*जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति से इनकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश है*
https://www.facebook.com/share/p/1EvaL98mDT/
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नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026:
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन और धरने के लिए अनुमति देने से दिल्ली पुलिस द्वारा अंतिम समय में इनकार किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसकी कड़ी निंदा की। बोर्ड ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों के मौलिक संवैधानिक अधिकार हैं और प्रशासनिक निर्णयों के माध्यम से इन पर अंकुश नहीं लगाया जाना चाहिए।
AIMPLB के प्रवक्ता और “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान के संयोजक डॉ. सैयद क़ासिम रसूल इलियास ने पिछले दस दिनों के दौरान तीन बार पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन का दौरा किया और थाना प्रभारी (SHO) तथा पुलिस उपायुक्त (DCP) को आश्वासन दिया कि धरने में शामिल होने वाले लोगों की संख्या निर्धारित सीमा के भीतर रहेगी। इन आश्वासनों के बावजूद, निर्धारित कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले यह कहते हुए धरने की अनुमति वापस ले ली गई कि पुलिस को बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की आशंका है।
बोर्ड ने इस निर्णय को एकतरफा और अनुचित बताया तथा कहा कि वह पहले भी निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन करते हुए जंतर-मंतर पर कई शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित कर चुका है।
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित धरना उसके राष्ट्रव्यापी “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान का पहला चरण था। इस अभियान का उद्देश्य समाज के वंचित और हाशिए पर पड़े वर्गों तथा अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों, के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन; भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं; जीवन, संपत्ति, गरिमा और सम्मान पर हमलों; मस्जिदों, मदरसों और मुस्लिम बस्तियों के विरुद्ध बुलडोज़र कार्रवाई; धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध; मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा; समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयासों; तथा वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने के प्रयासों जैसे मुद्दों की ओर जनता का ध्यान आकर्षित करना है।
बोर्ड ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा वर्ष 2029 तक भाजपा-शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने संबंधी बयान ने भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। मुसलमान मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा को अपने धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा मानते हैं। भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और भाषाओं वाला देश है तथा संविधान इस विविधता को संरक्षण प्रदान करता है। बोर्ड ने कहा कि इस विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली कोई भी नीति गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े करती है।
बोर्ड ने वंदे मातरम् के सभी अंतरों को अनिवार्य बनाने के प्रयासों पर भी आपत्ति जताई। उसने कहा कि देशभक्ति व्यक्त करने के साधन के रूप में किसी विशेष गीत के पूर्ण गायन को अनिवार्य बनाना धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।
देश की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक स्थिति का उल्लेख करते हुए बोर्ड ने कहा कि गरीबी, महँगाई, बेरोज़गारी, किसानों की समस्याओं और महिलाओं के विरुद्ध अपराध जैसे मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे समय में जनता का ध्यान इन बुनियादी मुद्दों से हटाकर धार्मिक और सांप्रदायिक मामलों की ओर मोड़ना राष्ट्रीय हित में नहीं है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान का उद्देश्य नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करना तथा देश में न्याय, स्वतंत्रता, समानता, मानवीय गरिमा और बंधुत्व का वातावरण मजबूत करना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति से इनकार के बावजूद राष्ट्रव्यापी अभियान अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।
*🎙️प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ता*
● मौलाना ओबैदुल्लाह खान आज़मी, उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
● श्री सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा अमीर, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद
● मौलाना असगर अली इमाम महदी सलाफी, उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा अमीर, जमीयत अहले हदीस
“संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्डhttps://www.facebook.com/share/p/1EvaL98mDT/
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नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026:
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन और धरने के लिए अनुमति देने से दिल्ली पुलिस द्वारा अंतिम समय में इनकार किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसकी कड़ी निंदा की। बोर्ड ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों के मौलिक संवैधानिक अधिकार हैं और प्रशासनिक निर्णयों के माध्यम से इन पर अंकुश नहीं लगाया जाना चाहिए।
AIMPLB के प्रवक्ता और “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान के संयोजक डॉ. सैयद क़ासिम रसूल इलियास ने पिछले दस दिनों के दौरान तीन बार पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन का दौरा किया और थाना प्रभारी (SHO) तथा पुलिस उपायुक्त (DCP) को आश्वासन दिया कि धरने में शामिल होने वाले लोगों की संख्या निर्धारित सीमा के भीतर रहेगी। इन आश्वासनों के बावजूद, निर्धारित कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले यह कहते हुए धरने की अनुमति वापस ले ली गई कि पुलिस को बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की आशंका है।
बोर्ड ने इस निर्णय को एकतरफा और अनुचित बताया तथा कहा कि वह पहले भी निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन करते हुए जंतर-मंतर पर कई शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित कर चुका है।
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित धरना उसके राष्ट्रव्यापी “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान का पहला चरण था। इस अभियान का उद्देश्य समाज के वंचित और हाशिए पर पड़े वर्गों तथा अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों, के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन; भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं; जीवन, संपत्ति, गरिमा और सम्मान पर हमलों; मस्जिदों, मदरसों और मुस्लिम बस्तियों के विरुद्ध बुलडोज़र कार्रवाई; धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध; मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा; समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयासों; तथा वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने के प्रयासों जैसे मुद्दों की ओर जनता का ध्यान आकर्षित करना है।
बोर्ड ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा वर्ष 2029 तक भाजपा-शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने संबंधी बयान ने भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। मुसलमान मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा को अपने धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा मानते हैं। भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और भाषाओं वाला देश है तथा संविधान इस विविधता को संरक्षण प्रदान करता है। बोर्ड ने कहा कि इस विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली कोई भी नीति गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े करती है।
बोर्ड ने वंदे मातरम् के सभी अंतरों को अनिवार्य बनाने के प्रयासों पर भी आपत्ति जताई। उसने कहा कि देशभक्ति व्यक्त करने के साधन के रूप में किसी विशेष गीत के पूर्ण गायन को अनिवार्य बनाना धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।
देश की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक स्थिति का उल्लेख करते हुए बोर्ड ने कहा कि गरीबी, महँगाई, बेरोज़गारी, किसानों की समस्याओं और महिलाओं के विरुद्ध अपराध जैसे मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे समय में जनता का ध्यान इन बुनियादी मुद्दों से हटाकर धार्मिक और सांप्रदायिक मामलों की ओर मोड़ना राष्ट्रीय हित में नहीं है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान का उद्देश्य नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करना तथा देश में न्याय, स्वतंत्रता, समानता, मानवीय गरिमा और बंधुत्व का वातावरण मजबूत करना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति से इनकार के बावजूद राष्ट्रव्यापी अभियान अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।
*🎙️प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ता*
● मौलाना ओबैदुल्लाह खान आज़मी, उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
● श्री सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा अमीर, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद
● मौलाना असगर अली इमाम महदी सलाफी, उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा अमीर, जमीयत अहले हदीस
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● मौलाना मुहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी, महासचिव, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
● मौलाना मुहम्मद उमरैन महफ़ूज़ रहमानी, सचिव, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
● मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी, महासचिव, जमीयत उलेमा-ए-हिंद
● डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास, प्रवक्ता, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा संयोजक, “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान
● मौलाना मुहम्मद उमरैन महफ़ूज़ रहमानी, सचिव, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
● मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी, महासचिव, जमीयत उलेमा-ए-हिंद
● डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास, प्रवक्ता, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा संयोजक, “संविधान बचाओ, देश बचाओ” अभियान
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*Denial of Permission for Dharna at Jantar Mantar is a Curbs on Freedom of Expression*
https://www.facebook.com/share/p/18B2Cdhbma/
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New Delhi, 17 September 2026:
The All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB) has expressed deep concern and strongly condemned the Delhi Police’s last-minute refusal to grant permission for the Board’s proposed protest dharna at Jantar Mantar. The Board stated that peaceful protest and freedom of expression are fundamental constitutional rights of citizens and should not be curtailed through administrative decisions.
