71. कृष्ण- राधापति, घनश्याम, वासुदेव, माधव, मोहन, केशव, गोविन्द, मुरारी, नन्दनन्दन, राधारमण, दामोदर, ब्रजवल्लभ, गोपीनाथ, मुरलीधर, द्वारिकाधीश, यदुनन्दन, कंसारि, रणछोड़, बंशीधर, गिरधारी।
72. कान- कर्ण, श्रुति, श्रुतिपटल, श्रवण, श्रोत, श्रुतिपुट।
73. कोयल- कोकिला, पिक, काकपाली, बसंतदूत, सारिका, कुहुकिनी, वनप्रिया।
74. क्रोध- रोष, कोप, अमर्ष, गुस्सा, आक्रोश, कोह, प्रतिघात।
75. कार्तिकेय- कुमार, षडानन, शरभव, स्कन्द। 
76. कुत्ता- श्वा, श्रवान, कुक्कुर। शुनक, सरमेव। 
77. कल्पद्रुम- देवद्रुम, कल्पवृक्ष, पारिजात, मन्दार, हरिचन्दन। 
78. काक- कौआ, वायस, काग, करठ, पिशुन। 
79. कीर्ति- यश, प्रसिद्धि।
80.
( ख )
81. खाना- भोज्य सामग्री, खाद्यय वस्तु, आहार, भोजन। 
82. खग- पक्षी, द्विज, विहग, नभचर, अण्डज, शकुनि, पखेरू।
83. खंभा- स्तूप, स्तम्भ, खंभ।
84. खल- दुर्जन, दुष्ट, घूर्त, कुटिल।
85. खून- रक्त, लहू, शोणित, रुधिर।
86.
( ग )
87. गणेश- विनायक, गजानन, गौरीनंदन, मूषकवाहन, गजवदन, विघ्रनाशक, भवानीनन्दन, विघ्रराज, मोदकप्रिय, मोददाता, गणपति, गणनायक, शंकरसुवन, लम्बोदर, महाकाय, एकदन्त।
88. गंगा- देवनदी, मंदाकिनी, भगीरथी, विश्नुपगा, देवपगा, ध्रुवनंदा, सुरसरिता, देवनदी, जाह्नवी, सुरसरि, अमरतरंगिनी, विष्णुपदी, नदीश्वरी, त्रिपथगा।
89. गज- हाथी, हस्ती, मतंग, कूम्भा, मदकल ।
90. गाय- गौ, धेनु, सुरभि, भद्रा, दोग्धी, रोहिणी।
91. गृह- घर, सदन, गेह, भवन, धाम, निकेतन, निवास, आगार, आयतन, आलय, आवास, निलय, मंदिर।
92. गर्मी- ताप, ग्रीष्म, ऊष्मा, गरमी, निदाघ।
93. गुरु- शिक्षक, आचार्य, उपाध्याय।
94. गणेश- विनायक, गणपति, लंबोदर, गजानन्।
95. गंगा- भगीरथी, मंदाकिनी,सुरसरिता, देवनदी, जाहनवी।
96. गरुड़- खगेश, पत्रगारि, उरगारि, हरियान, वातनेय, खगपति, सुपर्ण, विषमुख। 
97. गदहा- खर, गर्दभ, धूसर, रासभ, बेशर, चक्रीवान, वैशाखनन्दन।
98.
99.
( घ )
100. घट- घड़ा, कलश, कुम्भ, निप।
101. घर- आलय, आवास, गेह, गृह, निकेतन, निलय, निवास, भवन, वास, वास-स्थान, शाला, सदन।
102. घृत- घी, अमृत, नवनीत।
103. घास- तृण, दूर्वा, दूब, कुश, शाद।
104.
( च )
105. चन्द्र- चाँद, सुधांशु, सुधाधर, राकेश, सारंग, निशाकर, निशापति, रजनीपति, मृगांक, कलानिधि, हिमांशु, इंदु, सुधाकर, विधु, शशि, चंद्रमा, तारापति।
106. चंद्रमा- चाँद, हिमांशु, इंदु, सुधांशु, विधु, तारापति, चन्द्र, शशि, कलाधर, निशाकर, मृगांक, राकापति, हिमकर, राकेश, रजनीश, निशानाथ, सोम, मयंक, सारंग, सुधाकर, कलानिधि।
107. चरण- पद, पग, पाँव, पैर, पाद।
108. चतुर- विज्ञ, निपुण, नागर, पटु, कुशल, दक्ष, प्रवीण, योग्य।
109. चोर- तस्कर, दस्यु, रजनीचर, मोषक, कुम्भिल, खनक, साहसिक। 
110. चाँदनी- चन्द्रिका, कौमुदी, ज्योत्स्ना, चन्द्रमरीचि, उजियारी, चन्द्रप्रभा, जुन्हाई।
111. चाँदी- रजत, सौध, रूपा, रूपक, रौप्य, चन्द्रहास।
112. चन्द्रिका- चाँदनी, ज्योत्स्ना, कौमुदी। 
113. चोटी- मूर्धा, शीश, सानु, शृंग।
114.
( छ )
115. छतरी- छत्र, छाता, छत्ता।
116. छली- छलिया, कपटी, धोखेबाज।
117. छवि- शोभा, सौंदर्य, कान्ति, प्रभा।
118. छानबीन- जाँच, पूछताछ, खोज, अन्वेषण, शोध, गवेषण।
119. छैला- सजीला, बाँका, शौकीन।
120. छोर- नोक, कोर, किनारा, सिरा।
121.
( ज, झ )
122. जल- मेघपुष्प, अमृत, सलिल, वारि, नीर, तोय, अम्बु, उदक, पानी, जीवन, पय, पेय।
123. जहर- गरल, कालकूट, माहुर, विष ।
124. जगत- संसार, विश्व, जग, जगती, भव, दुनिया, लोक, भुवन।
125. जीभ- रसना, रसज्ञा, जिह्वा, रसिका, वाणी, वाचा, जबान।
126. जंगल- विपिन, कानन, वन, अरण्य, गहन, कांतार, बीहड़, विटप।
127. जेवर- गहना, अलंकार, भूषण, आभरण, मंडल।
128. ज्योति- आभा, छवि, द्युति, दीप्ति, प्रभा, भा, रुचि, रोचि।
129. जहाज- पोत, जलयान। 
130. जानकी- सीता, वैदही, जनकसुता, जनकतनया, जनकात्मजा। 
131. झरना- उत्स, स्रोत, प्रपात, निर्झर, प्रस्त्रवण। 
132. झण्डा- ध्वजा, पताका, केतु। 
133. झूठ- असत्य, मिथ्या, मृषा, अनृत।
134.
( ट, ठ, ड, ढ )
135. टक्कर- मुठभेड़, लड़ाई, मुकाबला। 
136. टहलुआ- नौकर, सेवक, खिदमतगार। 
137. टाँग- पाँव, पैर, टंक। 
138. टीका- तिलक, चिह्न, दाग, धब्बा। 
139. टोना- टोटका, जादू, यंत्रमंत्र, लटका। 
140. ठंड- ठंड, शीत, सर्दी। 
141. ठग- छली, धूर्त, धोखेबाज।
142. ठाँव- स्थान, जगह, ठिकाना। 
143. ठिंगना- बौना, वामन, नाटा। 
144. ठीक- उपयुक्त, उचित, मुनासिब। 
145. ठेठ- निपट, निरा, बिल्कुल। 
146. डंडा- सोंटा, छड़ी, लाठी। 
147. डाली- भेंट, उपहार। 
148. ढब- ढंग, रीति, तरीका, ढर्रा। 
149. ढाँचा- पंजर, ठठरी। 
150. ढील- शिथिलता, सुस्ती, अतत्परता। 
151. ढूँढ- खोज, तलाश। 
152. ढोर- चौपाया, मवेशी।
153.
(त )
154. तालाब- सरोवर, जलाशय, सर, पुष्कर, ह्रद, पद्याकर , पोखरा, जलवान, सरसी, तड़ाग।
155. तोता- सुग्गा, शुक, सुआ, कीर, रक्ततुण्ड, दाड़िमप्रिय। 
156. तरुवर- वृक्ष, पेड़, द्रुम, तरु, विटप, रूंख, पादप।
157. तलवार- असि, कृपाण, करवाल, खड्ग, शमशीर चन्द्रहास।
158. तरकस- तूण, तूणीर, त्रोण, निषंग, इषुधी। 
159. तामरस- कमल, पंकज, सरसिज, नीरज, पुण्डरीक, इन्दीवर। 
160. तिमिर- तम, अंधकार, अंधेरा, तमिस्त्रा। 
161. तीर- शर, बाण, विशिख, शिलीमुख, अनी, सायक।
162.
( थ )
163. थोड़ा- अल्प, न्यून, जरा, कम। 
164. थाती- जमापूँजी, धरोहर, अमानत। 
165. थाक- ढेर, समूह। 
166. थप्पड़- तमाचा, झापड़। 
167. थंभ- खंभ, खंभा, स्तम्भ।
168.
( द )
169. दूध- दुग्ध, दोहज, पीयूष, क्षीर, पय, गौरस, स्तन्य।
170. दास- नौकर, चाकर, सेवक, परिचारक, अनुचर, भृत्य, किंकर।
171. दुःख- पीड़ा, कष्ट, व्यथा, वेदना, संताप, संकट, क्लेश, यातना, यन्तणा, शोक, खेद, पीर,।
172. देवता- सुर, देव, अमर, वसु, आदित्य, निर्जर, त्रिदश, गीर्वाण, अदितिनंदन, अमर्त्य, अस्वप्न, आदितेय, दैवत, लेख, अजर, विबुध।
173. द्रव्य- धन, वित्त, सम्पदा, विभूति, दौलत, सम्पत्ति। 
174. दैत्य- असुर, इंद्रारि, दनुज, दानव, दितिसुत, दैतेय, राक्षस। 
175. दधि- दही, गोरस, मट्ठा, तक्र।
176. दरिद्र- निर्धन, ग़रीब, रंक, कंगाल, दीन।
177. दिन- दिवस, याम, दिवा, वार, प्रमान, वासर, अह्न।
178. दीन- ग़रीब, दरिद्र, रंक, अकिंचन, निर्धन, कंगाल।
179. दीपक- दीप, दीया, प्रदीप।
180. दुष्ट- पापी, नीच, दुर्जन, अधम, खल, पामर।
181. दाँत- दशन, रदन, रद, द्विज, दन्त, मुखखुर।
182. दर्पण- शीशा, आरसी, आईना, मुकुर।
183. दुर्गा- चंडिका, भवानी, कुमारी, कल्याणी, सिंहवाहिनी, कामाक्षी, सुभद्रा, महागौरी, कालिका, शिवा, चण्डी, चामुण्डा।
184. दया- अनुकंपा, अनुग्रह, करुणा, कृपा, प्रसाद, संवेदना, सहानुभूति, सांत्वना। 
185. देव-अमर, देवता, सुर, निर्जर, वृन्दारक, आदित्य। 
186. देह- काया, तन, शरीर, वपु, गात।
187.
( ध )
188. धन- दौलत, संपत्ति, सम्पदा, वित्त।
189. धरती- धरा, धरती, वसुधा, ज़मीन, पृथ्वी, भू, भूमि, धरणी, वसुंधरा, अचला, मही, रत्नवती, रत्नगर्भा।
190. धनुष- चाप्, शरासन, कमान, कोदंड, पिनाक, सारंग, धनु।
191.
( न )
192. नदी- तनूजा, सरित, शौवालिनी, स्रोतस्विनी, आपगा, निम्रगा, कूलंकषा, तटिनी, सरि, सारंग, जयमाला, तरंगिणी, दरिया, निर्झरिणी।
193. नौका- नाव, तरिणी, जलयान, जलपात्र, तरी, बेड़ा, डोंगी, तरी, पतंग। 
194. नाग- विषधर, भुजंग, अहि, उरग, काकोदर, फणीश, सारंग, व्याल, सर्प, साँप। 
195. नर्क- यमलोक, यमपुर, नरक, यमालय। 
196. नर- जन, मानव, मनुष्य, पुरुष, मर्त्य, मनुज। 
197. निंदा- दोषारोपण, फटकार, बुराई, भर्त्सना। 
198. नेत्र- चक्षु, लोचन, नयन, अक्षि, चख, आँख। 
199. नया- नूतन, नव, नवीन, नव्य।
200.
201.
( प )
202. पति- भर्ता, वल्लभ, स्वामी, प्राणाधार, प्राणप्रिय, प्राणेश, आर्यपुत्र।
203. पत्नी- भार्या, दारा, बेगम, कलत्र, प्राणप्रिया, वधू, वामा, अर्धांगिनी, सहधर्मिणी, गृहणी, बहु, वनिता, जोरू, वामांगिनी।
204. पक्षी- खेचर, दविज, पतंग, पंछी, खग, विहग, परिन्दा, शकुन्त, अण्डज, चिडिया, गगनचर, पखेरू, विहंग, नभचर।
205. पर्वत- पहाड़, गिरि, अचल, भूमिधर, तुंग आद्रि, शैल, धरणीधर, धराधर, नग, भूधर, महीधर।
206. पण्डित- सुधी, विद्वान, कोविद, बुध, धीर, मनीषी, प्राज्ञ, विचक्षण। 
207. पुत्र- बेटा, लड़का, आत्मज, सुत, वत्स, तनुज, तनय, नंदन।
208. पुत्री- बेटी, आत्मजा, तनूजा, दुहिता, नन्दिनी, लड़की, सुता, तनया।
209. पृथ्वी- धरा, धरती, भू, इला, उर्वी, धरित्री, धरणी, अवनि, मेदिनी, क्षिति, मही, वसुंधरा, वसुधा, जमीन, भूमि।
210. पुष्प- फूल, सुमन, कुसुम, मंजरी, प्रसून, पुहुप।
211. पानी- जल, नीर, सलिल, अंबु, अंभ, उदक, तोय, जीवन, वारि, पय, अमृत, मेघपुष्प, सारंग। 
212. पार्वती- अपर्णा, अंबिका, आर्या, उमा, गौरी, गिरिजा, भवानी, रुद्राणी, शिवा। 
213. परिवार- कुटुंब, कुनबा, खानदान, घराना। 
214. परिवर्तन- बदलाव, हेरफेर, तबदीली, फेरबदल। 
215. पत्थर- पाहन, पाषाण, प्रस्तर, उपल। 
216. पथ- मग, मार्ग, राह, पंथ, रास्ता। 
217. पिता- जनक, तात, पितृ, बाप। 
218. प्रकाश- ज्योति, चमक, प्रभा, छवि, द्युति। 
219. पेड़- तरु, द्रुम, वृक्ष, पादप, रुक्ष। 
220. पैर- पाँव, पद, चरण, पाद, पग। 
221. पवन- वायु, हवा, समीर, वात, मारुत, अनिल, पवमान, समीरण, स्पर्शन।
