दिल्ली के विरोध-प्रदर्शन में जो महिलाएँ पुरुषों को गाली देकर खुद को सही समझ रही हैं, उनसे कहना चाहता हूँ कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ माता-पिता अपनी बेटियों को दिल्ली जैसी यूनिवर्सिटी में भेजने से डरेंगे। ज़्यादा आज़ादी को लेकर भी उनके मन में सवाल उठेंगे। उन्हें लगेगा कि जिस बेटी के भविष्य के लिए वे दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, कहीं उसकी ज़िंदगी में वही उनसे सवाल जवाब न करने लगे और माता-पिता सिर्फ पैसे कमाने की मशीन बनकर न रह जाएँ। आज़ादी के साथ जिम्मेदारी भी ज़रूरी है।
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♥️𝐌𝐎𝐓𝐈𝐕𝐀𝐓𝐈𝐎𝐍 & 𝐒𝐀𝐘𝐀𝐑𝐈♥️
1. पहले महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था। उन्हें न खुलकर पढ़ने दिया जाता था, न अपनी मर्जी से जीवन जीने की आज़ादी मिलती थी। आज परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। 2. सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त किया गया और बाल विवाह रोकने के लिए कानून…
जब से दुनिया शुरू हुई है सम्मान पुरुषो को ही मिला है
लड़कियों ने 2,4 आवाजें क्या उठा दी पुरा मर्द समाज ही हिल गया है
अरे ये अच्छे पुरुष तब कहा थे जब निर्भया कांड हुआ
रूह कांप जाती हैं जब ये बात याद आती है
और कोलकाता कांड तब कहा थे पुरुष
जब घर से निकलते है तब दुप्पटा ठीक करने लगती ह लड़किया
डर लगता है कोई कुछ बोल ना दे
वो जो घूर रहा ह कुछ कर ना दे
अरे लड़के तो आँखों से रेप कर डालते ह लड़कियों का
बात करते है समान अधिकार की
पहली बार protest हुआ है और पुरा मर्द समाज effect हो गया
और लड़किया तो हर second mint hour दिन effect होती है वो कुछ ना बोले बस
लड़कियों ने 2,4 आवाजें क्या उठा दी पुरा मर्द समाज ही हिल गया है
अरे ये अच्छे पुरुष तब कहा थे जब निर्भया कांड हुआ
रूह कांप जाती हैं जब ये बात याद आती है
और कोलकाता कांड तब कहा थे पुरुष
जब घर से निकलते है तब दुप्पटा ठीक करने लगती ह लड़किया
डर लगता है कोई कुछ बोल ना दे
वो जो घूर रहा ह कुछ कर ना दे
अरे लड़के तो आँखों से रेप कर डालते ह लड़कियों का
बात करते है समान अधिकार की
पहली बार protest हुआ है और पुरा मर्द समाज effect हो गया
और लड़किया तो हर second mint hour दिन effect होती है वो कुछ ना बोले बस
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♥️𝐌𝐎𝐓𝐈𝐕𝐀𝐓𝐈𝐎𝐍 & 𝐒𝐀𝐘𝐀𝐑𝐈♥️
1. पहले महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था। उन्हें न खुलकर पढ़ने दिया जाता था, न अपनी मर्जी से जीवन जीने की आज़ादी मिलती थी। आज परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। 2. सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त किया गया और बाल विवाह रोकने के लिए कानून…
यहाँ पसंद के कपड़े कहाँ से आ गए महिलाओं के? 🙄
सोशल मीडिया पर भी तो महिलाएँ कहाँ सुरक्षित हैं। 🙄
यहाँ चॉकलेट और गिफ्ट कहाँ से आ गए?
कोई ये सब न दे, तब भी महिलाएँ खुश रह सकती हैं। 🙄
सिर्फ पुरुष ही रिश्ते नहीं निभाते
रिश्ते दोनों बराबर मिलकर निभाते हैं।
आज के तारीख में सिर्फ पुरुष कमाए तो उसे इज्जत मिलती है ऐसा नहीं है अब महिला को नोकरी की जरूरत है नहीं तो उसे भी इज्जत नहीं मिलती ससुराल में,
समझौता सिर्फ महिलाओं ने ही करती आई है अपने जीवन से
और फिर वही शॉपिंग, वही गिफ्ट... 🙄
सोशल मीडिया पर भी तो महिलाएँ कहाँ सुरक्षित हैं। 🙄
यहाँ चॉकलेट और गिफ्ट कहाँ से आ गए?
