🌸💖 𝑾𝒐𝒓𝒍𝒅 𝑳𝒊𝒇𝒆 𝑺𝒉𝒂𝒚𝒓𝒊 💖🌸
635 subscribers
1.17K photos
52 videos
1 file
19 links
💫💞 🅆🄾🅁🄻🄳 🄻🄸🄵🄴 🅂🄷🄰🅈🅁🄸 💞💫
🌹 “Jahan Har Lafz Mein Ek Ehsaas Chhupa Hai...” 🌹

Owner ---khalnayak (@khalnayakji92)
Download Telegram
1
महल छोड़ के आई थीं कैलाश की राह में,
दौलत भी झुकी देख के उस चाह की राह में।
पत्थर भी पिघल जाते हैं सच्चे से इश्क़ पर,
पार्वती ने जीत लिया शिव की निगाह में।
2
सिंहासन से बेहतर उन्हें शंकर का धाम लगा,
सच्चा जो था प्रेम वही उनका मुकाम लगा।
सोनें के महल क्या हैं भला भस्म के आगे,
कैलाश की मिट्टी भी उन्हें चाँद सा नाम लगा।
3
त्यागों की तपिश से ही वो गौरी बनीं यहाँ,
विरहों की अगन में ही उजियारी बनीं यहाँ।
शंकर के लिए राज भी ठुकरा दिया हँसकर,
प्रेमों की किताबों में वो पंक्ति बनीं यहाँ।
4
ना हार गहने माँगे, ना चाँदी की आस की,
बस एक झलक चाही थी भोले के वास की।
कैलाश की ठंडी हवा दुल्हन बनी उनकी,
ये रीत है सच्चे प्रेम की, ये बात ख़ास की।
5
तप करके जो माँगा वो महादेव मिले उन्हें,
साँसों के हर सुर में शिव-सेव मिले उन्हें।
राज्य सभी छोटे पड़े उस एक मिलन पर,
कैलाश के पत्थर भी अभिषेक मिले उन्हें।

Bhairav
❤1👍1💯1
निमंत्रण पत्र स्वीकार करे...🙇❤️

हर हर महादेव 💗
❤1🥰1
तेरे नाम की मेंहदी से तक़दीर सजा लूँ,
तेरे ही ख़यालों से हर रात बसा लूँ।
तू हाँ तो कहे एक दफ़ा मंद-सी हँसी में,
मैं खुद को तेरे नाम का वरदान बना लूँ।

कैलाश भी झुकेगा हमारे मिलन पर,
संसार रुकेगा हमारे वचन पर।
तू साथ रहे बस यही मांग है मेरी,
शिव-शक्ति सा प्रेम रहे हर जनम पर।

Bhairav
❤1👍1🥰1😁1
प्रेम ले आता है,खुद कैलाश तक
वरना, महलों का सुख कौन त्यागता है..


सभी को महाशिवरात्रि महापर्व
की हार्दिक शुभकामनाएं...💗✨🙏

हर हर महादेव ❤️🍀
👍2❤1
Public demand
Repost...💗


कौन जात हो भाई...?

दलित है साहब..!

नहीं मतलब किसमें आते हो..?

आपकी गाली में आते हैं..!
गंदी नाली में आते है..!
और अलग की हुई थाली में आते है

मुझे लगा हिन्दू में आते हो...?

आता हूँ ना साहब!
पर आपके चुनाव में

क्या खाते हो भाई...?

जो एक दलित खाता है साहब..!

नहीं मतलब क्या क्या खाते हो..?

आपसे मार खाता हूं
कर्ज का भार खाता हूं
और तंगी में नून (नमक) तो
कभी अचार खाता हूं साहब..!

नहीं मुझे लगा कि मुर्गा खाते हो

खाता हूं ना साहब..!
पर आपके चुनाव में

क्या पीते हो भाई..?

जो एक दलित पीता हैं साहब..!

नहीं मतलब क्या क्या पीते हो...?

छुआ छूत का गम,
टूटे अरमानों का दम
और नंगी आंखों से देखा गया
सारा भ्रम साहब...!

मुझे लगा शराब पीते हो...?

पीता हुं ना साहब...!
पर आपके चुनाव में

क्या मिला है भाई...?

जो दलितों को मिलता है साहब

नहीं मतलब क्या क्या मिला है...?

जिल्लत भरी जिंदगी, आपकी छोड़ी
हुई गंदगी...
और तिस पर आप जैसे पर
जीवियों की बंदगी साहब...!

मुझे लगा वादे मिले है...?

मिलते है ना साहब...!
पर आपके चुनाव में

क्या क्या किया है भाई...?

जो दलित करता है साहब..!

नहीं मतलब क्या क्या किया है...?

सौ दिन तालब में काम किया
पसीने से तर सुबह को शाम किया
और आते जाते ठाकुरों को सलाम
किया साहब...!

मुझे लगा कोई बड़ा काम किए हो..?

