प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. १७१. शत प्रतिशत (१००%) निष्काम कर्म करने वाले को क्या फल मिलता है ? उत्तर : जीवित अवस्था में विशुद्ध रूप में ईश्वर का सुख मिलता है। तथा शरीर त्याग करने के पश्चात् मोक्ष में इकत्तीस नील दस खरब, चालीस अरब (३१, १०, ४०, ००००००००) वर्ष पर्यन्त ईश्वर के आनन्द…
प्र. १७२. मनुष्य जन्म पाकर जीवात्मा पशु, पक्षी, कीट, पतंग, समुद्री जीव आदि शरीर में क्यों जाता है ?
उत्तर : मनुष्य जन्म पाकर ५०% से अधिक पाप करने पर उन कर्मों का दुःख रूपी फल भोगने के लिए पशु पक्षी, कीट पतंग, समुद्री जीव आदि शरीर में जाता है।
@vaidic_gyan
उत्तर : मनुष्य जन्म पाकर ५०% से अधिक पाप करने पर उन कर्मों का दुःख रूपी फल भोगने के लिए पशु पक्षी, कीट पतंग, समुद्री जीव आदि शरीर में जाता है।
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अनेक बार मैं लोगों से पूछता हूं, "क्या आप हवन/ यज्ञ करते हैं?" लोग कहते हैं, कि *"नहीं करते."मैं पूछता हूं "क्यों नहीं करते? क्या हवन यज्ञ करना बुरा काम है?" वे कहते हैं, "बुरा काम तो नहीं है, अच्छा काम है, परंतु हमें समय नहीं मिलता।"
फिर मैं पूछता हूं, "क्या आप ईश्वर का जाप/ ध्यान आदि कुछ करते हैं?" वे कहते हैं, *"नहीं करते." "क्यों नहीं करते?" "क्योंकि समय नहीं मिलता." मैं पूछता हूं "कुछ वैदिक ग्रंथों का स्वाध्याय करते हैं?" लोग कहते हैं, *"नहीं करते."* मैं पूछता हूं, *"क्यों नहीं करते?"* तो वही उत्तर मिलता है कि "समय नहीं मिलता."।
क्या आप भूखे बेसहारा पशुओं को चारा आदि खिलाते हैं तो कहते है? - नहीं
फिर मैं पूछता हूं, "कभी आप आर्य समाज आदि संस्थाओं में सत्संग में अथवा गुरुकुलों में शिविरों में जाते हैं?" तो वे कहते हैं, *"नहीं जाते." "क्यों नहीं जाते?"* वही पुराना उत्तर होता है कि *"हमें समय नहीं मिलता."*
आप देखिए। लोगों को अच्छे काम करने के लिए समय नहीं मिलता। और फालतू के कामों में पूरा दिन खर्च कर देंगे। "टीवी देखेंगे। व्हाट्सएप फेसबुक इंस्टाग्राम और भी न जाने क्या-क्या सोशल मीडिया में पूरा दिन खर्च कर देंगे। गप्पें मारने में घंटा घंटा फोन पर बातें करेंगे। खाने पीने में सोने में घूमने फिरने में धंधा व्यापार करने में पूरा दिन खर्च कर देंगे।" फिर कहेंगे, कि "पुण्य कामों के लिए समय नहीं मिलता."
जब मैं उनसे इस प्रकार की शिकायत करता हूं, कि *"आपका जीवन बीतता जा रहा है। बहुत छोटा जीवन है। आप ये ईश्वर की उपासना यज्ञ हवन आदि पुण्य कर्म कब करेंगे?"* तो वे कहते हैं, *"बस, अभी कुछ जरूरी काम है। यह काम पूरा हो जाए, फिर हम ये सारे अच्छे काम करेंगे।"*
"इसी प्रकार से वे लोग बहाने बना बनाकर पूरा जीवन यूं ही सांसारिक कर्मों में खर्च कर देते हैं। अपने जीवन में शांति आनंद प्राप्त करने के लिए तथा अपना अगला जन्म सुधारने के लिए कोई विशेष पुण्य नहीं करते।" बस यही कहते हैं, कि "हमारी योजनाएं तो हैं। हम भविष्य में ये सब अच्छे काम एक न एक दिन अवश्य करेंगे।" "और इस प्रकार से धीरे-धीरे उनका पूरा जीवन बीत जाता है, बुढ़ापा आ जाता है, फिर भी उन्हें समय नहीं मिलता."