222.
( फ )
223. फल- फलम, बीजकोश। 
224. फूल- पुष्प, सुमन, कुसुम, गुल, प्रसून।
225.
( ब )
226. बाण- सर, तीर, सायक, विशिख, आशुग, इषु, शिलीमुख, नाराच।
227. बिजली- घनप्रिया, इन्द्र्वज्र, चंचला, सौदामनी, चपला, बीजुरी, क्षणप्रभा, घनवल्ली, शया, ऐरावती, दामिनी, ताडित, विद्युत।
228. ब्रह्मा- विधि, विधाता, स्वयंभू, प्रजापति, आत्मभू, लोकेश, पितामह, चतुरानन, विरंचि, अज, कर्तार, कमलासन, नाभिजन्म, हिरण्यगर्भ।
229. ब्राह्मण- द्विज, भूदेव, विप्र, महीदेव, अग्रजन्मा, द्विजाति, भूसुर, महीसुर, वाडव, भूमिसुर, भूमिदेव।
230. बहुत- अनेक, अतीव, अति, बहुल, भूरि, बहु, प्रचुर, अपरिमित, प्रभूत, अपार, अमित, अत्यन्त, असंख्य।
231. बादल- मेघ, घन, जलधर, जलद, वारिद, नीरद, सारंग, पयोद, पयोधर।
232. बालू- रेत, बालुका, सैकत।
233. बन्दर- वानर, कपि, कपीश, मर्कट, कीश, शाखामृग, हरि।
234. बगीचा- बाग़, वाटिका, उपवन, उद्यान, फुलवारी, बगिया।
235. बाल- कच, केश, चिकुर, चूल।
236. बलदेव- बलराम, बलभद्र, हलायुध, राम, मूसली, रोहिणेय, संकर्षण।
237.
( भ )
238. भौंरा- अलि, मधुव्रत, शिलीमुख, मधुप, मधुकर, द्विरेप, षट्पद, भृंग, भ्रमर।
239. भोजन- खाना, भोज्य सामग्री, खाद्यय वस्तु, आहार। 
240. भय- भीति, डर, विभीषिका।
241. भाई- तात, अनुज, अग्रज, भ्राता, भ्रातृ।
242. भूषण- जेवर, गहना, आभूषण, अलंकार।
243.
( म )
244. मछली- मीन, मत्स्य, झख, झष, जलजीवन, शफरी, मकर।
245. महादेव- शम्भु, ईश, पशुपति, शिव, महेश्र्वर, शंकर, चन्द्रशेखर, भव, भूतेश, गिरीश, हर, त्रिलोचन। 
246. मेघ- घन, जलधर, वारिद, बादल, नीरद, वारिधर, पयोद, अम्बुद, पयोधर। 
247. मुनि- यती, अवधूत, संन्यासी, वैरागी, तापस, सन्त, भिक्षु, महात्मा, साधु, मुक्तपुरुष। 
248. मित्र- सखा, सहचर, स्नेही, स्वजन, सुहृदय, साथी, दोस्त।
249. मोर- केक, कलापी, नीलकंठ, शिखावल, सारंग, ध्वजी, शिखी, मयूर, नर्तकप्रिय।
250. मनुष्य- आदमी, नर, मानव, मानुष, जन, मनुज।
251. मदिरा- शराब, हाला, आसव, मधु, मद्य, वारुणी, सुरा, मद।
252. मधु- शहद, रसा, शहद, कुसुमासव।
253. मृग- हिरण, सारंग, कृष्णसार।
254. माता- जननी, माँ, अंबा, जनयत्री, अम्मा।
255. मूर्ख- गँवार, अल्पमति, अज्ञानी, अपढ़, जड़। 
256. मृत्यु- देहांत, मौत, अंत, स्वर्गवास, निधन, देहावसान, पंचत्व, इंतकाल, काशीवास, गंगालाभ, निर्वाण, मरण। 
257. माँ- अंबा, अम्बिका, अम्मा, जननी, धात्री, प्रसू। 
258. मुर्गा- तमचूक, अरुणशिखा, ताम्रचूड़, कुक्कुट। 
259. मग- पन्थ, मार्ग, बाट, पथ, राह। 
260. मूढ़- मूर्ख, अज्ञानी, निर्बुद्धि, जड़, गंवार। 
261. मैना- सारी, सारिका, त्रिलोचना, मधुरालाषा, कलहप्रिया। 
262. मूँगा- प्रवाल, रक्तांग, विद्रुम, रक्तमणि। 
263. मोक्ष- मुक्ति, परधाम, निर्वाण, कैवल्य, सद्गति, निर्वाण, परमपद, अपवर्ग।
264.
( य )
265. यम- सूर्यपुत्र, जीवितेश, श्राद्धदेव, कृतांत, अन्तक, धर्मराज, दण्डधर, कीनाश, यमराज।
266. यमुना- कालिन्दी, सूर्यसुता, रवितनया, तरणि-तनूजा, तरणिजा, अर्कजा, भानुजा।
267. युवति- युवती, सुन्दरी, श्यामा, किशोरी, तरुणी, नवयौवना।
268.
( र )
269. रात्रि- निशा, क्षया, रैन, रात, यामिनी, रजनी, त्रियामा, क्षणदा, शर्वरी, तमस्विनी, विभावरी।
270. रात- रात्रि, रैन, रजनी, निशा, यामिनी, तमी, निशि, यामा, विभावरी।
271. राजा- नृपति, भूपति, नरपति, नृप, महीप, राव, सम्राट, भूप, भूपाल, नरेश, महीपति, अवनीपति।
272. रवि- सूरज, दिनकर, प्रभाकर, दिवाकर, सविता, भानु, दिनेश, अंशुमाली, सूर्य। 
273. रमा- इन्दिरा, हरिप्रिया, श्री, लक्ष्मी, कमला, पद्मा, पद्मासना, समुद्रजा, श्रीभार्गवी, क्षीरोदतनया।
274. रामचन्द्र- अवधेश, सीतापति, राघव, रघुपति, रघुवर, रघुनाथ, रघुराज, रघुवीर, रावणारि, जानकीवल्लभ, कमलेन्द्र, कौशल्यानन्दन।
275. रावण- दशानन, लंकेश, लंकापति, दशशीश, दशकंध, दैत्येन्द्र।
276. राधिका- राधा, ब्रजरानी, हरिप्रिया, वृषभानुजा।
277. रक्त- खून, लहू, रुधिर, शोणित, लोहित। 
278. राक्षस- दैत्य, असुर, निशाचर।
279.
280.
( ल )
281. लक्ष्मी- चंचला, कमला, पद्मा, रमा, हरिप्रिया, श्री, इंदिरा, पद्ममा, सिन्धुसुता, कमलासना।
282. लड़का- बालक, शिशु, सुत, किशोर, कुमार।
283. लड़की- बालिका, कुमारी, सुता, किशोरी, बाला, कन्या।
284. लक्ष्मण- लखन, शेषावतार, सौमित्र, रामानुज, शेष।
285. लौह- अयस, लोहा, सार।
286. लता- बल्लरी, बल्ली, बेली।
287.
( व )
288. वृक्ष- तरू, अगम, पेड़, पादप, विटप, गाछ, दरख्त, शाखी, विटप, द्रुम।
289. विवाह- शादी, गठबंधन, परिणय, व्याह, पाणिग्रहण। 
290. वायु- हवा, पवन, समीर, अनिल, वात, मारुत।
291. वसन- अम्बर, वस्त्र, परिधान, पट, चीर।
292. विधवा- अनाथा, पतिहीना, राँड़।
293. विष- ज़हर, हलाहल, गरल, कालकूट।
294. विष्णु- नारायण, दामोदर, पीताम्बर, माधव, केशव, गोविन्द, चतुर्भज, उपेन्द्र, जनार्दन, चक्रपाणि, विश्वम्भर, लक्ष्मीपति, मधुरिपु।
295. विश्व- जगत, जग, भव, संसार, लोक, दुनिया।
296. विद्युत- चपला, चंचला, दामिनी, सौदामिनी, तड़ित, बीजुरी, घनवल्ली, क्षणप्रभा, करका।
297. वारिश- वर्षण, वृष्टि, वर्षा, पावस, बरसात।
298. वीर्य- जीवन, सार, तेज, शुक्र, बीज।
299. वज्र- कुलिस, पवि, अशनि, दभोलि।
300. विशाल- विराट, दीर्घ, वृहत, बड़ा, महा, महान।
301. वर्षा- पावस, बरसात, वर्षाकाल, चौमासा, वर्षाऋतु। 
302. वसन्त- मधुमास, माधव, कुसुमाकर, ऋतुराज। 
303. वन- कानन, विपिन, अरण्य, कांतार
304.
( श, ष)
305. शेर-हरि, मृगराज, व्याघ्र, मृगेन्द्र, केहरि, केशरी, वनराज, सिंह, शार्दूल, हरि, मृगराज।
306. शिव- भोलेनाथ, शम्भू, त्रिलोचन, महादेव, नीलकंठ, शंकर।
307. शरीर- देह, तनु, काया, कलेवर, वपु, गात्र, अंग, गात।
308. शत्रु- रिपु, दुश्मन, अमित्र, वैरी, प्रतिपक्षी, अरि, विपक्षी, अराति।
309. शिक्षक- गुरु, अध्यापक, आचार्य, उपाध्याय।
310. शेषनाग- अहि, नाग, भुजंग, व्याल, उरग, पन्नग, फणीश, सारंग।
311. शुभ्र- गौर, श्वेत, अमल, वलक्ष, धवल, शुक्ल, अवदात।
312. शहद- पुष्परस, मधु, आसव, रस, मकरन्द।
313. सरस्वती- गिरा, शारदा, भारती, वीणापाणि, विमला, वागीश, वागेश्वरी। 
314. सेना- ऊनी, कटक, दल, चमू, अनीक, अनीकिनी। 
315. साधु- सज्जन, भद्र, सभ्य, शिष्ट, कुलीन। 
316. सलिल- अम्बु, जल नीर, तोय, सलिल, पानी, वारि। 
317. सगर्भ- बंधु, भाई, सजात, सहोदर, भ्राता, सोदर। 
318. सगर्भा- भगिनी, सजाता, सहोदर, बहिन, सोदरा। 
319. षंड- हीजड़ा, नपुंसक, नामर्द।
320. षडानन- षटमुख, कार्तिकेय, षाण्मातुर।
321.
( स )
322. समुद्र- सागर, पयोधि, उदधि, पारावार, नदीश, नीरनिधि, अर्णव, पयोनिधि, अब्धि, वारीश, जलधाम, नीरधि, जलधि, सिंधु, रत्नाकर, वारिधि।
323. समूह- दल, झुंड, समुदाय, टोली, जत्था, मण्डली, वृंद, गण, पुंज, संघ, समुच्चय।
324. सरस्वती- गिरा, भाषा, भारती, शारदा, ब्राह्यी, वाक्, जातरूप, हाटक, वीणापाणि, विमला, वागीश, वागेश्वरी।
325. सुमन- कुसुम, मंजरी, प्रसून, पुष्प, फूल ।
326. सीता- वैदेही, जानकी, भूमिजा, जनकतनया, जनकनन्दिनी, रामप्रिया।
327. सर्प- साँप, अहि, भुजंग, ब्याल, फणी, पत्रग, नाग, विषधर, उरग, पवनासन।
328. सोना- स्वर्ण, कंचन, कनक, सुवर्ण, हाटक, हिरण्य, जातरूप, हेम, कुंदन।
329. सूर्य- रवि, सूरज, दिनकर, प्रभाकर, आदित्य, मरीची, दिनेश, भास्कर, दिनकर, दिवाकर, भानु, अर्क, तरणि, पतंग, आदित्य, सविता, हंस, अंशुमाली, मार्तण्ड।
330. संसार- जग, विश्व, जगत, लोक, दुनिया।
331. सिंह- केसरी, शेर, महावीर, व्याघ्र, पंचमुख, मृगेन्द्र, केहरी, केशी, ललित, हरि, मृगपति, वनराज, शार्दूल, नाहर, सारंग, मृगराज।
332. सम- सर्व, समस्त, सम्पूर्ण, पूर्ण, समग्र, अखिल, निखिल।
333. समीप- सन्निकट, आसन्न, निकट, पास।
334. सभा- अधिवेशन, संगीति, परिषद, बैठक, महासभा।
335. सुन्दर- कलित, ललाम, मंजुल, रुचिर, चारु, रम्य, मनोहर, सुहावना, चित्ताकर्षक, रमणीक, कमनीय, उत्कृष्ट, उत्तम, सुरम्य।
336. सन्ध्या- सायंकाल, शाम, साँझ, प्रदोषकाल, गोधूलि।
337. स्त्री- सुन्दरी, कान्ता, कलत्र, वनिता, नारी, महिला, अबला, ललना, औरत, कामिनी, रमणी।
338. सुगंधि- सौरभ, सुरभि, महक, खुशबू।
339. स्वर्ग- सुरलोक, देवलोक, दिव्यधाम, ब्रह्मधाम, द्यौ, परमधाम, त्रिदिव, दयुलोक।
340. स्वर्ण- सुवर्ण, कंचन, हेन, हारक, जातरूप, सोना, तामरस, हिरण्य।
341. सहेली- अलि, भटू, संगिनी, सहचारिणी, आली, सखी, सहचरी, सजनी, सैरन्ध्री।
342. संसार- लोक, जग, जहान, भूमण्डल, दुनियाँ, भव, जगत, विश्व।
343.
( ह )
344. हस्त- हाथ, कर, पाणि, बाहु, भुजा।
345. हिमालय- हिमगिरी, हिमाचल, गिरिराज, पर्वतराज, नगपति, हिमपति, नगराज, हिमाद्रि, नगेश।
346. हिरण- सुरभी, कुरग, मृग, सारंग, हिरन।
347. होंठ- अक्षर, ओष्ठ, ओंठ।
348. हनुमान- पवनसुत, पवनकुमार, महावीर, रामदूत, मारुततनय, अंजनीपुत्र, आंजनेय, कपीश्वर, केशरीनंदन, बजरंगबली, मारुति।
349. हिमांशु- हिमकर, निशाकर, क्षपानाथ, चन्द्रमा, चन्द्र, निशिपति।
350. हंस- कलकंठ, मराल, सिपपक्ष, मानसौक।
351. हृदय- छाती, वक्ष, वक्षस्थल, हिय, उर।
352. हाथ- हस्त, कर, पाणि।
353. हाथी- नाग, हस्ती, राज, कुंजर, कूम्भा, मतंग, वारण, गज, द्विप, करी, मदकल।
विलोम शब्द

