सादर समीक्षार्थ
बहर - 22, 22, 22, 22
क़ाफ़िया - आन
रदीफ़ - गए हम
उनको जब पहचान गए हम
बात सभी तब मान गए हम ।
दिल पर धोखे खाए हमने
तोड़ सभी अरमान गए हम ।
दुनियाँ में कितनों को देखा
उन पर ही कुर्बान गए हम ।
कथनी - करनी में था अंतर
लेकर अद्भुत ज्ञान गए हम ।
जब अपनों से काम पड़ा तो
खोते सब सम्मान गए हम ।
खाली हाथों आए हम भी
बेच न पर ईमान गए हम ।
'राज' सुनी जब उनकी बातें
ले दिल में तूफान गए हम ।
डॉ राजेश कुमार जैन
श्रीनगर गढ़वाल
उत्तराखण्ड
बहर - 22, 22, 22, 22
क़ाफ़िया - आन
रदीफ़ - गए हम
उनको जब पहचान गए हम
बात सभी तब मान गए हम ।
दिल पर धोखे खाए हमने
तोड़ सभी अरमान गए हम ।
दुनियाँ में कितनों को देखा
उन पर ही कुर्बान गए हम ।
कथनी - करनी में था अंतर
लेकर अद्भुत ज्ञान गए हम ।
जब अपनों से काम पड़ा तो
खोते सब सम्मान गए हम ।
खाली हाथों आए हम भी
बेच न पर ईमान गए हम ।
'राज' सुनी जब उनकी बातें
ले दिल में तूफान गए हम ।
डॉ राजेश कुमार जैन
श्रीनगर गढ़वाल
उत्तराखण्ड
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SIM-Binding नियम को लेकर अब तस्वीर और साफ होती दिख रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि मैसेजिंग ऐप्स के लिए SIM से अकाउंट जोड़ना अनिवार्य रहेगा और इसमें किसी तरह की ढील देने का फिलहाल इरादा नहीं है.
1 मार्च की तय समय सीमा को लेकर भी सरकार सख्त रुख में दिखाई दे रही है. दूरसंचार विभाग यानी DoT ने OTT मैसेजिंग ऐप्स को साफ निर्देश दिए हैं कि यूजर का अकाउंट एक्टिव SIM से जुड़ा होना चाहिए....
इसका मतलब यह है कि अगर फोन में वह SIM मौजूद नहीं है, जिससे WhatsApp या Telegram रजिस्टर है, तो ऐप का इस्तेमाल सीमित हो सकता है या बंद भी हो सकता है...!!
#SIMBinding #DoT #WhatsApp #Telegram #India #ATCard
He he he he 🙄😒
1 मार्च की तय समय सीमा को लेकर भी सरकार सख्त रुख में दिखाई दे रही है. दूरसंचार विभाग यानी DoT ने OTT मैसेजिंग ऐप्स को साफ निर्देश दिए हैं कि यूजर का अकाउंट एक्टिव SIM से जुड़ा होना चाहिए....
इसका मतलब यह है कि अगर फोन में वह SIM मौजूद नहीं है, जिससे WhatsApp या Telegram रजिस्टर है, तो ऐप का इस्तेमाल सीमित हो सकता है या बंद भी हो सकता है...!!
#SIMBinding #DoT #WhatsApp #Telegram #India #ATCard
He he he he 🙄😒
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WAQT बीतेगा
SAPNE टूटेंगे
LOG छोड़ेंगे
AUR ZINDAGI MAI TUM
HAR BAAR KUCH NAYA SIKHOGE🤌❤️
SAPNE टूटेंगे
LOG छोड़ेंगे
AUR ZINDAGI MAI TUM
HAR BAAR KUCH NAYA SIKHOGE🤌❤️
उड़ान 🦅
❤1👍1🎉1
𝐿 𝞲 𝟆 𝞮 :) 💫
I M SINGLE BECOUSE
बाबू निनी नई आ ली कॉल कलो ना
ये सुनके ही मेरे मुंह से गाली निकल जानी है...!!
