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प्र. ३१३. गोमेध, अश्वमेध आदि का क्या अर्थ है, क्या इन यज्ञों में गाय की या घोड़े की बलि दी जाती है ? उत्तर : गोमेध का अर्थ है - शरीर इन्द्रियों आदि को बलवान पुष्ट बनाना तथा अश्वमेध का अर्थ है राष्ट्र को समृद्ध, सुसंस्कृत, सुखी, सम्पन्न बनाने के लिए उत्तम…
प्र. ३१४. क्या स्त्री व शूद्र भी यज्ञ कर सकते हैं ?
उत्तर : हाँ, स्त्री व शूद्र भी यज्ञ कर सकते हैं।
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प्र. ३१४. क्या स्त्री व शूद्र भी यज्ञ कर सकते हैं ? उत्तर : हाँ, स्त्री व शूद्र भी यज्ञ कर सकते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३१५. यज्ञ में कहीं, कभी, किसी स्थिति में पाप-हिंसा होती है ?
उत्तर : नहीं, शास्त्रोक्त विधि अनुसार करने से यज्ञ में कहीं भी, कभी भी, किसी भी स्थिति में पाप, हिंसा नहीं होती है।
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उत्तर : नहीं, शास्त्रोक्त विधि अनुसार करने से यज्ञ में कहीं भी, कभी भी, किसी भी स्थिति में पाप, हिंसा नहीं होती है।
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प्र. ३१५. यज्ञ में कहीं, कभी, किसी स्थिति में पाप-हिंसा होती है ? उत्तर : नहीं, शास्त्रोक्त विधि अनुसार करने से यज्ञ में कहीं भी, कभी भी, किसी भी स्थिति में पाप, हिंसा नहीं होती है। @vaidic_gyan
प्र. ३१६. यज्ञ कर्म सकाम कर्म की कोटि में आता है या निष्काम कर्म की कोटि में ?
उत्तर : यज्ञ कर्म दोनों प्रकार से होते हैं सकाम भी और निष्काम भी ।
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उत्तर : यज्ञ कर्म दोनों प्रकार से होते हैं सकाम भी और निष्काम भी ।
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प्र. ३१६. यज्ञ कर्म सकाम कर्म की कोटि में आता है या निष्काम कर्म की कोटि में ? उत्तर : यज्ञ कर्म दोनों प्रकार से होते हैं सकाम भी और निष्काम भी । @vaidic_gyan
प्र. ३१७. क्या यज्ञ के माध्यम से मारण, मोहन, उच्चाटन, वशीकरण, हराने जिताने, आदि की क्रियाएँ भी की जा सकती हैं ?
उत्तर : नहीं, यज्ञ में मारण मोहन आदि क्रियाएं नहीं होती हैं ये दुष्ट व्यक्तियों की चालाकी, धूर्तता होती है।
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उत्तर : नहीं, यज्ञ में मारण मोहन आदि क्रियाएं नहीं होती हैं ये दुष्ट व्यक्तियों की चालाकी, धूर्तता होती है।
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प्र. ३१७. क्या यज्ञ के माध्यम से मारण, मोहन, उच्चाटन, वशीकरण, हराने जिताने, आदि की क्रियाएँ भी की जा सकती हैं ? उत्तर : नहीं, यज्ञ में मारण मोहन आदि क्रियाएं नहीं होती हैं ये दुष्ट व्यक्तियों की चालाकी, धूर्तता होती है। @vaidic_gyan
प्र. ३१८. क्या माचीस (दिया सलाई) के बिना केवल मंत्रों को बोलकर भी अग्नि को जलाया जा सकता है ?
उत्तर : मात्र मंत्रों को बोलकर अग्नि नहीं जलाई जा सकती है।
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प्र. ३१८. क्या माचीस (दिया सलाई) के बिना केवल मंत्रों को बोलकर भी अग्नि को जलाया जा सकता है ? उत्तर : मात्र मंत्रों को बोलकर अग्नि नहीं जलाई जा सकती है। @vaidic_gyan
प्र. ३१९. क्या यज्ञ करने वाले व्यक्ति को यज्ञोपवीत धारण करना अनिवार्य है ? इसके बिना यज्ञ नहीं होता ?
