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प्र. ३४९. क्या माता-पिता के मरणोपरांत उन्हें पिण्ड दान करना वेदोक्त है ? उत्तर : जी नहीं, माता-पिता के मरणोपरांत उन्हें पिण्ड दान वेदोक्त नहीं है। @vaidic_gyan
प्र. ३५०. क्या मृत व्यक्ति का अस्थि विसर्जन करने गंगा आदि नदियों में जाना उचित नहीं है ?
उत्तर : जी नहीं, मृत व्यक्ति का अस्थि विसर्जन करने गंगा आदि नदियों में जाना उचित नहीं है।
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उत्तर : जी नहीं, मृत व्यक्ति का अस्थि विसर्जन करने गंगा आदि नदियों में जाना उचित नहीं है।
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प्र. ३५०. क्या मृत व्यक्ति का अस्थि विसर्जन करने गंगा आदि नदियों में जाना उचित नहीं है ? उत्तर : जी नहीं, मृत व्यक्ति का अस्थि विसर्जन करने गंगा आदि नदियों में जाना उचित नहीं है। @vaidic_gyan
प्र. ३५१. क्या गंगा स्नान करने से, कुंभ मेले में स्नान से पाप धुल जाते हैं ?
उत्तर : जी नहीं, गंगा-स्नान करने या कुंभ आदि मेले में स्नान करने से पाप नहीं घुलते हैं।
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प्र. ३५१. क्या गंगा स्नान करने से, कुंभ मेले में स्नान से पाप धुल जाते हैं ? उत्तर : जी नहीं, गंगा-स्नान करने या कुंभ आदि मेले में स्नान करने से पाप नहीं घुलते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३५१. क्या गंगा स्नान करने से, कुंभ मेले में स्नान से पाप धुल जाते हैं ?
उत्तर : जी नहीं, गंगा-स्नान करने या कुंभ आदि मेले में स्नान करने से पाप नहीं घुलते हैं।
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प्र. ३५१. क्या गंगा स्नान करने से, कुंभ मेले में स्नान से पाप धुल जाते हैं ? उत्तर : जी नहीं, गंगा-स्नान करने या कुंभ आदि मेले में स्नान करने से पाप नहीं घुलते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३५२. तर्पण का अर्थ क्या है ?
उत्तर : बड़े वृद्धों को खिला-पिलाकर तृप्त करना तर्पण कहलाता है।
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प्र. ३५२. तर्पण का अर्थ क्या है ? उत्तर : बड़े वृद्धों को खिला-पिलाकर तृप्त करना तर्पण कहलाता है। @vaidic_gyan
प्र. ३५३. क्या स्नान करते समय सूर्य देवता को पानी चढ़ाने से यह जल उन तक पहुँचता है ?
उत्तर : नहीं, स्नान करते समय सूर्य देवता को पानी चढ़ाने से यह जल सूर्य तक नहीं पहुँचता है ।
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प्र. ३५३. क्या स्नान करते समय सूर्य देवता को पानी चढ़ाने से यह जल उन तक पहुँचता है ? उत्तर : नहीं, स्नान करते समय सूर्य देवता को पानी चढ़ाने से यह जल सूर्य तक नहीं पहुँचता है । @vaidic_gyan
३५४. क्या ब्राह्मणों को भोजन कराने से मृत व्यक्ति का तर्पण होता है ?
उत्तर : नहीं, ब्राह्मणों को भोजन कराने से मृत व्यक्ति का तर्पण नहीं होता है।
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उत्तर : नहीं, ब्राह्मणों को भोजन कराने से मृत व्यक्ति का तर्पण नहीं होता है।
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३५४. क्या ब्राह्मणों को भोजन कराने से मृत व्यक्ति का तर्पण होता है ? उत्तर : नहीं, ब्राह्मणों को भोजन कराने से मृत व्यक्ति का तर्पण नहीं होता है। @vaidic_gyan
प्र. ३५५. क्या मृत व्यक्ति की स्वर्ग प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों को गाय आदि दान देना उचित है ?
उत्तर : नहीं, मृत व्यक्ति की स्वर्ग प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों को गाय, सोना आदि दान देना उचित नहीं है।
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उत्तर : नहीं, मृत व्यक्ति की स्वर्ग प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों को गाय, सोना आदि दान देना उचित नहीं है।
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प्र. ३५५. क्या मृत व्यक्ति की स्वर्ग प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों को गाय आदि दान देना उचित है ? उत्तर : नहीं, मृत व्यक्ति की स्वर्ग प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों को गाय, सोना आदि दान देना उचित नहीं है। @vaidic_gyan
प्र. ३५६. गया श्राद्ध का वास्तविक अर्थ क्या है?
