♥️𝐌𝐎𝐓𝐈𝐕𝐀𝐓𝐈𝐎𝐍 & 𝐒𝐀𝐘𝐀𝐑𝐈♥️
When fear becomes routine, trust begins to disappear. A society that keeps asking women to "be careful" must also ask itself why safety still feels uncertain.
Delhi ke protest ke naare sun ke mard jaat me aag si lag gai h kilas gye h 😂😂😂 comments esi esi kar rahe
😁8
एक कचौड़ी दो समोसा
इन मर्दों का क्या भरोसा
मेंरे सिर में दर्द है
इसका कारण मर्द है
एक सूट्टा दो चाय
मर्द जात हाय हाय
शर्म नहीं है मर्दों में
औरत क्यों है पर्दों में
ठंडी चाय गरम करो
मर्द समाज शर्म करो
चाय गरम दूध गरम
मर्द समाज बेशर्म
आलू लो पूरी लो
इन मर्दों से दूरी लो
एक जीरा दो अजवाइन
मर्द समाज दो रिजाइन
चार बादाम दो किशमिश
मर्द समाज को करो डिसमिस
Vibe to hai yaar🙊😁
इन मर्दों का क्या भरोसा
मेंरे सिर में दर्द है
इसका कारण मर्द है
एक सूट्टा दो चाय
मर्द जात हाय हाय
शर्म नहीं है मर्दों में
औरत क्यों है पर्दों में
ठंडी चाय गरम करो
मर्द समाज शर्म करो
चाय गरम दूध गरम
मर्द समाज बेशर्म
आलू लो पूरी लो
इन मर्दों से दूरी लो
एक जीरा दो अजवाइन
मर्द समाज दो रिजाइन
चार बादाम दो किशमिश
मर्द समाज को करो डिसमिस
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♥️𝐌𝐎𝐓𝐈𝐕𝐀𝐓𝐈𝐎𝐍 & 𝐒𝐀𝐘𝐀𝐑𝐈♥️
एक कचौड़ी दो समोसा इन मर्दों का क्या भरोसा मेंरे सिर में दर्द है इसका कारण मर्द है एक सूट्टा दो चाय मर्द जात हाय हाय शर्म नहीं है मर्दों में औरत क्यों है पर्दों में ठंडी चाय गरम करो मर्द समाज शर्म करो चाय गरम दूध गरम मर्द समाज बेशर्म आलू लो पूरी लो इन…
{{ दो momos एक चटनी भाग गई मेरी पत्नी😭🙂 }}
🙄🙄
मेरे insta par kitna badhiya badhiya shyri aa rha h yaar😁😁
🙄🙄
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😁7
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1 नीला ड्रम और 2 वक़्त की रोटी,
अब मर्दों की होगी बोटी-बोटी 🤣🤣
अब मर्दों की होगी बोटी-बोटी 🤣🤣
🔥5😁4👌1
❤2🔥1💯1
1. पहले महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था। उन्हें न खुलकर पढ़ने दिया जाता था, न अपनी मर्जी से जीवन जीने की आज़ादी मिलती थी। आज परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है।
2. सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त किया गया और बाल विवाह रोकने के लिए कानून बनाए गए।
3. आज महिलाएँ पढ़ाई कर रही हैं, नौकरी कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
4. कई नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में महिलाओं को आरक्षण या अलग कटऑफ का लाभ मिलता है, हालाँकि यह हर जगह लागू नहीं होता।
5. आज महिलाएँ अपनी पसंद के कपड़े पहन सकती हैं, सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकती हैं और अपनी पसंद से जीवन जीने के अधिक अवसर रखती हैं।
6. आज पुरुष अपनी पत्नी और प्रेमिका की शॉपिंग करवाते हैं और उनकी पसंद की चीजें खरीदने में पैसे खर्च करते हैं।
7. पुरुष महिलाओं को चॉकलेट, महँगे गिफ्ट और दूसरी पसंदीदा चीजें दिलाकर उन्हें खुश करने की कोशिश करते हैं।
8. कई बार गलती किसी की भी हो, पुरुष ही रिश्ते को बचाने के लिए पहले माफी माँगते हैं और महिला को मनाते हैं।
9. पुरुषों से उम्मीद की जाती है कि वे कमाएँ, घर की जिम्मेदारियाँ उठाएँ, परिवार का खर्च चलाएँ और अपनी भावनाओं को पीछे रखकर दूसरों को खुश रखें।
10. जब पुरुष अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं, तो उनकी भावनाओं, मेहनत और आत्मसम्मान की कद्र करना भी जरूरी है।