जब बुढ़ापे में शरीर साथ नहीं देता, तब वे पश्चात्ताप करते हैं, कि "हमने बहुत मूर्खता की. फालतू कामों में बहुत समय बर्बाद किया, और जो पुण्य कर्म करने चाहिएं थे, वे नहीं किये।"
इसलिए मैं आप सबसे निवेदन करना चाहता हूं, कि "ऐसे लोगों की तरह आपको भी बुढ़ापे में पश्चात्ताप न करना पड़े, इसलिए अभी से सावधान हो जाएं। अधिक न सही, कम से कम डेढ़ या दो घंटा तो प्रतिदिन ऐसे उत्तम कार्यों के लिए समय अवश्य निकालें।" "समय आसानी से नहीं मिलता, समय तो निकालना पड़ता है। उसके लिए सबसे पहले आपको अपनी इच्छा बनानी पड़ेगी। यदि आपकी इच्छा बन गई, तो समय भी निकल आएगा। फालतू के काम कुछ कम करने होंगे, और इन उत्तम कार्यों को करने के लिए अपना टाइम टेबल बनाना होगा। जिसमें आप आधा घंटा ईश्वर का ध्यान/गायत्री जाप कर लें। 15 मिनट हवन कर लें। आधा घंटा स्वाध्याय कर लें। और आधा घंटा किसी के साथ सत्संग चर्चा कर लें।"
"यदि आप प्रतिदिन इतना भी कर लेंगे, तो आपको वृद्धावस्था में पश्चाताप नहीं होगा। और तब तक आपके बहुत से पुण्य कर्म भी जमा हो जाएंगे, जो आपको इस जीवन में भी शांति देंगे, तथा आपका अगला जन्म भी सुधार देंगे।"
----- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़, गुजरात।"*
फिर मैं पूछता हूं, "क्या आप ईश्वर का जाप/ ध्यान आदि कुछ करते हैं?" वे कहते हैं, *"नहीं करते." "क्यों नहीं करते?" "क्योंकि समय नहीं मिलता." मैं पूछता हूं "कुछ वैदिक ग्रंथों का स्वाध्याय करते हैं?" लोग कहते हैं, *"नहीं करते."* मैं पूछता हूं, *"क्यों नहीं करते?"* तो वही उत्तर मिलता है कि "समय नहीं मिलता."।
क्या आप भूखे बेसहारा पशुओं को चारा आदि खिलाते हैं तो कहते है? - नहीं
फिर मैं पूछता हूं, "कभी आप आर्य समाज आदि संस्थाओं में सत्संग में अथवा गुरुकुलों में शिविरों में जाते हैं?" तो वे कहते हैं, *"नहीं जाते." "क्यों नहीं जाते?"* वही पुराना उत्तर होता है कि *"हमें समय नहीं मिलता."*
आप देखिए। लोगों को अच्छे काम करने के लिए समय नहीं मिलता। और फालतू के कामों में पूरा दिन खर्च कर देंगे। "टीवी देखेंगे। व्हाट्सएप फेसबुक इंस्टाग्राम और भी न जाने क्या-क्या सोशल मीडिया में पूरा दिन खर्च कर देंगे। गप्पें मारने में घंटा घंटा फोन पर बातें करेंगे। खाने पीने में सोने में घूमने फिरने में धंधा व्यापार करने में पूरा दिन खर्च कर देंगे।" फिर कहेंगे, कि "पुण्य कामों के लिए समय नहीं मिलता."
जब मैं उनसे इस प्रकार की शिकायत करता हूं, कि *"आपका जीवन बीतता जा रहा है। बहुत छोटा जीवन है। आप ये ईश्वर की उपासना यज्ञ हवन आदि पुण्य कर्म कब करेंगे?"* तो वे कहते हैं, *"बस, अभी कुछ जरूरी काम है। यह काम पूरा हो जाए, फिर हम ये सारे अच्छे काम करेंगे।"*
"इसी प्रकार से वे लोग बहाने बना बनाकर पूरा जीवन यूं ही सांसारिक कर्मों में खर्च कर देते हैं। अपने जीवन में शांति आनंद प्राप्त करने के लिए तथा अपना अगला जन्म सुधारने के लिए कोई विशेष पुण्य नहीं करते।" बस यही कहते हैं, कि "हमारी योजनाएं तो हैं। हम भविष्य में ये सब अच्छे काम एक न एक दिन अवश्य करेंगे।" "और इस प्रकार से धीरे-धीरे उनका पूरा जीवन बीत जाता है, बुढ़ापा आ जाता है, फिर भी उन्हें समय नहीं मिलता."