Dr. Syed Qasim Rasool Ilyas, spokesperson of the AIMPLB and Convenor of the “Save the Constitution, Save the Nation” Campaign, visited Parliament Street Police Station three times during the past ten days and assured the SHO and DCP that the number of participants in the dharna would remain within the prescribed limit. Despite these assurances, permission for the dharna was withdrawn just one day before the scheduled programme on the grounds that the police apprehended the participation of a large number of people.
The Board termed the decision unilateral and inappropriate, pointing out that it has previously organised several peaceful demonstrations at Jantar Mantar while complying with all prescribed rules and conditions.
The Board clarified that the proposed dharna was the first phase of its nationwide “Save the Constitution, Save the Nation” Campaign. The campaign seeks to draw public attention to issues including violations of the fundamental rights of deprived and marginalised sections of society and minorities, particularly Muslims; incidents of mob lynching; attacks on life, property, dignity and honour; bulldozer actions against mosques, madrasas and Muslim localities; restrictions on religious and cultural freedoms; protection of Muslim Personal Law; attempts to introduce a Uniform Civil Code; and efforts to make Vande Mataram mandatory.
The Board said that the statement by the Union Home Minister regarding the implementation of a Uniform Civil Code in all BJP-ruled states by 2029 has raised fresh concerns regarding India’s religious and cultural diversity and the fundamental rights of citizens. Muslims consider the protection of Muslim Personal Law to be part of their religious and constitutional rights. India is a country of diverse religions, cultures and languages, and the Constitution provides protection to this diversity. Any policy that adversely affects this diversity, the Board stated, raises serious constitutional questions.
The Board also objected to attempts to make all the stanzas of Vande Mataram mandatory, stating that making the complete rendition of a particular song compulsory as a means of expressing patriotism raises important questions concerning religious freedom and civil liberties.
Referring to the prevailing economic and social situation in the country, the Board said that issues such as poverty, inflation, unemployment, farmers’ concerns and crimes against women require urgent attention. At such a time, diverting public attention from these fundamental issues towards religious and communal matters is not in the national interest.
The All India Muslim Personal Law Board stated that the objective of the “Save the Constitution, Save the Nation” Campaign is to create awareness among citizens about their constitutional rights, safeguard democratic and secular values, and strengthen an environment of justice, liberty, equality, human dignity and fraternity in the country. The Board made it clear that despite the denial of permission for the dharna at Jantar Mantar, the nationwide campaign will continue as per its planned programme.
“Save the Constitution, Save the Nation” Campaign to Continue as Scheduled: _All India Muslim Personal Law Board_https://www.facebook.com/share/p/18B2Cdhbma/
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New Delhi, 17 September 2026:
The All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB) has expressed deep concern and strongly condemned the Delhi Police’s last-minute refusal to grant permission for the Board’s proposed protest dharna at Jantar Mantar. The Board stated that peaceful protest and freedom of expression are fundamental constitutional rights of citizens and should not be curtailed through administrative decisions.
Dr. Syed Qasim Rasool Ilyas, spokesperson of the AIMPLB and Convenor of the “Save the Constitution, Save the Nation” Campaign, visited Parliament Street Police Station three times during the past ten days and assured the SHO and DCP that the number of participants in the dharna would remain within the prescribed limit. Despite these assurances, permission for the dharna was withdrawn just one day before the scheduled programme on the grounds that the police apprehended the participation of a large number of people.
The Board termed the decision unilateral and inappropriate, pointing out that it has previously organised several peaceful demonstrations at Jantar Mantar while complying with all prescribed rules and conditions.
The Board clarified that the proposed dharna was the first phase of its nationwide “Save the Constitution, Save the Nation” Campaign. The campaign seeks to draw public attention to issues including violations of the fundamental rights of deprived and marginalised sections of society and minorities, particularly Muslims; incidents of mob lynching; attacks on life, property, dignity and honour; bulldozer actions against mosques, madrasas and Muslim localities; restrictions on religious and cultural freedoms; protection of Muslim Personal Law; attempts to introduce a Uniform Civil Code; and efforts to make Vande Mataram mandatory.
The Board said that the statement by the Union Home Minister regarding the implementation of a Uniform Civil Code in all BJP-ruled states by 2029 has raised fresh concerns regarding India’s religious and cultural diversity and the fundamental rights of citizens. Muslims consider the protection of Muslim Personal Law to be part of their religious and constitutional rights. India is a country of diverse religions, cultures and languages, and the Constitution provides protection to this diversity. Any policy that adversely affects this diversity, the Board stated, raises serious constitutional questions.
The Board also objected to attempts to make all the stanzas of Vande Mataram mandatory, stating that making the complete rendition of a particular song compulsory as a means of expressing patriotism raises important questions concerning religious freedom and civil liberties.
Referring to the prevailing economic and social situation in the country, the Board said that issues such as poverty, inflation, unemployment, farmers’ concerns and crimes against women require urgent attention. At such a time, diverting public attention from these fundamental issues towards religious and communal matters is not in the national interest.