  शब्द     विलोम 

1. लाभ - हानि 
2. रात - दिन
3. अमृत - विष
4. अथ - इति
5. अन्धकार - प्रकाश
6. अल्पायु -दीर्घायु
7. इच्छा -अनिच्छ।
8. उत्कर्ष - अपकर्ष
9. अनुराग -विराग
10. आदि - अंत
11. आगामी - गत
12. उत्थान - पतन
13. आग्रह - दुराग्रह
14. एकता - अनेकता
15. अनुज - अग्रज
16. आकर्षण - विकर्षण
17. उद्यमी - आलसी
18. अधिक - न्यून
19. आदान - प्रदान
20. उर्वर - ऊसर
21. एक - अनेक
22. आलस्य - स्फूर्ति
23. अर्थ - अनर्थ
24. उधार - नगद
25. अपेक्षा - नगद
26. उपस्थित - अनुपस्थित
27. अतिवृष्टि - अनावृष्टि
28. उत्कृष्ट - निकृष्ट
29. उत्तम - अधम
30. आदर्श - यथार्थ
31. आय - व्यय
32. स्वाधीन - पराधीन
33. आहार - निराहार
34. दाता - याचक
35. खेद - प्रसन्नता
36. गुप्त - प्रकट
37. प्रत्यक्ष - परोक्ष
38. घृणा - प्रेम
39. सजीव - निर्जीव
40. सुगंध - दुर्गन्ध
41. मौखिक - लिखित
42. संक्षेप - विस्तार
43. घात - प्रतिघात
44. निंदा - स्तुति
45. मितव्यय - अपव्यय
46. सरस - नीरस
47. सौभाग्य - दुर्भाग्य
48. मोक्ष - बंधन
49. कृतज्ञ - कृतघ्न
50. क्रय - विक्रय
51. दुर्लभ - सुलभ
52. निरक्षर - साक्षर
53. नूतन - पुरातन
54. बंधन - मुक्ति
55. ठोस - तरल
56. यश - अपयश
57. सगुण - निर्गुण
58. मूक - वाचाल
59. रुग्ण - स्वस्थ
60. रक्षक - भक्षक
61. वरदान - अभिशाप
62. शुष्क - आर्द्र
63. हर्ष - शोक
64. क्षणिक - शाश्वत
65. विधि - निषेध
66. विधवा - सधवा
67. शयन - जागरण
68. शीत - उष्ण
69. सक्रिय - निष्क्रय
70. सफल - असफल
71. सज्जन - दुर्जन
72. शुभ - अशुभ
73. संतोष - असंतोष
74. आतुर - शांत
75. आगामी  - विगत
76. आरोह - अवरोह
77. आचार - अनाचार
78. आदत्त - प्रदत्त
79. आदर - अनादर
80. आदान - प्रदान
81. उचित - अनुचित
82. आरम्भ - अंत
83. आह्वान - विसर्जन
84. आवृत - अनावृत
85. आकर्ष - विकर्ष
86. आकर्षण - विकर्षण
87. आद्र - शुष्क
88. आच्छादित - अनाछ्दित
89. आहार - अनाहार
90. आशा - निराशा
91. आधुनिक - प्राचीन
92. आशीर्वाद - अभिशाप
93. आसक्त - अनाशक्त
94. आदर्श - यथार्थ
95. आगमन - गमन
96. आध्यात्मिक - भौतिक
97. आस्था - अनास्था
98. इच्छा - अनिच्छा
99. इहलोक - परलोक
100. ईश्वर - अनीश्वर
101. ईर्ष्या - प्रेम
102. उत्कर्ष - अपकर्ष
103. उषा - संध्या
104. उग्र - सौम्य
105. उदार - अनुदार
106. उचित - अनुचित
107. उपकार - अपकार
108. उत्थान - पतन
109. उधार - नगद
110. उन्नति - अवनति
111. उपयुक्त -  अनुपयुक्त
112. उपाय - निरुपाय
113. एकांगी - सर्वांगीण
114. कनिष्ठ - ज्येष्ठ
115. कृष - स्थूल
116. कृष्ण - शुक्ल
117. गुप्त - प्रकट
118. ग्रामीण - शहरी
119. घात - प्रतिघात
120. छली - निश्चल
121. छूत - अछूत
122. जल - थल
123. जन्म - मृत्यु
124. जंगली - पालतू
125. दयालु - निर्दयी
126. धीर - अधीर
127. नख - शिख
128. निरक्षर - साक्षर
129. निंदा - प्रशंसा
130. पक्ष - विपक्ष
131. पूर्ण - अपूर्ण
132. परकीया - स्वकीया
133. बंधन - मुक्ति
134. भद्र - अभद्र
135. भाव - अभाव
136. मौखिक - लिखित
137. राग - विराग
138. विधवा - सधवा
139. शयन - जागरण
140. शीत - उष्ण
141. घात - प्रतिघात
142. घृणा - प्रेम
143. चल - अचल
144. जटिल - सरल
145. ठोस - तरल
146. दाता - याचक
147. निर्मल - मलिन
148. नस्वर  अनश्वर
149. प्रभु - दास
150. बाढ़ - सूखा
151. मानव - दानव
152. मिलन - विछोह
153. मूक - वाचाल
154. रहित - सहित
155. रात्री - दिवस
156. लोभ - संतोष
157. विपन्न - संपन्न
158. विशुद्ध - दूषित
159. विरोध - समर्थन
160. शकुन - अपशकुन
161. सामिष - निरामिष
162. सूक्ष्म - स्थूल
163. हास्य - रुदन
164. तरुण - वृद्ध
165. दुर्लभ - सुलभ
166. पंडित - मूर्ख
167. पतिव्रता - कुलटा
168. प्रत्यक्ष - परोक्ष
169. भूत - भविष्य
170. मनुष्यता - पशुता
171. मिथ्या -  सत्य
172. मोक्ष - बंधन
173. योगी - भोगी
174. सजीव - निर्जीव
175. अग्नि - जल
176. अनाथ - सनाथ
177. अर्पण - ग्रहण
178. अथ - इति
179. अस्त - उदय
180. अगम - सुगम
181. अपेक्षा - उपेक्षा
182. अकाल - सुकाल
183. आयात - निर्यात
184. असली - नकली
185. अज्ञ - विज्ञ
186. अमर - मर्त्य
187. अधम - उत्तम
188. आतुर - शांत
189. आगामी - विगत
190. आरोह - अवरोह
191. आचार - अनाचार
192. आश्रित - अनाश्रित
193. आदत्त - प्रदत्त
194. आदर - अनादर
195. आदान - प्रदान
196. उचित - अनुचित
197. आरंभ - अंत
198. आह्वान - विसर्जन
199. आवृत - अनावृत
200. आकर्ष - विकर्ष
201. आकर्षण - विकर्षण
202. आद्र - शुष्क
203. आच्छादित - अनाच्छादित
204. आहार - अनाहार
205. आशा - निराशा
206. आधुनिक - प्राचीन
207. आशीर्वाद - अभिशाप
208. आसक्त - अनाशक्त
209. आदर्श - यथार्थ
210. आगमन - गमन
211. आध्यात्मिक - भौतिक
212. आगामी - विगत
213. आस्था - अनास्था
214. इच्छा - अनिच्छा
215. इहलोक - परलोक
216. ईर्ष्या - प्रेम
217. उत्कर्ष - अपकर्ष
218. उषा - सौम्य
219. उदार - अनुदार
220. उचित - अनुचित
221. उपकार - अपकार
222. उत्थान - पतन
223. उधार - नगद
224. उन्नति - अवनति
225. उत्तीर्ण - अनुतीर्ण
226. उपयुक्त - अनुपयुक्त
227. उपाय - निरुपाय
228. उद्यमी - आलसी
229. ऋजु - कुटिल
230. ऋणी - उऋण
231. एकांगी - सर्वागीण
232. ऐश्वर्य - दारिद्य
233. कनिष्ठ - ज्येष्ठ
234. कृश - स्थूल
235. कृष्ण - शुक्ल
236. गुप्त - प्रकट
237. ग्रामीण - शहरी
238. ग्राम्य - शिष्ट
239. यश - अपयश
240. योगी - भोगी
241. रचना - विनाश
242. रत - विरत
243. राजतंत्र - प्रजातंत्र
244. रिक्त - पूर्ण
245. रंगीन - रंगहीन
246. लोभी - संतोषी
247. लेन - देन
248. लौह - स्वर्ण
249. वन - मरू
250. विधि - निषेध
251. विरह - मिलन
252. विशालकाय - लघुकाय
253. विश्वास - संदेह
254. शकुन - अपशकुन
255. शयन - जागरण
256. शासक - शासित
257. शुचि - अशुचि
258. शोषण - पोषण
259. समास - व्यास
260. सम्पद - विपद
261. सरस - नीरस
262. स्थावर - जंगम
263. स्वकीया - परकीय
264. सांगत - असंगत
265. संत - असंत
266. संश्लिष्ट - विश्लिष्ट
267. वृष्टि - अनाविष्टि
268. विवाद - निर्णय
269. विशिष्ट - साधारण
270. विस्तार - संक्षेप
271. श्वेत - श्याम
272. सदाशय - दुराशय
273. सपूत - कपूत
274. समाज - व्यक्ति
275. ससीम - असीम
276. संकीर्ण  - उदार
277. सूक्षम - स्थूल
278. हास्य - रुदन
279. क्षम - अक्षम
280. क्षर - अक्षर
281. सुगम - दुर्गम
282. सुभग - दुर्भग
283. क्षुद्र - महान
284. श्रव्य - दृश्य
प्रश्‍न 1- क्रिया विशेषण किसे कहते है। 
उत्‍तर - जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का ज्ञान होता है, उसे क्रिया विशेषण कहते है।
जैसे – यहॉ , वहॉ , अब , तक आदि 

प्रश्‍न 2- अव्यय किसे कहते है। 

उत्‍तर - जिन शब्दों में लिंग , वचन , पुरूष , कारक आदि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते है। 
प्रश्‍न 3- अव्यय के सामान्यत: कितने भेद है। 
उत्‍तर - अव्यय के सामान्यत: 4 भेद है।
1. क्रिया विशेषण
2. संबंधबोधक
3. समुच्चोय बोधक
4. विस्मचयादि बोधक 
प्रश्‍न 4- हिन्दी् में वचन कितने प्रकार के होते है। 
उत्‍तर - हिन्दी् में वचन 2 प्रकार के होते है।
1. एक वचन
2. बहुवचन 
प्रश्‍न 5- वर्ण किसे कहते है। 
उत्‍तर - वह मूल ध्वनि जिसका और विभाजन नही हो सकता हो उसे वर्ण कहते है।
जैसे - म , प , र , य , क आदि 
प्रश्‍न 6- वर्णमाला किसे कहते है। 
उत्‍तर - वर्णों का क्रमबद्ध समूह ही वर्णमाला कहलाता है। 
प्रश्‍न 7- शब्द किसे कहते है। 
उत्‍तर - दो या दो से अधिक वर्णों का मेल जिनका कोई निश्चित अर्थ निकलता हो उन्हे शब्द कहते है। 
प्रश्‍न 8- वाक्य किसे कहते है। 
उत्‍तर - दो या दो से अधिक शब्दों का सार्थक समूह वाक्य कहलाता है। 
प्रश्‍न 9- मूल स्वरों की संख्यां कितनी है।
उत्‍तर - मूल स्वरों की संख्यां 11 होती है। 
प्रश्‍न 10- मूल व्यंजन की संख्यां कितनी होती है। 
उत्‍तर - मूल व्यंजन की संख्यां 33 होती है। 
प्रश्‍न 11- 'क्ष' ध्‍वनि किसके अर्न्‍तगत आती है। 
उत्‍तर - संयुक्‍त्‍ा वर्ण । 
प्रश्‍न 12- 'त्र' किन वर्णों के मेल से बना है। 
उत्‍तर - त् + र । 
प्रश्‍न 13- 'ट' वर्ण का उच्‍चारण स्‍थान क्‍या है। 
उत्‍तर - मूर्धा । 
प्रश्‍न 14- 'फ' का उच्‍चारण स्‍थान है। 
उत्‍तर - दन्‍तोष्‍ठय । 
प्रश्‍न 15- श् , ष् , स् , ह् व्‍यंजन कहलाते है। 
उत्‍तर - ऊष्‍म व्‍यंजन । 
प्रश्‍न 16- य् , र् , ल् , व् व्‍यंजन को कहते है। 
उत्‍तर - अन्‍तस्‍थ व्‍यंजन । 
प्रश्‍न 17- क् से म् तक के व्‍यंजनों को कहा जाता है। 
उत्‍तर - स्‍पर्श व्‍यंजन । 
प्रश्‍न 18- घोष का अर्थ है। 
उत्‍तर - नाद । 
प्रश्‍न 19- जिन ध्‍वनियों के उच्‍चारण में श्‍वास जिह्वा के दोनों ओर से निकल जाती है कहलाती है। 
उत्‍तर - पार्श्विक । 
प्रश्‍न 20- 'आ' स्‍वर कहलाता है। 
उत्‍तर - विवृत स्‍वर । 
प्रश्‍न 21- पश्‍च स्‍वर है। 
उत्‍तर - इ , आ । 
प्रश्‍न 22- अग्र स्‍वर है। 
उत्‍तर - ऐ । 
प्रश्‍न 23- 'श्र' व्‍यंजन किन दो व्‍यंजनों से मिलकर बना है। 
उत्‍तर - श् + र । 
प्रश्‍न 24- 'ड' , 'ढ' का व्‍यंजन वर्ग है। 
उत्‍तर - मूर्धन्‍य -उत्क्षिप्‍त । 
प्रश्‍न 25- ओम ध्‍वनि के उच्‍चारण में स्‍वर का कौन सा रूप प्रकट होता है। 
उत्‍तर - प्‍लुत स्‍वर । 
प्रश्‍न 26- सघोष वर्णो का सही वर्ग है। 
उत्‍तर - ड , ढ । 
प्रश्‍न 27- भ्राता का भाववाचक शब्‍द क्‍या होगा । 
उत्‍तर - भ्रातृत्‍व । 
प्रश्‍न 28- सीमा दौड़ती है। यहॉ दौड़ती है कैसी क्रिया है। 
उत्‍तर - अर्कमक । 
प्रश्‍न 29- आशुतोष ने कहा कि मैं पढूँगा । इसमें 'कि मै पढूँगा' क्‍या है। 
उत्‍तर - संज्ञा उपवाक्‍य । 
प्रश्‍न 30- सोना - चॉंदी और तेल - पानी किस प्रकार के संज्ञा शब्‍द है। 
उत्‍तर - द्रव्‍यवाचक । 
प्रश्‍न 31- कृपाण का विलोम शब्‍द होगा । 
उत्‍तर - दानी । 
प्रश्‍न 32- अनुराग का विलोम शब्‍द होगा । 
उत्‍तर - विराग । 
प्रश्‍न 33- भोगी का विलोम शब्‍द होगा । 
उत्‍तर - योगी । 
प्रश्‍न 34- कीर्ति का विलोम शब्‍द होगा । 
उत्‍तर - अपकीर्ति । 
प्रश्‍न 35- स्‍थूल का विलोम शब्‍द होगा । 
उत्‍तर - सूक्ष्‍म । 
प्रश्‍न 36- शीर्ष का विलोम शब्‍द होगा । 
उत्‍तर - तल । 
प्रश्‍न 37- शोषक का विलोम शब्‍द होगा । 
उत्‍तर - शोषित । 
प्रश्‍न 38- मृदु का विलोम शब्‍द होगा । 
उत्‍तर - कटु । 
प्रश्‍न 39- कलुष का विलोम शब्‍द होगा ।
उत्‍तर - निष्‍कलुष । 
प्रश्‍न 40- निर्दय का विलोम शब्‍द होगा ।
उत्‍तर - सदय । 
प्रश्‍न 41- नीरोग में संधि है। 
उत्‍तर - विसर्ग सन्धि । 
प्रश्‍न 42- निस्‍तेज में कौन सी संधि है। 
उत्‍तर - विसर्ग संधि । 
प्रश्‍न 43- उज्‍जवल का संधि विच्‍छेद होगा । 
उत्‍तर - उत् + ज्‍वल । 
प्रश्‍न 44- बहिष्‍कार का सन्धि विच्‍छेद होगा । 
उत्‍तर - बहि: + कार । 
प्रश्‍न 45- चयन में कौन सी सन्धि है। 
उत्‍तर - अयादि संधि । 
प्रश्‍न 46- अन्‍वय में कौन सी संधि है। 
उत्‍तर - गुण संधि । 
प्रश्‍न 47- सच्चिदानंद का संधि विच्‍छेद होगा । 
उत्‍तर - सत् + चित् + आनंद । 
प्रश्‍न 48- उन्‍नति का संधि विच्‍छेद है। 
उत्‍तर - उत् + नति । 
प्रश्‍न 49- निर्धन में कौन सी सन्धि है। 
उत्‍तर - विसर्ग सन्धि । 
प्रश्‍न 50- सूर्य + उदय का संधयुक्‍त शब्‍द है। 
उत्‍तर - सूर्योदय । 
प्रश्‍न 51- किस युग को आधुनिक हिन्दी कविता का सिंहद्वार कहा जाता है। 
उत्‍तर - भारतेन्दु युग को । 

