प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. २५२. क्या ईश्वर सब कुछ कर सकता है ? क्योंकि उसे सर्वशक्तिमान् कहा गया है। उत्तर : ईश्वर सब कुछ नहीं कर सकता, अपने को मार नहीं सकता या अपने जैसा दूसरा ईश्वर नहीं बना सकता। सर्वशक्तिमान् का अर्थ है, हो सकने वाले कार्यों को ईश्वर अपनी ही शक्ति से पूर्ण…
प्र. २५३. क्या ईश्वर अपने भक्त उपासक के वश में भी हो जाता है ? अर्थात् जैसा भक्त चाहे वैसा ईश्वर करे, ऐसा भी होता है ?
उत्तर : नहीं, ईश्वर भक्त के वश में नहीं होता है। बल्कि भक्त ईश्वर के वश में रहना चाहता है।
@vaidic_gyan
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प्र. २५३. क्या ईश्वर अपने भक्त उपासक के वश में भी हो जाता है ? अर्थात् जैसा भक्त चाहे वैसा ईश्वर करे, ऐसा भी होता है ? उत्तर : नहीं, ईश्वर भक्त के वश में नहीं होता है। बल्कि भक्त ईश्वर के वश में रहना चाहता है। @vaidic_gyan
प्र. २५४. क्या ईश्वर की भक्ति, प्रार्थना, ध्यान, उपासना किन्हीं विशेष मन्त्रों, सूत्रों, श्रलोकों द्वारा ही की जा सकती है, अपनी भाषा में इच्छानुसार नहीं की जा सकती ?
उत्तर : अपनी भाषा से भी की जा सकती है, किन्तु मन्त्र आदि के माध्यम से संक्षेप में, सरलता से, उत्तम रीति से की जा सकती है।
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प्र. २५४. क्या ईश्वर की भक्ति, प्रार्थना, ध्यान, उपासना किन्हीं विशेष मन्त्रों, सूत्रों, श्रलोकों द्वारा ही की जा सकती है, अपनी भाषा में इच्छानुसार नहीं की जा सकती ? उत्तर : अपनी भाषा से भी की जा सकती है, किन्तु मन्त्र आदि के माध्यम से संक्षेप में, सरलता…
प्र. २५५. ईश्वर एक है किन्तु उसके रूप अनेक हैं क्या यह बात सत्य है ? अर्थात् एक ही ईश्वर ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, देवी आदि अनेक रूपों वाला है ?
उत्तर : ईश्वर के रूप (देवी देवता के रूप) अनेक नहीं हैं। वह तो अरूप = निराकार है, किन्तु गुण कर्म स्वभाव के अनुसार नाम तो अनेक हैं ।
@vaidic_gyan
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प्र. २५५. ईश्वर एक है किन्तु उसके रूप अनेक हैं क्या यह बात सत्य है ? अर्थात् एक ही ईश्वर ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, देवी आदि अनेक रूपों वाला है ? उत्तर : ईश्वर के रूप (देवी देवता के रूप) अनेक नहीं हैं। वह तो अरूप = निराकार है, किन्तु गुण कर्म स्वभाव के…
प्र. २५६. एक की बजाए अनेक ईश्वर क्यों न मान लिये जाएँ ? ऐसा करने से सभी मत पंथ संप्रदाय वाले भी संतुष्ट हो जायेंगे ।
उत्तर : जब ईश्वर एक ही है तो अनेक मानना झूठ होगा । साथ ही इन अनेक ईश्वर वालों के परस्पर झगड़े होंगे कि मेरा ईश्वर बडा है, उसका छोटा है ।
@vaidic_gyan
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क्रोध को कैसे दूर करें.pdf
4.1 MB
" क्रोध को कैसे दूर करें "
- स्वामी विवेकानंद परिव्राजक
• क्रोध को छोड़ने के लिए उपाय
• क्रोध करने से हानियां
• प्रेमपूर्वक व्यवहार करने से लाभ
छोटी सी पुस्तक है (6 पृष्ठ), सभी पढ़ें और अपने मित्रों को भी भेजें।
- स्वामी विवेकानंद परिव्राजक
• क्रोध को छोड़ने के लिए उपाय
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प्र. २५६. एक की बजाए अनेक ईश्वर क्यों न मान लिये जाएँ ? ऐसा करने से सभी मत पंथ संप्रदाय वाले भी संतुष्ट हो जायेंगे । उत्तर : जब ईश्वर एक ही है तो अनेक मानना झूठ होगा । साथ ही इन अनेक ईश्वर वालों के परस्पर झगड़े होंगे कि मेरा ईश्वर बडा है, उसका छोटा है । …
प्र. २५७. ईश्वर की प्रार्थना उपासना करने से कया-क्या लाभ होते हैं ?
उत्तर : ईश्वर की उपासना करने से समाधि अवस्था में विशेष ज्ञान, बल, आनन्द, धैर्य, सहनशक्ति, उत्साह, पराक्रम, निष्कामता आदि गुणों की प्राप्ति होती है। साथ ही मनुष्य, आत्मा का साक्षात्कार करता है तथा उसके अविद्या आदि दोष नष्ट होते हैं।
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उत्तर : ईश्वर की उपासना करने से समाधि अवस्था में विशेष ज्ञान, बल, आनन्द, धैर्य, सहनशक्ति, उत्साह, पराक्रम, निष्कामता आदि गुणों की प्राप्ति होती है। साथ ही मनुष्य, आत्मा का साक्षात्कार करता है तथा उसके अविद्या आदि दोष नष्ट होते हैं।
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