The All India Muslim Personal Law Board stated that the objective of the “Save the Constitution, Save the Nation” Campaign is to create awareness among citizens about their constitutional rights, safeguard democratic and secular values, and strengthen an environment of justice, liberty, equality, human dignity and fraternity in the country. The Board made it clear that despite the denial of permission for the dharna at Jantar Mantar, the nationwide campaign will continue as per its planned programme.
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*Speakers at the Press Conference*
● Maulana Ubaidullah Khan Azmi, Vice-President, All India Muslim Personal Law Board
● Mr. Syed Saadatullah Husaini, Vice-President, All India Muslim Personal Law Board and Ameer, Jamaat-e-Islami Hind
● Maulana Asghar Ali Imam Mehdi Salafi, Vice-President, All India Muslim Personal Law Board and Ameer, Jamiat Ahle Hadees
● Maulana Mohammed Fazlur Rahim Mujaddidi, General Secretary, All India Muslim Personal Law Board
● Maulana Muhammad Umrain Mahfooz Rahmani, Secretary, All India Muslim Personal Law Board
● Maulana Hakimuddin Qasmi, General Secretary, Jamiat Ulama-i-Hind
● Dr. S. Q. R.Ilyas, Spokesperson, All India Muslim Personal Law Board and Convenor, “Save the Constitution, Save the Nation” Campaign
● Maulana Ubaidullah Khan Azmi, Vice-President, All India Muslim Personal Law Board
● Mr. Syed Saadatullah Husaini, Vice-President, All India Muslim Personal Law Board and Ameer, Jamaat-e-Islami Hind
● Maulana Asghar Ali Imam Mehdi Salafi, Vice-President, All India Muslim Personal Law Board and Ameer, Jamiat Ahle Hadees
● Maulana Mohammed Fazlur Rahim Mujaddidi, General Secretary, All India Muslim Personal Law Board
● Maulana Muhammad Umrain Mahfooz Rahmani, Secretary, All India Muslim Personal Law Board
● Maulana Hakimuddin Qasmi, General Secretary, Jamiat Ulama-i-Hind
● Dr. S. Q. R.Ilyas, Spokesperson, All India Muslim Personal Law Board and Convenor, “Save the Constitution, Save the Nation” Campaign
❤7
*سنجیدہ ،اصولی اور قانونی جدوجہد ہی بورڈ کا طریقہ کار ہے:*
https://www.facebook.com/share/p/19U1z1EmCD/
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نئی دہلی: 22؍ستمبر 2026
17؍ستمبر کو پولیس کی جانب سے آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کو دھرنے کی اجازت نہ دینے اور اس کے بعد بورڈ کی جانب سے دھرنا منسوخ کرنے کے فیصلے پر میڈیا اور سوشل میڈیا میں بعض افراد حقائق سے ناواقفیت کی بنا پر بورڈ کو سخت تنقید کا نشانہ بنا رہے ہیں اور بعض لوگوں نے تو اخلاقی حدود سے بھی تجاوز کیا ہے۔ حقائق سے واقفیت کے بغیر بعض گوشوں سےتنقیدیں، بورڈ کو کمزور کرنے اوراسلام مخالف طاقتوں کومضبوط کرنے کی نادانستہ کوشش ہے۔ ظاہر ہے کہ ایک ذمہ دار ملت کے افراد سے اس نامناسب رویے کی توقع نہیں کی جا سکتی۔
آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کے ترجمان ڈاکٹر سید قاسم رسول الیاس نے اپنے ایک بیان میں کہا کہ عوام ان گمراہ کن تبصروں سے متأثر نہ ہوں، اس لیے ضروری ہے کہ اس معاملے کے بعض اہم حقائق ان کے سامنے رکھے جائیں۔انہوں نے کہا:
(1) آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کے قیام سے لے کر آج تک اس کے اکابر اور ذمہ داران نے ہمیشہ شریعت اور ملکی قانون کے دائرے میں رہ کر اپنی ذمہ داریاں انجام دی ہیں۔ بورڈ کے پہلے صدرحکیم الاسلام حضرت مولاناقاری محمد طیب صاحبؒ سے لے کرحضرت مولاناسید محمد رابع حسنی ندوی ؒ تک بورڈ کا مزاج جذباتی سیاسی ردعمل کے بجائے سنجیدہ، قانونی اور اصولی جدوجہد پر مبنی رہا ہے۔ اس کے فیصلے وقتی جذبات سے نہیں، بلکہ حالات کے گہرےتجزیے، امت کے مفاد اور دور رس نتائج کو سامنے رکھ کر کیے جاتے رہے ہیں۔
(2) بورڈ ایسا کوئی جذباتی فیصلہ نہیں کرتا جس کے نتیجے میں مسلم نوجوانوں کو غیر ضروری طور پر سڑکوں پر آنے اور حکومت کو ان کے خلاف سخت کارروائی کا موقع ملے۔ موجودہ حالات میں جب پہلے ہی ہزاروں مسلم نوجوان جیلوں میں بند ہیں اوران کے گھر والے ان کے لیے دربدر کی ٹھوکریں کھارہے ہیں، ایسے میں کسی بھی احتجاجی اقدام کے ممکنہ نتائج پر غور کرنا ہماری اجتماعی ذمہ داری ہے۔ احتجاج کا مقصد مسائل کا حل اور حقوق کا تحفظ ہے نہ کہ نوجوانوں کو ایسے خطرات سے دوچار کرنا جن کے نتائج پوری ملت کو بھگتنا پڑیں۔