कोई ये सब न दे, तब भी महिलाएँ खुश रह सकती हैं। 🙄
सिर्फ पुरुष ही रिश्ते नहीं निभाते
रिश्ते दोनों बराबर मिलकर निभाते हैं।
आज के तारीख में सिर्फ पुरुष कमाए तो उसे इज्जत मिलती है ऐसा नहीं है अब महिला को नोकरी की जरूरत है नहीं तो उसे भी इज्जत नहीं मिलती ससुराल में,
समझौता सिर्फ महिलाओं ने ही करती आई है अपने जीवन से
और फिर वही शॉपिंग, वही गिफ्ट... 🙄
छोड़िए, क्या ही कहें हम...
क्योंकि हम महिला हैं ना।
हमें महिलाओं के बारे में कुछ कहने का हक ही कहाँ है इस समाज में। 😞🤐
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ज़िंदगी ने जब भी मुझे आज़माया,
मैंने हर बार ख़ुद को थोड़ा और पाया।
कुछ लोग मिले तो लगा, सफ़र आसान है,
कुछ बिछड़े तो समझ आया—हर रिश्ता मेहमान है।
कुछ ख़्वाब टूटे, कुछ उम्मीदें भी रूठीं,
मगर इन्हीं ख़ामोश रातों में सुबहें भी फूटीं।
अब न किसी मंज़िल की जल्दी है,
न किसी के साथ चलने की ज़िद…
बस इतना समझ लिया है मैंने—
ज़िंदगी ख़ूबसूरत तब लगती है,
जब इंसान दूसरों से नहीं,
ख़ुद से मोहब्बत करना सीख जाता है। 🌙
GOOD NIGHT EVERYONE _❤️
मैंने हर बार ख़ुद को थोड़ा और पाया।
कुछ लोग मिले तो लगा, सफ़र आसान है,
कुछ बिछड़े तो समझ आया—हर रिश्ता मेहमान है।
कुछ ख़्वाब टूटे, कुछ उम्मीदें भी रूठीं,
मगर इन्हीं ख़ामोश रातों में सुबहें भी फूटीं।
अब न किसी मंज़िल की जल्दी है,
न किसी के साथ चलने की ज़िद…
बस इतना समझ लिया है मैंने—
ज़िंदगी ख़ूबसूरत तब लगती है,
जब इंसान दूसरों से नहीं,
ख़ुद से मोहब्बत करना सीख जाता है। 🌙
GOOD NIGHT EVERYONE _❤️
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एक स्त्री की माँग होनी चाहिए कि उसे पढ़ने की आज़ादी मिले, नौकरी करने की आज़ादी मिले और अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मनिर्भर बनने की आज़ादी मिले। उसकी प्राथमिकता शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मानपूर्वक जीवन जीना होनी चाहिए, न कि केवल छोटे कपड़े पहनने या रात में घूमने की आज़ादी।
हर स्त्री को अपनी मर्यादा और संस्कार बनाए रखने चाहिए। पुरुष चाहे निर्वस्त्र घूम सकता हो, लेकिन स्त्री के लिए समाज में ऐसी स्वतंत्रता सहज रूप से स्वीकार नहीं की जाती। इसलिए स्वतंत्रता के साथ मर्यादा बनाए रखना भी ज़रूरी है। यही हमारी संस्कृति और शास्त्रों की शिक्षा है। 🙏
हर स्त्री को अपनी मर्यादा और संस्कार बनाए रखने चाहिए। पुरुष चाहे निर्वस्त्र घूम सकता हो, लेकिन स्त्री के लिए समाज में ऐसी स्वतंत्रता सहज रूप से स्वीकार नहीं की जाती। इसलिए स्वतंत्रता के साथ मर्यादा बनाए रखना भी ज़रूरी है। यही हमारी संस्कृति और शास्त्रों की शिक्षा है। 🙏
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