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प्र. २५६. एक की बजाए अनेक ईश्वर क्यों न मान लिये जाएँ ? ऐसा करने से सभी मत पंथ संप्रदाय वाले भी संतुष्ट हो जायेंगे । उत्तर : जब ईश्वर एक ही है तो अनेक मानना झूठ होगा । साथ ही इन अनेक ईश्वर वालों के परस्पर झगड़े होंगे कि मेरा ईश्वर बडा है, उसका छोटा है । …
प्र. २५७. ईश्वर की प्रार्थना उपासना करने से कया-क्या लाभ होते हैं ?
उत्तर : ईश्वर की उपासना करने से समाधि अवस्था में विशेष ज्ञान, बल, आनन्द, धैर्य, सहनशक्ति, उत्साह, पराक्रम, निष्कामता आदि गुणों की प्राप्ति होती है। साथ ही मनुष्य, आत्मा का साक्षात्कार करता है तथा उसके अविद्या आदि दोष नष्ट होते हैं।
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उत्तर : ईश्वर की उपासना करने से समाधि अवस्था में विशेष ज्ञान, बल, आनन्द, धैर्य, सहनशक्ति, उत्साह, पराक्रम, निष्कामता आदि गुणों की प्राप्ति होती है। साथ ही मनुष्य, आत्मा का साक्षात्कार करता है तथा उसके अविद्या आदि दोष नष्ट होते हैं।
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प्र. २५७. ईश्वर की प्रार्थना उपासना करने से कया-क्या लाभ होते हैं ? उत्तर : ईश्वर की उपासना करने से समाधि अवस्था में विशेष ज्ञान, बल, आनन्द, धैर्य, सहनशक्ति, उत्साह, पराक्रम, निष्कामता आदि गुणों की प्राप्ति होती है। साथ ही मनुष्य, आत्मा का साक्षात्कार करता…
प्र. २५८. क्या ईश्वर कर्मफल देने में अन्य जीवों की सहायता लेता है ?
उत्तर : नहीं, ईश्वर कर्म फल देने में अन्य जीवों की सहायता नहीं लेता ।
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प्र. २५८. क्या ईश्वर कर्मफल देने में अन्य जीवों की सहायता लेता है ? उत्तर : नहीं, ईश्वर कर्म फल देने में अन्य जीवों की सहायता नहीं लेता । @vaidic_gyan
प्र. २५९. क्या उपासना करने वाले व्यक्ति को ईश्वर वास्तव में दिखाई देता है ?
उत्तर : दिखाई देता है अर्थात् उसको ईश्वर की अनुभूति होती है। जैसा ईश्वर सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान्, आनन्द स्वरूप, न्यायकारी, सर्वव्यापक आदि गुणों वाला है वैसा ही उसे अनुभव में आता है। साथ ही ईश्वर के आनन्द की अनुभूति भी वह करता है। इसे ही दिखाई देना समझना चाहिए ।
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उत्तर : दिखाई देता है अर्थात् उसको ईश्वर की अनुभूति होती है। जैसा ईश्वर सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान्, आनन्द स्वरूप, न्यायकारी, सर्वव्यापक आदि गुणों वाला है वैसा ही उसे अनुभव में आता है। साथ ही ईश्वर के आनन्द की अनुभूति भी वह करता है। इसे ही दिखाई देना समझना चाहिए ।
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प्र. २५९. क्या उपासना करने वाले व्यक्ति को ईश्वर वास्तव में दिखाई देता है ? उत्तर : दिखाई देता है अर्थात् उसको ईश्वर की अनुभूति होती है। जैसा ईश्वर सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान्, आनन्द स्वरूप, न्यायकारी, सर्वव्यापक आदि गुणों वाला है वैसा ही उसे अनुभव में आता है।…
प्र. २६०. ईश्वर अपने उपासकों की रक्षा कैसे करता है ? उसकी रक्षा करने का तरीका, विधि, ढंग क्या है ?
उत्तर : ईश्वर अपने उपासक को आपत्ति, कठिनाई, विरोध , बाधा आदि प्रतिकूलता उपस्थित होने पर उत्साह, बल, ज्ञान, पराक्रम, धैर्य, सहनशक्ति आदि गुणों को प्रदान करके समस्याओं से दुःखी होने से बचाता है। यही उसकी रक्षा है।
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उत्तर : ईश्वर अपने उपासक को आपत्ति, कठिनाई, विरोध , बाधा आदि प्रतिकूलता उपस्थित होने पर उत्साह, बल, ज्ञान, पराक्रम, धैर्य, सहनशक्ति आदि गुणों को प्रदान करके समस्याओं से दुःखी होने से बचाता है। यही उसकी रक्षा है।
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प्र. २६०. ईश्वर अपने उपासकों की रक्षा कैसे करता है ? उसकी रक्षा करने का तरीका, विधि, ढंग क्या है ? उत्तर : ईश्वर अपने उपासक को आपत्ति, कठिनाई, विरोध , बाधा आदि प्रतिकूलता उपस्थित होने पर उत्साह, बल, ज्ञान, पराक्रम, धैर्य, सहनशक्ति आदि गुणों को प्रदान करके…
प्र. २६१. क्या ईश्वर अपनी ही इच्छा से किसी व्यक्ति विशेष को धन, बल, प्रतिष्ठा, सम्मान, सफलता, सुख देता है ?
उत्तर : ईश्वर अपनी इच्छा से किसी व्यक्ति विशेष को धन, बल, प्रतिष्ठा, सम्मान, सफलता, सुख नहीं देता है। ऐसा करे तो वह अन्यायकारी हो जाये ।
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उत्तर : ईश्वर अपनी इच्छा से किसी व्यक्ति विशेष को धन, बल, प्रतिष्ठा, सम्मान, सफलता, सुख नहीं देता है। ऐसा करे तो वह अन्यायकारी हो जाये ।
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प्र. २६१. क्या ईश्वर अपनी ही इच्छा से किसी व्यक्ति विशेष को धन, बल, प्रतिष्ठा, सम्मान, सफलता, सुख देता है ? उत्तर : ईश्वर अपनी इच्छा से किसी व्यक्ति विशेष को धन, बल, प्रतिष्ठा, सम्मान, सफलता, सुख नहीं देता है। ऐसा करे तो वह अन्यायकारी हो जाये । @vaidic_gyan
प्र. २६२. किसी व्यक्ति ने ईश्वर का प्रत्यक्ष किया है, इस बात का पता कैसे लगाया जा सकता है ?
उत्तर : जो व्यक्ति ईश्वर का प्रत्यक्ष अनुभव करता है, उसके जीवन, वाणी, व्यवहार में आनंद, शांति, निर्भयता, सत्य, परोपकारिता, निष्पक्षता, निःस्वार्थता आदि दैवीय गुण दिखाई देते हैं। वह दुखी, चिंतित, क्रोधित, द्वेषपूर्ण, पक्षपाती नहीं होता है।
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