प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
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प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३६८. ज्योतिष शास्त्र से वास्तविक लाभ क्या होता है ? उत्तर : ज्योतिष शास्त्र से सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण की स्थिति तथा विभिन्न ग्रह-उपग्रहों की गति एवं स्थिति का परिज्ञान होता है। @vaidic_gyan
प्र. ३६९. शनि-मंगल आदि ग्रहों के कुपित होने से व्यक्ति पर विपत्तियाँ आती हैं क्या यह बात सत्य है ?

उत्तर : नहीं, शनि-मंगल आदि ग्रह कोई चेतन देवता नहीं हैं जो किसी पर कुपित या किसी पर प्रसन्न होते हों। अतः शनि आदि ग्रह की शांति के लिए विविध कर्मकाण्डों का अनुष्ठान करना शास्त्र विरुद्ध है ।

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प्र. ३६९. शनि-मंगल आदि ग्रहों के कुपित होने से व्यक्ति पर विपत्तियाँ आती हैं क्या यह बात सत्य है ? उत्तर : नहीं, शनि-मंगल आदि ग्रह कोई चेतन देवता नहीं हैं जो किसी पर कुपित या किसी पर प्रसन्न होते हों। अतः शनि आदि ग्रह की शांति के लिए विविध कर्मकाण्डों का…
प्र. ३७०. क्या राशि फल देखकर भविष्य की बातों का ज्ञान होता है ?

उत्तर : जी नहीं, राशि फल देखकर भविष्यवाणी करना कल्पना मात्र है या आनुमानिक हो सकता है, किसी वैदिक शास्त्र में राशि देखकर भविष्यवाणी करने या भविष्य की बातों को जानने की चर्चा नहीं आयी है।

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प्र. ३७०. क्या राशि फल देखकर भविष्य की बातों का ज्ञान होता है ? उत्तर : जी नहीं, राशि फल देखकर भविष्यवाणी करना कल्पना मात्र है या आनुमानिक हो सकता है, किसी वैदिक शास्त्र में राशि देखकर भविष्यवाणी करने या भविष्य की बातों को जानने की चर्चा नहीं आयी है। @vaidic_gyan
प्र. ३७१. क्या चारों धाम आदि तीर्थयात्रा करने से पाप छूटते हैं ?

उत्तर : जी नहीं, चारों धाम आदि तीर्थ यात्रा करने से पाप नहीं छूटते हैं, यह मान्यता असत्य है, शास्त्र विपरीत है। इससे मात्र भौगोलिक, प्राकृतिक ज्ञान-विज्ञान की वृद्धि होती है।

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प्र. ३७१. क्या चारों धाम आदि तीर्थयात्रा करने से पाप छूटते हैं ? उत्तर : जी नहीं, चारों धाम आदि तीर्थ यात्रा करने से पाप नहीं छूटते हैं, यह मान्यता असत्य है, शास्त्र विपरीत है। इससे मात्र भौगोलिक, प्राकृतिक ज्ञान-विज्ञान की वृद्धि होती है। @vaidic_gyan
प्र. ३७२. क्या मंदिर आदि स्थानों में पूजा-पाठ के बाद बाँटे जाने वाले प्रसाद को ग्रहण करना अनिवार्य होता है तथा ये प्रसाद ग्रहण न करें तो ईश्वर नाराज होते हैं ये बात उचित है ?

उत्तर : नहीं, पूजा पाठ के बाँटे जाने वाले प्रसाद को ग्रहण करना अनिवार्य नहीं है तथा ऐसा प्रसाद ग्रहण न करें तो ईश्वर नाराज होते हैं यह बात गलत है।

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प्र. ३७२. क्या मंदिर आदि स्थानों में पूजा-पाठ के बाद बाँटे जाने वाले प्रसाद को ग्रहण करना अनिवार्य होता है तथा ये प्रसाद ग्रहण न करें तो ईश्वर नाराज होते हैं ये बात उचित है ? उत्तर : नहीं, पूजा पाठ के बाँटे जाने वाले प्रसाद को ग्रहण करना अनिवार्य नहीं है…
प्र. ३७३. मंदिरों में आरती करने = अगरबत्ती या दीपक से ईश्वर प्रसन्न होते हैं क्या यह बात सही है ?

उत्तर : नहीं, अगरबत्ती जलाने या दीपक जलाने मात्र से ईश्वर प्रसन्न नहीं होते हैं अपितु ईश्वर की आज्ञा का पालन करने से तथा ईश्वराज्ञा के विपरीत आचरण न करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं।

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प्र. ३७३. मंदिरों में आरती करने = अगरबत्ती या दीपक से ईश्वर प्रसन्न होते हैं क्या यह बात सही है ? उत्तर : नहीं, अगरबत्ती जलाने या दीपक जलाने मात्र से ईश्वर प्रसन्न नहीं होते हैं अपितु ईश्वर की आज्ञा का पालन करने से तथा ईश्वराज्ञा के विपरीत आचरण न करने से…
प्र. ३७४. ब्राह्मणों के द्वारा पूजा पाठ करवाने से भटकती आत्माओं को शांति मिलती है, क्या यह बात सही है ?

उत्तर : नहीं, यह बात सर्वथा गलत है, क्योंकि सर्व प्रथम यह जानना चाहिये कि कोई भी आत्मा कभी भी मृत्यु के बाद भटकती नहीं है। वह तो मृत्यु के पश्चात् तत्काल ईश्वर की व्यवस्था से दूसरा शरीर प्राप्त कर लेती है ।

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प्र. ३७४. ब्राह्मणों के द्वारा पूजा पाठ करवाने से भटकती आत्माओं को शांति मिलती है, क्या यह बात सही है ? उत्तर : नहीं, यह बात सर्वथा गलत है, क्योंकि सर्व प्रथम यह जानना चाहिये कि कोई भी आत्मा कभी भी मृत्यु के बाद भटकती नहीं है। वह तो मृत्यु के पश्चात् तत्काल…
प्र. ३७५. दीपावली, जन्माष्टमी आदि पर्वों के दिन जुआ खेलना चाहिए। क्या यह बात शास्त्र सम्मत है ?

उत्तर : नहीं, दीपावली के दिन जुआ खेलने का विधान किसी भी वैदिक शास्त्र में नहीं है अपितु वेदादि शास्त्रों में जुआ खेलने का निषेध किया गया है।

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आध्यात्मिक उन्नति में सफलता के लिए ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें।

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प्र. ३७५. दीपावली, जन्माष्टमी आदि पर्वों के दिन जुआ खेलना चाहिए। क्या यह बात शास्त्र सम्मत है ? उत्तर : नहीं, दीपावली के दिन जुआ खेलने का विधान किसी भी वैदिक शास्त्र में नहीं है अपितु वेदादि शास्त्रों में जुआ खेलने का निषेध किया गया है। @vaidic_gyan
प्र. ३७६. जिस घर में मृत्यु होती है, वहाँ १२ दिन तक संध्या हवन भजन, उपासना नहीं करना चाहिए, क्या यह बात उचित है ?

उत्तर : नहीं, यह बात उचित नहीं है अपितु मृत्यु के पश्चात् तो घर में यज्ञ करके घर को शुद्ध, कीटाणु रहित बनाना चाहिये तथा ईश्वर की उपासना, भजन आदि के द्वारा घर में आयी विपत्ति को सहन करने हेतु ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिये।

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