11. अगर महिलाओं को अपनी पसंद और स्वतंत्रता का अधिकार है, तो पुरुषों को भी अपनी पसंद, भावनाओं और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।
12. रिश्ते में हर बार पुरुष ही समझौता क्यों करे? महिला को भी पुरुष की परिस्थितियों, परेशानियों और भावनाओं को समझना चाहिए।
13. शॉपिंग, गिफ्ट और महँगी चीजें प्यार का प्रमाण नहीं हैं। सच्चे रिश्ते में दोनों की आर्थिक स्थिति और जरूरतों का सम्मान होना चाहिए।
14. फिजूलखर्ची और दिखावे की अपेक्षाएँ किसी एक लिंग तक सीमित नहीं हैं। गलत व्यवहार चाहे पुरुष करे या महिला, उसका विरोध होना चाहिए।
15. महिलाओं को सम्मान मिलना चाहिए, लेकिन पुरुषों को भी सम्मान मिलना चाहिए। अधिकार और स्वतंत्रता के साथ रिश्ते में जिम्मेदारी, समझदारी और बराबरी भी जरूरी है।
2. सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त किया गया और बाल विवाह रोकने के लिए कानून बनाए गए।
3. आज महिलाएँ पढ़ाई कर रही हैं, नौकरी कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
4. कई नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में महिलाओं को आरक्षण या अलग कटऑफ का लाभ मिलता है, हालाँकि यह हर जगह लागू नहीं होता।
5. आज महिलाएँ अपनी पसंद के कपड़े पहन सकती हैं, सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकती हैं और अपनी पसंद से जीवन जीने के अधिक अवसर रखती हैं।
6. आज पुरुष अपनी पत्नी और प्रेमिका की शॉपिंग करवाते हैं और उनकी पसंद की चीजें खरीदने में पैसे खर्च करते हैं।
7. पुरुष महिलाओं को चॉकलेट, महँगे गिफ्ट और दूसरी पसंदीदा चीजें दिलाकर उन्हें खुश करने की कोशिश करते हैं।
8. कई बार गलती किसी की भी हो, पुरुष ही रिश्ते को बचाने के लिए पहले माफी माँगते हैं और महिला को मनाते हैं।
9. पुरुषों से उम्मीद की जाती है कि वे कमाएँ, घर की जिम्मेदारियाँ उठाएँ, परिवार का खर्च चलाएँ और अपनी भावनाओं को पीछे रखकर दूसरों को खुश रखें।
10. जब पुरुष अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं, तो उनकी भावनाओं, मेहनत और आत्मसम्मान की कद्र करना भी जरूरी है।
11. अगर महिलाओं को अपनी पसंद और स्वतंत्रता का अधिकार है, तो पुरुषों को भी अपनी पसंद, भावनाओं और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।
12. रिश्ते में हर बार पुरुष ही समझौता क्यों करे? महिला को भी पुरुष की परिस्थितियों, परेशानियों और भावनाओं को समझना चाहिए।
13. शॉपिंग, गिफ्ट और महँगी चीजें प्यार का प्रमाण नहीं हैं। सच्चे रिश्ते में दोनों की आर्थिक स्थिति और जरूरतों का सम्मान होना चाहिए।
14. फिजूलखर्ची और दिखावे की अपेक्षाएँ किसी एक लिंग तक सीमित नहीं हैं। गलत व्यवहार चाहे पुरुष करे या महिला, उसका विरोध होना चाहिए।
15. महिलाओं को सम्मान मिलना चाहिए, लेकिन पुरुषों को भी सम्मान मिलना चाहिए। अधिकार और स्वतंत्रता के साथ रिश्ते में जिम्मेदारी, समझदारी और बराबरी भी जरूरी है।
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दिल्ली के विरोध-प्रदर्शन में जो महिलाएँ पुरुषों को गाली देकर खुद को सही समझ रही हैं, उनसे कहना चाहता हूँ कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ माता-पिता अपनी बेटियों को दिल्ली जैसी यूनिवर्सिटी में भेजने से डरेंगे। ज़्यादा आज़ादी को लेकर भी उनके मन में सवाल उठेंगे। उन्हें लगेगा कि जिस बेटी के भविष्य के लिए वे दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, कहीं उसकी ज़िंदगी में वही उनसे सवाल जवाब न करने लगे और माता-पिता सिर्फ पैसे कमाने की मशीन बनकर न रह जाएँ। आज़ादी के साथ जिम्मेदारी भी ज़रूरी है।