(3) آج ملک میں برادرانِ وطن کے مختلف طبقات کی جانب سے حکومت کی پالیسیوں، سماجی ناہمواریوں اور اونچ نیچ کے خلاف آوازیں بلندہو رہی ہیں، ریزرویشن کے مسئلے پر بھی بے چینی بڑھ رہی ہے۔ ایک طرف برسراقتدار پارٹی کا روایتی اپر کاسٹ ووٹ بینک ریزرویشن کے خلاف ہے تو دوسری طرف بی جے پی ملک کے پسماندہ طبقوں کو اپنی طرف مائل کرنے کے لیے ریزرویشن کی بات کررہی ہے، اس کی وجہ سے خودپارٹی کے اندر شدیدکش مکش اوربے چینی پائی جاتی ہے، بعض ریاستوں میں انتخابات قریب ہیں اوراس پارٹی کا ہمیشہ سے یہ طریقہ رہاہے کہ اس نے ترقیاتی کاموں کے بجائے فرقہ وارانہ مسائل پر ووٹ حاصل کیے ہیں۔ ان حالات میں ہر اقدام کے سیاسی اور سماجی اثرات کا جائزہ لینا ضروری ہے۔ بورڈ کی کوشش ہے کہ کوئی ایسا قدم نہ اٹھایا جائے جس سے حکمراں جماعت کو اپنے سیاسی مفادات کے لیے نئی توانائی حاصل کرنے یا عوامی توجہ کو اصل مسائل سے ہٹانے کا موقع ملے۔
(4) بورڈ نے 17؍ ستمبر کے احتجاج کے لیے قانونی تقاضے پورے کیے تھے اور احتجاج کے تعلق سے بھرپور کوشش کی تھی اور تمام اسٹیک ہولڈرس سے بات بھی کرلی تھی؛ جنتر منتر پر بورڈ اس سے قبل بھی دو مرتبہ احتجاج کرچکا ہے، اس لیے توقع تھی کہ اس بار بھی اجازت حاصل ہوجائے گی؛ لیکن بدقسمتی سے ایسا نہیں ہوسکا اورآخروقت میں اجازت کینسل کردی گئی ۔مگراحتجاج کی اجازت نہ ملنے کو بورڈ کی کمزوری یا اپنے موقف سے دست برداری سمجھنا درست نہیں ہے۔
(5) بورڈ کی موجودہ انتظامیہ نے ملک کے مرکزی شہروں میں ایسے بڑے احتجاجات منعقد کیے ہیں ، جن کی مثال اس سے قبل کم ہی ملتی ہے۔ ماضی کے حالات ایسے تھے کہ حکومت کے ساتھ گفت وشنید اور مذاکرات کا دروازہ کھلا ہوا تھا،لیکن موجودہ صورتِ حال میں مشکلات کی نوعیت مختلف ہے۔ حکومت نے نہ صرف اقلیتوں بلکہ اپوزیشن جماعتوں کے ساتھ بھی گفت وشنید کےدروازے بند کررکھے ہیں اورمسلم مخالف اقدامات کو سیاسی فائدے کے لیے کھلے عام اختیار کیا جارہا ہے۔ ایسے ماحول میں احتجاجی حکمت عملی کے لیے پہلے سے زیادہ احتیاط، تدبر اور دور اندیشی درکار ہے۔
(6) آج کے حالات میں میڈیا کے ایک بڑے حصے کے کردار پر سنجیدہ سوالات اٹھ رہے ہیں،عوام میں انہیں بجاطورپر گودی میڈیا کہاجاتاہے، یعنی ایسا میڈیا جو حکومت کی گود میں بیٹھاہوا ہے اور حکومت کی منشاء کے مطابق کام کرتا ہے۔ ایسے ماحول میں ہر احتجاجی اقدام کے پیغام، اس کی پیش کش اور اس کے ممکنہ نتائج پر گہری نظر رکھنا ضروری ہے، بورڈ کا مقصد محض احتجاج کرنا نہیں، بلکہ ملت کے حقوق اور مسائل کو مؤثر انداز میں حکومت اور عوام کے سامنے پیش کرنا بھی ہے۔
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نئی دہلی: 22؍ستمبر 2026
17؍ستمبر کو پولیس کی جانب سے آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کو دھرنے کی اجازت نہ دینے اور اس کے بعد بورڈ کی جانب سے دھرنا منسوخ کرنے کے فیصلے پر میڈیا اور سوشل میڈیا میں بعض افراد حقائق سے ناواقفیت کی بنا پر بورڈ کو سخت تنقید کا نشانہ بنا رہے ہیں اور بعض لوگوں نے تو اخلاقی حدود سے بھی تجاوز کیا ہے۔ حقائق سے واقفیت کے بغیر بعض گوشوں سےتنقیدیں، بورڈ کو کمزور کرنے اوراسلام مخالف طاقتوں کومضبوط کرنے کی نادانستہ کوشش ہے۔ ظاہر ہے کہ ایک ذمہ دار ملت کے افراد سے اس نامناسب رویے کی توقع نہیں کی جا سکتی۔
آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کے ترجمان ڈاکٹر سید قاسم رسول الیاس نے اپنے ایک بیان میں کہا کہ عوام ان گمراہ کن تبصروں سے متأثر نہ ہوں، اس لیے ضروری ہے کہ اس معاملے کے بعض اہم حقائق ان کے سامنے رکھے جائیں۔انہوں نے کہا:
(1) آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کے قیام سے لے کر آج تک اس کے اکابر اور ذمہ داران نے ہمیشہ شریعت اور ملکی قانون کے دائرے میں رہ کر اپنی ذمہ داریاں انجام دی ہیں۔ بورڈ کے پہلے صدرحکیم الاسلام حضرت مولاناقاری محمد طیب صاحبؒ سے لے کرحضرت مولاناسید محمد رابع حسنی ندوی ؒ تک بورڈ کا مزاج جذباتی سیاسی ردعمل کے بجائے سنجیدہ، قانونی اور اصولی جدوجہد پر مبنی رہا ہے۔ اس کے فیصلے وقتی جذبات سے نہیں، بلکہ حالات کے گہرےتجزیے، امت کے مفاد اور دور رس نتائج کو سامنے رکھ کر کیے جاتے رہے ہیں۔
(2) بورڈ ایسا کوئی جذباتی فیصلہ نہیں کرتا جس کے نتیجے میں مسلم نوجوانوں کو غیر ضروری طور پر سڑکوں پر آنے اور حکومت کو ان کے خلاف سخت کارروائی کا موقع ملے۔ موجودہ حالات میں جب پہلے ہی ہزاروں مسلم نوجوان جیلوں میں بند ہیں اوران کے گھر والے ان کے لیے دربدر کی ٹھوکریں کھارہے ہیں، ایسے میں کسی بھی احتجاجی اقدام کے ممکنہ نتائج پر غور کرنا ہماری اجتماعی ذمہ داری ہے۔ احتجاج کا مقصد مسائل کا حل اور حقوق کا تحفظ ہے نہ کہ نوجوانوں کو ایسے خطرات سے دوچار کرنا جن کے نتائج پوری ملت کو بھگتنا پڑیں۔
