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प्र. १९०. क्या भ्रान्ति, विवशता, मजबूरी या अल्पज्ञान से किये जाने वाले कर्मों का भी फल मिलता है ? उत्तर : जी हाँ । भ्रान्ति, विवशता, मजबूरी या अल्पज्ञान से किये गये कर्मों का भी फल ईश्वर द्वारा मिलता है। चाहे वे अच्छे हों या बुरे । क्योंकि उन कर्मों से अन्यों…
प्र. १९१. क्या आयु जन्म से निश्चित है या घटायी-बढ़ायी जा सकती है ?
उत्तर : मनुष्य अपने कर्मों से, अपनी आयु को जो कि उसको पिछले जन्मों के कर्मों के फलस्वरूप मिलती है, घटा भी सकता है और बढ़ा भी सकता है। वेदानुकूल आचरण करेगा तो बढ़ जायेगी, विपरीत करेगा तो घट जायेगी ।
@vaidic_gyan
उत्तर : मनुष्य अपने कर्मों से, अपनी आयु को जो कि उसको पिछले जन्मों के कर्मों के फलस्वरूप मिलती है, घटा भी सकता है और बढ़ा भी सकता है। वेदानुकूल आचरण करेगा तो बढ़ जायेगी, विपरीत करेगा तो घट जायेगी ।
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यन्त्री राट् यन्त्री०।।(यजु० १४-२२)
भावार्थः-जो स्त्री पृथिवी के समान क्षमायुक्त आकाश के समान निश्चल और यन्त्रकला के तुल्य जितेन्द्रिय होती है वह कुल का प्रकाश करने वाली है ॥ २२ ॥
भावार्थः-जो स्त्री पृथिवी के समान क्षमायुक्त आकाश के समान निश्चल और यन्त्रकला के तुल्य जितेन्द्रिय होती है वह कुल का प्रकाश करने वाली है ॥ २२ ॥
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प्र. १९१. क्या आयु जन्म से निश्चित है या घटायी-बढ़ायी जा सकती है ? उत्तर : मनुष्य अपने कर्मों से, अपनी आयु को जो कि उसको पिछले जन्मों के कर्मों के फलस्वरूप मिलती है, घटा भी सकता है और बढ़ा भी सकता है। वेदानुकूल आचरण करेगा तो बढ़ जायेगी, विपरीत करेगा तो घट…
प्र. १९२. क्या मनुष्य का अगला जन्म होता है ? / क्या मनुष्य का मरने के बाद पुनः जन्म होता है ?
उत्तर : हाँ । मनुष्य मरने के बाद पुनः जन्म ग्रहण करता है ।
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उत्तर : हाँ । मनुष्य मरने के बाद पुनः जन्म ग्रहण करता है ।
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प्र. १९२. क्या मनुष्य का अगला जन्म होता है ? / क्या मनुष्य का मरने के बाद पुनः जन्म होता है ? उत्तर : हाँ । मनुष्य मरने के बाद पुनः जन्म ग्रहण करता है । @vaidic_gyan
प्र. १९३. मरने के बाद मनुष्य पुनः जन्म ग्रहण क्यों करता है ?
उत्तर : मनुष्य जितना व जितने प्रकार का कर्म करता है, उन सभी का फल इसी जन्म में भोग नहीं सकता हैं। कुछ कर्म ऐसे होते हैं जिनका फल भोगने के लिए पुनः जन्म ग्रहण करता है ।
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उत्तर : मनुष्य जितना व जितने प्रकार का कर्म करता है, उन सभी का फल इसी जन्म में भोग नहीं सकता हैं। कुछ कर्म ऐसे होते हैं जिनका फल भोगने के लिए पुनः जन्म ग्रहण करता है ।
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प्र. १९३. मरने के बाद मनुष्य पुनः जन्म ग्रहण क्यों करता है ? उत्तर : मनुष्य जितना व जितने प्रकार का कर्म करता है, उन सभी का फल इसी जन्म में भोग नहीं सकता हैं। कुछ कर्म ऐसे होते हैं जिनका फल भोगने के लिए पुनः जन्म ग्रहण करता है । @vaidic_gyan
प्र. १९४. मनुष्य मरने के बाद पुनः मनुष्य ही बनता है या पशु- पक्षी आदि भी बनता है ?