प्रश्‍न 52- द्विवेदी युग के प्रवर्तक कौन थे। 
उत्‍तर - महावीर प्रसाद द्विवेदी । 
प्रश्‍न 53- हिन्दी का पहला सामाजिक उपन्यास कौन सा माना जाता है। 
उत्‍तर - भाग्यवती । 
प्रश्‍न 54- सन् 1950 से पहले हिन्दी् कविता किस कविता के रूप में जानी जाती थी। 
उत्‍तर - प्रयोगवादी । 
प्रश्‍न 55- ब्रज भाषा का सर्वोत्त‍म कवि है। 
उत्‍तर - सूरदास । 
प्रश्‍न 56- आदिकाल के बाद हिन्दी में किस साहित्य का उदय हुआ । 
उत्‍तर - भक्ति साहित्य का । 
प्रश्‍न 57- निर्गुण भक्ति काव्य के प्रमुख कवि है। 
उत्‍तर - कबीरदास । 
प्रश्‍न 58- किस काल को स्वर्णकाल कहा जाता है। 
उत्‍तर - भक्ति काल को । 
प्रश्‍न 59- हिन्दी का आदि कवि किसे माना जाता है। 
उत्‍तर - स्व्यंभू । 
प्रश्‍न 60- आधुनिक काल का समय कब से माना जाता है। 
उत्‍तर - 1900 से अब तक । 
प्रश्‍न 61- जयशंकर प्रसाद की सर्वश्रेष्ठ रचना कौन सी है। 
उत्‍तर - कामायनी । 
प्रश्‍न 62- बिहारी ने क्या लिखे है। 
उत्‍तर - दोहे । 
प्रश्‍न 63- कबीर किसके शिष्य थे। 
उत्‍तर - रामानन्द । 
प्रश्‍न 64- पद्यावत महाकाव्य कौन सी भाषा में लिखा है। 
उत्‍तर - अवधी । 
प्रश्‍न 65- चप्पू किसे कहा जाता है। 
उत्‍तर - गद्य और पद्य मिश्रित रचनाओं को । 
प्रश्‍न 66- कलाधर उपनाम से कविता कौन से कवि लिखते थे। 
उत्‍तर - जयशंकर प्रसाद । 
प्रश्‍न 67- रस निधि किस कवि का उपनाम है। 
उत्‍तर - पृथ्वी सिंह । 
प्रश्‍न 68- प्रेमचन्द्र के अधुरे उपन्यांस का नाम है। 
उत्‍तर - मंगलसूत्र । 
प्रश्‍न 69- हिन्दी का सर्वाधिक नाटककार कौन है। 
उत्‍तर - जयशंकर प्रसाद । 
प्रश्‍न 70- तुलसीकृत रामचरित मानस में कौन सी भाषा का प्रयोग किया गया है। 
उत्‍तर - अवधी भाषा का प्रयोग किया गया है। 
प्रश्‍न 71- एकांकी के जन्मदाता कौन है।
उत्‍तर - धर्मवीर भारती । 
प्रश्‍न 72- मीराबाई ने किस भाव से कृष्ण की उपासना की । 
उत्‍तर - माधुर्य भाव से । 
प्रश्‍न 73- रामचरित मानस का प्रधान रस है। 
उत्‍तर - शान्त रस । 
प्रश्‍न 74- सबसे पहले अपनी आत्मकथा हिन्दी में किसने लिखी । 
उत्‍तर - डॉं. राजेन्द्र प्रसाद ने । 
प्रश्‍न 75- हिन्दी कविता का पहला महाकाव्य् कौन सा है। 
उत्‍तर - पृथ्वीराज रासो । 
प्रश्‍न 76- हिन्दी के सर्वप्रथम प्रकाशित पत्र का नाम क्या है। 
उत्‍तर - उदन्ड मार्तण्ड । 
प्रश्‍न 77- हिन्दी साहित्य की प्रथम कहानी है। 
उत्‍तर - इन्दुमती । 
प्रश्‍न 78- आंचलिक रचनाऍं किससे सम्बन्धित होती है। 
उत्‍तर - क्षेत्र विषेश से । 
प्रश्‍न 79- पृथ्वीराज रासो किस काल की रचना है । 
उत्‍तर - आदिकाल की । 
प्रश्‍न 80- हिन्दी गद्य का जन्म दाता किसको माना जाता है। 
उत्‍तर - भारतेन्दु हरिचन्‍द्र जी को । 
प्रश्‍न 81- कवि कालिदास की ‘अभिज्ञान शाकुन्त‍लम्’ का हिन्दी अनुवाद किसने किया। 
उत्‍तर - राजा लक्ष्मणसिंह ने । 
प्रश्‍न 82- पद्य साहित्य को कितने भागों में बॉंटा गया है। 
उत्‍तर - पन्द्रह भागों में । 
प्रश्‍न 83- कवि नरेन्द्र शर्मा ने राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के निधन से प्रभावित होकर कौन सी रचना की । 
उत्‍तर - रक्त चन्दन की रचना की । 
प्रश्‍न 84- नाट्यशास्त्रकारों द्वारा अमान्य रस कौन सा है। 
उत्‍तर - वीभत्स रस । 
प्रश्‍न 85- काव्य शास्त्र का प्राचीनतम नाम क्या था। 
उत्‍तर - अलंकार शास्त्र । 
प्रश्‍न 86- रीति सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे। 
उत्‍तर - आचार्य वामन । 
प्रश्‍न 87- हिन्दी में काव्य शास्त्र के प्रथम आचार्य कौन है। 
उत्‍तर - केशवदास । 
प्रश्‍न 88- साहित्य शब्द् किस शब्द से बना है। 
उत्‍तर - सहित शब्द से बना है। 
प्रश्‍न 89- हिन्दी साहित्य में जीवनी साहित्य का प्रारम्भ कौन से युग में हुआ । 
उत्‍तर - भारतेंदु युग में । 
प्रश्‍न 90- हिन्‍दी भाषा और सांहित्‍य के लेखक है। 
उत्‍तर - श्‍यामसुंदरदास । 
प्रश्‍न 91- मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । यह किसने कहा । 
उत्‍तर - अरस्तू ने । 
प्रश्‍न 92- भाषा किसे कहते है। 
उत्‍तर - मनुष्य अपने मानसिक विचारों की अभिव्यक्ति के लिए जिस माध्यम का प्रयोग करता है। वह भाषा कहलाती है। 
प्रश्‍न 93- भाषा शब्द की उत्पत्ति कहॉ से हुई है। 
उत्‍तर - भाषा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के भाष धातु से हुई है। 
प्रश्‍न 94- सामान्य् शब्दों मे हम भाषा को किस तरह से व्यक्तु करेगे । 
उत्‍तर - भाषा वह साधन है । जिसके द्वारा मनुष्य अपने भावों या विचारों को बोलकर या लिखकर दूसरे मनुष्यो तक पहुँचाता है। 
प्रश्‍न 95- भाषा को मोटे रूप में कितने भागों मे बांटा गया है। 
उत्‍तर - भाषा को मोटे रूप में 2 भागों मे बांटा गया है।
1. लिखित भाषा
2. मौखिक भाषा 
प्रश्‍न 96- हिन्दी भाषा का सम्बंन्ध किस लिपि से है। 
उत्‍तर - देवनागरी लिपि से है। 
प्रश्‍न 97- बोलने वालो की संख्या की दृष्टि से हिन्दी का विश्व मे कौन सा स्थान है। 
उत्‍तर - तीसरा । 
प्रश्‍न 98- सूरदास के काव्य किस भाषा में है। 
उत्‍तर - ब्रजभाषा में । 
प्रश्‍न 99- संविधान के किस अनुच्छे्द में कहा गया है – ‘’ संघ की राजभाषा हिन्दी् और लिपि देवनागरी होगी ‘’ । 
उत्‍तर - 343 वें अनुच्छेद में कहॉ गया । 
प्रश्‍न 100- हिन्दी शब्द‍ की व्युात्पात्ति कहॉ से हुई है। 
उत्‍तर - सिंधु से । 
प्रश्‍न 101- वर्तमान हिन्दी का प्रचलित रूप कैसा है। 
उत्‍तर - खडी बोली । 
प्रश्‍न 102- जिन ध्वनियों के संयोग से शब्दों का निर्माण होता है। उन्हें क्या कहते है। 
उत्‍तर - वर्ण । 
प्रश्‍न 103- स्वरों की संख्या कितनी मानी गई है। 
उत्‍तर - 11 । 
प्रश्‍न 104- हिन्दी मानक वर्ण माला में कुल कितने वर्ण है। 
उत्‍तर - 52 । 
प्रश्‍न 105- अन्तस्थ व्यंजनों की संख्या कितनी है। 
उत्‍तर - 4 । 
प्रश्‍न 106- हिन्दी वर्ण माला को कितने भागों में विभक्त किया गया है। 
उत्‍तर - दो भागो में । 
प्रश्‍न 107- हिन्दो वर्ण माला में स्पर्श व्यंजनों की संख्या कितनी है। 
उत्‍तर - 25 । 
प्रश्‍न 108- मात्रा के आधार पर हिन्दी स्वंरों के दो भेद कौन से है। 
उत्‍तर - हस्वर और दीर्घ । 
प्रश्‍न 109- ‘ क्ष ‘ वर्ण किसके योग से बना है। 
उत्‍तर - ‘’ क् + ष ‘’ से बना है। 
प्रश्‍न 110- हिन्दी वर्ण माला में व्यंजनों की संख्या है। 
उत्‍तर - 33 व्यंजन है। 
प्रश्‍न 111- सूरदास का काव्‍य किस भाषा में है। 
उत्‍तर - ब्रजभाषा में । 
प्रश्‍न 112- हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मेलन प्रयाग की स्‍थापना कब हुई । 
उत्‍तर - 1910 में । 
प्रश्‍न 113- संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्‍लेखित भारतीय भाषाओं की संख्‍या है। 
उत्‍तर - 22 । 
प्रश्‍न 114- हिन्‍दी की विशिष्‍ट बोली ब्रज भाषा किस रूप में सबसे अधिक प्रसिद्ध है। 
उत्‍तर - काव्‍य भाषा । 
प्रश्‍न 115- देवनागरी लिपि किस लिपि का विकसित रूप है। 
उत्‍तर - ब्राम्‍ही लिपि । 
प्रश्‍न 116- रामायण महाभारत आदि ग्रन्‍थ कौन सी भाषा में लिखे गये है। 
उत्‍तर - आर्यभाषा में । 
प्रश्‍न 117- विद्यापति की प्रसिद्ध रचना पदावली किस भाषा में लिखी गई है। 
उत्‍तर - मैथिली में । 
प्रश्‍न 118- भारत में हिन्‍दी का संवैधानिक स्‍वरूप है। 
उत्‍तर - राजभाषा । । 
प्रश्‍न 119- जाटू किस बोली का उपनाम है। 
उत्‍तर - बॉगरू । 
प्रश्‍न 120- ''एक मनई के दुई बेटवे रहिन'' यह अवतरण हिन्‍दी की किस बोली में है। 
उत्‍तर - भोजपुरी से । 
प्रश्‍न 121- हिन्दी का पहला नाटक है। 
उत्‍तर - नहुष । 
प्रश्‍न 122- कबीरदास की भाषा थी। 
उत्‍तर - सधुक्कडी । 
प्रश्‍न 123- कलम का जादूगर किसे कहा जाता है। 
उत्‍तर - रामवृक्ष बेनीपुरी को । 
प्रश्‍न 124- प्रगतिवाद उपयोगितावाद का दूसरा नाम है। यह कथन किसका है।
उत्‍तर - रामविलास शर्मा । 
प्रश्‍न 125- रामचरितमानस में कुल कितने काण्ड है। 
उत्‍तर - सात । 
प्रश्‍न 126- हिन्दी साहित्य के इतिहास के रचयिता कौन है। 
उत्‍तर - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल । 
प्रश्‍न 127- गीत गोविन्द किस भाषा में है। 
उत्‍तर - संस्कृत भाषा में । 
प्रश्‍न 128- लोक नायक किसको कहा जाता है। 
उत्‍तर - तुलसीदास जी को । 
प्रश्‍न 129- इन्दिरापति किसे कहा जाता है। 
उत्‍तर - विष्णु को । 
प्रश्‍न 130- पंचतंत्र क्या है। 
उत्‍तर - कहानी संग्रह । 
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प्रश्‍न 1 – निम्‍नलिखित में से अयोगवाह है।
(a) विसर्ग
(b) महाप्राण
(c)  संयुक्‍त व्‍यंजन
(d) अल्‍पप्राण
उत्‍तर – विसर्ग ।

प्रश्‍न 2 – किस क्रमांक में ‘’ ई ‘’ स्‍वर का सही उच्‍चारण स्‍थान है। 
(a) कण्‍ठ
(b) तालु
(c)  ओष्‍ठ
(d) मूर्धा
उत्‍तर – तालु ।

प्रश्‍न 3 – व्‍यंजन वर्गीकरण की दृष्टि से ‘ ल ‘ व्‍यंजन किस वर्ण भेद में रखा जायेगा ।
(a) मूर्धन्‍य
(b) वत्‍स्‍र्य
(c)  कंठ्य
(d) दंत्‍य
उत्‍तर – वत्‍स्‍र्य ।

प्रश्‍न 4 – ‘क्ष’ वर्ण किसके योग से बना है।
(a) क् + ष
(b) क् + च
(c)  क् + छ
(d) क् + श
उत्‍तर – क् + ष ।

प्रश्‍न 5 – नि‍म्‍नलिखित में से कौन सा वर्ण उच्‍चारण की दृष्टि से दंत्‍य नहीं है।
(a) त
(b) न
(c)  द
(d) ट
उत्‍तर – ट ।  

प्रश्‍न 6 – हिंदी शब्‍द कोश में ‘क्ष’ का क्रम किस वर्ण के बाद आता है।
(a) क
(b) छ
(c)  त्र
(d) ज्ञ
उत्‍तर – क ।  

प्रश्‍न 7 – यदि नीचे का होठ पूरी तरह काट दिया जाए तो किस ध्‍वनि के उच्‍चारण में कठिनाई होगी ।
(a) ल
(b) ब
(c)  ध
(d) ख
उत्‍तर – ब ।  

प्रश्‍न 8 – किस क्रमांक में अघोष व्‍यंजन है।  
(a) य, र
(b) व, ह
(c)  ड, ण
(d) श, स
उत्‍तर – श, स ।

प्रश्‍न 9 – किस व्‍यंजन के उच्‍चारण  में जिव्‍हा तालु से नही टकराती है।
(a) च
(b) य
(c)  घ
(d) श
उत्‍तर – घ ।  

प्रश्‍न 10 – किस क्रमांक में अंतस्‍थ व्‍यंजन है।
(a) ग, घ
(b) द, ध
(c)  ड, ढ
(d) य, व
उत्‍तर – य, व ।

प्रश्‍न 11 – ‘न’ व्‍यंजन का उच्‍चारण स्‍थान है।
(a) मूर्धा और नासिका
(b) वत्‍स्‍र्य और नासिका
(c)  ओष्‍ठ और नासिका
(d) कंठ और नासिका
उत्‍तर – वत्‍स्‍र्य और नासिका ।

प्रश्‍न 12 – वर्णमाला में कुल वर्ण है।
(a) 33
(b) 42
(c)  52
(d) 35
उत्‍तर – 52 ।

प्रश्‍न 13 – इनमें से कौन वृत्‍तमुखी स्‍वर है।
(a) आ
(b) ऊ
(c)  ओ
(d) औ
उत्‍तर – आ ।  

प्रश्‍न 14 – किस क्रम में पश्‍च स्‍वर है।
(a) ई
(b) उ
(c)  ए
(d) ऐ
उत्‍तर – उ ।  

प्रश्‍न 15 – ‘ क्ष , त्र , ज्ञ ‘ है।
(a) मूल स्‍वर
(b) अनुस्‍वार
(c)  संयुक्‍त स्‍वर
(d) संयुक्‍त व्‍यंजन
उत्‍तर – संयुक्‍त व्‍यंजन ।

प्रश्‍न 16 – किस क्रम में स्‍पर्श – संघर्षी व्‍यंजन है।
(a) छ
(b) क
(c)  ख
(d) ड
उत्‍तर – छ ।  

प्रश्‍न 17 – किस क्रम में पार्श्विक व्‍यंजन है।
(a) ट
(b) ठ
(c)  ल
(d) च
उत्‍तर – ल ।  

प्रश्‍न 18 – किस क्रम में तालव्‍य व्‍यंजन नहीं है।
(a) च
(b) घ
(c)  श
(d) य
उत्‍तर – घ ।  

प्रश्‍न 19 – जिन स्‍वरों के उच्‍चारण में मुँह सबसे कम खुलता है। उसे कहते है।
(a) संवृत स्‍वर
(b) विवृत स्‍वर
(c)  पश्‍च स्‍वर
(d) अग्र स्‍वर
उत्‍तर – संवृत स्‍वर ।