(3) آج ملک میں برادرانِ وطن کے مختلف طبقات کی جانب سے حکومت کی پالیسیوں، سماجی ناہمواریوں اور اونچ نیچ کے خلاف آوازیں بلندہو رہی ہیں، ریزرویشن کے مسئلے پر بھی بے چینی بڑھ رہی ہے۔ ایک طرف برسراقتدار پارٹی کا روایتی اپر کاسٹ ووٹ بینک ریزرویشن کے خلاف ہے تو دوسری طرف بی جے پی ملک کے پسماندہ طبقوں کو اپنی طرف مائل کرنے کے لیے ریزرویشن کی بات کررہی ہے، اس کی وجہ سے خودپارٹی کے اندر شدیدکش مکش اوربے چینی پائی جاتی ہے، بعض ریاستوں میں انتخابات قریب ہیں اوراس پارٹی کا ہمیشہ سے یہ طریقہ رہاہے کہ اس نے ترقیاتی کاموں کے بجائے فرقہ وارانہ مسائل پر ووٹ حاصل کیے ہیں۔ ان حالات میں ہر اقدام کے سیاسی اور سماجی اثرات کا جائزہ لینا ضروری ہے۔ بورڈ کی کوشش ہے کہ کوئی ایسا قدم نہ اٹھایا جائے جس سے حکمراں جماعت کو اپنے سیاسی مفادات کے لیے نئی توانائی حاصل کرنے یا عوامی توجہ کو اصل مسائل سے ہٹانے کا موقع ملے۔
(4) بورڈ نے 17؍ ستمبر کے احتجاج کے لیے قانونی تقاضے پورے کیے تھے اور احتجاج کے تعلق سے بھرپور کوشش کی تھی اور تمام اسٹیک ہولڈرس سے بات بھی کرلی تھی؛ جنتر منتر پر بورڈ اس سے قبل بھی دو مرتبہ احتجاج کرچکا ہے، اس لیے توقع تھی کہ اس بار بھی اجازت حاصل ہوجائے گی؛ لیکن بدقسمتی سے ایسا نہیں ہوسکا اورآخروقت میں اجازت کینسل کردی گئی ۔مگراحتجاج کی اجازت نہ ملنے کو بورڈ کی کمزوری یا اپنے موقف سے دست برداری سمجھنا درست نہیں ہے۔
(5) بورڈ کی موجودہ انتظامیہ نے ملک کے مرکزی شہروں میں ایسے بڑے احتجاجات منعقد کیے ہیں ، جن کی مثال اس سے قبل کم ہی ملتی ہے۔ ماضی کے حالات ایسے تھے کہ حکومت کے ساتھ گفت وشنید اور مذاکرات کا دروازہ کھلا ہوا تھا،لیکن موجودہ صورتِ حال میں مشکلات کی نوعیت مختلف ہے۔ حکومت نے نہ صرف اقلیتوں بلکہ اپوزیشن جماعتوں کے ساتھ بھی گفت وشنید کےدروازے بند کررکھے ہیں اورمسلم مخالف اقدامات کو سیاسی فائدے کے لیے کھلے عام اختیار کیا جارہا ہے۔ ایسے ماحول میں احتجاجی حکمت عملی کے لیے پہلے سے زیادہ احتیاط، تدبر اور دور اندیشی درکار ہے۔
(6) آج کے حالات میں میڈیا کے ایک بڑے حصے کے کردار پر سنجیدہ سوالات اٹھ رہے ہیں،عوام میں انہیں بجاطورپر گودی میڈیا کہاجاتاہے، یعنی ایسا میڈیا جو حکومت کی گود میں بیٹھاہوا ہے اور حکومت کی منشاء کے مطابق کام کرتا ہے۔ ایسے ماحول میں ہر احتجاجی اقدام کے پیغام، اس کی پیش کش اور اس کے ممکنہ نتائج پر گہری نظر رکھنا ضروری ہے، بورڈ کا مقصد محض احتجاج کرنا نہیں، بلکہ ملت کے حقوق اور مسائل کو مؤثر انداز میں حکومت اور عوام کے سامنے پیش کرنا بھی ہے۔
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(7) اگرچہ جنتر منتر پر دھرنا نہیں ہوسکا، لیکن احتجاج کا بنیادی مقصد، یعنی بورڈ کے موقف کو عوام اورمتعلقہ حلقوں تک پہنچانا، ایک مختلف انداز میں زیادہ مؤثر طور پر سامنے آیاہے۔ اجازت نہ ملنے کے بعد بورڈ کی پریس کانفرنس اور وضاحت کو میڈیا نے نمایاں طور پر نشر کیا۔ اس طرح بورڈ کی آواز ملک کے مختلف حصوں کے علاوہ بیرونِ ملک تک بھی پہنچی۔یہ امر بھی قابلِ توجہ ہے کہ احتجاج کی اجازت نہ ملنے کے واقعے نے بورڈ کے موقف اور اس کی آواز کو وسیع پیمانے پر زیرِ بحث لایا، اس صورتِ حال سے یہ بات واضح ہوئی کہ بورڈ کے موقف اور اجتماعی آواز کو نظرانداز نہیں کیا جاسکتا۔
(8) آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کی تحریک دستور بچاؤ، ملک بچاؤ جاری ہے اور آئندہ بھی حالات، مواقع اور ماحول کے مطابق جاری رہے گی۔ بورڈ اپنے اصولی موقف سے دست بردار نہیں ہوا ہے اور ملت کے دینی، قانونی اور اجتماعی حقوق کے تحفظ کے لیے اپنی جدوجہد جاری رکھے گا، احتجاج کے طریقۂ کار اور وقت کا تعین حالات کے مناسب جائزے کے بعد کیا جائے گا۔
(9) آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ ملت کا ایک اجتماعی پلیٹ فارم ہے، جس میں مسلمانوں کی تمام دینی و ملی جماعتیں، مسالک، اہم دینی مدارس، ملک کے ممتاز علماء و دانشور شامل ہیں۔ بورڈ میں جہاں ایک طرف ملک کی مؤقر تنظیم جمعیت علماء ہند کے دونوں گروپس موجود ہیں، وہیں مرکزی جمعیت اہل حدیث، جماعت اسلامی ہند اور امارت شرعیہ پٹنہ بھی اس میں شامل ہے۔ بریلوی مکتبہ فکر اور مؤقر شیعہ علماء کی نمائندگی بھی ہے۔ اس کے مرکزی مناصب پر فقیہ ملت مولانا خالد سیف اللہ رحمانی(صدر)، مؤقر عالم دین اور ممتاز دینی رہنما مولانا سیدارشد مدنی، مولانا عبیداللہ خاں اعظمی (سابق ایم پی)، مولانا اصغر علی امام مہدی سلفی، جناب سید سعادت اللہ حسینی، مولانا محمد علی محسن تقوی( نائب صدور)، مولانا محمد فضل الرحیم مجددی ( جنرل سکریٹری)، مولانا محمد عمرین محفوظ رحمانی، مولانا سید بلال عبدالحی حسنی ندوی اور مولانا ڈاکٹر یاسین علی عثمانی (سکریٹریز) پر فائز ہیں اور مولانا سید محمود اسعد مدنی صدر جمعیۃ علماء ہند بھی شامل ہیں۔ بورڈ کے تمام اہم فیصلے اس کی مجلس عاملہ میں اور مرکزی ذمہ داران کی موجودگی میں اتفاق رائے سے طے پاتے ہیں۔ ایک غلط تأثر یہ پیدا کیا جا رہا ہے کہ ایک دو افراد ہی بورڈ کے اہم فیصلے کر تے ہیں جو کہ خلاف حقیقت اور کذب بیانی ہے۔