उत्तर : अत्यंत श्रद्धापूर्वक विद्वान अतिथि, आचार्य, माता-पिता तथा सन्तानों का पालन करना गया श्राद्ध कहलाता है।
@vaidic_gyan
उत्तर : अत्यंत श्रद्धापूर्वक विद्वान अतिथि, आचार्य, माता-पिता तथा सन्तानों का पालन करना गया श्राद्ध कहलाता है।
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Forwarded from स्वदेशी आंदोलन राजीव दीक्षित जी
आप सभी को श्रावणी उपाकर्म एवं रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं। 🌸🙏
पवित्र श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर वेद, ज्ञान, संस्कार और धर्म के प्रति हमारी आस्था और भी दृढ़ हो। ईश्वर सभी के जीवन में सद्बुद्धि, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करें।
रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का यह बंधन सदैव अटूट रहे। बहनों के जीवन में सुख-समृद्धि और भाइयों को सदैव अपनी बहनों की रक्षा एवं सम्मान करने का सामर्थ्य प्राप्त हो।
ओ३म् सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। 🙏
पवित्र श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर वेद, ज्ञान, संस्कार और धर्म के प्रति हमारी आस्था और भी दृढ़ हो। ईश्वर सभी के जीवन में सद्बुद्धि, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करें।
रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का यह बंधन सदैव अटूट रहे। बहनों के जीवन में सुख-समृद्धि और भाइयों को सदैव अपनी बहनों की रक्षा एवं सम्मान करने का सामर्थ्य प्राप्त हो।
ओ३म् सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। 🙏
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प्र. ३५६. गया श्राद्ध का वास्तविक अर्थ क्या है? उत्तर : अत्यंत श्रद्धापूर्वक विद्वान अतिथि, आचार्य, माता-पिता तथा सन्तानों का पालन करना गया श्राद्ध कहलाता है। @vaidic_gyan
प्र. ३५७. पीपल पेड़ के चारों ओर धागा बाँधने से व उसके फेरे करने से कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है तथा पति देव की आयु बढ़ती है क्या मान्यता उचित हैं ?
उत्तर : जी नहीं, पीपल पेड़ पर धागा बाँधने, उसके फेरे करने से कन्याओं को मनचाहा वर मिलता व पति देव की आयु बढ़ती है यह मान्यता शास्त्र सम्मत नहीं है अपितु सर्वथा शास्त्र विरुद्ध है, असत्य है ।
@vaidic_gyan
उत्तर : जी नहीं, पीपल पेड़ पर धागा बाँधने, उसके फेरे करने से कन्याओं को मनचाहा वर मिलता व पति देव की आयु बढ़ती है यह मान्यता शास्त्र सम्मत नहीं है अपितु सर्वथा शास्त्र विरुद्ध है, असत्य है ।
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प्र. ३५७. पीपल पेड़ के चारों ओर धागा बाँधने से व उसके फेरे करने से कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है तथा पति देव की आयु बढ़ती है क्या मान्यता उचित हैं ? उत्तर : जी नहीं, पीपल पेड़ पर धागा बाँधने, उसके फेरे करने से कन्याओं को मनचाहा वर मिलता व पति देव की आयु बढ़ती…
प्र. ३५८. साधु, पीर या फकीर के मजार पर जाकर मनौती मांगने से इच्छाएँ पूर्ण होती हैं क्या यह बात सत्य है ?
उत्तर : जी नहीं, साधु, पीर या फकीर के मजार पर जाकर मन्नत माँगने से मन्नत पूरी होती हैं यह मान्यता अवैदिक तथा असत्य है ।
@vaidic_gyan
उत्तर : जी नहीं, साधु, पीर या फकीर के मजार पर जाकर मन्नत माँगने से मन्नत पूरी होती हैं यह मान्यता अवैदिक तथा असत्य है ।
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प्र. ३५८. साधु, पीर या फकीर के मजार पर जाकर मनौती मांगने से इच्छाएँ पूर्ण होती हैं क्या यह बात सत्य है ? उत्तर : जी नहीं, साधु, पीर या फकीर के मजार पर जाकर मन्नत माँगने से मन्नत पूरी होती हैं यह मान्यता अवैदिक तथा असत्य है । @vaidic_gyan
प्र. ३५९. 'ब्रह्म सत्य जगत् मिथ्या' क्या यह सिद्धान्त ठीक है ?
उत्तर : जी नहीं, यह सिद्धान्त ठीक नहीं है, वेद विरुद्ध है ।
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उत्तर : जी नहीं, यह सिद्धान्त ठीक नहीं है, वेद विरुद्ध है ।
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