऐसा होता है कि हम जब तक परिवार के साथ मिलकर सेलिब्रेट न करें... हम भले ही आधुनिकता की चकाचौंध के साथ न मना पाएं, लेकिन मिडिल क्लास में एक बाहर गया व्यक्ति का घर पर आना ही त्योहार की सबसे बड़ी रंगत होती है।
और तुम जो बार-बार मिल रही असफलता से ग्रसित होकर चिंतित हो कि वहां जाने पर कोई पूछेगा - "बेटा कब तक होगा? बेटा क्या हुआ? तैयारी कैसे चल रही है?" इन प्रश्नों की चिंता किए बिना तुम लोगों का सामना करो।
तुम्हारी वर्तमान परिस्थिति वह इतनी बड़ी नहीं जितनी तुम उसे अपने ऊपर हावी करके बना रहे हो। ऐसे इस दिवाली अपने घर जरूर जाओ। अपनों से बातें करो। और वहां से जब तुम वापस आओगे, एक अलग तरह का जोश, जुनून, जिद होगी तुममें स्वयं से कुछ करने का।
तुम जब आसपास की परिस्थितियां देखोगे कि कितनी विपरीत परिस्थितियों में मां-बाप अभी भी रह रहे हैं, और हम इतने बड़े हो गए, तो तुममें एक नई ऊर्जा का संचार होगा। तुम्हें अपनी नई जिम्मेदारियों का एहसास होगा। जहां सिर्फ उन्हें तुम्हारे पैसे की नहीं, बल्कि तुम्हारे जीवन में एक निश्चित स्थिरता की राह देख रहे हैं। तुम्हारे अपने उन्हें तुम्हारे पैसे की ही नहीं, तुम्हारे साथ की भी जरूरत है।
तुम्हें स्वयं से ग्लानि होगी कि बेकार में क्या कर रहा हूं? क्या मैं सही दिशा में प्रयास नहीं कर रहा? तो एक राह निकलेगी।
तो ऐसी समस्याओं से भागना नहीं है, बल्कि समस्याओं के बीच रहकर हमें समस्याओं को खत्म करना है। अपनों से जुड़ाव नहीं खत्म करना है, अपनों से लगाव खत्म नहीं करना है। इसलिए जब भी, जहां भी, जैसी भी परिस्थिति में मौका मिले, वर्तमान में परिवार के पास जाने का, तो जरूर जाओ।
इस दिवाली तुम देख रहे होंगे, अपनों से मिलने के लिए बाहर रह रहे लोग कितने बेताब हैं। बहुत सारे लोग जो रोजगार एवं सरकारी नौकरी जैसी कई सारी चीजों में हैं, वह सिर्फ नौकरी की वजह से घर नहीं आ पाए, लेकिन उनके पास घर आने की तीव्र इच्छा है। सब कुछ होते हुए भी घर नहीं आ पा रहे हैं।
ऐसे में तुम्हारे पास भले ही उतने पैसे न हों, लेकिन तुम्हारे पास अवसर है - घर जाने का। हर व्यक्ति की अपनी कुछ कमियां हैं। और हम अगर कुछ पाते हैं तो कुछ खोते भी हैं। तो आज नहीं तो कल तुम भी कहीं न कहीं इस तरह होगे। और तुम भी इंतजार करोगे। एक दिन तुम्हारी भी छुट्टी मिलेगी और तुम छुट्टियों के बीच सामंजस्य बैठाकर घर जाने की कोशिश करोगे। तो उन्हें दिन को याद कर तुम वापस अपने घर जाओ। लोगों से मिलो। जो है उसी में खुश रहकर सेलिब्रेट करो।
और इस दिवाली अपनों के बीच - शुभ दिवाली!