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♥️𝐌𝐎𝐓𝐈𝐕𝐀𝐓𝐈𝐎𝐍 & 𝐒𝐀𝐘𝐀𝐑𝐈♥️
1. पहले महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था। उन्हें न खुलकर पढ़ने दिया जाता था, न अपनी मर्जी से जीवन जीने की आज़ादी मिलती थी। आज परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। 2. सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त किया गया और बाल विवाह रोकने के लिए कानून…
जब से दुनिया शुरू हुई है सम्मान पुरुषो को ही मिला है
लड़कियों ने 2,4 आवाजें क्या उठा दी पुरा मर्द समाज ही हिल गया है
अरे ये अच्छे पुरुष तब कहा थे जब निर्भया कांड हुआ
रूह कांप जाती हैं जब ये बात याद आती है
और कोलकाता कांड तब कहा थे पुरुष
जब घर से निकलते है तब दुप्पटा ठीक करने लगती ह लड़किया
डर लगता है कोई कुछ बोल ना दे
वो जो घूर रहा ह कुछ कर ना दे
अरे लड़के तो आँखों से रेप कर डालते ह लड़कियों का
बात करते है समान अधिकार की
पहली बार protest हुआ है और पुरा मर्द समाज effect हो गया
और लड़किया तो हर second mint hour दिन effect होती है वो कुछ ना बोले बस
लड़कियों ने 2,4 आवाजें क्या उठा दी पुरा मर्द समाज ही हिल गया है
अरे ये अच्छे पुरुष तब कहा थे जब निर्भया कांड हुआ
रूह कांप जाती हैं जब ये बात याद आती है
और कोलकाता कांड तब कहा थे पुरुष
जब घर से निकलते है तब दुप्पटा ठीक करने लगती ह लड़किया
डर लगता है कोई कुछ बोल ना दे
वो जो घूर रहा ह कुछ कर ना दे
अरे लड़के तो आँखों से रेप कर डालते ह लड़कियों का
बात करते है समान अधिकार की
पहली बार protest हुआ है और पुरा मर्द समाज effect हो गया
और लड़किया तो हर second mint hour दिन effect होती है वो कुछ ना बोले बस
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♥️𝐌𝐎𝐓𝐈𝐕𝐀𝐓𝐈𝐎𝐍 & 𝐒𝐀𝐘𝐀𝐑𝐈♥️
1. पहले महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था। उन्हें न खुलकर पढ़ने दिया जाता था, न अपनी मर्जी से जीवन जीने की आज़ादी मिलती थी। आज परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। 2. सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त किया गया और बाल विवाह रोकने के लिए कानून…
यहाँ पसंद के कपड़े कहाँ से आ गए महिलाओं के? 🙄
सोशल मीडिया पर भी तो महिलाएँ कहाँ सुरक्षित हैं। 🙄
यहाँ चॉकलेट और गिफ्ट कहाँ से आ गए?
कोई ये सब न दे, तब भी महिलाएँ खुश रह सकती हैं। 🙄
सिर्फ पुरुष ही रिश्ते नहीं निभाते
रिश्ते दोनों बराबर मिलकर निभाते हैं।
आज के तारीख में सिर्फ पुरुष कमाए तो उसे इज्जत मिलती है ऐसा नहीं है अब महिला को नोकरी की जरूरत है नहीं तो उसे भी इज्जत नहीं मिलती ससुराल में,
समझौता सिर्फ महिलाओं ने ही करती आई है अपने जीवन से
और फिर वही शॉपिंग, वही गिफ्ट... 🙄
सोशल मीडिया पर भी तो महिलाएँ कहाँ सुरक्षित हैं। 🙄
यहाँ चॉकलेट और गिफ्ट कहाँ से आ गए?
कोई ये सब न दे, तब भी महिलाएँ खुश रह सकती हैं। 🙄
सिर्फ पुरुष ही रिश्ते नहीं निभाते
रिश्ते दोनों बराबर मिलकर निभाते हैं।
आज के तारीख में सिर्फ पुरुष कमाए तो उसे इज्जत मिलती है ऐसा नहीं है अब महिला को नोकरी की जरूरत है नहीं तो उसे भी इज्जत नहीं मिलती ससुराल में,
समझौता सिर्फ महिलाओं ने ही करती आई है अपने जीवन से
और फिर वही शॉपिंग, वही गिफ्ट... 🙄
छोड़िए, क्या ही कहें हम...
क्योंकि हम महिला हैं ना।
हमें महिलाओं के बारे में कुछ कहने का हक ही कहाँ है इस समाज में। 😞🤐
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