आज वादा करते है,,,💞🤝
आज वादा करो अपने माँ-पापा से 🙏
कि सिर्फ़ नाम नहीं, उनका मान बढ़ाओगे,
उनकी चुप कुर्बानियों को शब्दों में नहीं,
अपने काम से समझाओगे।
बुढ़ापे में सहारा बनोगे,
और हर हाल में उनका सम्मान निभाओगे।
आज वादा करो अपने आप से 🪞
कि हालात चाहे जैसे भी हों,
खुद को गलत रास्तों पर नहीं ले जाओगे,
हार कर भी मेहनत छोड़ोगे नहीं,
और अपनी क़ीमत कभी
किसी और से तय नहीं करवाओगे।
आज वादा करो अपने दोस्तों से ❤️
कि मतलब से नहीं,
दिल से रिश्ते निभाओगे,
उनकी जीत में तालियाँ बनोगे,
और हार में
खामोश सहारा बनकर खड़े रहोगे।
आज वादा करो समाज से 🤝
कि गलत होते देखकर
चुप नहीं रहोगे,
कमज़ोर की आवाज़ बनोगे,
और इंसानियत को
कभी शर्मिंदा नहीं होने दोगे।
आज वादा करो अपने कर्म से 🔥
कि मेहनत से भागोगे नहीं,
ईमानदारी से समझौता नहीं करोगे,
और जो भी करोगे
उसे ऐसा करोगे
कि खुद पर नाज़ हो सके।
आज वादा करो अपने भविष्य से 🌱
कि डर से नहीं,
हौसले से फैसले लोगे,
और एक दिन
पीछे मुड़कर कह सकोगे
हाँ, मैंने अपने हर वादे को निभाया...!!
💗🥀𓂃
мєєт...✍️
🥰1
इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएँ
हम तिरे सर की क़सम झूट ही खाने लग जाएँ!!
तू ने क़सम मय-कशी की खाई है 'ग़ालिब'
तेरी क़सम का कुछ ए'तिबार नहीं है!!
तर्क-ए-सितम पे वो जो क़सम खा के रह गए
अरमान दिल में अर्ज़-ए-तमन्ना के रह गए!!
तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म की क़सम
चैन से हैं तेरे सितम की क़सम!!
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है!!
अब तुम कभी न आओगे यानी कभी कभी
रुख़्सत करो मुझे कोई वादा किए बग़ैर!!
एक इक बात में सच्चाई है उस की लेकिन
अपने वादों से मुकर जाने को जी चाहता है!!
और कुछ देर सितारो ठहरो
उस का व'अदा है ज़रूर आएगा!!
तेरे वादे को कभी झूट नहीं समझूँगा
आज की रात भी दरवाज़ा खुला रक्खूँगा!!
था व'अदा शाम का मगर आए वो रात को
मैं भी किवाड़ खोलने फ़ौरन नहीं गया!!
वो फिर वादा मिलने का करते हैं यानी
अभी कुछ दिनों हम को जीना पड़ेगा!!
झूटे वादे भी नहीं करते आप
कोई जीने का सहारा ही नहीं!!
आप ने झूटा व'अदा कर के
आज हमारी उम्र बढ़ा दी!!
वो और वा'दा वस्ल का क़ासिद नहीं नहीं
सच सच बता ये लफ़्ज़ उन्ही की ज़बाँ के हैं!!
मान लेता हूँ तेरे वादे को
भूल जाता हूँ मैं कि तू है वही!!
आप की क़समों का और मुझ को यक़ीं
एक भी वादा कभी पूरा किया!!
Promise day
हम तिरे सर की क़सम झूट ही खाने लग जाएँ!!
तू ने क़सम मय-कशी की खाई है 'ग़ालिब'
तेरी क़सम का कुछ ए'तिबार नहीं है!!
तर्क-ए-सितम पे वो जो क़सम खा के रह गए
अरमान दिल में अर्ज़-ए-तमन्ना के रह गए!!
तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म की क़सम
चैन से हैं तेरे सितम की क़सम!!
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है!!
अब तुम कभी न आओगे यानी कभी कभी
रुख़्सत करो मुझे कोई वादा किए बग़ैर!!
एक इक बात में सच्चाई है उस की लेकिन
अपने वादों से मुकर जाने को जी चाहता है!!
और कुछ देर सितारो ठहरो
उस का व'अदा है ज़रूर आएगा!!
तेरे वादे को कभी झूट नहीं समझूँगा
आज की रात भी दरवाज़ा खुला रक्खूँगा!!
था व'अदा शाम का मगर आए वो रात को
मैं भी किवाड़ खोलने फ़ौरन नहीं गया!!
