प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३१८. क्या माचीस (दिया सलाई) के बिना केवल मंत्रों को बोलकर भी अग्नि को जलाया जा सकता है ? उत्तर : मात्र मंत्रों को बोलकर अग्नि नहीं जलाई जा सकती है। @vaidic_gyan
प्र. ३१९. क्या यज्ञ करने वाले व्यक्ति को यज्ञोपवीत धारण करना अनिवार्य है ? इसके बिना यज्ञ नहीं होता ?
उत्तर : ऋषियों ने अनुशासन बनाए रखने के लिए एक व्यवस्था बनाई है कि यज्ञ करते समय आवरण पहनना चाहिए, लेकिन बिना आवरण पहने यज्ञ करने से पाप नहीं होता।
@vaidic_gyan
उत्तर : ऋषियों ने अनुशासन बनाए रखने के लिए एक व्यवस्था बनाई है कि यज्ञ करते समय आवरण पहनना चाहिए, लेकिन बिना आवरण पहने यज्ञ करने से पाप नहीं होता।
@vaidic_gyan
🙏4❤1
प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३१९. क्या यज्ञ करने वाले व्यक्ति को यज्ञोपवीत धारण करना अनिवार्य है ? इसके बिना यज्ञ नहीं होता ? उत्तर : ऋषियों ने अनुशासन बनाए रखने के लिए एक व्यवस्था बनाई है कि यज्ञ करते समय आवरण पहनना चाहिए, लेकिन बिना आवरण पहने यज्ञ करने से पाप नहीं होता। @vaidic_gyan
३२०. वेद के मन्त्रों की ही तरह क्या गीता, रामायण, महाभारत के श्लोकों को बोलकर भी यज्ञ किया जा सकता है ?
उत्तर : नहीं, गीता आदि ग्रन्थों के श्लोकों को बोलकर यज्ञ नहीं करना चाहिये क्योंकि गीता आदि के श्लोकों के वो अर्थ नहीं निकलते हैं जो वेदमन्त्रों के अर्थ निकलते हैं ।
@vaidic_gyan
उत्तर : नहीं, गीता आदि ग्रन्थों के श्लोकों को बोलकर यज्ञ नहीं करना चाहिये क्योंकि गीता आदि के श्लोकों के वो अर्थ नहीं निकलते हैं जो वेदमन्त्रों के अर्थ निकलते हैं ।
@vaidic_gyan
👍6
प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
३२०. वेद के मन्त्रों की ही तरह क्या गीता, रामायण, महाभारत के श्लोकों को बोलकर भी यज्ञ किया जा सकता है ? उत्तर : नहीं, गीता आदि ग्रन्थों के श्लोकों को बोलकर यज्ञ नहीं करना चाहिये क्योंकि गीता आदि के श्लोकों के वो अर्थ नहीं निकलते हैं जो वेदमन्त्रों के अर्थ…
प्र. ३२१. घृत पात्र में यदि घी बच जावे और सामग्री के पात्र में सामग्री बच जावे तो उसका क्या करना चाहिये ?
उसे यज्ञ कुण्ड में डालें या न डालें ?
उत्तर : यदि अग्नि घी-सामग्री को जला सकती है तो डाल सकते हैं। नहीं तो पुनः पृथक घृत सामग्री पात्र में अगले दिन के लिए रख देना चाहिए ।
@vaidic_gyan
उसे यज्ञ कुण्ड में डालें या न डालें ?
उत्तर : यदि अग्नि घी-सामग्री को जला सकती है तो डाल सकते हैं। नहीं तो पुनः पृथक घृत सामग्री पात्र में अगले दिन के लिए रख देना चाहिए ।
@vaidic_gyan
🙏4
प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३२१. घृत पात्र में यदि घी बच जावे और सामग्री के पात्र में सामग्री बच जावे तो उसका क्या करना चाहिये ? उसे यज्ञ कुण्ड में डालें या न डालें ? उत्तर : यदि अग्नि घी-सामग्री को जला सकती है तो डाल सकते हैं। नहीं तो पुनः पृथक घृत सामग्री पात्र में अगले दिन के…
प्र. ३२२. क्या यज्ञ कर्म को यंत्रीकरण द्वारा स्वचालित बनाकर भी सम्पन्न किया जा सकता है ?