😌💓
мєєт…✍️
❤1👍1⚡1
चुप रहा तो दिल का हाल बोलने लगा,
वो शिकारी था मगर खुद डोलने लगा।
कहा उसने — “लो आ गया समंदर देखो”,
मैं तेरी आँखों में ही मचलने लगा।
पहले रखा सिर उसने मेरे कंधे पर,
फिर मेरी ख़ामोशी का सवाल देखने लगा।
नया इश्क़ उसे रास आता ही नहीं,
दिल हर बार वही पुराना साल देखने लगा।
होली में जब हाथों में उठाया गुलाल,
तेरा ही चेहरा हर बार देखने लगा।
निवाला देकर जो ली थी तुमने तस्वीर,
मैं उस हँसी में छुपा मलाल देखने लगा।
अब भी जब चुप बैठा हूँ भीड़ में कहीं,
तेरी आहट का ही ख्याल देखने लगा…
वो शिकारी था मगर खुद डोलने लगा।
कहा उसने — “लो आ गया समंदर देखो”,
मैं तेरी आँखों में ही मचलने लगा।
पहले रखा सिर उसने मेरे कंधे पर,
फिर मेरी ख़ामोशी का सवाल देखने लगा।
नया इश्क़ उसे रास आता ही नहीं,
दिल हर बार वही पुराना साल देखने लगा।
होली में जब हाथों में उठाया गुलाल,
तेरा ही चेहरा हर बार देखने लगा।
निवाला देकर जो ली थी तुमने तस्वीर,
मैं उस हँसी में छुपा मलाल देखने लगा।
अब भी जब चुप बैठा हूँ भीड़ में कहीं,
तेरी आहट का ही ख्याल देखने लगा…
कान्हा 🥀
❤1👏1
तुम कहती हो मैं बदल गया हूँ,
पर तुमसे बिछड़कर संभल गया हूँ…
जब आया था तुमसे मिलने चुपके से,
दरवाज़े पे खड़ा था… मगर लौट गया हूँ…
तुम्हें मेरी आवाज़ चुभती थी कभी,
इसलिए ख़ामोशी ओढ़कर पिघल गया हूँ…
मेरी बातें ज़हर लगती थीं तुम्हें,
अब वही लफ़्ज़ दिल में ही निगल गया हूँ…
इंतज़ार मैंने भी कम नहीं किया था,
बस तुम्हारी ख़ुशी सोचकर टल गया हूँ…
दुत्कारा था तुमने भीड़ के सामने जिस दिन,
उस दिन से थोड़ा-थोड़ा रोज़ मर गया हूँ…
बेवफ़ाई का इल्ज़ाम मुझपे है मगर,
सच ये है कि वफ़ा में ही जल गया हूँ…
तुम्हारी रातों की चीखें अगर गवाह हैं,
तो मेरी नींदें भी बताएं… मैं कब से जाग गया हूँ…
तन्हाई तुम्हारी महबूबा सही,
पर मैं भी उसे अपना कर बदल गया हूँ…
खुश रहो तुम रकीब के साथ अगर,
मैं भी दुआ में तुम्हारा नाम रखकर निकल गया हूँ…
पर तुमसे बिछड़कर संभल गया हूँ…
जब आया था तुमसे मिलने चुपके से,
दरवाज़े पे खड़ा था… मगर लौट गया हूँ…
तुम्हें मेरी आवाज़ चुभती थी कभी,
इसलिए ख़ामोशी ओढ़कर पिघल गया हूँ…
मेरी बातें ज़हर लगती थीं तुम्हें,
अब वही लफ़्ज़ दिल में ही निगल गया हूँ…
इंतज़ार मैंने भी कम नहीं किया था,
बस तुम्हारी ख़ुशी सोचकर टल गया हूँ…
दुत्कारा था तुमने भीड़ के सामने जिस दिन,
उस दिन से थोड़ा-थोड़ा रोज़ मर गया हूँ…
बेवफ़ाई का इल्ज़ाम मुझपे है मगर,
सच ये है कि वफ़ा में ही जल गया हूँ…
तुम्हारी रातों की चीखें अगर गवाह हैं,
तो मेरी नींदें भी बताएं… मैं कब से जाग गया हूँ…
तन्हाई तुम्हारी महबूबा सही,
पर मैं भी उसे अपना कर बदल गया हूँ…
खुश रहो तुम रकीब के साथ अगर,
मैं भी दुआ में तुम्हारा नाम रखकर निकल गया हूँ…
🖤 🥀
Kanha✍️ 🥺
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जड़ों से जो जुड़ा हो वही मज़बूत घर करता है
सूखे तने को भी कुछ रोज़ खड़ा रहने दो
छाँव देगा तो दुआ बन के लगेगी सर पर
इस बुज़ुर्गे-शजर को यूँ बड़ा रहने दो
— भैरव ✍️
सूखे तने को भी कुछ रोज़ खड़ा रहने दो
छाँव देगा तो दुआ बन के लगेगी सर पर
इस बुज़ुर्गे-शजर को यूँ बड़ा रहने दो
— भैरव ✍️
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"जमते रहना ढहते रहना दोनों सीख रहा हूँ मैं,
सुनते रहना कहते रहना दोनों सीख रहा हूँ मैं..