वो फिर वादा मिलने का करते हैं यानी
अभी कुछ दिनों हम को जीना पड़ेगा!!
झूटे वादे भी नहीं करते आप
कोई जीने का सहारा ही नहीं!!
आप ने झूटा व'अदा कर के
आज हमारी उम्र बढ़ा दी!!
वो और वा'दा वस्ल का क़ासिद नहीं नहीं
सच सच बता ये लफ़्ज़ उन्ही की ज़बाँ के हैं!!
मान लेता हूँ तेरे वादे को
भूल जाता हूँ मैं कि तू है वही!!
आप की क़समों का और मुझ को यक़ीं
एक भी वादा कभी पूरा किया!!
Promise day
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पहले वो वक़्त को अपना बना के गया है
फिर हर लम्हे को मुझसे चुरा के गया है
हँसता रहा सामने, दिल में साज़िश लिए
मेरी सादगी को हथियार बना के गया है
ऑनलाइन था तो बातें सितारों सी थीं
ऑफ़लाइन रहा तो ख़ुदा के हवाले गया है
वो रोज़ कहता था “तू मेरा सब कुछ है”
और फिर मुझे ही सब कुछ सिखा के गया है
मेरे यक़ीन को बाज़ार में बेच आया
वो झूठ को रिश्तों का नाम दे के गया है
मैंने जो माँगा था सिर्फ़ थोड़ा सा सुकून
वो बदले में रातों का ज़हर दे के गया है
हम चुप रहे तो हमें कायर समझ लिया
वो शोर को हक़ीक़त का पर दे के गया है
हर बार कहा उसने “मैं साथ हूँ तेरे”
और हर मोड़ पे मुझे अकेला कर गया है
अगर ये ग़ज़ल किसी महफ़िल में पढ़ी जाए
यक़ीन मान, सन्नाटों को भी रुला जाएगा
फिर हर लम्हे को मुझसे चुरा के गया है
हँसता रहा सामने, दिल में साज़िश लिए
मेरी सादगी को हथियार बना के गया है
ऑनलाइन था तो बातें सितारों सी थीं
ऑफ़लाइन रहा तो ख़ुदा के हवाले गया है
वो रोज़ कहता था “तू मेरा सब कुछ है”
और फिर मुझे ही सब कुछ सिखा के गया है
मेरे यक़ीन को बाज़ार में बेच आया
वो झूठ को रिश्तों का नाम दे के गया है
मैंने जो माँगा था सिर्फ़ थोड़ा सा सुकून
वो बदले में रातों का ज़हर दे के गया है
हम चुप रहे तो हमें कायर समझ लिया
वो शोर को हक़ीक़त का पर दे के गया है
हर बार कहा उसने “मैं साथ हूँ तेरे”
और हर मोड़ पे मुझे अकेला कर गया है
अगर ये ग़ज़ल किसी महफ़िल में पढ़ी जाए
यक़ीन मान, सन्नाटों को भी रुला जाएगा
🥀💔
Kanha ✍️🥺
👍1🥰1
मोहल्ले की मोहब्बत का भी अजीब फ़साना है,
चार घर की दूरी है ओर बीच मे सारा जमाना हें !
🥀
चार घर की दूरी है ओर बीच मे सारा जमाना हें !
🥀
❤1🎉1
पाया है उन रातों में हमने,
कि सोना आसान कहाँ होता है,,,
जब दिल के कोने-कोने में
अनकहे दर्द का मकान होता है।
तकिये भीग जाते हैं खामोशी से,
आँसू बोलते हैं,लफ़्ज़ गुम होते हैं,
जिन्हें दुनिया समझ न पाई कभी,
वो दर्द सिर्फ़ रातों को मालूम होते हैं।
दिन में हँसना आदत बन जाती है,
रात में खुद से सामना होता है,
पाया है उन रातों में हमने,
कि सोना....
सच में आसान कहाँ होता है...!!
कि सोना आसान कहाँ होता है,,,
जब दिल के कोने-कोने में
अनकहे दर्द का मकान होता है।
तकिये भीग जाते हैं खामोशी से,
आँसू बोलते हैं,लफ़्ज़ गुम होते हैं,
जिन्हें दुनिया समझ न पाई कभी,
वो दर्द सिर्फ़ रातों को मालूम होते हैं।
दिन में हँसना आदत बन जाती है,
रात में खुद से सामना होता है,
पाया है उन रातों में हमने,
कि सोना....
सच में आसान कहाँ होता है...!!
