प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
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प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३१०. यज्ञ कुण्ड में बची राख का क्या उपयोग होता है ? उत्तर : राख को खेत, खलिहान, उद्यान, फूलों, फलों, सब्जियों के स्थान पर डालना चाहिए। यह एक उत्तम खाद का कार्य करती है। @vaidic_gyan
प्र. ३११. यज्ञ एक भौतिक कार्य है तो इसके साथ ईश्वर स्तुति प्रार्थना उपासना के मन्त्रों को क्यों बोला जाता है ? वेद मन्त्रों को बोलने की क्या आवश्यकता है ?

उत्तर : इससे ईश्वर के प्रति श्रद्धा, विश्वास, प्रेम उत्पन्न होता है तथा कृतज्ञता भी प्रकट होती है एवं प्रेरणा भी मिलती है।

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प्र. ३१२. क्या यज्ञ में पशु बलि, पक्षी बलि, या मांस, शराब आदि प्रदान करने का विधान है ? उत्तर : नहीं, यज्ञ को हिंसा रहित कर्म कहा गया है। इसमें मांस आदि अपवित्र हिंसा युक्त पदार्थों को प्रदान नहीं किया जाता है। @vaidic_gyan
प्र. ३१३. गोमेध, अश्वमेध आदि का क्या अर्थ है, क्या इन यज्ञों में गाय की या घोड़े की बलि दी जाती है ?

उत्तर : गोमेध का अर्थ है - शरीर इन्द्रियों आदि को बलवान पुष्ट बनाना तथा अश्वमेध का अर्थ है राष्ट्र को समृद्ध, सुसंस्कृत, सुखी, सम्पन्न बनाने के लिए उत्तम कार्यों को करना । इन यज्ञों में गाय की या घोड़े की बलि नही दी जाती है।

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प्र. ३१४. क्या स्त्री व शूद्र भी यज्ञ कर सकते हैं ? उत्तर : हाँ, स्त्री व शूद्र भी यज्ञ कर सकते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३१५. यज्ञ में कहीं, कभी, किसी स्थिति में पाप-हिंसा होती है ?

उत्तर : नहीं, शास्त्रोक्त विधि अनुसार करने से यज्ञ में कहीं भी, कभी भी, किसी भी स्थिति में पाप, हिंसा नहीं होती है।

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प्र. ३१६. यज्ञ कर्म सकाम कर्म की कोटि में आता है या निष्काम कर्म की कोटि में ? उत्तर : यज्ञ कर्म दोनों प्रकार से होते हैं सकाम भी और निष्काम भी । @vaidic_gyan
प्र. ३१७. क्या यज्ञ के माध्यम से मारण, मोहन, उच्चाटन, वशीकरण, हराने जिताने, आदि की क्रियाएँ भी की जा सकती हैं ?

उत्तर : नहीं, यज्ञ में मारण मोहन आदि क्रियाएं नहीं होती हैं ये दुष्ट व्यक्तियों की चालाकी, धूर्तता होती है।

@vaidic_gyan
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