सुनते रहना कहते रहना दोनों सीख रहा हूँ मैं..
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अच्छी किताबें ,
और
अच्छे लोग...।
तुरंत समझ नहीं आते ,
उन्हें पढ़ना पड़ता है
और
अच्छे लोग...।
तुरंत समझ नहीं आते ,
उन्हें पढ़ना पड़ता है
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किसी को पढने की क्या जल्दी है, उसकेलिए पुरा जमाना पडा है...
एक बात हमेंशा याद रखो,
मुसीबतों में जो खड़ा वही सबसे बडा है|
एक बात हमेंशा याद रखो,
मुसीबतों में जो खड़ा वही सबसे बडा है|
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तेरे शहर की धूप थी या तेरी ही परछाइयाँ,
मैं खुद को ढूँढ रहा था कि तुम याद आ गई.....
सूखी हुई डाल पर बैठे हुए दो परिंदे,
चुपचाप देखता रहा कि तुम याद आ गई.....
आईने में आज भी चेहरा नहीं मेरा,
कोई और झाँक रहा था कि तुम याद आ गई.....
धड़कन ने आज फिर वही दस्तक सी दी दिल पर,
कोई नाम ले रहा था कि तुम याद आ गई.....
भैरव
मैं खुद को ढूँढ रहा था कि तुम याद आ गई.....
सूखी हुई डाल पर बैठे हुए दो परिंदे,
चुपचाप देखता रहा कि तुम याद आ गई.....
आईने में आज भी चेहरा नहीं मेरा,
कोई और झाँक रहा था कि तुम याद आ गई.....
धड़कन ने आज फिर वही दस्तक सी दी दिल पर,
कोई नाम ले रहा था कि तुम याद आ गई.....
भैरव
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क्या रखा है दिल यूँ बार-बार जलाने में,
सुकून मिलता है क्या, हर रिश्ता आज़माने में।
कल तक जो मेरी धड़कन में बसा करते थे,
देर न लगी उन्हें, नया ठिकाना बनाने में।
हम तो ठहरे वही, तेरे दर के मुसाफ़िर,
उम्र गुज़र गई मगर, कदम न उठे जाने में।.
तूने बदली है मोहब्बत मौसमों की तरह,
हमने सदियाँ लगा दीं, एक नाम निभाने में।
लोग कहते हैं बड़ा आसान है भूल जाना,
जान जाती है मगर, यादों को मिटाने में।
तू जो हँसता है मुझे गैरों में बैठाकर,
क्या रखा है यूँ किसी को तन्हा बनाने में।
हम भी चाहें तो बदल लें अपने चेहरे सौ,
वक़्त नहीं लगता ज़मीरों को गिराने में।
अब तो आईना भी मुझसे सवाल करता है,
क्या मिला तुझे यूँ खुद को ही हराने में।
तेरा होना ही इबादत था मेरे हिस्से में,
क्या रखा है फिर यूँ खुदा को भी भुलाने में।
लिख रहा हूँ ये ग़ज़ल आख़िरी दफ़ा शायद,
कुछ तो कमी रही होगी तुझे मनाने में…
🖤🥀
Kanha ✍
सुकून मिलता है क्या, हर रिश्ता आज़माने में।
कल तक जो मेरी धड़कन में बसा करते थे,
देर न लगी उन्हें, नया ठिकाना बनाने में।
हम तो ठहरे वही, तेरे दर के मुसाफ़िर,
उम्र गुज़र गई मगर, कदम न उठे जाने में।.