प्रश्‍न 20 – ‘ न ‘ व्‍यंजन का उच्‍चारण स्‍थान है।
(a) मूर्धा और नासिका
(b) वर्त्‍स और नासिका
(c)  ओष्‍ठा और नासिका
(d) कंठ और नासिका
उत्‍तर – वर्त्‍स और नासिका ।

प्रश्‍न 21 – ‘पुरोधा’ शब्‍द में संधि है।
(a) गुण
(b) व्‍यंजन
(c)  यण
(d) विसर्ग
उत्‍तर – विसर्ग

प्रश्‍न 22 – इनमें से कौन सा शब्‍द स‍ंधि का उदाहरण नही है।
(a) संसार
(b) अत्‍यंत
(c)  सदाचार
(d) सामाजिक
उत्‍तर – सामाजिक

प्रश्‍न 23 – किस समूह में यण संधि रहित शब्‍द है।
(a) अन्वित, सख्‍युचित, न्‍यून
(b) पित्रनुमति, य‍द्यपि, षडानन
(c)  मात्रानंद, नद्यपर्णण, देव्‍यागम
(d) देव्‍यैश्‍वर्य, प्रत्‍युपकार, नद्युर्मि  
उत्‍तर – पित्रनुमति,  यद्यपि, षडानन

प्रश्‍न 24 – निम्‍नलिखित में से कौन से शब्‍द में विसर्ग संधि नही है।
(a) अत्‍यधिक
(b) मनोनुकूल
(c)  उत्‍तम
(d) तन्‍मय
उत्‍तर – मनोनुकूल

प्रश्‍न 25 – निम्‍नलिखित में से कौन सा शब्‍द व्‍यंजन संधि का है।
(a) स्‍वागत
(b) उच्‍छ्वास
(c)  सरोवर
(d) सरोज
उत्‍तर – उच्‍छवास

प्रश्‍न 26 – निम्‍नांकित में से सही संधियुक्‍त शब्‍द कौन सा है।
(a) गति + अवरोध = गत्‍यावरोध
(b) अभि + ईप्‍सा = अभिप्‍सा
(c)  गुरू + उपदेश = गुरोपदेश
(d) लघु + उत्‍तर = लघूत्‍तर
उत्‍तर – लघूत्‍तर

प्रश्‍न 27 – इनमें से सही संधि विच्‍छेद का उदाहरण है।
(a) तथैव = तथा + ऐव
(b) स्‍वच्छ = स्‍व + च्‍छ
(c)  महर्षि = महा + ऋषि
(d) अन्‍वेषण = अनु + ऐषण
उत्‍तर – महर्षि = महा + ऋषि

प्रश्‍न 28 – उपर्युक्‍त शब्‍द का सही संधि विच्‍छेद होगा -
(a) उपरि + युक्‍त
(b) उपर + उक्‍त
(c)  ऊपर + युक्‍त
(d) उपरि + युक्‍त
उत्‍तर – उपरि + युक्‍त

प्रश्‍न 29 – इनमें से किस शब्‍द में गलत संधि विच्‍छेद हुआ है।
(a) संसद = सम् + सद्
(b) षडानन = षड + आनन
(c)  विच्‍छेद = वि + छेद
(d) दिग्‍दर्शन = दिक् + दर्शन
उत्‍तर – षडानन = षड + आनन

प्रश्‍न 30 – किस समूह में सभी शब्‍द संधियुक्‍त है।
(a) नीमड़ी, दुर्जन, निश्‍चल
(b) साकार, सरोज, मयूर
(c)  देवेन्‍द्र, निशीथ, संकुल
(d) मनोज, नरेश, देवर्षि
उत्‍तर – मनोज, नरेश, देवर्षि
प्रश्‍न 31 – किस शब्‍द में सही संधि नियम का पालन नही हुआ है।
(a) नीरव
(b) तदैव
(c)  प्रतीप
(d) सञ्जीव
उत्‍तर – प्रतीप

प्रश्‍न 32 – संधि का सही प्रयोग किस शब्‍द में हुआ है।
(a) नीरोग
(b) निनाद
(c)  विनोद
(d) निचोड़
उत्‍तर – नीरोग

प्रश्‍न 33 – किस शब्‍द में संधि नही है।
(a) अतएव
(b) सज्‍जन
(c)  जलौक
(d) काजल
उत्‍तर – काजल

प्रश्‍न 34 – किस क्रमांक में सही संधि का उदाहरण नही है।
(a) मृद + मय = मृण्‍मय
(b) प्र + ऊढ़ = प्रौढ़
(c)  अप् + जात = अब्‍जात
(d) मन: + प्रसाद = मनोप्रसाद
उत्‍तर – मन: + प्रसाद = मनोप्रसाद

प्रश्‍न 35 – अभ्‍यार्थी का संधि विच्‍छेद होगा।
(a) अभि + अर्थी
(b) अभ्‍य + अर्थी
(c)  अथ + यर्थी
(d) अभ्‍या + अर्थी
उत्‍तर – अभि + अर्थी

प्रश्‍न 36 – किस क्रमांक संरचना में शब्‍दगत संरचना में संधि नियम का अपवाद है।
(a) प्रबोधिनी
(b) नीरोग  
(c)  अ‍क्षौहिणी
(d) अपरान्‍ह
उत्‍तर – अक्षौहिणी

प्रश्‍न 37 – घुड़दौड़ का सही संधि विच्‍छेद है।
(a) घुड़ + दौड़
(b) घोड़ + दौड़
(c) घोड़ा + दौड़
(d) इनमें से कोई नही
उत्‍तर – घोड़ा + दौड़ 

प्रश्‍न 38 – ‘पावक’ में कौन सी संधि है।
(a) यण् संधि
(b) अयादि संधि
(c)  विसर्ग संधि
(d) व्‍यंजन संधि
उत्‍तर – अयादि संधि

प्रश्‍न 39 – ‘विपज्‍जाल’ में कौन सही संधि है।
(a) व्‍यंजन संधि
(b) वृद्धि संधि
(c)  दीर्घ संधि
(d) गुण संधि
उत्‍तर – व्‍यंजन संधि

प्रश्‍न 40 – ‘प्रत्‍युपकार’ में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन संधि
(b) विसर्ग संधि
(c)  गुण संधि
(d) यण् संधि
उत्‍तर – यण संधि

प्रश्‍न 41 – ‘नयन’ में कौन सी संधि है।
(a) अयादि
(b) गुण
(c)  वृद्धि
(d) यण्
उत्‍तर – अयादि

प्रश्‍न 42 – ‘धनुष्‍टकार’ में कौन सी संधि है।
(a) विसर्ग
(b) व्‍यंजन
(c)  दीर्घ
(d) यण
उत्‍तर – विसर्ग

प्रश्‍न 43 – ‘परस्‍पर’ में कौन सी संधि है।
(a) वृद्धि
(b) व्‍यंजन
(c)  अयादि
(d) विसर्ग
उत्‍तर – विसर्ग

प्रश्‍न 44 – ‘दिग्‍दर्शक’ में कौन सी संधि है।
(a) विसर्ग
(b) वृद्धि
(c)  अयादि
(d) व्‍यंजन
उत्‍तर – व्‍यंजन

प्रश्‍न 45 – यद्यपि में कौन सी संधि है।
(a) यण्
(b) व्‍यंजन
(c)  विसर्ग
(d) दीर्घ
उत्‍तर – यण्

प्रश्‍न 46 – ‘गिरीश’ में कौन सी संधि है।
(a) गुण
(b) दीर्घ
(c)  वृद्धि
(d) यण्
उत्‍तर – दीर्घ

प्रश्‍न 47 – ‘भानूदय’ में कौन सी संधि है।
(a) गुण
(b) अयादि
(c)  यण्
(d) दीर्घ
उत्‍तर – दीर्घ

प्रश्‍न 48 – ‘बहिरंग’ में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन
(b) दीर्घ
(c)  विसर्ग
(d) गुण
उत्‍तर – विसर्ग

प्रश्‍न 49 – ‘अनुष्‍ठान’ का संधि विच्‍छेद होगा।
(a) अनु + ठान
(b) अनु + स्‍थान
(c)  अनु + ठान
(d) अनु: + ठान
उत्‍तर – अनु + स्‍थान

प्रश्‍न 50 –  किस क्रम में गुण संधि नही है।
(a) हितेच्‍छा
(b) प्रेषिति
(c)  मानवेतर
(d) भूर्ध्‍व
उत्‍तर – भूर्ध्‍व

प्रश्‍न 51 – पुरोधा शब्‍द में सन्धि है।
(a) गुण
(b) व्‍यंजन
(c)  यण
(d) विसर्ग
उत्‍तर – विसर्ग ।

प्रश्‍न 52 – इनमें से कौन सा शब्‍द सन्धि का उदहारण नही है।
(a) संसार
(b) अत्‍यंत
(c)  सदाचार
(d) सामाजिक
उत्‍तर – सामाजिक ।

प्रश्‍न 53 – निम्‍नलिखित में से कौन से शब्‍द में विसर्ग सन्धि है।
(a) अत्‍यधिक
(b) मनोनुकूल
(c)  उत्‍तम
(d) तन्‍मय
उत्‍तर – मनोनुकूल ।

प्रश्‍न 54 – अहोरात्र शब्‍द का सन्धि विच्‍छेद है।
(a) अहा + रात्र
(b) अहो + रात्र
(c)  अहन् + रात्रि
(d) अहा + रात्रि
उत्‍तर – अहन् + रात्रि ।

प्रश्‍न 55 – निम्‍नलिखित में से किस शब्‍द में सही संधि हुई है।
(a) स्‍वा + छंद = स्‍वछंद
(b) माह + ऋषि = महर्षि
(c)  गति + अवरोध = गत्‍यावरोध
(d) मत + ऐक्‍य = मतैक्‍य
उत्‍तर – मत + ऐक्‍य = मतैक्‍य ।

प्रश्‍न 56 – निम्‍नलिखित में से कौन सा शब्‍द व्‍यंजन संधि का है।
(a) स्‍वागत
(b) उच्‍छ्वास
(c)  सरोवर
(d) सरोज
उत्‍तर – उच्‍छ्वास ।

प्रश्‍न 57 – इनमें से सही संधि विच्‍छेद का उदहारण है।
(a) तथैव = तथा + ऐव
(b) स्‍वच्‍द = स्‍व + च्‍छ
(c)  महर्षि = महा + ऋषि
(d) अन्‍वेषण = अनु + ऐषण
उत्‍तर – महर्षि = महा + ऋषि ।

प्रश्‍न 58 – पावन में कौन सी संधि है।
(a) यण्‍ संधि
(b) अयाधि संधि
(c)  विसर्ग संधि
(d) व्‍यंजन संधि
उत्‍तर – अयाधि संधि ।

प्रश्‍न 59 – विपज्‍जाल में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन संधि
(b) वृद्धि संधि
(c)  दीर्घ संधि
(d) गुण संधि
उत्‍तर – व्‍यंजन संधि ।

प्रश्‍न 60 – प्रत्‍युपकार में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन संधि
(b) विसर्ग संधि
(c)  गुण संधि
(d) यण्‍ संधि
उत्‍तर – यण्‍ संधि ।

प्रश्‍न 61 – नयन में कौन सी संधि है।
(a) अयादि
(b) गुण
(c)  वृद्धि
(d) यण्‍
उत्‍तर – अयादि ।

प्रश्‍न 62 – धनुष्‍टकार में कौन सी संधि है।
(a) विसर्ग
(b) व्‍यंजन
(c)  दीर्घ
(d) यण्‍
उत्‍तर – विसर्ग ।
प्रश्‍न 63 – परस्‍पर में कौन सी संधि है।
(a) वृद्धि संधि
(b) व्‍यंजन संधि
(c)  विसर्ग संधि
(d) गुण संधि
उत्‍तर – विसर्ग संधि ।

प्रश्‍न 64 – गिरीश में कौन सी संधि है।
(a) गुण
(b) दीर्घ
(c)  वृद्धि
(d) यण्‍
उत्‍तर – दीर्घ  ।

प्रश्‍न 65 – परिच्‍छेद में कौन सी संधि है।
(a) व्‍यंजन
(b) दीर्घ
(c)  गुण
(d) अयादि
उत्‍तर – व्‍यंजन ।

प्रश्‍न 66 – भानूदय में कौन सी सन्धि है।
(a) गुण्‍
(b) अयादि
(c)  यण्‍
(d) दीर्घ
उत्‍तर – दीर्घ ।

प्रश्‍न 67 – अनुष्‍ठान का संधि विच्‍छेद होगा ।
(a) अनु + ठान
(b) अनु + स्‍थान
(c)  अनु + थान
(d) अनु: + ठान
उत्‍तर – अनु + स्‍थान ।

प्रश्‍न 68 – वृद्धि संधि का उदहारण नही है।
(a) अभ्‍यागत
(b) एकैक
(c)  जलौध
(d) महौषध
उत्‍तर – अभ्‍यागत ।

प्रश्‍न 69 – साध्‍वाचरण का सही संधि विच्‍छेद होगा ।
(a) साध + चरण
(b) साधव + चरण
(c)  साधु + आचरण
(d) साध + आचरण
उत्‍तर – साधु + आचरण ।

प्रश्‍न 70 – निम्‍न में से किसमें वृद्धि संधि नही है।
(a) स्‍व + ऐच्छिक = स्‍वैच्छिक 
(b) महा + ऊर्जा = महोर्जा
(c)  जल + ओक =   जलौक
(d) वसुधा  + एव = वसुधैव
उत्‍तर – महा + ऊर्जा ।

प्रश्‍न 71 – कर्म तत्‍पुरूष  समास का उदाहरण इनमें से कौन सा है।  
(a) लोमहर्षक
(b) आत्‍मनिर्भरता
(c)  देशवासियों
(d) सर्वाधिक
उत्‍तर – लोमहर्षक ।

प्रश्‍न 72 – अंधविश्‍वास में समास है।
(a) तत्‍पुरूष
(b) कर्मधारय
(c)  द्विगु
(d) अव्‍ययीभाव
उत्‍तर – कर्मधारय ।

प्रश्‍न 73 – जिस पद में दूसरा पद प्रधान होता है। उसे कहते है।
(a) द्विगु समास
(b) अव्‍ययीभाव समास
(c)  तत्‍पुरूष समास
(d) बहुव्रीहि समास
उत्‍तर – तत्‍पुरूष समास ।

प्रश्‍न 74 – राज्‍यसभा शब्‍द में कौन सा समास है।
(a) तत्‍पुरूष
(b) कर्मधारय
(c)  अव्‍ययीभाव
(d) बहुव्रीहि
उत्‍तर – तत्‍पुरूष ।

प्रश्‍न 75 – इनमें से कौन सा सामाजिक पद नही है।
(a) तिरंगा
(b) शारीरिक
(c)  रंगमंच
(d) यथाशक्ति
उत्‍तर – शारीरिक ।

प्रश्‍न 76 – यथाशक्ति समस्‍त पद का विग्रह होगा ।
(a) शक्ति के अनुसार
(b) शक्ति से बढ़ चढ़ कर
(c)  शक्ति से  बाहर
(d) शक्त्‍िा के भीत
उत्‍तर – शक्ति के अनुसार ।

प्रश्‍न 77 – किस समस्‍त पद में तत्‍पुरूष समास नही है।
(a) राजपुरूष
(b) राम - लक्ष्‍मण
(c)  कालिदास
(d) कर्मवीर
उत्‍तर – राम – लक्ष्‍मण ।

प्रश्‍न 78 – समास के कितने भेद होते है।
(a) पॉच
(b) तीन
(c)  सात
(d) छह
उत्‍तर – छह ।