उत्तर : ऋषियों ने अनुशासन बनाए रखने के लिए एक व्यवस्था बनाई है कि यज्ञ करते समय आवरण पहनना चाहिए, लेकिन बिना आवरण पहने यज्ञ करने से पाप नहीं होता।
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उत्तर : ऋषियों ने अनुशासन बनाए रखने के लिए एक व्यवस्था बनाई है कि यज्ञ करते समय आवरण पहनना चाहिए, लेकिन बिना आवरण पहने यज्ञ करने से पाप नहीं होता।
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प्र. ३१९. क्या यज्ञ करने वाले व्यक्ति को यज्ञोपवीत धारण करना अनिवार्य है ? इसके बिना यज्ञ नहीं होता ? उत्तर : ऋषियों ने अनुशासन बनाए रखने के लिए एक व्यवस्था बनाई है कि यज्ञ करते समय आवरण पहनना चाहिए, लेकिन बिना आवरण पहने यज्ञ करने से पाप नहीं होता। @vaidic_gyan
३२०. वेद के मन्त्रों की ही तरह क्या गीता, रामायण, महाभारत के श्लोकों को बोलकर भी यज्ञ किया जा सकता है ?
उत्तर : नहीं, गीता आदि ग्रन्थों के श्लोकों को बोलकर यज्ञ नहीं करना चाहिये क्योंकि गीता आदि के श्लोकों के वो अर्थ नहीं निकलते हैं जो वेदमन्त्रों के अर्थ निकलते हैं ।
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उत्तर : नहीं, गीता आदि ग्रन्थों के श्लोकों को बोलकर यज्ञ नहीं करना चाहिये क्योंकि गीता आदि के श्लोकों के वो अर्थ नहीं निकलते हैं जो वेदमन्त्रों के अर्थ निकलते हैं ।
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३२०. वेद के मन्त्रों की ही तरह क्या गीता, रामायण, महाभारत के श्लोकों को बोलकर भी यज्ञ किया जा सकता है ? उत्तर : नहीं, गीता आदि ग्रन्थों के श्लोकों को बोलकर यज्ञ नहीं करना चाहिये क्योंकि गीता आदि के श्लोकों के वो अर्थ नहीं निकलते हैं जो वेदमन्त्रों के अर्थ…
प्र. ३२१. घृत पात्र में यदि घी बच जावे और सामग्री के पात्र में सामग्री बच जावे तो उसका क्या करना चाहिये ?
उसे यज्ञ कुण्ड में डालें या न डालें ?
उत्तर : यदि अग्नि घी-सामग्री को जला सकती है तो डाल सकते हैं। नहीं तो पुनः पृथक घृत सामग्री पात्र में अगले दिन के लिए रख देना चाहिए ।
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उसे यज्ञ कुण्ड में डालें या न डालें ?
उत्तर : यदि अग्नि घी-सामग्री को जला सकती है तो डाल सकते हैं। नहीं तो पुनः पृथक घृत सामग्री पात्र में अगले दिन के लिए रख देना चाहिए ।
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प्र. ३२१. घृत पात्र में यदि घी बच जावे और सामग्री के पात्र में सामग्री बच जावे तो उसका क्या करना चाहिये ? उसे यज्ञ कुण्ड में डालें या न डालें ? उत्तर : यदि अग्नि घी-सामग्री को जला सकती है तो डाल सकते हैं। नहीं तो पुनः पृथक घृत सामग्री पात्र में अगले दिन के…
प्र. ३२२. क्या यज्ञ कर्म को यंत्रीकरण द्वारा स्वचालित बनाकर भी सम्पन्न किया जा सकता है ?
उत्तर : हाँ, किया जा सकता है किन्तु स्वयं करने से जो लाभ होते हैं वे नहीं मिल पायेंगे ।
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उत्तर : हाँ, किया जा सकता है किन्तु स्वयं करने से जो लाभ होते हैं वे नहीं मिल पायेंगे ।
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