💞🥀🌙
мєєт...✍️
❤1👍1🎉1
मैं उसे क्या कहूँ कि जब वो किसी और से बात करती है,
मेरे सीने में कोई चीज़ रोज़ मरती है…
मैं हँस तो लेता हूँ, मगर भीतर कहीं
हर एक साँस उसकी आवाज़ से डरती है…
उसे हक़ है हँसने का, बातें करने का,
पर ये दिल क्यों हर बार बग़ावत करती है…
एकतरफ़ा सही, मगर बेइंतहा चाहता हूँ उसे,
ये मोहब्बत मेरी नहीं, मेरी किस्मत करती है…तो
मैंने कभी रोका नहीं उसके रास्तों को,
बस मेरी आँखें हर मोड़ पर शर्मिंदा रहती हैं…
जब उसका नाम किसी और की ज़ुबाँ परक्या है आता है,
मेरी रगों में चुपचाप आग-सी भरती है…
मैंने चाहा था बस इतना कि वो मेरा होमैं है जाए,
मगर हर दुआ मेरी आधी ही उतरती है…
शायद मैं ही उसकी मोहब्बत के क़ाबिल न था,
इसी बात से मेरी रातें बिखरती हैं…
वो किसी और के साथ खुश है—ये सोचकर,
मेरी आत्मा तक सिसक-सिसक के रोती है…
मैं उसे देख तो सकता हूँ, पा नहीं सकता,
यही बात मेरी आँखों को हर रोज़ भिगोती है…
उसके लिए तो मैं बस एक नाम भर हूँ,
मगर मेरे लिए वही पूरी कायनात होती है…
कभी सोचा था वो मेरा दर्द समझेगी,
आज समझ आया—ख़ामोशी भी बेआवाज़ चोट करती है…
मैं आज भी उसे किसी और के साथ नहीं देख सकता,
क्योंकि मेरी मोहब्बत आज भी उतनी ही सच्ची है…
एकतरफ़ा ही सही, मगर आख़िर तक निभाऊँगा,
ये दिल है साहब—हार के भी उससे वफ़ा करती है…
कान्हा✍🏿
मेरे सीने में कोई चीज़ रोज़ मरती है…
मैं हँस तो लेता हूँ, मगर भीतर कहीं
हर एक साँस उसकी आवाज़ से डरती है…
उसे हक़ है हँसने का, बातें करने का,
पर ये दिल क्यों हर बार बग़ावत करती है…
एकतरफ़ा सही, मगर बेइंतहा चाहता हूँ उसे,
ये मोहब्बत मेरी नहीं, मेरी किस्मत करती है…तो
मैंने कभी रोका नहीं उसके रास्तों को,
बस मेरी आँखें हर मोड़ पर शर्मिंदा रहती हैं…
जब उसका नाम किसी और की ज़ुबाँ परक्या है आता है,
मेरी रगों में चुपचाप आग-सी भरती है…
मैंने चाहा था बस इतना कि वो मेरा होमैं है जाए,
मगर हर दुआ मेरी आधी ही उतरती है…
शायद मैं ही उसकी मोहब्बत के क़ाबिल न था,
इसी बात से मेरी रातें बिखरती हैं…
वो किसी और के साथ खुश है—ये सोचकर,
मेरी आत्मा तक सिसक-सिसक के रोती है…
मैं उसे देख तो सकता हूँ, पा नहीं सकता,
यही बात मेरी आँखों को हर रोज़ भिगोती है…
उसके लिए तो मैं बस एक नाम भर हूँ,
मगर मेरे लिए वही पूरी कायनात होती है…
कभी सोचा था वो मेरा दर्द समझेगी,
आज समझ आया—ख़ामोशी भी बेआवाज़ चोट करती है…
मैं आज भी उसे किसी और के साथ नहीं देख सकता,
क्योंकि मेरी मोहब्बत आज भी उतनी ही सच्ची है…
एकतरफ़ा ही सही, मगर आख़िर तक निभाऊँगा,
ये दिल है साहब—हार के भी उससे वफ़ा करती है…
कान्हा✍🏿
🥰2
उसके हाथ में थे, मेरे खत के हजार टुकड़े,
मेरे एक सवाल के वो कितने जवाब लाई थी।
मेरे एक सवाल के वो कितने जवाब लाई थी।
🥀💔
kanha✍🥺
❤1🥰1
जब फुरसत मिले चाँद से
मेरे दर्द की कहानी पूछ लेना,
सिर्फ एक वो ही है मेरा हमराज
तेरे जाने के बाद।
न लफ़्ज़ों से लहू बहता है
न किताबें बोल पाती हैं,
मेरे दर्द के दो ही गवाह थे
दोनों ही बेजुबान निकले।
अब ये न पूछना कि ये
अल्फ़ाज़ कहाँ से लाता हूँ,
कुछ चुराता हूँ दर्द दूसरों के
कुछ अपनी सुनाता हूँ।
कान्हा🥺
🥰2
मैंने सीखा ही नहीं किसी को छोड़ देना 🤍
मगर हाँ मुझे अच्छे से आता है लोगो को ‘जाने देना’ 🚶♂️🥀
मगर हाँ मुझे अच्छे से आता है लोगो को ‘जाने देना’ 🚶♂️🥀
❤2👍1
मुझसे मेरा दर्द अब बंया नहीं होता मुर्शीद,
एक फकीर रखूंगा अपनी आह सुनाने के लिये.