بورڈ کے ترجمان نے آگے کہا:
(10) آج سوشل میڈیا پر بعض ایسے افراد کی جانب سے بورڈ کو کمزور، بے اثر یا بے وزن ثابت کرنے کی کوششیں کی جارہی ہیں،جن کا سماج میں کوئی اثر نہیں ہے،مسلمانوں کو ایسی مہمات سے متأثر ہونے کے بجائے حقیقت پسندانہ انداز میں حالات کا جائزہ لینا چاہیے۔ اختلافِ رائے کا حق اپنی جگہ مسلم ہے؛ لیکن اجتماعی اداروں کی اہمیت کو کمزور کرنا اور ملت کی اجتماعیت کو نقصان پہنچانا کسی کے بھی مفاد میں نہیں ہے۔مسلمانوں سے اپیل ہے کہ وہ اپنی اجتماعیت کو برقرار رکھیں، ذمہ دار اداروں کے ساتھ تعلق اور اعتماد کو قائم رکھیں اور کسی بھی معاملے میں جذباتی ردعمل کے بجائے سنجیدگی، بصیرت اور باہمی تعاون سے کام لیں۔
ڈاکٹر الیاس نے کہا کہ ا ٓل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ اپنے اصولی موقف پر قائم ہے اور ملت کے حقوق کے تحفظ کے لیے قانونی، جمہوری اور مؤثر جدوجہد جاری رکھنے کا عزم رکھتا ہےاوربورڈ کے آئندہ اقدام ان شاءاللہ اس کے اس عزم کی گواہ ہوں گے۔
✍️ جاری کردہ
*ڈاکٹر وقارالدین لطیفی*
آفس سکریٹری
(8) آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کی تحریک دستور بچاؤ، ملک بچاؤ جاری ہے اور آئندہ بھی حالات، مواقع اور ماحول کے مطابق جاری رہے گی۔ بورڈ اپنے اصولی موقف سے دست بردار نہیں ہوا ہے اور ملت کے دینی، قانونی اور اجتماعی حقوق کے تحفظ کے لیے اپنی جدوجہد جاری رکھے گا، احتجاج کے طریقۂ کار اور وقت کا تعین حالات کے مناسب جائزے کے بعد کیا جائے گا۔
(9) آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ ملت کا ایک اجتماعی پلیٹ فارم ہے، جس میں مسلمانوں کی تمام دینی و ملی جماعتیں، مسالک، اہم دینی مدارس، ملک کے ممتاز علماء و دانشور شامل ہیں۔ بورڈ میں جہاں ایک طرف ملک کی مؤقر تنظیم جمعیت علماء ہند کے دونوں گروپس موجود ہیں، وہیں مرکزی جمعیت اہل حدیث، جماعت اسلامی ہند اور امارت شرعیہ پٹنہ بھی اس میں شامل ہے۔ بریلوی مکتبہ فکر اور مؤقر شیعہ علماء کی نمائندگی بھی ہے۔ اس کے مرکزی مناصب پر فقیہ ملت مولانا خالد سیف اللہ رحمانی(صدر)، مؤقر عالم دین اور ممتاز دینی رہنما مولانا سیدارشد مدنی، مولانا عبیداللہ خاں اعظمی (سابق ایم پی)، مولانا اصغر علی امام مہدی سلفی، جناب سید سعادت اللہ حسینی، مولانا محمد علی محسن تقوی( نائب صدور)، مولانا محمد فضل الرحیم مجددی ( جنرل سکریٹری)، مولانا محمد عمرین محفوظ رحمانی، مولانا سید بلال عبدالحی حسنی ندوی اور مولانا ڈاکٹر یاسین علی عثمانی (سکریٹریز) پر فائز ہیں اور مولانا سید محمود اسعد مدنی صدر جمعیۃ علماء ہند بھی شامل ہیں۔ بورڈ کے تمام اہم فیصلے اس کی مجلس عاملہ میں اور مرکزی ذمہ داران کی موجودگی میں اتفاق رائے سے طے پاتے ہیں۔ ایک غلط تأثر یہ پیدا کیا جا رہا ہے کہ ایک دو افراد ہی بورڈ کے اہم فیصلے کر تے ہیں جو کہ خلاف حقیقت اور کذب بیانی ہے۔
بورڈ کے ترجمان نے آگے کہا:
(10) آج سوشل میڈیا پر بعض ایسے افراد کی جانب سے بورڈ کو کمزور، بے اثر یا بے وزن ثابت کرنے کی کوششیں کی جارہی ہیں،جن کا سماج میں کوئی اثر نہیں ہے،مسلمانوں کو ایسی مہمات سے متأثر ہونے کے بجائے حقیقت پسندانہ انداز میں حالات کا جائزہ لینا چاہیے۔ اختلافِ رائے کا حق اپنی جگہ مسلم ہے؛ لیکن اجتماعی اداروں کی اہمیت کو کمزور کرنا اور ملت کی اجتماعیت کو نقصان پہنچانا کسی کے بھی مفاد میں نہیں ہے۔مسلمانوں سے اپیل ہے کہ وہ اپنی اجتماعیت کو برقرار رکھیں، ذمہ دار اداروں کے ساتھ تعلق اور اعتماد کو قائم رکھیں اور کسی بھی معاملے میں جذباتی ردعمل کے بجائے سنجیدگی، بصیرت اور باہمی تعاون سے کام لیں۔
ڈاکٹر الیاس نے کہا کہ ا ٓل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ اپنے اصولی موقف پر قائم ہے اور ملت کے حقوق کے تحفظ کے لیے قانونی، جمہوری اور مؤثر جدوجہد جاری رکھنے کا عزم رکھتا ہےاوربورڈ کے آئندہ اقدام ان شاءاللہ اس کے اس عزم کی گواہ ہوں گے۔
✍️ جاری کردہ
*ڈاکٹر وقارالدین لطیفی*
آفس سکریٹری
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Khitab e juma 25 September 2026 (3).pdf
1.9 MB
▪️ #سلسلہ_خطاب_جمعہ نمبر: 343▪️
🗓 برائے تاریخ: 25 ستمبر 2026 مطابق , 12 ربیع الثانی 1448
🎯 آئیے، دلوں کو جوڑیں!