आप सभी को ढेर सारा प्यार, आशीर्वाद और आपसी सामंजस्य आपस में बनाए रखें। और हम सब मिलकर जीतेंगे। हैप्पी दिवाली! 🪔
बार-बार मिल रही असफलता से हर वर्ष जिस बात के इंतजार में रहते हैं कि अगले वर्ष इस त्यौहार को अच्छे से मनाएंगे, कुछ करके दिखाएंगे। लेकिन होता क्या है? वही एक और असफलता। और इसी के साथ एक के बाद एक मिल रही असफलताओं ने तुम्हें अवसाद से ग्रसित कर दिया है।
तुम वर्तमान पल को जीना भूल गए हो। भविष्य की चिंता तुम्हें खा रही है। तुम अपनी वर्तमान स्थिति से निकलना चाहते हो। लेकिन भविष्य की चिंता तुम्हें निकालने नहीं देती। यह भविष्य की चिंता वर्तमान में तुम्हें एक और चिंता में उलझाए हुए है।
भविष्य की चिंता को कुछ समय के लिए साइड करो। वर्तमान की चिंता पर काम करो।
वर्तमान की चिंता यानी अपने आसपास के लोगों से कटाव और अकेलेपन से तुम जूझ रहे हो। ऐसे में अपनों से दूर भागना, अपने आप को अकेलेपन का शिकार बनना - यह हमारी समस्या का समाधान नहीं।
भारत ऐसा देश है जहां हर त्योहार-उत्सव ऐसा होता है कि हम जब तक परिवार के साथ मिलकर सेलिब्रेट न करें... हम भले ही आधुनिकता की चकाचौंध के साथ न मना पाएं, लेकिन मिडिल क्लास में एक बाहर गया व्यक्ति का घर पर आना ही त्योहार की सबसे बड़ी रंगत होती है।
और तुम जो बार-बार मिल रही असफलता से ग्रसित होकर चिंतित हो कि वहां जाने पर कोई पूछेगा - "बेटा कब तक होगा? बेटा क्या हुआ? तैयारी कैसे चल रही है?" इन प्रश्नों की चिंता किए बिना तुम लोगों का सामना करो।
तुम्हारी वर्तमान परिस्थिति वह इतनी बड़ी नहीं जितनी तुम उसे अपने ऊपर हावी करके बना रहे हो। ऐसे इस दिवाली अपने घर जरूर जाओ। अपनों से बातें करो। और वहां से जब तुम वापस आओगे, एक अलग तरह का जोश, जुनून, जिद होगी तुममें स्वयं से कुछ करने का।
तुम जब आसपास की परिस्थितियां देखोगे कि कितनी विपरीत परिस्थितियों में मां-बाप अभी भी रह रहे हैं, और हम इतने बड़े हो गए, तो तुममें एक नई ऊर्जा का संचार होगा। तुम्हें अपनी नई जिम्मेदारियों का एहसास होगा। जहां सिर्फ उन्हें तुम्हारे पैसे की नहीं, बल्कि तुम्हारे जीवन में एक निश्चित स्थिरता की राह देख रहे हैं। तुम्हारे अपने उन्हें तुम्हारे पैसे की ही नहीं, तुम्हारे साथ की भी जरूरत है।
तुम्हें स्वयं से ग्लानि होगी कि बेकार में क्या कर रहा हूं? क्या मैं सही दिशा में प्रयास नहीं कर रहा? तो एक राह निकलेगी।
तो ऐसी समस्याओं से भागना नहीं है, बल्कि समस्याओं के बीच रहकर हमें समस्याओं को खत्म करना है। अपनों से जुड़ाव नहीं खत्म करना है, अपनों से लगाव खत्म नहीं करना है। इसलिए जब भी, जहां भी, जैसी भी परिस्थिति में मौका मिले, वर्तमान में परिवार के पास जाने का, तो जरूर जाओ।
इस दिवाली तुम देख रहे होंगे, अपनों से मिलने के लिए बाहर रह रहे लोग कितने बेताब हैं। बहुत सारे लोग जो रोजगार एवं सरकारी नौकरी जैसी कई सारी चीजों में हैं, वह सिर्फ नौकरी की वजह से घर नहीं आ पाए, लेकिन उनके पास घर आने की तीव्र इच्छा है। सब कुछ होते हुए भी घर नहीं आ पा रहे हैं।
ऐसे में तुम्हारे पास भले ही उतने पैसे न हों, लेकिन तुम्हारे पास अवसर है - घर जाने का। हर व्यक्ति की अपनी कुछ कमियां हैं। और हम अगर कुछ पाते हैं तो कुछ खोते भी हैं। तो आज नहीं तो कल तुम भी कहीं न कहीं इस तरह होगे। और तुम भी इंतजार करोगे। एक दिन तुम्हारी भी छुट्टी मिलेगी और तुम छुट्टियों के बीच सामंजस्य बैठाकर घर जाने की कोशिश करोगे। तो उन्हें दिन को याद कर तुम वापस अपने घर जाओ। लोगों से मिलो। जो है उसी में खुश रहकर सेलिब्रेट करो।
और इस दिवाली अपनों के बीच - शुभ दिवाली!
आप सभी को ढेर सारा प्यार, आशीर्वाद और आपसी सामंजस्य आपस में बनाए रखें। और हम सब मिलकर जीतेंगे। हैप्पी दिवाली! 🪔
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