किया है ना साहब,
आपके चुनाव का प्रचार

नोट ~~इस लेख का उद्देश्य किसी
की धार्मिक एवं जातिगत भावनाओं
को ठेस पहुंचाना नहीं है
..❤️😊

इस लेख में चुनाव प्रचार
के दौरान गरीबों से किए गए झूठे वादों
कसमों की एक छोटी सी झलक को
दर्शाया गया है...❤️🙏



мєєт...✍️
❤1👏1
तुझ से बिछड़ के यूँ तो बहुत जी उदास है
लेकिन ये लग रहा है कि तू मेरे पास है,

वीराँ है मेरा घर भी उसी तरह दोस्तो,
कॉलेज में जिस तरह कोई उर्दू क्लास है!!



🤍
❤1👍1🥰1🎉1
मुझे कहती हो मैं सब भूल जाऊँ,
ख़ुद अब भी मेरी ग़ज़लें पढ़ रही हो!!



🤍
🥰2❤1
Good morning 🌅
🥰2❤1
Thanks sir bhairav sir 😁🙏✅
👍2🥰1
क्या खरीदोगे ये बाज़ार बहुत महंगा है
प्यार की ज़िद न करो प्यार बहुत महंगा है

चाहने वालों की एक भीड़ लगी रहती है
आज कल आपका दीदार बहुत महंगा है

इश्क़ में वादा निभाना कोई आसान नहीं
करके पछताओगे इक़रार बहुत महंगा है

आज तक तुमने खिलौने ही ख़रीदे होंगे
दिल है ये दिल मेरे सरकार बहुत महंगा है!!




🤍
👍1🥰1
वो जा चुका हैं,
अगर छोड़ कर मुझे तन्हा,...


तो फ़िर ये कौन भटकता हैं,
शब-ओ-रोज़ मेरी आँखों में...?



प्रियांशु
❤2👍1😁1
Are Are कहां जा रहे हो,
Post पर आ ही गए हो तो
थोड़ा पढ़ कर ही जाओ,,,,


क्या हुआ बेटी, आज अलग सी क्यों हो...?

पीरियड्स हैं साहब,,,

नहीं मतलब ठीक से बताओ, क्या बीमारी है...?

बीमारी नहीं साहब,
कुदरत का नियम है,
पर आपके घर में
इसे गुनाह समझा जाता है साहब,,,

मुझे लगा कमजोरी होगी...?

लगती है ना साहब,,,
पर सिर्फ आपकी सोच में,,,

रसोई में क्यों नहीं आई आज...?

मना है साहब,,,

नहीं मतलब किसने मना किया...?

आपकी परंपराओं ने,
डर से भरी सीख ने,
और “छूना मत” कहने वाली
ज़ुबानों ने साहब,,,

मुझे लगा आराम कर रही हो...?

करती हूँ ना साहब,,,
पर शर्म ओढ़कर,,,,

पूजा क्यों नहीं करोगी आज...?

क्योंकि अपवित्र हूँ साहब,,,

नहीं मतलब ऐसा कौन कहता है...?

वही समाज साहब,
जो स्त्री से जन्म लेता है
और उसी स्त्री के
दर्द से नज़र चुरा लेता है,,,

मुझे लगा भगवान नाराज़ होंगे...?

नाराज़ नहीं साहब,,,
बस हम इंसान
समझदार नहीं हुए,,,

स्कूल में ये सब क्यों नहीं बताया गया...?

क्योंकि चुप्पी सिखाई गई साहब,,,

नहीं मतलब बताना ज़रूरी नहीं था...?

ज़रूरी था साहब,
ताकि हर लड़की
अपने दर्द को
अपराध न समझे,,,

पीरियड्स में लड़की क्या सहती है...?

जो दिखता नहीं साहब,,,,

नहीं मतलब क्या-क्या...?

दर्द तो शरीर में होता है,
पर चोट शब्दों से लगती है,
“गंदी”,अलग बैठो
जैसी बातों से साहब,,,,

मुझे लगा वो आदत डाल लेती है...?

डालती है ना साहब,,,
पर चुप रहने की,,,

लड़के इस पर क्या सोचते हैं...?

जो उन्हें सिखाया जाता है साहब,,,

नहीं मतलब तुम क्या सोचते हो...?

पहले मज़ाक उड़ाया,
फिर समझा साहब,,,
जिस प्रक्रिया से
ज़िंदगी जन्म लेती है,
वो शर्म की नहीं,
सम्मान की हक़दार है साहब,,,

पीरियड्स में लड़की क्या चाहती है...?

दया नहीं साहब,,,

नहीं मतलब फिर क्या...?

समझ,
सम्मान,
और इतना हक़
कि वो खुलकर कह सके
मैं गंदी नहीं,
मैं स्त्री हूँ साहब,,,

समाज कब बदलेगा...?

जिस दिन सवाल बदलेंगे साहब,,

नहीं मतलब कैसे...?

जब छुपाओ की जगह
“समझाओ” होगा,
जब हँसी की जगह
संवेदनशीलता होगी,
और जब पीरियड्स
सामान्य बात मानी जाएगी साहब,,,

आख़िर पीरियड्स हैं क्या...?

ज़िंदगी की शुरुआत साहब,,,

फिर इतनी चुप्पी क्यों...?

क्योंकि हमने
सच को
शर्म में बाँध दिया है साहब...!!

