मतला:
तेरे जाने के बाद अजनबी हो गया हूँ मैं,
अपने ही घर में अब पराई हो गया हूँ मैं।
---
धूल पर लिखे नाम मिट गए बारिश में,
तेरे ख़त के भी अब साए हो गया हूँ मैं।
---
आँख ने चाहा था ख़्वाब तेरा देखना,
पर हर ख़्वाब से परहेज़ी हो गया हूँ मैं।
---
तेरे जाने से रुक गया है सफ़र जैसे,
समय की राह में पत्थरी हो गया हूँ मैं।
---
याद तुझसे भी ज़्यादा सताती है रातें,
चाँद की धूप में सियाही हो गया हूँ मैं।
---
मक़्ता:
भैरव की मोहब्बत से कोई सीख ले सके,
किताब-ए-दर्द की तफ़्सीरी हो गया हूँ मैं।
भैरव
तेरे जाने के बाद अजनबी हो गया हूँ मैं,
अपने ही घर में अब पराई हो गया हूँ मैं।
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धूल पर लिखे नाम मिट गए बारिश में,
तेरे ख़त के भी अब साए हो गया हूँ मैं।
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आँख ने चाहा था ख़्वाब तेरा देखना,
पर हर ख़्वाब से परहेज़ी हो गया हूँ मैं।
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तेरे जाने से रुक गया है सफ़र जैसे,
समय की राह में पत्थरी हो गया हूँ मैं।
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याद तुझसे भी ज़्यादा सताती है रातें,
चाँद की धूप में सियाही हो गया हूँ मैं।
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मक़्ता:
भैरव की मोहब्बत से कोई सीख ले सके,
किताब-ए-दर्द की तफ़्सीरी हो गया हूँ मैं।
भैरव
🥰2
ग़ज़ल
ग़मों को कभी भी छुपाया नहीं है।
कसम से सभी को बताया नहीं है।
मिला जो नसीबों से हमको यहाँ पर।
बिना बात के यों लुटाया नहीं है।
भलाई किये जा सभी की तू जग में।
इसे फिर कभी भी जताया नहीं है।
भले आदमी हो कहा है सभी से।
कहो तुम किसी को सताया नहीं है।
मदद के लिए ही खड़े हो सदा तुम।
उठा के कभी भी गिराया नहीं है।
सही राह पर हम चले जा रहे है।
जहर तो किसी को पिलाया नहीं है।
कहे भैरव गैरत बची है जो मुझमें।
मिला जो सड़क पर उठाया नहीं है।
#भैरव
ग़मों को कभी भी छुपाया नहीं है।
कसम से सभी को बताया नहीं है।
मिला जो नसीबों से हमको यहाँ पर।
बिना बात के यों लुटाया नहीं है।
भलाई किये जा सभी की तू जग में।
इसे फिर कभी भी जताया नहीं है।
भले आदमी हो कहा है सभी से।
कहो तुम किसी को सताया नहीं है।
मदद के लिए ही खड़े हो सदा तुम।
उठा के कभी भी गिराया नहीं है।
सही राह पर हम चले जा रहे है।
जहर तो किसी को पिलाया नहीं है।
कहे भैरव गैरत बची है जो मुझमें।
मिला जो सड़क पर उठाया नहीं है।
#भैरव
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एक उम्मीद के सिवा और कुछ नहीं यहां
इस घर में रोशनी का यही इंतजाम है !!
इस घर में रोशनी का यही इंतजाम है !!
