Don't have Telegram yet? Try it now!
http://www.epatrakaar.com/special-article-on-communal-violence-by-rohit-shrivastava/
दंगे ‘इन्सान’ नहीं ‘परिवार’ निगलते हैं: जो चलना सिखाते हैं, उनकी अर्थी उठवाते हैं!