📌 خطاب جمعہ ڈاؤنلوڈ کرنے کے لیے اس لنک پر کلک کریں:
https://t.me/AIMPLB_Official/10091
٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭
▪️ہر ہفتہ بورڈ کی طرف سے جاری ہونے والا خطبۂ جمعہ حاصل کرنے کے درج ذیل نمبر پر اپنا نام اور پتہ بذریعہ وہاٹس ایپ ارسال کریں:
http://wa.me/+918657219464
🎁 منجانب: سوشل میڈیا ڈیسک آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ
🗓 برائے تاریخ: 25 ستمبر 2026 مطابق , 12 ربیع الثانی 1448
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*شاہی مسجد اجین کے تحفظ کے لئے مسلمانوں کا جذبہ قابلِ تحسین*
نئی دہلی:29/ ستمبر 2026
آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کے صدر مولانا خالد سیف اللہ رحمانی نے ایک بیان میں اجین کے مسلمانوں، خصوصاً پردہ نشیں خواتین، کی جانب سے شاہی مسجد کے تحفظ کے لئے کئے گئے پُرامن احتجاج اور ان کے حوصلے کی ستائش کی ہے۔
انہوں نے کہا کہ گزشتہ روز اجین میں جس طرح بڑی تعداد میں مسلمان، جن میں پردہ نشیں خواتین بھی شامل تھیں، انتظامیہ اور پولیس کے سامنے ڈٹ کر کھڑے ہوئے اور مسجد کو مکمل طور پر منہدم کرنے کی کوشش کے خلاف مضبوط مزاحمت کی، وہ قابلِ تحسین ہے۔ ان کے اس پُرامن اور جمہوری احتجاج نے مسجد کی مکمل مسماری کی کوشش کو بڑی حد تک ناکام بنایا۔
مولانا رحمانی نے کہا کہ اطلاعات کے مطابق بعض سرکاری اور حکومت نواز افراد نے مسجد کی انتظامیہ پر دباؤ ڈال کر اسے مسجد کے تقریباً تین فٹ حصے کو خود منہدم کرنے پر آمادہ کرنے کی کوشش کی۔ انہیں یہ باور کرایا گیا کہ اگر یہ حصہ خود نہیں گرایا گیا تو پوری مسجد کو منہدم ہونے سے نہیں بچایا جا سکے گا۔ تاہم وہاں موجود مسلمانوں نے اس تجویز کی سخت مخالفت کی اور اس کے خلاف احتجاج کیا۔
انہوں نے کہا کہ احتجاج کو ختم کرنے کے لئے پولیس نے لاٹھی چارج کیا اور آنسو گیس کے گولے داغے۔ اطلاعات کے مطابق متعدد افراد کے خلاف ایف آئی آر درج کی گئی، جبکہ کئی نوجوانوں کو حراست میں بھی لیا گیا۔
بورڈ کے صدر نے کہا کہ اگر حکومت اور انتظامیہ چاہتی تو اس مسماری کو روکا جا سکتا تھا۔ اس سے قبل بھی اجین میں مسلمانوں کی بستی نظام الدین کو مہاکال کوریڈور کے نام پر اجاڑا گیا اور وہاں موجود تکیہ مسجد کو منہدم کر دیا گیا، جبکہ اس سے متصل گنیش کالونی کو کوئی نقصان نہیں پہنچایا گیا۔ ایسے واقعات انتظامیہ کے طرزِ عمل پر سنجیدہ سوالات پیدا کرتے ہیں۔
مولانا خالد سیف اللہ رحمانی نے کہا کہ اب یہ ایک تشویش ناک رجحان بنتا جا رہا ہے کہ کبھی سڑک کی توسیع اور کبھی کسی دوسرے عذر کی بنیاد پر بی جے پی حکومت والی ریاستوں میں برسوں سے قائم مدارس اور مساجد کو نشانہ بنایا جا رہا ہے۔ افسوس کی بات یہ ہے کہ ایسے اقدامات میں نہ تو Places of Worship Act, 1991 کی روح اور تقاضوں کا لحاظ رکھا جاتا ہے اور نہ ہی وقف املاک کی قانونی حیثیت کا۔
انہوں نے کہا کہ آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ اجین کے مسلمانوں، بالخصوص نوجوانوں اور پردہ نشیں خواتین کے عزم، حوصلے اور پُرامن جدوجہد کو قدر کی نگاہ سے دیکھتا ہے۔ اگر حکومت اور انتظامیہ کی حمایت کرنے والا طبقہ درمیان میں نہ آتا تو ممکن ہے کہ مسجد کا کوئی حصہ بھی منہدم نہ کیا جاتا۔
مولانا رحمانی نے مسلمانوں سے اپیل کی کہ ایسے تمام معاملات میں جذباتی ردِعمل کے بجائے پُرامن، جمہوری، دستوری اور قانونی طریقوں کو اختیار کیا جائے اور اپنے حقوق کے تحفظ کے لیے آئین اور قانون کے دائرے میں دستیاب تمام ذرائع کا بھرپور استعمال کیا جائے۔
✍️ جاری کردہ
*ڈاکٹر محمد وقار الدین لطیفی*
_آفس سکریٹری_
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آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کے صدر مولانا خالد سیف اللہ رحمانی نے اجین کے مسلمانوں کو مبارکباد دینئی دہلی:29/ ستمبر 2026
آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کے صدر مولانا خالد سیف اللہ رحمانی نے ایک بیان میں اجین کے مسلمانوں، خصوصاً پردہ نشیں خواتین، کی جانب سے شاہی مسجد کے تحفظ کے لئے کئے گئے پُرامن احتجاج اور ان کے حوصلے کی ستائش کی ہے۔
انہوں نے کہا کہ گزشتہ روز اجین میں جس طرح بڑی تعداد میں مسلمان، جن میں پردہ نشیں خواتین بھی شامل تھیں، انتظامیہ اور پولیس کے سامنے ڈٹ کر کھڑے ہوئے اور مسجد کو مکمل طور پر منہدم کرنے کی کوشش کے خلاف مضبوط مزاحمت کی، وہ قابلِ تحسین ہے۔ ان کے اس پُرامن اور جمہوری احتجاج نے مسجد کی مکمل مسماری کی کوشش کو بڑی حد تک ناکام بنایا۔
مولانا رحمانی نے کہا کہ اطلاعات کے مطابق بعض سرکاری اور حکومت نواز افراد نے مسجد کی انتظامیہ پر دباؤ ڈال کر اسے مسجد کے تقریباً تین فٹ حصے کو خود منہدم کرنے پر آمادہ کرنے کی کوشش کی۔ انہیں یہ باور کرایا گیا کہ اگر یہ حصہ خود نہیں گرایا گیا تو پوری مسجد کو منہدم ہونے سے نہیں بچایا جا سکے گا۔ تاہم وہاں موجود مسلمانوں نے اس تجویز کی سخت مخالفت کی اور اس کے خلاف احتجاج کیا۔