जब बुढ़ापे में शरीर साथ नहीं देता, तब वे पश्चात्ताप करते हैं, कि "हमने बहुत मूर्खता की. फालतू कामों में बहुत समय बर्बाद किया, और जो पुण्य कर्म करने चाहिएं थे, वे नहीं किये।"
इसलिए मैं आप सबसे निवेदन करना चाहता हूं, कि "ऐसे लोगों की तरह आपको भी बुढ़ापे में पश्चात्ताप न करना पड़े, इसलिए अभी से सावधान हो जाएं। अधिक न सही, कम से कम डेढ़ या दो घंटा तो प्रतिदिन ऐसे उत्तम कार्यों के लिए समय अवश्य निकालें।" "समय आसानी से नहीं मिलता, समय तो निकालना पड़ता है। उसके लिए सबसे पहले आपको अपनी इच्छा बनानी पड़ेगी। यदि आपकी इच्छा बन गई, तो समय भी निकल आएगा। फालतू के काम कुछ कम करने होंगे, और इन उत्तम कार्यों को करने के लिए अपना टाइम टेबल बनाना होगा। जिसमें आप आधा घंटा ईश्वर का ध्यान/गायत्री जाप कर लें। 15 मिनट हवन कर लें। आधा घंटा स्वाध्याय कर लें। और आधा घंटा किसी के साथ सत्संग चर्चा कर लें।"
"यदि आप प्रतिदिन इतना भी कर लेंगे, तो आपको वृद्धावस्था में पश्चाताप नहीं होगा। और तब तक आपके बहुत से पुण्य कर्म भी जमा हो जाएंगे, जो आपको इस जीवन में भी शांति देंगे, तथा आपका अगला जन्म भी सुधार देंगे।"
----- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़, गुजरात।"*
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प्र. १७२. मनुष्य जन्म पाकर जीवात्मा पशु, पक्षी, कीट, पतंग, समुद्री जीव आदि शरीर में क्यों जाता है ? उत्तर : मनुष्य जन्म पाकर ५०% से अधिक पाप करने पर उन कर्मों का दुःख रूपी फल भोगने के लिए पशु पक्षी, कीट पतंग, समुद्री जीव आदि शरीर में जाता है। @vaidic_gyan
प्र. १७३. व्यक्ति जब पचास प्रतिशत (५०%) से अधिक पाप करता है तो पशु आदि नीच शरीरों में जाता है । पुनः उसे मनुष्य शरीर कब मिलता है ?
उत्तर : जब अधिक पाप का फल पशु आदि के शरीरों में भोग लिया जाता है तब पाप और पुण्य बराबर हो जाने पर पुनः उसे मनुष्य का शरीर मिलता है ।
@vaidic_gyan
उत्तर : जब अधिक पाप का फल पशु आदि के शरीरों में भोग लिया जाता है तब पाप और पुण्य बराबर हो जाने पर पुनः उसे मनुष्य का शरीर मिलता है ।
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प्र. १७३. व्यक्ति जब पचास प्रतिशत (५०%) से अधिक पाप करता है तो पशु आदि नीच शरीरों में जाता है । पुनः उसे मनुष्य शरीर कब मिलता है ? उत्तर : जब अधिक पाप का फल पशु आदि के शरीरों में भोग लिया जाता है तब पाप और पुण्य बराबर हो जाने पर पुनः उसे मनुष्य का शरीर मिलता…
प्र. १७४. क्या एक क्षण के लिए भी बिना कर्म किए रहा जा सकता है ?
उत्तर : नहीं, कर्म किये बिना एक क्षण भी नहीं रहा जा सकता।
@vaidic_gyan
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प्र. १७४. क्या एक क्षण के लिए भी बिना कर्म किए रहा जा सकता है ? उत्तर : नहीं, कर्म किये बिना एक क्षण भी नहीं रहा जा सकता। @vaidic_gyan
प्र. १७५. क्या कर्म करना जीवन काल में कभी समाप्त हो सकता है ?
