प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
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यहां पर आपको प्राचीन वैदिक ज्ञान से संबंधित प्रश्न और उसका उत्तर दिया जाएगा।
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प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३०६. कौन व्यक्ति यज्ञ कर्म को छोड़ सकता है ? उत्तर : संन्यासी विरक्त व्यक्ति को यज्ञ करना आवश्यक नहीं होता है क्योंकि उसका जीवन ही यज्ञमय होता है । @vaidic_gyan
प्र. ३०७. क्या मन्त्रों के अर्थों को जाने बिना भी यज्ञ करने से लाभ होता है ?

उत्तर : मन्त्रों के अर्थों को जाने बिना भी यज्ञ करने से भौतिक लाभ तो होगा ही, किन्तु मन्त्रों के अर्थों को जानकर जो मानसिक, बौद्धिक लाभ होता है, वह नहीं होगा।

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प्र. ३०८. क्या यज्ञ करने से शारीरिक, मानसिक रोग भी दूर होते हैं ? उत्तर : हाँ। यज्ञ करने से शारीरिक, मानसिक रोग भी दूर होते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३०९. क्या बिना ही घी के या बिना ही सामग्री के यज्ञ हो सकता है ?

उत्तर : हाँ, यदि घी या सामग्री उपलब्ध न हो तो अन्य पदार्थों से तथा औषधि, अन्न, वनस्पति आदि से भी यज्ञ किया जा सकता है ।

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प्र. ३१०. यज्ञ कुण्ड में बची राख का क्या उपयोग होता है ? उत्तर : राख को खेत, खलिहान, उद्यान, फूलों, फलों, सब्जियों के स्थान पर डालना चाहिए। यह एक उत्तम खाद का कार्य करती है। @vaidic_gyan
प्र. ३११. यज्ञ एक भौतिक कार्य है तो इसके साथ ईश्वर स्तुति प्रार्थना उपासना के मन्त्रों को क्यों बोला जाता है ? वेद मन्त्रों को बोलने की क्या आवश्यकता है ?

उत्तर : इससे ईश्वर के प्रति श्रद्धा, विश्वास, प्रेम उत्पन्न होता है तथा कृतज्ञता भी प्रकट होती है एवं प्रेरणा भी मिलती है।

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प्र. ३१२. क्या यज्ञ में पशु बलि, पक्षी बलि, या मांस, शराब आदि प्रदान करने का विधान है ? उत्तर : नहीं, यज्ञ को हिंसा रहित कर्म कहा गया है। इसमें मांस आदि अपवित्र हिंसा युक्त पदार्थों को प्रदान नहीं किया जाता है। @vaidic_gyan
प्र. ३१३. गोमेध, अश्वमेध आदि का क्या अर्थ है, क्या इन यज्ञों में गाय की या घोड़े की बलि दी जाती है ?

उत्तर : गोमेध का अर्थ है - शरीर इन्द्रियों आदि को बलवान पुष्ट बनाना तथा अश्वमेध का अर्थ है राष्ट्र को समृद्ध, सुसंस्कृत, सुखी, सम्पन्न बनाने के लिए उत्तम कार्यों को करना । इन यज्ञों में गाय की या घोड़े की बलि नही दी जाती है।

@vaidic_gyan
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