👍2🥰2
किसी की धड़कनों में अपना ही नाम सुन लूँ,
उसकी हर धड़कन में अपना ही इकरार देखूँ।
पलकों पे रखे हो वो मेरे ख्वाबों की खुशबू,
उसकी हर रात में अपना ही इंतज़ार देखूँ।
आईना भी शरमा जाए उसकी निगाहों से,
चेहरे पे मोहब्बत का ऐसा श्रृंगार देखूँ।
तड़प उसकी भी मेरी तरह बेचैन कर दे,
मिलने को वो करे मुझसे बातें हज़ार देखूँ।
भैरव
उसकी हर धड़कन में अपना ही इकरार देखूँ।
पलकों पे रखे हो वो मेरे ख्वाबों की खुशबू,
उसकी हर रात में अपना ही इंतज़ार देखूँ।
आईना भी शरमा जाए उसकी निगाहों से,
चेहरे पे मोहब्बत का ऐसा श्रृंगार देखूँ।
तड़प उसकी भी मेरी तरह बेचैन कर दे,
मिलने को वो करे मुझसे बातें हज़ार देखूँ।
भैरव
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विषय - समाज की कड़वी हकीकत 🌷
तुम भी इंसानियत की बात करते हो
भरे बाजार में, रिश्ते नीलाम करते हो
झूठ ही पसंद आया, तुम्हे सच के आगे
और सच्चे होने का, गुणगान करते हो
सजा हुआ होता है अंधेरा हर कोने में
क्या तुम कभी, रोशनी की परवाह करते हो
इंसानियत अगर होती जरा भी तुममें
तो क्यों ही धर्म के नाम पर, गुमराह करते हो
लोगों की आवाज तो, पहले ही दब चुकी है
परेशानी दूर के नाम पर भी, आघात करते हो
हर तरफ तो झूठ, फरेब, मक्कारी है
तब किसकदर बदलाव का दिलासा देते हो
भूखे लोग जो सड़कों पर, सोते है रोज रात
क्या उनकी भी कभी तुम, गुहार सुनते हो
नफरत से क्या ही मिलेगा, बताओ मुझे जरा
प्यार के नाम पर भी, जीना दुश्वार करते हो
जो बदलना चाहता है हालत, वो बेहाल है
और तुम महंगी चादरों की, फरियाद करते हो
दूसरों का बुरा और, सिर्फ अपनी भलाई
ऐसे हो, और इंसानियत की बात करते हो 🆕💗
प्रियांशु ✍🏻✍🏻
🥰2👍1⚡1
जितनी जंजीर थी सब तोड़ के रख दी हमने,
अब उड़ानों का यहाँ आसमाँ बाक़ी है।
ख़ौफ़ के शहर में सच बोल दिया है खुलकर,
देखना ये है कि किस में ज़ुबाँ बाक़ी है।
तेरी दीवार गिराने को क़लम काफ़ी है,
हाथ कमज़ोर सही, पर यहाँ जान बाक़ी है।
हमने हर दौर में तूफ़ान से टक्कर ली है,
इस परिंदे की अभी और उड़ान बाक़ी है।
सर झुकाने की रिवायत को जला देंगे हम,
इस बग़ावत में अभी इम्तिहान बाक़ी है।
भैरव
अब उड़ानों का यहाँ आसमाँ बाक़ी है।
ख़ौफ़ के शहर में सच बोल दिया है खुलकर,
देखना ये है कि किस में ज़ुबाँ बाक़ी है।
तेरी दीवार गिराने को क़लम काफ़ी है,
हाथ कमज़ोर सही, पर यहाँ जान बाक़ी है।
हमने हर दौर में तूफ़ान से टक्कर ली है,
इस परिंदे की अभी और उड़ान बाक़ी है।
सर झुकाने की रिवायत को जला देंगे हम,
इस बग़ावत में अभी इम्तिहान बाक़ी है।
भैरव
🥰3❤1
दिल के टुकड़े मजबूर करते हैं
कलम चलाने को वरना,
हक़ीक़त में कोई भी खुद का
दर्द लिखकर खुश नहीं होता वरना।
छुपा लेते हैं लोग आँसू हँसी के पीछे अक्सर,
हर ज़ख़्म यूँ सरे-बाज़ार बयाँ होता नहीं वरना।
रातों की तन्हाई में दिल चीख़ता तो बहुत है,
दिन की रौशनी में ये हालात दिखते नहीं वरना।
हम भी मुस्कुराते फिरते हैं महफ़िलों में अक्सर,
भीतर का समंदर यूँ ठहरा हुआ होता नहीं वरना।
कुछ ख़्वाब थे जो टूट के बिखरे हैं आँखों में,
हर आदमी यूँ ख़ामोश सा रहता नहीं वरना।
कलम से जो बह निकला वही सच बन गया अपना,
दिल यूँ हर किसी के सामने खुलता नहीं वरना।
"आकाश" अपने जज़्बात यूँ काग़ज़ पे उतार देता है,
सीने में ये तूफ़ान कभी थमता नहीं होता वरना।
#आकाश
कलम चलाने को वरना,
हक़ीक़त में कोई भी खुद का
दर्द लिखकर खुश नहीं होता वरना।
छुपा लेते हैं लोग आँसू हँसी के पीछे अक्सर,
हर ज़ख़्म यूँ सरे-बाज़ार बयाँ होता नहीं वरना।
रातों की तन्हाई में दिल चीख़ता तो बहुत है,
दिन की रौशनी में ये हालात दिखते नहीं वरना।
हम भी मुस्कुराते फिरते हैं महफ़िलों में अक्सर,
भीतर का समंदर यूँ ठहरा हुआ होता नहीं वरना।
कुछ ख़्वाब थे जो टूट के बिखरे हैं आँखों में,