तूने बदली है मोहब्बत मौसमों की तरह,
हमने सदियाँ लगा दीं, एक नाम निभाने में।
लोग कहते हैं बड़ा आसान है भूल जाना,
जान जाती है मगर, यादों को मिटाने में।
तू जो हँसता है मुझे गैरों में बैठाकर,
क्या रखा है यूँ किसी को तन्हा बनाने में।
हम भी चाहें तो बदल लें अपने चेहरे सौ,
वक़्त नहीं लगता ज़मीरों को गिराने में।
अब तो आईना भी मुझसे सवाल करता है,
क्या मिला तुझे यूँ खुद को ही हराने में।
तेरा होना ही इबादत था मेरे हिस्से में,
क्या रखा है फिर यूँ खुदा को भी भुलाने में।
लिख रहा हूँ ये ग़ज़ल आख़िरी दफ़ा शायद,
कुछ तो कमी रही होगी तुझे मनाने में…
🖤🥀
Kanha ✍
❤2🥰2
सुनो मोहतरमा....
तुम फिर से कहो तो होली का एक और रंग रच दें,
प्रयागराज की फिज़ा में मोहब्बत का ढंग रच दें।
संगम की धार पे जब बादल गुलाबी छाएँगे,
हम भीगी सी दुआओं में तेरे नाम जप जाएँगे।
अरैल की शाम में जब ठंडी हवा छुएगी,
रंगों से ज्यादा तेरी याद हमें रंग जाएँगी।
दारागंज की छत पर बैठ फाग जो छेड़ेंगे,
हर सुर में तेरे हँसने की आहट सजा जाएँगे।
चौक की रौनक में उड़ता जब अबीर सुनहरा,
तेरी पलकों पे हल्का सा गुलाल लगा जाएँगे।
अलोपी की देहरी पर चढ़ेगा आज रंग अपना,
माथे की उस लकीर में भाग्य नया लिख जाएँगे।
मनकामेश्वर की घंटियाँ जब होरी संग बजेंगी,
भक्ति में भीगी धड़कन से दिल तेरा छू जाएँगे।
यूनिवर्सिटी के लॉन में दो पल चुपके बैठेंगे,
किताबों के पन्नों पर रंगों के ख़्वाब सजा जाएँगे।
नेतराम की जलेबी संग ठंडी ठंडाई पीकर,
मीठे-मीठे लम्हों में रिश्ते को पिघला जाएँगे।
गंगा आरती की लौ में जब रंग झिलमिल होगा,
दीपों की उस रौशनी में कल अपना रच जाएँगे।
बस इस होली तुम आ जाना मुस्काकर एक बार,
हम प्रयागराज के रंगों में इश्क़ अमर कर जाएँगे…
तुम फिर से कहो तो होली का एक और रंग रच दें,
प्रयागराज की फिज़ा में मोहब्बत का ढंग रच दें।
संगम की धार पे जब बादल गुलाबी छाएँगे,
हम भीगी सी दुआओं में तेरे नाम जप जाएँगे।
अरैल की शाम में जब ठंडी हवा छुएगी,
रंगों से ज्यादा तेरी याद हमें रंग जाएँगी।
दारागंज की छत पर बैठ फाग जो छेड़ेंगे,
हर सुर में तेरे हँसने की आहट सजा जाएँगे।
चौक की रौनक में उड़ता जब अबीर सुनहरा,
तेरी पलकों पे हल्का सा गुलाल लगा जाएँगे।
अलोपी की देहरी पर चढ़ेगा आज रंग अपना,
माथे की उस लकीर में भाग्य नया लिख जाएँगे।
मनकामेश्वर की घंटियाँ जब होरी संग बजेंगी,
भक्ति में भीगी धड़कन से दिल तेरा छू जाएँगे।
यूनिवर्सिटी के लॉन में दो पल चुपके बैठेंगे,
किताबों के पन्नों पर रंगों के ख़्वाब सजा जाएँगे।
नेतराम की जलेबी संग ठंडी ठंडाई पीकर,
मीठे-मीठे लम्हों में रिश्ते को पिघला जाएँगे।
गंगा आरती की लौ में जब रंग झिलमिल होगा,
दीपों की उस रौशनी में कल अपना रच जाएँगे।
बस इस होली तुम आ जाना मुस्काकर एक बार,
हम प्रयागराज के रंगों में इश्क़ अमर कर जाएँगे…
Kanha ✍️🥺🌸