उत्तर : हाँ, किया जा सकता है किन्तु स्वयं करने से जो लाभ होते हैं वे नहीं मिल पायेंगे ।
@vaidic_gyan
उत्तर : हाँ, किया जा सकता है किन्तु स्वयं करने से जो लाभ होते हैं वे नहीं मिल पायेंगे ।
@vaidic_gyan
👍5
प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३२२. क्या यज्ञ कर्म को यंत्रीकरण द्वारा स्वचालित बनाकर भी सम्पन्न किया जा सकता है ? उत्तर : हाँ, किया जा सकता है किन्तु स्वयं करने से जो लाभ होते हैं वे नहीं मिल पायेंगे । @vaidic_gyan
प्र. ३२३. क्या मन्त्रों का अशुद्ध उच्चारण करने वाले यज्ञकर्त्ता को पाप लगता है या लाभ नहीं होता है या कोई हानि होती है ?
उत्तर : अशुद्ध मंत्रों का उच्चारण करके यज्ञ करने से भी भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। लेकिन वे मंत्रों को गलत तरीके से सीखते हैं और गलत परंपरा का पालन करते हैं।
@vaidic_gyan
उत्तर : अशुद्ध मंत्रों का उच्चारण करके यज्ञ करने से भी भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। लेकिन वे मंत्रों को गलत तरीके से सीखते हैं और गलत परंपरा का पालन करते हैं।
@vaidic_gyan
❤4👏2👍1
प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३२३. क्या मन्त्रों का अशुद्ध उच्चारण करने वाले यज्ञकर्त्ता को पाप लगता है या लाभ नहीं होता है या कोई हानि होती है ? उत्तर : अशुद्ध मंत्रों का उच्चारण करके यज्ञ करने से भी भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। लेकिन वे मंत्रों को गलत तरीके से सीखते हैं और गलत परंपरा…
प्र. ३२४. जो व्यक्ति बिना ही आहुति दिये, बिना ही मंत्रों को बोले यज्ञ शाला में बैठे होते हैं उनको भी यज्ञ का लाभहोता है ?
उत्तर : हाँ होता है। उन्हें भी भेषज वायु मिलता है। मन्त्रों से प्रेरणा मिलती है। मन्त्र याद भी होते हैं ।
@vaidic_gyan
उत्तर : हाँ होता है। उन्हें भी भेषज वायु मिलता है। मन्त्रों से प्रेरणा मिलती है। मन्त्र याद भी होते हैं ।
@vaidic_gyan
❤6
प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३२४. जो व्यक्ति बिना ही आहुति दिये, बिना ही मंत्रों को बोले यज्ञ शाला में बैठे होते हैं उनको भी यज्ञ का लाभहोता है ? उत्तर : हाँ होता है। उन्हें भी भेषज वायु मिलता है। मन्त्रों से प्रेरणा मिलती है। मन्त्र याद भी होते हैं । @vaidic_gyan
प्र. ३२५. यज्ञ करते समय मन को कहाँ पर केन्द्रित करना चाहिये मंत्र के अर्थ पर, अग्नि पर, ध्वनि पर या अन्य स्थान पर ?