प्रश्‍न 79 – किस शब्‍द में तत्‍पुरूष समास है।
(a) महादेव
(b) पंचवटी
(c)  ग्रंथरत्‍न
(d) गृहागत
उत्‍तर – गृहागत ।

प्रश्‍न 80 – नास्तिक में कौन सा समास है।
(a) तत्‍पुरूष
(b) द्विगु
(c)  बहुव्रीहि
(d) अव्‍यायी भाव
उत्‍तर – तत्‍पुरूष ।

प्रश्‍न 81 – किस शब्‍द में कर्मधारय समास है।
(a) रणवीर
(b) दुश्‍चरित्र
(c)  विचार मग्‍न
(d) सिरदर्द
उत्‍तर – दुश्‍चरित्र ।

प्रश्‍न 82 – अंधकूप में कौन सा समास है।
(a) बहुव्रीहि समास
(b) तत्‍पुरूष समास
(c)  कर्मधारय समास
(d) अव्‍ययी भाव समास
उत्‍तर – कर्मधारय समास ।

प्रश्‍न 83 – नवनिधि में कौन सा समास है।
(a) अव्‍ययीभाव
(b) द्विगु
(c)  कर्मधारय
(d) तत्‍पुरूष
उत्‍तर – द्विगु समास ।

प्रश्‍न 84 – चक्रपाणि शब्‍द में कौन सा समास है।
(a) बहु्ब्रीहि समास
(b) द्विगु समास
(c)  कर्मधारय समास
(d) तत्‍पुरूष समास
उत्‍तर – बहुव्रीहि समास ।

प्रश्‍न 85 – किस शब्‍द में अधिकरण तत्‍पुरूष समास है।
(a) लाभालाभ
(b) अश्‍वारोही
(c)  त्रिवेणी
(d) सुमुखी
उत्‍तर – अश्‍वारोही ।

प्रश्‍न 86 – यावज्‍जीवन में कौन सा समास है।
(a) तत्‍पुरूष समास
(b) अव्‍ययीभाव समास
(c)  बहुव्रीहि समास
(d) कर्मधारय समास
उत्‍तर – अव्‍ययीभाव समास ।

प्रश्‍न 87 – किस क्रम में कर्मधारय समास का उदाहरण नही है।
(a) संसार – सागर
(b) देहलता
(c)  जगबीती
(d) भला मानस
उत्‍तर – जगबीती ।

प्रश्‍न 88 – धड़ाधड में कौन सा समास है।
(a) द्विगु
(b) कर्मधारय
(c)  अव्‍ययीभाव
(d) बहुव्रीहि
उत्‍तर – अव्‍ययीभाव ।

प्रश्‍न 89 – चरणकमल समास पद के लिए समास विग्रह का सही क्रमांक होगा ।
(a) चरण जो कमल
(b) चरण और कमल
(c)  चरण पर कमल
(d) चरण में कमल
उत्‍तर – चरण जो कमल ।

प्रश्‍न 90 – किस  क्रमांक में तत्‍पुरूष समास है।
(a) यथाशक्ति
(b) शिवार्पण
(c)  खगेश
(d) पंचपाल
उत्‍तर – शिवार्पण ।

प्रश्‍न 91 – इनमें से कौन सा शब्‍द कारक परसर्ग के साथ प्रयुक्‍त होने पर ही बहुवचन में रूप बदलता है।  
(a) बालक
(b) पुस्‍तक
(c)  दीवार
(d) दाल
उत्‍तर – बालक ।

प्रश्‍न 92 – अपादान कारक के लिए सही क्रमांक है।
(a) बहू सास से ले जाती है।
(b) बहू सास से सामान ले जाती है।
(c)  सास बहू से काम कराती है।
(d) सास बहू से बात करती है।
उत्‍तर – बहू सास से ले जाती है।
प्रश्‍न 93 – राजा सेवक को कंबल देता है, वाक्‍य में रेखांकित शब्‍द के लिए कारक का सही क्रमांक है।
(a) कर्म कारक 
(b) संबंध कारक
(c)  संप्रदान कारक
(d) कर्ता कारक
उत्‍तर – संप्रदान कारक ।

प्रश्‍न 94 – ‘झगड़ा मेरे और उसके मध्‍य में था’ में कौन सा कारक है।
(a) संबंध कारक
(b) कर्म कारक
(c)  अधिकरण कारक
(d) संप्रदान कारक
उत्‍तर – अधिकरण कारक ।

प्रश्‍न 95 – ‘गरीबो के निमित्‍त धन इकट्ठा करो’ में कौन सा कारक है।
(a) करण कारक
(b) अपादान कारक
(c)  सम्‍प्रदान कारक
(d) कर्ता कारक
उत्‍तर – सम्‍प्रदान कारक ।

प्रश्‍न 96 – ‘माँ बच्‍चे को दूध पिला रही है।‘ में कौन सा कारक है।
(a) करण कारक
(b) अपादान कारक
(c)  कर्म कारक
(d) कर्ता कारक
उत्‍तर – कर्म कारक ।

प्रश्‍न 97 – किस  क्रम में संप्रदान कारक है।
(a) हमने चिडियाघर में पक्षी देखे ।
(b) गरीब के निमित वस्‍त्र दान करो ।
(c)  साँप को लाठी से मारो ।
(d) कलम मेज पर है।
उत्‍तर – गरीब के निमित वस्‍त्र दान करो ।

प्रश्‍न 98 – ‘वीरों ने देश के हेतु बलिदान दे दिया’ में कौन सा कारक है।
(a) कर्ता कारक
(b) करण कारक
(c)  संप्रदान कारक
(d) अपादान कारक
उत्‍तर – संप्रदान कारक ।

प्रश्‍न 99 – ‘जिस वस्‍तु पर क्रिया के व्‍यापार का फल पड़ता है, उसे सूचित करने वाला संज्ञा रूप’ को कौन सा कारक कहा जाता है।
(a) कर्ता कारक
(b) कर्म कारक
(c)  अपादान कारक
(d) संप्रदान कारक
उत्‍तर – कर्म कारक ।

प्रश्‍न 110 – देवेन्‍द्र मैदान में खेल रहा है। पंक्ति में कौन सा कारक है।
(a) कर्म कारक
(b) संबंध कारक
(c)  अपादान कारक
(d) अधिकरण कारक
उत्‍तर – अधिकरण कारक ।

प्रश्‍न 101 – रेखांकित का कारक बताइए – ‘मेढ़क को पत्‍थर से मत मारो’ ।
(a) अधिकरण कारक
(b) संबंध कारक
(c)  करण कारक
(d) कर्म कारक
उत्‍तर – करण कारक ।

प्रश्‍न 102 – किस क्रम मे संप्रदान कारक का सही प्रयोग हुआ है।
(a) बच्‍चों के लिए मिठाई लाओ ।
(b) हाथ से घड़ी गिर गई ।
(c)  हिमालय से नदी निकलती है।
(d) आसमान का रंग नीला है।
उत्‍तर – बच्‍चों के लिए मिठाई लाओ ।

प्रश्‍न 103 – ‘क्रिया का प्रभाव या फल संज्ञा/सर्वनाम पर पड़ता है, उसे कौन – सा कारक कहते है।
(a) कर्ता कारक
(b) अपादान कारक
(c)  संप्रदान कारक
(d) कर्म कारक
उत्‍तर – कर्म कारक ।

प्रश्‍न 104 – निम्‍नलिखित में से अपादान कारक का विभक्ति चिन्‍ह है।
(a) को
(b) से ( पृथक्ता के लिए )
(c)  में
(d) के द्वारा
उत्‍तर – से ( पृथक्ता के लिए ) ।

प्रश्‍न 105 – ‘ अमेरिका ने भारत को आर्थिक सहायता दी ’ में कौन सा कारक है।
(a) कर्ता कारक
(b) अपादान कारक
(c)  संप्रदान कारक
(d) संबंध कारक
उत्‍तर – संप्रदान कारक ।

प्रश्‍न 106 – किस क्रम में अधिकरण कारक का उदाहरण नहीं है । 
(a) छत पर खेलो
(b) पिताजी कार्यालय में है।
(c)  आलमारी में कपड़े रखे है।
(d) यह सुधीर का पेन है।
उत्‍तर – यह सुधीर का पेन है।

प्रश्‍न 107 – ‘ मैं साँप से डरता हूँ ‘ रेखांकित वाक्‍य के लिए कारक बताइए ।
(a) करण
(b) अपादान
(c)  कर्ता
(d) संबंध
उत्‍तर – अपादान ।

प्रश्‍न 108 – कारक कितने प्रकार के होते है।
(a) छह
(b) पाँच
(c)  चार
(d) आठ
उत्‍तर – आठ ।

प्रश्‍न 109 – ‘लोटा छत से गिरा’ में कौन सा कारक है।
(a) कर्म
(b) अपादान
(c)  करण
(d) अधिकरण
उत्‍तर – अपादान ।

प्रश्‍न 110 – ‘को’ और ‘के लिए’ किस कारक के चिन्‍ह है ।
(a) सम्‍प्रदान कारक
(b) करण कारक
(c)  अपादान कारक
(d) सम्‍बोधन कारक
उत्‍तर – सम्‍प्रदान कारक ।

प्रश्‍न 111 – भाषा शब्‍द की उत्‍पत्ति संस्‍कृत की किस  धातु से हुई है।
(a) भास्
(b) भाश्
(c) भाष्‍
(d) भाषा
उत्‍तर – भाष्‍ ।

प्रश्‍न 112 – देवनागरी लिपि का संबंध किस भाषा से है।
(a) पंजाबी
(b) बांग्‍ला
(c)  उर्दू
(d)  हिन्‍दी
उत्‍तर – हिन्‍दी ।

प्रश्‍न 113 – अधिकतर भारतीय भाषाओं का विकास किस लिपि से हुआ है।
(a) शारदा लिपि
(b) खरोष्‍ठी लिपि
(c) कुटिल लिपि
(d) ब्राम्‍ही लिपि
उत्‍तर – ब्राम्‍ही लिपि ।

प्रश्‍न 114 – हिन्‍दी की मूल उत्‍पत्ति किससे हुई है।
(a) लौकिक संस्‍कृत
(b) वैदिक संस्‍कृत
(c) मागधी
(d) पालि
उत्‍तर – वैदिक संस्‍कृत ।

प्रश्‍न 115 – हिन्‍दी शब्‍द किसका दिया हुआ है।
(a) आर्यो का
(b) यूनानियों का
(c)  ईरानियों का
(d)  तुर्कों का
उत्‍तर – ईरानियों का ।

प्रश्‍न 116 – सूरदास का काव्‍य किस भाषा में है।
(a) ब्रजभाषा
(b) मैथिली
(c) अवधी
(d) बुंदेली
उत्‍तर – ब्रजभाषा ।

प्रश्‍न 117 – रिपोर्ताज किस भाषा का शब्‍द है।
(a) अरबी
(b) फरसी
(c) फ्रांसीसी
(d) अंग्रेजी
उत्‍तर – फ्रांसीसी ।

प्रश्‍न 118 – स‍ंविधान के किस अनुच्‍छेद में कहा गया है कि ‘’ संघ की राजभाषा हिन्‍दी और लिपि देवनागरी होगी ।
(a) 343
(b) 344
(c) 345
(d) 346
उत्‍तर – 343 ।
प्रश्‍न 119 – हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मेलन  प्रयाग की स्‍थापना कब हुई ।
(a) 1910
(b) 1915
(c) 1920
(d) 1925
उत्‍तर – 1910 ।

प्रश्‍न 120 – हिन्‍दी के अतिरिक्‍त इनमें से कौन सी भाषा देवनागरी में लिखी जाती है।
(a) पंजाबी
(b) उर्दू
(c) मराठी
(d) बंगाली
उत्‍तर – मराठी ।

प्रश्‍न 121 – हिन्‍दी की विशिष्‍ट  बोली ‘’ब्रज भाषा’’ किस रूप में सबसे अधिक प्रसिद्ध है। 
(a) राज भाषा
(b) तकनीकी भाषा
(c) राष्‍ट्र भाषा
(d) काव्‍य भाषा
उत्‍तर – काव्‍य भाषा ।

प्रश्‍न 122 – निम्‍न‍लिखित में से कौन सी बोली अथवा भाषा हिन्‍दी के अन्‍तर्गत नही आती है।
(a) कन्‍नौजी
(b) बाँगरू
(c) तेलुगू
(d) अवधी
उत्‍तर – कन्‍नौजी ।

प्रश्‍न 123 – वर्तमान हिन्‍दी का प्रचलित रूप है।
(a) अवधी
(b) ब्रजभाषा
(c) खड़ी बोली
(d) देवनागरी
उत्‍तर – खड़ी बोली ।

प्रश्‍न 124 – हिन्‍दी भाषा की बोलियों के वर्गीकरण के आधार पर छत्‍तीसगढ़ी बोली है।
(a) पूर्व हिन्‍दी
(b) पश्चिमी हिन्‍दी
(c) पहाड़ी हिन्‍दी
(d) राजस्‍थानी हिन्‍दी
उत्‍तर – पूर्वी हिन्‍दी ।

प्रश्‍न 125 – ब्रजबुलि नाम से जानी जाती है।
(a) पंजाबी
(b) मराठी
(c) गुजराती
(d) पुरानी बॅगला
उत्‍तर – पुरानी बॅगला ।

प्रश्‍न 126 – भाषा के लिए हिन्‍दीवी शब्‍द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया । 
(a) नरपति नाल्‍ह
(b) अमीर खुसरो
(c) सरहपा
(d) शालिभद्र सूरि
उत्‍तर – अमीर खुसरो ।

प्रश्‍न 127 – कन्‍नौजी किस उपभाषा वर्ग में आती है।
(a) बिहारी
(b) राजस्‍थानी
(c) पूर्वी हिन्‍दी
(d) पश्चिमी हिन्‍दी
उत्‍तर – पश्चिमी हिन्‍दी ।

प्रश्‍न 128 – भाषा के अर्थ में हिन्‍दुस्‍तानी शब्‍द का प्रयोग कब से मिलता है।
(a) 13वीं शती
(b) 17वीं शती
(c) 18वीं शती 
(d) 15वीं शती
उत्‍तर – 15वीं शती ।

प्रश्‍न 129 – हिन्‍दी भाषा और साहित्‍य के लेखक है।
(a) आचार्य शुक्‍ल
(b) भोलानाथ तिवारी  
(c) आचार्य द्विवेदी
(d) श्‍यामसुंदरदास
उत्‍तर – श्‍यामसुंदरदास ।

प्रश्‍न 130 – हिन्‍दी भाषा का इतिहास पुस्‍तक के लेखक है।
(a) आचार्य शुक्‍ल
(b) धीरेन्‍द्र वर्मा
(c) भारतेन्‍दु
(d) हजारी प्रसाद
उत्‍तर – धीरेन्‍द्र वर्मा ।
लिंग

"संज्ञा के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की नर या मादा जाति का बोध हो, उसे व्याकरण में 'लिंग' कहते है।
दूसरे शब्दों में-संज्ञा शब्दों के जिस रूप से उसके पुरुष या स्त्री जाति होने का पता चलता है, उसे लिंग कहते है।
सरल शब्दों में- शब्द की जाति को 'लिंग' कहते है। 
जैसे -पुरुष जाति- बैल, बकरा, मोर, मोहन, लड़का आदि। 
स्त्री जाति- गाय, बकरी, मोरनी, मोहिनी, लड़की आदि।
'लिंग' संस्कृत भाषा का एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'चिह्न' या 'निशान'। चिह्न या निशान किसी संज्ञा का ही होता है। 'संज्ञा' किसी वस्तु के नाम को कहते है और वस्तु या तो पुरुषजाति की होगी या स्त्रीजाति की। तात्पर्य यह है कि प्रत्येक संज्ञा पुंलिंग होगी या स्त्रीलिंग। संज्ञा के भी दो रूप हैं। एक, अप्रणिवाचक संज्ञा- लोटा, प्याली, पेड़, पत्ता इत्यादि और दूसरा, प्राणिवाचक संज्ञा- घोड़ा-घोड़ी, माता-पिता, लड़का-लड़की इत्यादि।

