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फुले री लाल लडेतीं संग ।
फूलनी को महल फूलनी के बागे फूली सखी गावै तान तरंग ।।
फुले मुख सुखदाईक अंग अंग मिली फुले मन उदित अनंग ।
श्रीसरसदासि फूली छबि निरखत बिहरत प्रीतम सुरति सुरंग ।।
श्रीस्वामी सरसदेव जु महाराज कृतः
श्रीयुगल कुसुम सदन विलास
राग केदारों !
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