नोट ~~
यह लेख पीरियड्स को लेकर
समाज में फैली चुप्पी,
भ्रम और भेदभाव
की एक सच्ची झलक है...❤️🙏


мєєт...✍️
❤1🎉1
कुछ चूड़ियां टूट जाती है...❤️✍️


फौजी 🇮🇳
👍1
वाह…......
आज फिर तुमने खामोशी से मुझे आज़माया है,
मेरी वफ़ा को शक की चादर में लपेटकर भुलाया है…

मैंने हर दुआ में बस तुम्हारा ही नाम दोहराया है,
तुमने हर बात में मेरा ही कसूर बताया है…

कितनी रातें जागकर दिल को बहलाया है,
तेरी यादों को सीने से लगाकर खुद को समझाया है…

मेरे लफ़्ज़ों में सिर्फ़ मोहब्बत ही तो समाई थी,
फिर क्यों तुमने हर एहसास को झूठा बताया है…

मैंने तेरे बिना भी तेरे साथ होने का भ्रम सजाया है,
तन्हाई को भी तेरे नाम का हमसफ़र बनाया है…

और तुम कहते हो मैंने दिल दुखाया है…
मैंने तो हर दर्द को चुपचाप अपना बनाया है…

तेरी नाराज़गी भी सर आँखों पर रख ली मैंने,
तूने मगर हर बार मुझे ही बेवफ़ा ठहराया है…

अब भी अगर लौट आओ तो शिकवा नहीं होगा,
ये दिल आज भी सिर्फ़ तुम्हें ही चाहता आया है…

तुम्हें गुस्सा था, मुझे मोहब्बत थी…
तुमने रिश्ता छोड़ा, मैंने उसे आख़िरी सांस तक निभाया है…
🤩
🥺🥀

Kanha✍️🤩
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤1🥰1
जो लोग बेटी के जन्म
को बोझ समझते है,उनके
लिए मीत की तरफ से थोड़ी
बहुत पंक्तियां,,,,


कौन हो तुम बेटी...?

एक घर की किस्मत हूँ साहब,,,

नहीं मतलब घर में क्या लगती हो...?

खर्च लगती हूँ,
बोझ समझी जाती हूँ,
और पैदा होते ही
पराई कही जाती हूँ साहब,,,

मुझे लगा लक्ष्मी हो...?

होती हूँ ना साहब,,,
पर आपके घर में नहीं,,,

पढ़ाई क्यों करानी है इसे...?

क्योंकि सपना है साहब,,,

नहीं मतलब इतना क्यों पढ़ाओगे...?

कल दहेज बढ़ जाएगा,
आज सवाल उठ जाएँगे,
और समाज की पंचायत में
नाम कटघरे में आ जाएगा साहब,,,

मुझे लगा हक़ है उसका....?

है ना साहब,,,
पर आपकी सोच में नहीं,,,

बेटी क्या-क्या लाएगी...?

जो एक बेटी लाती है साहब,,,

नहीं मतलब क्या सामान लाएगी...?

माँ की ममता लाएगी,
बाप की इज़्ज़त लाएगी,
अपनी हँसी दबाकर
पूरे घर की खुशियाँ लाएगी साहब,,,

मुझे लगा दहेज लाएगी...?

लाएगी ना साहब,,,
पर आपकी मांग में,,,

शादी के बाद क्या होगा...?

जो हर बेटी के साथ होता है साहब,,,

नहीं मतलब साफ़-साफ़ बताओ...?

तानों की चादर ओढ़ेगी,
तुलनाओं में तोली जाएगी,
और “कम लाई है” कहकर
हर रोज़ थोड़ी-थोड़ी मारी जाएगी साहब,,,

मुझे लगा सम्मान मिलेगा...?

मिलता है ना साहब,,,
पर आपके भाषणों में,,,

अगर बेटी पैदा न होती तो...?

तो चैन की नींद आती साहब,,,

नहीं मतलब क्या सच में...?

न खर्च का डर होता,
न समाज का ज़हर,
न दहेज की चिंता,
न सवालों का कहर साहब,,,

मुझे लगा अफ़सोस होता...?

होता है ना साहब,,,
पर सिर्फ दूसरों के घर में,,,

बेटे और बेटी में फर्क क्यों...?

क्योंकि रिवाज़ है साहब,,,

नहीं मतलब इंसानियत कहाँ है...?

वो किताबों में पढ़ाई जाती है,
भाषणों में सुनाई जाती है,
और बेटी के जन्म पर
दम तोड़ जाती है साहब,,,

बेटी क्या सच में बोझ है...?

नहीं साहब,,,

तो फिर बोझ कौन है...?

वो सोच जो बेटी को तौलती है,
वो ज़बान जो उसे पराया कहती है,
और वो समाज
जो उसे जीने से पहले
डरा देता है साहब,,,

नोट ~~
इस रचना का उद्देश्य किसी की
धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक
भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है।
यह लेख समाज में फैली
उस सोच को दर्शाता है
जिसमें आज भी
बेटी को बोझ
समझा जाता है...❤️🙏


мєєт... ✍️
👍1❤‍🔥1