लिंग के भेद
 
हिन्दी व्याकरण में लिंग के दो भेद होते है-
(1)पुलिंग(Masculine Gender)
(2)स्त्रीलिंग( Feminine Gender)

(1) पुलिंग :- 

जिन संज्ञा शब्दों से पुरूष जाति का बोध होता है, उसे पुलिंग कहते है।
जैसे- सजीव- कुत्ता, बालक, खटमल, पिता, राजा, घोड़ा, बन्दर, हंस, बकरा, लड़का इत्यादि।
निर्जीव पदार्थ- मकान, फूल, नाटक, लोहा, चश्मा इत्यादि। 
भाव- दुःख, लगाव, इत्यादि। 

(2)स्त्रीलिंग :- 

जिस संज्ञा शब्द से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते है।
जैसे- सजीव- माता, रानी, घोड़ी, कुतिया, बंदरिया, हंसिनी, लड़की, बकरी,जूँ। 
निर्जीव पदार्थ- सूई, कुर्सी, गर्दन इत्यादि। 
भाव- लज्जा, बनावट इत्यादि।

पुल्लिंग की पहचान 

(1) कुछ संज्ञाएँ हमेशा पुल्लिंग रहती है-
खटमल, भेड़या, खरगोश, चीता, मच्छर, पक्षी, आदि 

(2) समूहवाचक संज्ञा- मण्डल, समाज, दल, समूह, वर्ग आदि 

(3) भारी और बेडौल वस्तुअों के नाम- जूता, रस्सा, लोटा ,पहाड़ आदि। 

(4) दिनों के नाम- सोमवार, मंगलवार, बुधवार, शनिवार आदि।

(5) महीनो के नाम- चैत, वैसाख, जनवरी, फरवरी आदि। 

(6) पर्वतों के नाम- हिमालय, विन्द्याचल, सतपुड़ा आदि। 

(7) देशों के नाम- भारत, चीन, इरान, अमेरिका आदि। 

(8) नक्षत्रों, व ग्रहों के नाम- सूर्य, चन्द्र, राहू, शनि, आकाश, बृहस्पति, बुध आदि। 
अपवाद- पृथ्वी  

(9) धातुओं- सोना, तांबा, पीतल, लोहा, आदि 

(10) वृक्षों,फलो के नाम- अमरुद, केला, शीशम, पीपल, आम आदि।  

(11) अनाजों के नाम- चावल, चना, जौ, गेहूँ आदि।  

(12) रत्नों के नाम- नीलम, पन्ना, मोती, हीरा आदि।  

(13) फूलों के नाम- गेंदा, मोतिया, कमल, गुलाब आदि।  

(14) देशों और नगरों के नाम- दिल्ली, लन्दन, चीन, रूस, भारत आदि।  

(15) द्रव पदार्थो के नाम- शरबत, दही, दूध, पानी, तेल, घी आदि। 

(16) आकारान्त संज्ञायें- गुस्सा, चश्मा, पैसा, छाता आदि।

स्त्रीलिंग की पहचान 

(1) कुछ संज्ञाएँ हमेशा स्त्रीलिंग रहती है- मक्खी ,कोयल, मछली, तितली, मैना आदि। 

(2) समूहवाचक संज्ञायें- भीड़, कमेटी, सेना, सभा, कक्षा आदि। 

(3) प्राणिवाचक संज्ञा- धाय, सन्तान, सौतन आदि।  

(4) छोटी और सुन्दर वस्तुअों के नाम- जूती, रस्सी, लुटिया, पहाड़ी आदि।  

(5) नदियों के नाम- रावी, कावेरी, कृष्णा, गंगा आदि। 

(6) भाषाओं व लिपियों के नाम- देवनागरी, अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली आदि।  

(7) पुस्तकों के नाम- कुरान, रामायण, गीता आदि।  

(8) तिथियों के नाम- पूर्णिमा, अमावस्था, चतुर्थी, प्रथमा आदि।  

(9) आहारों के नाम- सब्जी, दाल, कचौरी, पूरी, रोटी आदि।  
अपवाद- हलुआ, अचार, रायता आदि। 

(10) ईकारान्त वाले शब्द- नानी, बेटी, मामी, भाभी आदि।
 
(12) जिन शब्दों के अन्त में 'हट, वट, ता, आई, या' तथा 'आस' आये-
हट- कड़वाहट, बौखलाहट, घबराहट आदि।
वट- मिलावट, बनावट, सजावट आदि।
ता- शत्रुता, मित्रता, मूखर्ता आदि।
आई- बड़ाई, रजाई, मिठास, प्यास आदि।
या- छाया, माया, काया आदि।
आस- खटास, मिठास, प्यास आदि

नोट- 

हिन्दी भाषा में वाक्य रचना में क्रिया का रूप लिंग पर ही निर्भर करता है। यदि कर्ता पुल्लिंग है तो क्रिया रूप भी पुल्लिंग होता है तथा यदि कर्ता स्त्रीलिंग है तो क्रिया का रूप भी स्त्रीलिंग होता है।

लिंग-निर्णय 

तत्सम (संस्कृत) शब्दों का लिंग-निर्णय
संस्कृत पुंलिंग शब्द
पं० कामताप्रसाद गुरु ने संस्कृत शब्दों को पहचानने के निम्नलिखित नियम बताये है- 

(अ) जिन संज्ञाओं के अन्त में 'त्र' होता है। जैसे- चित्र, क्षेत्र, पात्र, नेत्र, चरित्र, शस्त्र इत्यादि। 

(आ) 'नान्त' संज्ञाएँ। जैसे- पालन, पोषण, दमन, वचन, नयन, गमन, हरण इत्यादि। 
अपवाद- 'पवन' उभयलिंग है।  

(इ) 'ज'-प्रत्ययान्त संज्ञाएँ। जैसे- जलज,स्वेदज, पिण्डज, सरोज इत्यादि।  

(ई) जिन भाववाचक संज्ञाओं के अन्त में त्व, त्य, व, य होता है। जैसे- सतीत्व, बहूत्व, नृत्य, कृत्य, लाघव, गौरव, माधुर्य इत्यादि। 
(उ) जिन शब्दों के अन्त में 'आर', 'आय', 'वा', 'आस' हो। जैसे- विकार, विस्तार, संसार, अध्याय, उपाय, समुदाय, उल्लास, विकास, ह्रास इत्यादि। 
अपवाद- सहाय (उभयलिंग), आय (स्त्रीलिंग) ।  

(ऊ) 'अ'-प्रत्ययान्त संज्ञाएँ। जैसे- क्रोध, मोह, पाक, त्याग, दोष, स्पर्श इत्यादि। 
अपवाद- जय (स्त्रीलिंग), विनय (उभयलिंग) आदि।  

(ऋ) 'त'-प्रत्ययान्त संज्ञाएँ। जैसे- चरित, गणित, फलित, मत, गीत, स्वागत इत्यादि।  

(ए) जिनके अन्त में 'ख' होता है। जैसे- नख, मुख, सुख, दुःख, लेख, मख, शख इत्यादि।

संस्कृत स्त्रीलिंग शब्द 

पं० कामताप्रसाद गुरु ने संस्कृत स्त्रीलिंग शब्दों को पहचानने के निम्नलिखित नियम बताये है-
(अ) आकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- दया, माया, कृपा, लज्जा, क्षमा, शोभा इत्यादि।  

(आ) नाकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- प्रार्थना, वेदना, प्रस्तावना, रचना, घटना इत्यादि।  

(इ) उकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- वायु, रेणु, रज्जु, जानु, मृत्यु, आयु, वस्तु, धातु इत्यादि। 
अपवाद- मधु, अश्रु, तालु, मेरु, हेतु, सेतु इत्यादि।  

(ई) जिनके अन्त में 'ति' वा 'नि' हो। जैसे- गति, मति, रीति, हानि, ग्लानि, योनि, बुद्धि, ऋद्धि, सिद्धि (सिध् +ति=सिद्धि) इत्यादि।  

(उ) 'ता'-प्रत्ययान्त भाववाचक संज्ञाएँ। जैसे- न्रमता, लघुता, सुन्दरता, प्रभुता, जड़ता इत्यादि।  

(ऊ) इकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- निधि, विधि, परिधि, राशि, अग्नि, छवि, केलि, रूचि इत्यादि। 
अपवाद- वारि, जलधि, पाणि, गिरि, अद्रि, आदि, बलि इत्यादि। 

(ऋ) 'इमा'- प्रत्ययान्त शब्द। जैसे- महिमा, गरिमा, कालिमा, लालिमा इत्यादि।

तत्सम पुंलिंग शब्द 

चित्र, पत्र, पात्र, मित्र, गोत्र, दमन, गमन, गगन, श्रवण, पोषण, शोषण, पालन, लालन, मलयज, जलज, उरोज, सतीत्व, कृत्य, लाघव, वीर्य, माधुर्य, कार्य, कर्म, प्रकार, प्रहार, विहार, प्रचार, सार, विस्तार, प्रसार, अध्याय, स्वाध्याय, उपहार, ह्रास, मास, लोभ, क्रोध, बोध, मोद, ग्रन्थ, नख, मुख, शिख, दुःख, सुख, शंख, तुषार, तुहिन, उत्तर, पश्र, मस्तक, आश्र्चर्य, नृत्य, काष्ट, छत्र, मेघ, कष्ट, प्रहर, सौभाग्य, अंकन, अंकुश, अंजन, अंचल, अन्तर्धान, अन्तस्तल, अम्बुज, अंश, अकाल, अक्षर, कल्याण, कवच, कायाकल्प, कलश, काव्य, कास, गज, गण, ग्राम, गृह, चन्द्र, चन्दन, क्षण, छन्द, अलंकार, सरोवर, परिमाण, परिमार्जन, संस्करण, संशोधन, परिवर्तन, परिशोध, परिशीलन, प्राणदान,
वचन, मर्म, यवन, रविवार, सोमवार, मार्ग, राजयोग, रूप, रूपक, स्वदेश, राष्ट, प्रान्त, नगर, देश, सर्प, सागर, साधन, सार, तत्त्व, स्वर्ग, दण्ड, दोष, धन, नियम, पक्ष, पृष्ट, विधेयक, विनिमय, विनियोग, विभाग, विभाजन, विऱोध, विवाद, वाणिज्य, शासन, प्रवेश, अनुच्छेद, शिविर, वाद, अवमान, अनुमान, आकलन, निमन्त्रण, नियंत्रण, आमंत्रण,उद्भव, निबन्ध, नाटक, स्वास्थ्य, निगम, न्याय, समाज, विघटन, विसर्जन, विवाह, व्याख्यान, धर्म, उपकरण, आक्रमण, श्रम,बहुमत, निर्माण, सन्देश, ज्ञापक, आभार, आवास, छात्रावास, अपराध, प्रभाव, लोक, विराम, विक्रम, न्याय, संघ, संकल्प इत्यादि।

तत्सम स्त्रीलिंग शब्द 

दया, माया, कृपा, लज्जा, क्षमा, शोभा, सभा, प्रार्थना, वेदना, समवेदना, प्रस्तावना, रचना, घटना, अवस्था, नम्रता, सुन्दरता, प्रभुता, जड़ता, महिमा, गरिमा, कालिमा, लालिमा, ईष्र्या, भाषा, अभिलाषा, आशा, निराशा, पूर्णिमा, अरुणिमा, काया, कला, चपला, इच्छा, अनुज्ञा, आज्ञा, आराधना, उपासना, याचना, रक्षा, संहिता, आजीविका, घोषणा, परीक्षा, गवेषणा, नगरपालिका, नागरिकता, योग्यता, सीमा, स्थापना, संस्था, सहायता,मान्यता, व्याख्या, शिक्षा, समता, सम्पदा, संविदा, सूचना, सेवा, सेना, विज्ञप्ति, अनुमति, अभियुक्ति, अभिव्यक्ति, उपलब्धि, विधि, क्षति,
पूर्ति, विकृति, जाति, निधि, सिद्धि, समिति, नियुक्ति, निवृत्ति, रीति, शक्ति, प्रतिकृति, कृति, प्रतिभूति, प्रतिलिपि, अनुभूति, युक्ति, धृति, हानि, स्थिति, परिस्थिति, विमति, वृत्ति, आवृत्ति, शान्ति, सन्धि, समिति, सम्पत्ति, सुसंगति, कटि, छवि, रुचि, अग्नि, केलि, नदी, नारी, मण्डली, लक्ष्मी, शताब्दी, श्री, कुण्डली, कुण्डलिनी, कौमुदी, गोष्ठी, धात्री, मृत्यु, आयु, वस्तु, रज्जु, रेणु, वायु इत्यादि।

तद्भव (हिन्दी) शब्दों का लिंगनिर्णय 

तद्भव शब्दों के लिंगनिर्णय में अधिक कठिनाई होती है। तद्भव शब्दों का लिंगभेद, वह भी अप्राणिवाचक शब्दों का, कैसे किया जाय और इसके सामान्य नियम क्या हों, इसके बारे में विद्वानों में मतभेद है। पण्डित कामताप्रसाद गुरु ने हिन्दी के तद्भव शब्दों को परखने के लिए पुंलिंग के तीन और स्त्रीलिंग के दस नियमों का उल्लेख अपने हिन्दी व्याकरण में किया है वे नियम इस प्रकार है-

तद्भव पुंलिंग शब्द 

(अ) ऊनवाचक संज्ञाओं को छोड़ शेष आकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- कपड़ा, गत्रा, पैसा, पहिया, आटा, चमड़ा, इत्यादि।  
(आ) जिन भाववाचक संज्ञाओं के अन्त में ना, आव, पन, वा, पा, होता है। जैसे- आना, गाना, बहाव, चढाव, बड़प्पन, बढ़ावा, बुढ़ापा इत्यादि।  

(इ) कृदन्त की आनान्त संज्ञाएँ। जैसे- लगान, मिलान, खान, पान, नहान, उठान इत्यादि। 
अपवाद- उड़ान, चट्टान इत्यादि।

तद्भव स्त्रीलिंग शब्द 

(अ) ईकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- नदी, चिट्ठी, रोटी, टोपी, उदासी इत्यादि। 
अपवाद- घी, जी मोती, दही इत्यादि। 

(आ) ऊनवाचक याकारान्त संज्ञाए। जैसे- गुड़िया, खटिया, टिबिया, पुड़िया, ठिलिया इत्यादि।  

(इ) तकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- रात, बात, लात, छत, भीत, पत इत्यादि। 
अपवाद- भात, खेत, सूत, गात, दाँत इत्यादि।  

(ई) उकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- बालू, लू, दारू, ब्यालू, झाड़ू इत्यादि। 
अपवाद- आँसू, आलू, रतालू, टेसू इत्यादि। 

(उ) अनुस्वारान्त संज्ञाएँ। जैसे- सरसों, खड़ाऊँ, भौं, चूँ, जूँ इत्यादि। 
अपवाद- गेहूँ।  

(ऊ) सकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- प्यास, मिठास, निदास, रास (लगाम), बाँस, साँस इत्यादि।  
अपवाद- निकास, काँस, रास (नृत्य) । 

(ऋ) कृदन्त नकारान्त संज्ञाएँ, जिनका उपान्त्य वर्ण अकारान्त हो अथवा जिनकी धातु नकारान्त हो। जैसे- रहन, सूजन, जलन, उलझन, पहचान इत्यादि। 
अपवाद- चलन आदि। 

(ए) कृदन्त की अकारान्त संज्ञाएँ। जैसे- लूट, मार,समझ, दौड़, सँभाल, रगड़, चमक, छाप, पुकारइत्यादि। 
अपवाद- नाच, मेल, बिगाड़, बोल, उतार इत्यादि।  

(ऐ) जिन भाववाचक संज्ञाओं के अन्त में ट, वट, हट, होता है। जैसे- सजावट, घबराहट, चिकनाहट, आहट, झंझट इत्यादि।  