उत्तर : नहीं, मनुष्य को आजीवन कर्म करना ही पड़ता है ।
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उत्तर : नहीं, मनुष्य को आजीवन कर्म करना ही पड़ता है ।
@vaidic_gyan
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प्र. १७५. क्या कर्म करना जीवन काल में कभी समाप्त हो सकता है ? उत्तर : नहीं, मनुष्य को आजीवन कर्म करना ही पड़ता है । @vaidic_gyan
प्र. १७६. सकाम कर्म किसे कहते हैं ?
उत्तर : उन शुभ, अशुभ और मिश्रित कर्मों को सकाम कर्म कहते हैं , जिसमें सांसारिक फल प्राप्ति की कामना बनी रहती है।
@vaidic_gyan
उत्तर : उन शुभ, अशुभ और मिश्रित कर्मों को सकाम कर्म कहते हैं , जिसमें सांसारिक फल प्राप्ति की कामना बनी रहती है।
@vaidic_gyan
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प्रिय मित्रों 🙏
सरकार ने वक़्फ़ बोर्ड पर जनता से राय माँगी है। यही समय है अपनी राय तुरन्त, बिना विलम्ब के देने का। समय है सोशल मीडिया से उठकर सरकार तक अपनी विचारधारा को रखने का! मौका छूट गया तो आपका भविष्य खतरे में है। हममें से प्रत्येक को अपनी टिप्पणियाँ *10 सितंबर 2024* (अंतिम दिन) तक निम्नलिखित पते पर भेजनी चाहिए।
डाक का पता
संयुक्त सचिव (जेएम)
लोकसभा सचिवालय
440, संसदीय सौध
नई दिल्ली-110001
*फैक्स :* 011-23017709
*ईमेल :* jpcwaqf-lss@sansad.nic.in पर ईमेल भी करें।
जो लोग पोस्ट या फैक्स नहीं कर सकते तो कृपया अपनी टिप्पणियाँ कम से कम jpcwaqf-lss@sansad.nic.in पर ईमेल अवश्य ही करें। हर एक ईमेल से फ़र्क़ पड़ेगा।
____
सेवा में,
संयुक्त सचिव (जेएम)
लोकसभा सचिवालय
महोदय,
भारत के वक़्फ़ बोर्ड के विषय में मेरी राय ये है -
- जब पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू सम्पतियों के रख रखाव के लिए कोई प्रावधान नहीं है, तो किस आधार पर भारत में ऐसा हो रहा है…?
- वक़्फ़ बोर्ड को किस संवैधानिक अधिकार के तहत इतनी शक्तियाँ दी गई है…?
- कितने मुस्लिम राष्ट्रों में वक़्फ़ बोर्ड जैसी संस्था आज मौजूद है…?
- आये दिन वक़्फ़ बोर्ड भारत में गाँव के गाँव और हिन्दू मन्दिरों पर अपना दावा ठोकता है, ये किस हद तक जायज़ है…?
- बगैर किसी सूचना के किसी हिन्दू धार्मिक स्थल, निवास या खेत को वक्फ की संपत्ति घोषित करना, सफाई के लिए मौका न देना क्या यह अन्याय नहीं है…?
- जिन संपत्तियों पर वक्फ ने कब्जा कर रखा है, जांच हो कि वह कौन लोग हैं जिन्होंने यह संपत्तियां दान की हैं और क्यों की हैं…?
- 9.40 लाख एकड़ जमीन दान के लिए कहाँ से आ गई मुस्लिमों के पास…?
- वक़्फ़ बोर्ड के पास भारतीय भूमि का कितना प्रतिशत क़ब्ज़ा है…? क्या इस क़ब्ज़े की कोई सीमा तय है…?
- हिंदू मंदिरों की भाँति वक़्फ़ बोर्ड पर सरकार का नियंत्रण क्यों नहीं है…?