उत्तर : मनुष्य मरने के बाद मनुष्य ही बनेगा, यह जरूरी नहीं है। कर्मों के आधार पर पशु-पक्षी आदि भी बन सकता है ।
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उत्तर : मनुष्य मरने के बाद मनुष्य ही बनेगा, यह जरूरी नहीं है। कर्मों के आधार पर पशु-पक्षी आदि भी बन सकता है ।
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प्र. १९४. मनुष्य मरने के बाद पुनः मनुष्य ही बनता है या पशु- पक्षी आदि भी बनता है ? उत्तर : मनुष्य मरने के बाद मनुष्य ही बनेगा, यह जरूरी नहीं है। कर्मों के आधार पर पशु-पक्षी आदि भी बन सकता है । @vaidic_gyan
प्र. १९५. मनुष्य की आत्मा अगला जन्म पाने के लिए किसी माँ के पेट में स्वयं चली जाती है या कोई ले जाता है ?
उत्तर : अगला जन्म पाने के लिए मनुष्य की आत्मा किसी माँ के पेट (गर्भाशय) में स्वयं नहीं चली जाती है बल्कि उसको परमात्मा (ईश्वर) ही ले जाते हैं।
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उत्तर : अगला जन्म पाने के लिए मनुष्य की आत्मा किसी माँ के पेट (गर्भाशय) में स्वयं नहीं चली जाती है बल्कि उसको परमात्मा (ईश्वर) ही ले जाते हैं।
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प्र. १९५. मनुष्य की आत्मा अगला जन्म पाने के लिए किसी माँ के पेट में स्वयं चली जाती है या कोई ले जाता है ? उत्तर : अगला जन्म पाने के लिए मनुष्य की आत्मा किसी माँ के पेट (गर्भाशय) में स्वयं नहीं चली जाती है बल्कि उसको परमात्मा (ईश्वर) ही ले जाते हैं। @vaidic_gyan
प्र. १९६. दुःख किसे कहते हैं ?
उत्तर : बाधा, पीड़ा, कष्ट, पराधीनता आदि जिससे व्यक्ति बचना चाहता है उसे दुःख कहते हैं ।
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प्र. १९६. दुःख किसे कहते हैं ? उत्तर : बाधा, पीड़ा, कष्ट, पराधीनता आदि जिससे व्यक्ति बचना चाहता है उसे दुःख कहते हैं । @vaidic_gyan
प्र. १९७. सुख किसे कहते हैं ?
उत्तर : स्वतंत्रता, निर्भयता, प्रसन्नता आदि जिसको प्राप्त करने के पश्चात् व्यक्ति छोड़ना नहीं चाहता, उसे सुख कहते हैं ।
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उत्तर : स्वतंत्रता, निर्भयता, प्रसन्नता आदि जिसको प्राप्त करने के पश्चात् व्यक्ति छोड़ना नहीं चाहता, उसे सुख कहते हैं ।
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प्र. १९७. सुख किसे कहते हैं ? उत्तर : स्वतंत्रता, निर्भयता, प्रसन्नता आदि जिसको प्राप्त करने के पश्चात् व्यक्ति छोड़ना नहीं चाहता, उसे सुख कहते हैं । @vaidic_gyan
प्र. १९८. मनुष्य सुखी कैसे होता है ?
उत्तर : विद्या, बुद्धि व ज्ञान प्राप्त करने , अच्छे कर्म करने और ईश्वर की उपासना करने से मनुष्य सुखी होता है ।
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उत्तर : विद्या, बुद्धि व ज्ञान प्राप्त करने , अच्छे कर्म करने और ईश्वर की उपासना करने से मनुष्य सुखी होता है ।
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