(ओ) जिन संज्ञाओं के अन्त में 'ख' होता है। जैसे- ईख, भूख, राख, चीख, काँख, कोख, साख, देखरेख इत्यादि। 
अपवाद- पंख, रूख।

अर्थ के अनुसार लिंग-निर्णय 

कुछ लोग अप्राणिवाचक शब्दों का लिंगभेद अर्थ के अनुसार करते है। पं० कामताप्रसाद गुरु ने इस आधार और दृष्टिकोण को 'अव्यापक और अपूर्ण' कहा है; क्योंकि इसके जितने उदाहरण है, प्रायः उतने ही अपवाद हैं। इसके अलावा, इसके जो थोड़े-से नियम बने हैं, उनमें सभी तरह के शब्द सम्मिलित नहीं होते। गुरुजी ने इस सम्बन्ध में जो नियम और उदाहरण दिये है, उनमें भी अपवादों की भरमार है। उन्होंने जो भी नियम दिये है, वे बड़े जटिल और अव्यवहारिक है।
यहाँ इन नियमों का उल्लेख किया जा रहा है-

(क) अप्राणिवाचक पुंलिंग हिन्दी शब्द 

(i) शरीर के अवयवों के नाम पुंलिंग होते है। जैसे- कान, मुँह, दाँत, ओठ, पाँव, हाथ, गाल, मस्तक, तालु, बाल, अँगूठा, मुक्का, नाख़ून, नथना, गट्टा इत्यादि। 
अपवाद- कोहनी, कलाई, नाक, आँख, जीभ, ठोड़ी, खाल, बाँह, नस, हड्डी, इन्द्रिय, काँख इत्यादि।  

(ii) रत्नों के नाम पुंलिंग होते है। जैसे- मोती, माणिक, पत्रा, हीरा, जवाहर, मूँगा, नीलम, पुखराज, लाल इत्यादि। 
अपवाद- मणि, चुत्री, लाड़ली इत्यादि। 

(iii) धातुओं के नाम पुंलिंग होते है। जैसे- ताँबा, लोहा, सोना, सीसा, काँसा, राँगा, पीतल, रूपा, टीन इत्यादि। 
अपवाद- चाँदी।  

(iv) अनाज के नाम पुंलिंग होते है। जैसे- जौ, गेहूँ, चावल, बाजरा, चना, मटर, तिल इत्यादि।  
अपवाद- मकई, जुआर, मूँग, खेसारी इत्यादि।  

(v) पेड़ों के नाम पुंलिंग होते है। जैसे- पीपल, बड़, देवदारु, चीड़, आम, शीशम, सागौन, कटहल, अमरूद, शरीफा, नीबू, अशोक तमाल, सेब, अखरोट इत्यादि। 
अपवाद-लीची, नाशपाती, नारंगी, खिरनी इत्यादि।  

(vi) द्रव्य पदार्थों के नाम पुंलिंग होते हैं। जैसे- पानी, घी, तेल, अर्क, शर्बत, इत्र, सिरका, आसव, काढ़ा, रायता इत्यादि। 
अपवाद- चाय, स्याही, शराब।  

(vii) भौगोलिक जल और स्थल आदि अंशों के नाम प्रायः पुंलिंग होते है। जैसे- देश, नगर, रेगिस्तान, द्वीप, पर्वत, समुद्र, सरोवर, पाताल, वायुमण्डल, नभोमण्डल, प्रान्त इत्यादि। 
अपवाद- पृथ्वी, झील, घाटी इत्यादि।

(ख) अप्राणिवाचक स्त्रीलिंग हिन्दी-शब्द 

(i) नदियों के नाम स्त्रीलिंग होते है। जैसे- गंगा, यमुना, महानदी, गोदावरी, सतलज, रावी, व्यास, झेलम इत्यादि। 
अपवाद- शोण, सिन्धु, ब्रह्यपुत्र नद है, अतः पुंलिंग है।  

(ii) नक्षत्रों के नाम स्त्रीलिंग होते है। जैसे- भरणी, अश्र्विनी, रोहिणी इत्यादि। 
अपवाद- अभिजित, पुष्य आदि।  

(iii) बनिये की दुकान की चीजें स्त्रीलिंग है। जैसे- लौंग, इलायची, मिर्च, दालचीनी, चिरौंजी, हल्दी, जावित्री, सुपारी, हींग इत्यादि।  
अपवाद- धनिया, जीरा, गर्म मसाला, नमक, तेजपत्ता, केसर, कपूर इत्यादि। 

(iv) खाने-पीने की चीजें स्त्रीलिंग है। जैसे- कचौड़ी, पूरी, खीर, दाल, पकौड़ी, रोटी, चपाती, तरकारी, सब्जी, खिचड़ी इत्यादि। 
अपवाद- पराठा, हलुआ, भात, दही, रायता इत्यादि।
संज्ञा

संज्ञा का शाब्दिक अर्थ होता है : नाम। किसी व्यक्ति,वस्तु,स्थान तथा भाव के नाम को संज्ञा कहा जाता है। जैसे - राम,वाराणसी,महल,बहादुरी,रामायण आदि।

हिन्दी में मुख्य रूप से संज्ञा के पाँच भेद माने जाते है :-
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
2. जातिवाचक संज्ञा
3. भाववाचक संज्ञा
4. समूहवाचक संज्ञा
5. द्रव्यवाचक संज्ञा 

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा:- जिस शब्द से किसी एक विशेष व्यक्ति,वस्तु या स्थान आदि का बोध होता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते है। जैसे -राम,कृष्ण ,सीता ,गंगा,यमुना,गोदावरी,काशी,कलकत्ता ,दिल्ली,हिमालय,सतपुडा आदि।

2. जातिवाचक संज्ञा :- जिस शब्द से एक ही जाति के अनेक प्राणियो या वस्तुओं का बोध हो ,उसे जातिवाचक संज्ञा कहते है। जैसे - कलम,पुस्तक,दूध,कुर्सी,घर,विद्यालय,सड़क,बाग़,पहाड़,कुत्ता,हाथी,गाय,बैल आदि।

3. भाववाचक संज्ञा :- जिस संज्ञा शब्द से किसी के गुण,दोष,दशा ,स्वभाव ,भाव आदि का बोध होता हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते है। जैसे - सच्चाई ,ईमानदारी,गर्मी,वीरता,लड़कपन,सुख,बुढ़ापा,हरियाली,जवानी,गरीबी आदि।

4. समूहवाचक संज्ञा :- जो संज्ञा शब्द किसी समूह या समुदाय का बोध कराते है, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते है । जैसे -भीड़ ,सेना,जुलुस ,खेल आदि।
5. द्रव्यवाचक संज्ञा :- जो संज्ञा शब्द ,किसी द्रव्य ,पदार्थ या धातु आदि का बोध कराते है, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। जैसे -स्टील,घी ,सोना,दूध ,पानी,लकड़ी आदि।
सर्वनाम

संज्ञा के स्थान पर जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें सर्वनाम कहते है।
जैसे :- 

1.रीता ने गीता से कहा ,मै तुम्हे पुस्तक दूँगी।
2. सीता ने रीता से कहा ,मै बाज़ार जाती हूँ।
इन वाक्यों में मै , तुम्हे शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते है। अतः ये सभी सर्वनाम है।

सर्वनाम के भेद :- 

सर्वनाम के मुख्य छः भेद होते है - 1. पुरुषवाचक सर्वनाम 2. निश्चयवाचक सर्वनाम 3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम 4. सम्बन्धवाचक सर्वनाम 5. प्रश्नवाचक सर्वनाम 6. निजवाचक सर्वनाम

1. पुरुषवाचक सर्वनाम :- 

जो सर्वनाम शब्द बोलने वाला अपने लिए, सुनने वाले के लिए या किसी अन्य के लिए प्रयोग करता है, उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है। जैसे - मै,हम,तुम आदि।
पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार से प्रयोग किया जाता है :- 

1.उत्तम पुरूष :- 

जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग तीनो पुरूष उत्तम,मध्यम एवं अन्य के लिए होता है, यानी व्यक्ति के नाम के बदले आने वाले सर्वनाम को पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है। जैसे :- 1. मै काम कर रहा हूँ। 2. हम सब घुमने जायेंगे ।

2. मध्यम पुरूष :- 

जिस सर्वनाम का प्रयोग सुनने वाले के लिए किया जाता है,उसे मध्यम पुरूष कहते है। जैसे - तुम कहाँ जा रहे हो ? तुम सब क्या लिख रहे हो ?

3. अन्य पुरूष :- 

जिसके विषय में बात की जाय ,वे सभी शब्द अन्य पुरूष में होते है। जैसे -वह चालाक है, वह पागल है।

2. निश्चयवाचक सर्वनाम :- 

जो सर्वनाम किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति की ओर संकेत करते है, वे निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते है। जैसे- 1. वह मेरा गाँव है। 2. यह मेरी पुस्तक है।

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम :-

जिन सर्वनाम शब्दों से किसी प्राणी या वस्तु का बोध न हो ,वे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते है। जैसे - 1. कोई व्यक्ति इधर ही आ रहा है। 2. कुछ सेब मेरी टोकरी में है।

4. सम्बन्धवाचक सर्वनाम :- 

जिस सर्वनाम से दो पदों के बीच का सम्बन्ध जाना जाता है। उसे सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहते है। जैसे- 1. जैसी करनी, वैसी भरनी 2. जैसा राजा,वैसी प्रजा

5. प्रश्नवाचक सर्वनाम :-

जिस सर्वनाम का प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए किया जाता है,उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते है। जैसे :- 1. आज कौन आया है ? 2. तुम किसको पत्र लिख रहे हो ?

6. निजवाचक सर्वनाम :- 

जिस सर्वनाम का प्रयोग वाक्य में कर्ता के लिए होता है,उसे निजवाचक सर्वनाम कहते है। जैसे - 1. हमें अपना काम अपने आप करना चाहिए । 2. तुम अपना काम स्वयं करो ।
वचन

शब्द के जिस रूप से एक या एक से अधिक का बोध होता है, उसे हिन्दी व्याकरण में 'वचन' कहते है।
दूसरे शब्दों में- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के जिस रूप से संख्या का बोध हो, उसे 'वचन' कहते है।
वचन का शाब्दिक अर्थ है- 'संख्यावचन'। 'संख्यावचन' को ही संक्षेप में 'वचन' कहते है। वचन का अर्थ कहना भी है।
जैसे- लड़का= एक लड़का;
लड़के= अनेक लड़के।

वचन के प्रकार 

वचन के दो भेद होते है
(1) एकवचन 
(2)बहुवचन 

(1)एकवचन :- 

संज्ञा के जिस रूप से एक व्यक्ति या एक वस्तु होने का ज्ञान हो, उसे एकवचन कहते है।
जैसे- स्त्री, घोड़ा, नदी, रुपया, लड़का, गाय, सिपाही, बच्चा, कपड़ा, माता, माला, पुस्तक, टोपी, बंदर, मोर आदि।

(2)बहुवचन :-

शब्द के जिस रूप से एक से अधिक व्यक्ति या वस्तु होने का ज्ञान हो, उसे बहुवचन कहते है।
जैसे- स्त्रियाँ, घोड़े, नदियाँ, रूपये, लड़के, गायें, कपड़े, टोपियाँ, मालाएँ, माताएँ, पुस्तकें, वधुएँ, गुरुजन, रोटियाँ, लताएँ, बेटे आदि। 

विशेष-

(i) आदरणीय व्यक्तियों के लिए सदैव बहुवचन का प्रयोग किया जाता है। जैसे -पापाजी कल मुंबई जायेंगे।
(ii)संबद्ध दर्शाने वाली कुछ संज्ञायें एकवचन और बहुवचन में एक समान रहती है। जैसे -ताई, मामा, दादा, नाना, चाचा आदि।
(iii)द्रव्यसूचक संज्ञायें एकवचन में प्रयोग होती है। जैसे -पानी, तेल, घी, दूध आदि।
(iv)कुछ शब्द सदैव बहुवचन में प्रयोग किये जाते है जैसे -दाम, दर्शन, प्राण, आँसू आदि।
(v)पुल्लिंग ईकारान्त, उकारान्त और ऊकारान्त शब्द दोनों वचनों में समान रहते है।
जैसे -एक मुनि -दस मुनि, एक डाकू -दस डाकू, एक आदमी -दस आदमी आदि।
(vi)बड़प्पन दिखाने के लिए कभी -कभी वक्ता अपने लिए 'मैं' के स्थान पर 'हम' का प्रयोग करता है 
जैसे - 'हमें' याद नहीं कि हमने कभी 'आपसे' ऐसा कहा हो।
(vii)व्यवहार में 'तुम' के स्थान पर 'आप' का प्रयोग करते हैं। जैसे -'आप' कल कहाँ गये थे ?
(vii)जातिवाचक संज्ञायें दोनों ही वचनों में प्रयुक्त होती है।
जैसे - (i)'कुत्ता' भौंक रहा है। (ii) 'कुत्ते' भौंक रहे है।

परन्तु धातुओं का बोध कराने वाली जातिवाचक संज्ञायें एकवचन में ही प्रयुक्त होती है। जैसे - 'सोना' महँगा है, 'चाँदी' सस्ती है।

एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम-

विभिक्तिरहित संज्ञाओं के बहुवचन बनाने के नियम-
(1)आकारान्त पुल्लिंग शब्दों में 'आ' के स्थान पर 'ए' लगाने से-
एकवचन...............बहुवचन
जूता................. जूते
तारा................. तारे
लड़का............... लड़के 
घोड़ा............... घोडे 
बेटा................. बेटे 
मुर्गा................. मुर्गे 
कपड़ा................ कपड़े 

(2)अकारांत स्त्रीलिंग शब्दों में 'अ' के स्थान पर 'एें' लगाने से-
एकवचन..............बहुवचन
कलम .............. कलमें 
बात ............... बातें
रात ................रातें
आँख ...............आखें
पुस्तक ..............पुस्तकें

(3)जिन स्त्रीलिंग संज्ञाओं के अन्त में 'या' आता है, उनमें 'या' के ऊपर चन्द्रबिन्दु लगाने से बहुवचन बनता है। जैसे- 
एकवचन..............बहुवचन
बिंदिया .............. बिंदियाँ 
चिडिया .............. चिडियाँ
डिबिया ...............डिबियाँ
गुडिया ............... गुडियाँ
चुहिया ................चुहियाँ

(4)ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के 'इ' या 'ई' के स्थान पर 'इयाँ' लगाने से-
एकवचन..............बहुवचन
तिथि ............... तिथियाँ 
नारी ............... नारियाँ 
गति .................गतियाँ 
थाली ............... थालियाँ 

(5)आकारांत स्त्रीलिंग एकवचन संज्ञा-शब्दों के अन्त में 'एँ' लगाने से बहुवचन बनता है ।जैसे-
एकवचन....................बहुवचन
लता ....................लताएँ
अध्यापिका ...............अध्यापिकाएँ 
कन्या ..................कन्याएँ
माता ...................माताएँ
भुजा ..................भुजाएँ
पत्रिका .................पत्रिकाएँ
शाखा................. शाखाएँ 
कामना.............. ..कामनाए
कथा ................ कथाएँ 

(6)इकारांत स्त्रीलिंग शब्दों में 'याँ'लगाने से -
एकवचन..............बहुवचन
जाति.................जातियाँ
रीति .................रीतियाँ
नदी .................नदियाँ
लड़की................लड़कियाँ

(7)उकारान्त व ऊकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के अन्त में 'एँ'लगाते है। 'ऊ' को 'उ' में बदल देते है-
एकवचन...............बहुवचन
वस्तु .................वस्तुएँ
गौ ..................गौएँ
बहु ..................बहुएँ 
वधू .............. .वधुएँ 
गऊ ................. गउएँ