उत्तर : उत्तम तो यह है कि मन को मन्त्र के अर्थों में लगाना चाहिए या ईश्वर में लगाना चाहिए या फिर अग्नि की लपटों में लगाना चाहिए।
@vaidic_gyan
उत्तर : उत्तम तो यह है कि मन को मन्त्र के अर्थों में लगाना चाहिए या ईश्वर में लगाना चाहिए या फिर अग्नि की लपटों में लगाना चाहिए।
@vaidic_gyan
🙏4❤1
17.5.2026
*"हर व्यक्ति अपने गुणों के माध्यम से चमकना चाहता है।"* अच्छी बात है, चमकना चाहिए। इसके लिए आपको सुबह से ही पुरुषार्थ करना होगा।
*"रात को सोने से पहले अगले दिन की योजना बना लें, कि कल मुझे क्या-क्या करना है।उसके लिए सभी आवश्यक साधन सामग्री रात को ही जुटा लें। और सुबह उठते ही चमकने के लिए तैयार हो जाएं।"*
सुबह का सूर्योदय प्रतिदिन आपको एक उत्तम अवसर देता है। *"अब यह आप पर निर्भर करता है, कि आप कितना पुरुषार्थ करते हैं, और कितना चमकते हैं!"*
सुबह का सूर्य उदय देखकर बहुत उत्साह उत्पन्न होता है, उस उत्साह का लाभ उठाएं और चमकने के लिए तैयार हो जाएं। *"पूरा दिन पुरुषार्थ करें, और संसार को अपनी योग्यता दिखलाएं। उसी से जब आप संसार में चमकेंगे, तभी कोई आपको धन और सम्मान देगा, और तभी आपका जीवन सफल होगा।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*
*"हर व्यक्ति अपने गुणों के माध्यम से चमकना चाहता है।"* अच्छी बात है, चमकना चाहिए। इसके लिए आपको सुबह से ही पुरुषार्थ करना होगा।
*"रात को सोने से पहले अगले दिन की योजना बना लें, कि कल मुझे क्या-क्या करना है।उसके लिए सभी आवश्यक साधन सामग्री रात को ही जुटा लें। और सुबह उठते ही चमकने के लिए तैयार हो जाएं।"*
सुबह का सूर्योदय प्रतिदिन आपको एक उत्तम अवसर देता है। *"अब यह आप पर निर्भर करता है, कि आप कितना पुरुषार्थ करते हैं, और कितना चमकते हैं!"*
सुबह का सूर्य उदय देखकर बहुत उत्साह उत्पन्न होता है, उस उत्साह का लाभ उठाएं और चमकने के लिए तैयार हो जाएं। *"पूरा दिन पुरुषार्थ करें, और संसार को अपनी योग्यता दिखलाएं। उसी से जब आप संसार में चमकेंगे, तभी कोई आपको धन और सम्मान देगा, और तभी आपका जीवन सफल होगा।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*
❤6🙏3
प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३२५. यज्ञ करते समय मन को कहाँ पर केन्द्रित करना चाहिये मंत्र के अर्थ पर, अग्नि पर, ध्वनि पर या अन्य स्थान पर ? उत्तर : उत्तम तो यह है कि मन को मन्त्र के अर्थों में लगाना चाहिए या ईश्वर में लगाना चाहिए या फिर अग्नि की लपटों में लगाना चाहिए। @vaidic_gyan
प्र. ३२६. क्या किसी पण्डित, ब्राह्मण को धन देकर अपने लाभ के लिये यज्ञ कराया जा सकता है ?
उत्तर : हाँ, धन देकर यज्ञ कराया जा सकता है। जितने धन से घृत-सामग्री आदि का यज्ञ होगा उसका तो पुण्य मिलेगा किन्तु करने का पुण्य लाभ कर्त्ता (पण्डित, ब्राह्मण) को मिलेगा ।
@vaidic_gyan
उत्तर : हाँ, धन देकर यज्ञ कराया जा सकता है। जितने धन से घृत-सामग्री आदि का यज्ञ होगा उसका तो पुण्य मिलेगा किन्तु करने का पुण्य लाभ कर्त्ता (पण्डित, ब्राह्मण) को मिलेगा ।
@vaidic_gyan
💯4❤1👍1
प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३२६. क्या किसी पण्डित, ब्राह्मण को धन देकर अपने लाभ के लिये यज्ञ कराया जा सकता है ? उत्तर : हाँ, धन देकर यज्ञ कराया जा सकता है। जितने धन से घृत-सामग्री आदि का यज्ञ होगा उसका तो पुण्य मिलेगा किन्तु करने का पुण्य लाभ कर्त्ता (पण्डित, ब्राह्मण) को मिलेगा…
प्र. ३२७. यज्ञ एक समय करना चाहिये या दो समय ?
उत्तर : सामर्थ्य, साधन, समय, श्रद्धा रूचि हो तो दो समय (प्रातः व सांय) करना चाहिए ।
@vaidic_gyan
उत्तर : सामर्थ्य, साधन, समय, श्रद्धा रूचि हो तो दो समय (प्रातः व सांय) करना चाहिए ।
@vaidic_gyan
👍3💯3