انہوں نے کہا کہ احتجاج کو ختم کرنے کے لئے پولیس نے لاٹھی چارج کیا اور آنسو گیس کے گولے داغے۔ اطلاعات کے مطابق متعدد افراد کے خلاف ایف آئی آر درج کی گئی، جبکہ کئی نوجوانوں کو حراست میں بھی لیا گیا۔
بورڈ کے صدر نے کہا کہ اگر حکومت اور انتظامیہ چاہتی تو اس مسماری کو روکا جا سکتا تھا۔ اس سے قبل بھی اجین میں مسلمانوں کی بستی نظام الدین کو مہاکال کوریڈور کے نام پر اجاڑا گیا اور وہاں موجود تکیہ مسجد کو منہدم کر دیا گیا، جبکہ اس سے متصل گنیش کالونی کو کوئی نقصان نہیں پہنچایا گیا۔ ایسے واقعات انتظامیہ کے طرزِ عمل پر سنجیدہ سوالات پیدا کرتے ہیں۔
مولانا خالد سیف اللہ رحمانی نے کہا کہ اب یہ ایک تشویش ناک رجحان بنتا جا رہا ہے کہ کبھی سڑک کی توسیع اور کبھی کسی دوسرے عذر کی بنیاد پر بی جے پی حکومت والی ریاستوں میں برسوں سے قائم مدارس اور مساجد کو نشانہ بنایا جا رہا ہے۔ افسوس کی بات یہ ہے کہ ایسے اقدامات میں نہ تو Places of Worship Act, 1991 کی روح اور تقاضوں کا لحاظ رکھا جاتا ہے اور نہ ہی وقف املاک کی قانونی حیثیت کا۔
انہوں نے کہا کہ آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ اجین کے مسلمانوں، بالخصوص نوجوانوں اور پردہ نشیں خواتین کے عزم، حوصلے اور پُرامن جدوجہد کو قدر کی نگاہ سے دیکھتا ہے۔ اگر حکومت اور انتظامیہ کی حمایت کرنے والا طبقہ درمیان میں نہ آتا تو ممکن ہے کہ مسجد کا کوئی حصہ بھی منہدم نہ کیا جاتا۔
مولانا رحمانی نے مسلمانوں سے اپیل کی کہ ایسے تمام معاملات میں جذباتی ردِعمل کے بجائے پُرامن، جمہوری، دستوری اور قانونی طریقوں کو اختیار کیا جائے اور اپنے حقوق کے تحفظ کے لیے آئین اور قانون کے دائرے میں دستیاب تمام ذرائع کا بھرپور استعمال کیا جائے۔
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Khitab e juma 02 October 2026.pdf
1.8 MB
▪️ #سلسلہ_خطاب_جمعہ نمبر: 344▪️
🗓 برائے تاریخ: 02 اکتوبر 2026 مطابق , 19 ربیع الثانی 1448
🎯 نعمتوں کی قدر کریں!
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Khitab e juma 09 October 2026.pdf
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▪️ #سلسلہ_خطاب_جمعہ نمبر: 345▪️
🗓 برائے تاریخ:
🎯 سستی و کاہلی: دین و دنیا کے زوال کا پوشیدہ سبب
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🗓 برائے تاریخ:
09 اکتوبر 2026 مطابق , 26 ربیع الثانی 1448🎯 سستی و کاہلی: دین و دنیا کے زوال کا پوشیدہ سبب
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*🎯 نفرت ہار جائے گی... جب آپ یہ ہتھیار اپنائیں گے!*
🎙️*حضرت مولانا عمرین محفوظ رحمانی صاحب* _(سکریٹری آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ)_
👇🏼👇👇🏼👇👇🏼👇👇🏼👇
https://youtube.com/shorts/_gIuCx8JXSY?si=Pmrcx4haGeYngAQK
*🎯 Nafrat haar jayegi... Jab aap yeh hathiyar apnayenge!*
🎙️ *_Hazrat Maulana Umrain Mahfouz Rahmani sahab_* _(Secretary, All India Muslim Personal Law Board)_
🎙️*حضرت مولانا عمرین محفوظ رحمانی صاحب* _(سکریٹری آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ)_
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*🎯 Nafrat haar jayegi... Jab aap yeh hathiyar apnayenge!*
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नफ़रत को हराने का सबसे बड़ा हथियार | Maulana Umrain Mahfooz Rahmani
خدمتِ خلق صرف ایک نیکی نہیں بلکہ معاشرے سے نفرت کی آگ کو بجھانے کا ...
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Khitab e juma 16 October 2026.pdf
2.3 MB
▪️ #سلسلہ_خطاب_جمعہ نمبر: 346▪️
🗓 برائے تاریخ: 16 اکتوبر 2026 مطابق , 03 جمادی الاولیٰ 1448
🎯 سود، جوا اور آن لائن فراڈ: ایک خطرناک مالی فتنہ
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🎯 سود، جوا اور آن لائن فراڈ: ایک خطرناک مالی فتنہ
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Khitab e juma 23 October 2026.pdf
3.4 MB
▪️ #سلسلہ_خطاب_جمعہ نمبر: 348▪️
🗓 برائے تاریخ: 23 اکتوبر 2026 مطابق , 10 جمادی الاولیٰ 1448
🎯 مثالی شوہر: سیرتِ نبوی ﷺ کے آئینے میں
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🎁 منجانب: سوشل میڈیا ڈیسک آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ
🗓 برائے تاریخ: 23 اکتوبر 2026 مطابق , 10 جمادی الاولیٰ 1448
🎯 مثالی شوہر: سیرتِ نبوی ﷺ کے آئینے میں
📌 خطاب جمعہ ڈاؤنلوڈ کرنے کے لیے اس لنک پر کلک کریں:
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