भारतीय नागरिक होने के नाते आप से प्रार्थना है कि इस तुष्टिकरण को रोकिए। कृपया वक़्फ़ बोर्ड के क़ब्ज़े की भूमि की समीक्षा कीजिए।
भवदीय-
( आपका नाम एवं फोन नंबर (आप चाहें तो))
————————————————
> नोट :- कृपया उपरोक्त Format को कॉपी कीजिए और डाक द्वारा प्राप्त प्रतिक्रियाओं को अत्यधिक महत्व दिया जाएगा। इसलिए कम से कम डाक के साथ एक Email भी भेजें। वैसे डाक से भेजा जाए तो और भी उत्तम होगा। अतः E-Mail/Post दोनों कीजिए एवं दूसरों को भी प्रेरित कीजिए।
या तो इस लिंक https://tinyurl.com/WAKFAmend के माध्यम से भेज सकते हैं ये automail है इसमें पहले से लिखा हुआ है ।
सरकार ने वक़्फ़ बोर्ड पर जनता से राय माँगी है। यही समय है अपनी राय तुरन्त, बिना विलम्ब के देने का। समय है सोशल मीडिया से उठकर सरकार तक अपनी विचारधारा को रखने का! मौका छूट गया तो आपका भविष्य खतरे में है। हममें से प्रत्येक को अपनी टिप्पणियाँ *10 सितंबर 2024* (अंतिम दिन) तक निम्नलिखित पते पर भेजनी चाहिए।
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महोदय,
भारत के वक़्फ़ बोर्ड के विषय में मेरी राय ये है -
- जब पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू सम्पतियों के रख रखाव के लिए कोई प्रावधान नहीं है, तो किस आधार पर भारत में ऐसा हो रहा है…?
- वक़्फ़ बोर्ड को किस संवैधानिक अधिकार के तहत इतनी शक्तियाँ दी गई है…?
- कितने मुस्लिम राष्ट्रों में वक़्फ़ बोर्ड जैसी संस्था आज मौजूद है…?
- आये दिन वक़्फ़ बोर्ड भारत में गाँव के गाँव और हिन्दू मन्दिरों पर अपना दावा ठोकता है, ये किस हद तक जायज़ है…?
- बगैर किसी सूचना के किसी हिन्दू धार्मिक स्थल, निवास या खेत को वक्फ की संपत्ति घोषित करना, सफाई के लिए मौका न देना क्या यह अन्याय नहीं है…?
- जिन संपत्तियों पर वक्फ ने कब्जा कर रखा है, जांच हो कि वह कौन लोग हैं जिन्होंने यह संपत्तियां दान की हैं और क्यों की हैं…?
- 9.40 लाख एकड़ जमीन दान के लिए कहाँ से आ गई मुस्लिमों के पास…?
- वक़्फ़ बोर्ड के पास भारतीय भूमि का कितना प्रतिशत क़ब्ज़ा है…? क्या इस क़ब्ज़े की कोई सीमा तय है…?
- हिंदू मंदिरों की भाँति वक़्फ़ बोर्ड पर सरकार का नियंत्रण क्यों नहीं है…?
भारतीय नागरिक होने के नाते आप से प्रार्थना है कि इस तुष्टिकरण को रोकिए। कृपया वक़्फ़ बोर्ड के क़ब्ज़े की भूमि की समीक्षा कीजिए।
भवदीय-
( आपका नाम एवं फोन नंबर (आप चाहें तो))
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> नोट :- कृपया उपरोक्त Format को कॉपी कीजिए और डाक द्वारा प्राप्त प्रतिक्रियाओं को अत्यधिक महत्व दिया जाएगा। इसलिए कम से कम डाक के साथ एक Email भी भेजें। वैसे डाक से भेजा जाए तो और भी उत्तम होगा। अतः E-Mail/Post दोनों कीजिए एवं दूसरों को भी प्रेरित कीजिए।
या तो इस लिंक https://tinyurl.com/WAKFAmend के माध्यम से भेज सकते हैं ये automail है इसमें पहले से लिखा हुआ है ।
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प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. १७६. सकाम कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर : उन शुभ, अशुभ और मिश्रित कर्मों को सकाम कर्म कहते हैं , जिसमें सांसारिक फल प्राप्ति की कामना बनी रहती है। @vaidic_gyan
प्र. १७७. फल की दृष्टि से कर्म कितने प्रकार के होते हैं ? और वे कौन कौन से ?
उत्तर : फल की दृष्टि से कर्म तीन प्रकार के हैं-
(१) संचित
(२) प्रारब्ध
(३) क्रियमाण
@vaidic_gyan
उत्तर : फल की दृष्टि से कर्म तीन प्रकार के हैं-
(१) संचित
(२) प्रारब्ध
(३) क्रियमाण
@vaidic_gyan
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