एक फकीर रखूंगा अपनी आह सुनाने के लिये.
🥰1🎉1
चलो अच्छा है, अब धुंध पड़ने लगी है,
वरना दूर तक ताकती रहती थी निगाहें तुम्हें.
🖤
वरना दूर तक ताकती रहती थी निगाहें तुम्हें.
🖤
👍1🥰1
उम्मीदों के दामन मैं जिंदा है हम
वरना जीने की चाहत कहा है
तुमसे मिलने की आरजू लिए
फिरते है हम दर ब दर
वरना इस लाश के नसीब मैं
कबर भी कहा है 🥀🖤❣️
वरना जीने की चाहत कहा है
तुमसे मिलने की आरजू लिए
फिरते है हम दर ब दर
वरना इस लाश के नसीब मैं
कबर भी कहा है 🥀🖤❣️
❤1👍1
मेरी दुआओं में उसका ही पैग़ाम था,
हर साँस पर जैसे उसी का इल्ज़ाम था।
मैंने तो चाहा था बस उसका साथ उम्र भर,
उसे लगा शायद ये कोई अधूरा-सा ख़्वाब था।
वो मेरी राधा, मैं उसका श्याम नहीं बन सका,
शायद मोहब्बत में मेरा ही कोई कम मुकाम था।.
इतिहास ने फिर वही मोड़ दिखाया हमें,
मिलन से पहले जुदाई का ही इंतज़ाम था।.
कहते हैं राधा के नसीब में श्याम था,
मेरे हिस्से बस तन्हाई का जाम था।
“जान, अगर आप यही चाहते हैं तो ठीक है…”
ये कह दिया मैंने, क्योंकि प्यार मेरा ही नाम था।.
आपने चाँद-तारे नहीं माँगे थे मुझसे,
बस थोड़ी-सी ख़ुशी… और वो भी मेरे बस के बाहर काम था।
ना शिकवा है अब, ना कोई इल्ज़ाम है,
मेरी मोहब्बत गुमनाम सही… पर सच्ची हर शाम है।
हर साँस पर जैसे उसी का इल्ज़ाम था।
मैंने तो चाहा था बस उसका साथ उम्र भर,
उसे लगा शायद ये कोई अधूरा-सा ख़्वाब था।
वो मेरी राधा, मैं उसका श्याम नहीं बन सका,
शायद मोहब्बत में मेरा ही कोई कम मुकाम था।.
इतिहास ने फिर वही मोड़ दिखाया हमें,
मिलन से पहले जुदाई का ही इंतज़ाम था।.
कहते हैं राधा के नसीब में श्याम था,
मेरे हिस्से बस तन्हाई का जाम था।
“जान, अगर आप यही चाहते हैं तो ठीक है…”
ये कह दिया मैंने, क्योंकि प्यार मेरा ही नाम था।.
आपने चाँद-तारे नहीं माँगे थे मुझसे,
बस थोड़ी-सी ख़ुशी… और वो भी मेरे बस के बाहर काम था।
ना शिकवा है अब, ना कोई इल्ज़ाम है,
मेरी मोहब्बत गुमनाम सही… पर सच्ची हर शाम है।
🥀💔
कान्हा✍🥺
🥰3
प्रयागराज नागेश्वर नाथ महादेव मंदिर,,, कि कुछ तस्वीरें
यह है प्रयागराज नागेश्वर नाथ महादेव मंदिर,,,
यहां पर श्रद्वालुओं की मान्यता
है कि इस मंदिर परिसर में आके ताला
लगाने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण
होती है,,,
तो इस पर कुछ लिखा है,,,
कि हो जाती है अक्सर भक्तों
की मनोकामना पूरी,
जब दिल से निकले अरदास,
और नीयत हो सच्ची
ना शब्दों की ज़रूरत,
ना दिखावे का शोर,
भोले समझ लेते हैं,
हर आंसू, हर एक इच्छा....!!
हर हर महादेव ❤️🙏🕉️
мєєт...✍️
❤1👍1🥰1