हर आदमी यूँ ख़ामोश सा रहता नहीं वरना।
कलम से जो बह निकला वही सच बन गया अपना,
दिल यूँ हर किसी के सामने खुलता नहीं वरना।
"आकाश" अपने जज़्बात यूँ काग़ज़ पे उतार देता है,
सीने में ये तूफ़ान कभी थमता नहीं होता वरना।
#आकाश
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दिल के टुकड़े मजबूर करते हैं
कलम चलाने को वरना,
हक़ीक़त में कोई भी खुद का
दर्द लिखकर खुश नहीं होता वरना।
छुपा लेते हैं लोग आँसू हँसी के पीछे अक्सर,
हर ज़ख़्म यूँ सरे-बाज़ार बयाँ होता नहीं वरना।
रातों की तन्हाई में दिल चीख़ता तो बहुत है,
दिन की रौशनी में ये हालात दिखते नहीं वरना।
हम भी मुस्कुराते फिरते हैं महफ़िलों में अक्सर,
भीतर का समंदर यूँ ठहरा हुआ होता नहीं वरना।
कुछ ख़्वाब थे जो टूट के बिखरे हैं आँखों में,
हर आदमी यूँ ख़ामोश सा रहता नहीं वरना।
कलम से जो बह निकला वही सच बन गया अपना,
दिल यूँ हर किसी के सामने खुलता नहीं वरना।
"आकाश" अपने जज़्बात यूँ काग़ज़ पे उतार देता है,
सीने में ये तूफ़ान कभी थमता नहीं होता वरना।
#आकाश
कलम चलाने को वरना,
हक़ीक़त में कोई भी खुद का
दर्द लिखकर खुश नहीं होता वरना।
छुपा लेते हैं लोग आँसू हँसी के पीछे अक्सर,
हर ज़ख़्म यूँ सरे-बाज़ार बयाँ होता नहीं वरना।
रातों की तन्हाई में दिल चीख़ता तो बहुत है,
दिन की रौशनी में ये हालात दिखते नहीं वरना।
हम भी मुस्कुराते फिरते हैं महफ़िलों में अक्सर,
भीतर का समंदर यूँ ठहरा हुआ होता नहीं वरना।
कुछ ख़्वाब थे जो टूट के बिखरे हैं आँखों में,
हर आदमी यूँ ख़ामोश सा रहता नहीं वरना।
कलम से जो बह निकला वही सच बन गया अपना,
दिल यूँ हर किसी के सामने खुलता नहीं वरना।
"आकाश" अपने जज़्बात यूँ काग़ज़ पे उतार देता है,
सीने में ये तूफ़ान कभी थमता नहीं होता वरना।
#आकाश
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अगर विवाह की शर्तों में से
( संभोग ) को हटा दिया जाए
तो कोई विवाह के लिए तैयार
नहीं होगा...!!
( संभोग ) को हटा दिया जाए
तो कोई विवाह के लिए तैयार
नहीं होगा...!!
ओशो...‼️
❤1👍1
𝐿 𝞲 𝟆 𝞮 :) 💫
किसी रोज अचानक से मर जाऊ तो हैरान मत होना
✨
क्यों की हम दर्द की उस दहलीज पर खड़े हे
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किसी रोज अचानक से मर जाऊ तो हैरान मत होना
✨
क्यों की हम दर्द की उस दहलीज पर खड़े हे
जहा लोग अक्सर पंखे से लटक जाते हे
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┼─•• -'🖤^
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🥰2😁1
पूतना जैसी नीयत लेकर भी,
यशोदा सा विश्वास माँगते हैं,,,
कंस जैसे कर्मों के बाद भी
कृष्ण से आशीष चाहते हैं,
शकुनी सी राजनीति खेलकर,
खुद को नीति का ज्ञाता कहते हैं
और रावण सा अहंकार पालकर,
राम का आदर्श बताते हैं...!!
यशोदा सा विश्वास माँगते हैं,,,
कंस जैसे कर्मों के बाद भी
कृष्ण से आशीष चाहते हैं,
शकुनी सी राजनीति खेलकर,
खुद को नीति का ज्ञाता कहते हैं
और रावण सा अहंकार पालकर,
राम का आदर्श बताते हैं...!!
जिनके ऊपर जिम्मेदारी नहीं
उन सभी को शुभ रात्रि ✨❤️
мєєт...✍️
👍1
मत करो कभी किसी से दिल दुखाने वाली बातें..
सुना है दिल पे निशाँ रह जाते हैं सदियों तक..
सुना है दिल पे निशाँ रह जाते हैं सदियों तक..
❤2💯1
जिस्म के रिश्ते को..
नजर नहीं लगा करती ..
उससे बस मन भरता है..
♥️
नजर नहीं लगा करती ..
उससे बस मन भरता है..
♥️
❤1🥰1
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बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
~जॉन एलिया
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बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
~जॉन एलिया
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