मानसिंह द्वारा काबुल (अफगानिस्तान) के पाँच कबीलों पर विजय उपरान्त इन पठान कबीलों ने अपने ध्वज /पगड़ी का हिस्सा फाड़कर राजा मानसिंह को दिया। इन ध्वज या पगड़ी के कपड़े के पाँच रंगों (नीले, पीले, लाल, हरे, काले) से मिलकर जयपुर का पचरंगा झण्डा बना। इससे पूर्व जयपुर ध्वज सफेद रंग का हुआ करता था।
#important ❤️☘
#important ❤️☘
मलागिरि (मलयगिरि) : भूरे रंग में (चंदन के रंग से)रंगा हुआ वस्त्र जो कई वर्षों तक सुगंध देता था। सिटी पैलेस (जयपुर) में सवाई रामसिंह द्वितीय की अंगरखियां आज भी सुगन्धित है।
#important ❤️☘
#important ❤️☘
❤1
दामणी : मारवाड़ क्षेत्र में प्रचलित लाल रंग की ओढ़नी,जिस पर धागे से कशीदाकारी की होती है।
ध्यान रहे - 'दामणा' अंगुली का आभूषण है।
#important ❤️☘
ध्यान रहे - 'दामणा' अंगुली का आभूषण है।
#important ❤️☘
साड़ियों के विविध रूप - चोल, निकोल/निचोल, पट, दुकुल, अंसुक, चीर, पटोरी, चोरसो,धोरावली आदि साड़ियों के विविध रूप है।
#important ❤️☘
#important ❤️☘
पोत, निबोरी, तिमणिया, तुलसी, जुमावली, चोकी, झालरो, गुंजमाला, गुंजा, चम्पाकली, हंसहार, कंठ साड़ी, कंठमला, हार, चन्द्रहार आदि गले के आभूषण थे।
बाजूबंद (कंगन), रामपाट, चूड़ियां, नोगरी, कंकण, गजरा, गुजरी, बरखा आदि आग्रबाहुओं हाथ की कसाइयों के आभूषण थे।
अंगूठी, विनती, मुंदरी, दामचा (दवनो), नथ-पान आदि हाथ की अंगुलियों के आभूषण थे।
#important❤️👆
बाजूबंद (कंगन), रामपाट, चूड़ियां, नोगरी, कंकण, गजरा, गुजरी, बरखा आदि आग्रबाहुओं हाथ की कसाइयों के आभूषण थे।
अंगूठी, विनती, मुंदरी, दामचा (दवनो), नथ-पान आदि हाथ की अंगुलियों के आभूषण थे।
#important❤️👆
खड़नाल : तेजाजी का जन्म स्थल
ददरेवा : गोगाजी का जन्म स्थल
कोलू : पाबूजी का जन्म स्थल
आसींद : देवनारायण जी का जन्म स्थल
#important ❤️☘
ददरेवा : गोगाजी का जन्म स्थल
कोलू : पाबूजी का जन्म स्थल
आसींद : देवनारायण जी का जन्म स्थल
#important ❤️☘
❤3
लोकदेवता के अवतारों के सम्बन्ध में-
(i) पाबूजी - लक्ष्मण का अवतार
(ii) रामदेवजी – श्रीकृष्ण का अवतार
(iii) देवनारायणजी – भगवान विष्णु का अवतार
(iv) वीर कल्लाजी - शेषनाग का अवतार
#important ❤️☘
(i) पाबूजी - लक्ष्मण का अवतार
(ii) रामदेवजी – श्रीकृष्ण का अवतार
(iii) देवनारायणजी – भगवान विष्णु का अवतार
(iv) वीर कल्लाजी - शेषनाग का अवतार
#important ❤️☘
❤2
जैसलमेर के प्रमुख मंदिर -
◆ चुंधी गणेश तीर्थ मंदिर (जैसलमेर), तनोट माता का मंदिर (तनोट), घटियाली माता मंदिर (तनोट), आशापूर्णा माता मंदिर (पोकरण), चारभुजा मंदिर (पोकरण), खींवज माता का मंदिर (पोकरण), रामदेवजी का मंदिर (रामदेवरा), स्वागियाँ देवी का मंदिर (जैसलमेर दुर्ग)
#important ❤️👍🏼
◆ चुंधी गणेश तीर्थ मंदिर (जैसलमेर), तनोट माता का मंदिर (तनोट), घटियाली माता मंदिर (तनोट), आशापूर्णा माता मंदिर (पोकरण), चारभुजा मंदिर (पोकरण), खींवज माता का मंदिर (पोकरण), रामदेवजी का मंदिर (रामदेवरा), स्वागियाँ देवी का मंदिर (जैसलमेर दुर्ग)
#important ❤️👍🏼
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में सात अभेद्य प्रवेश द्वार है।
1. प्रथम द्वारा – पाडनपोल के पास रावत बाघसिंह की छतरी बनी हुई है।
2. भैरव पोल व हनुमानपोल के मध्य जयमल और कल्ला जी राठौड़ की छतरियाँ बनी हुई है।
सातवें द्वारा रामपोल के पास फत्ता सिसोदिया की छतरी बनी हुई है।
#important ❤️☘
1. प्रथम द्वारा – पाडनपोल के पास रावत बाघसिंह की छतरी बनी हुई है।
2. भैरव पोल व हनुमानपोल के मध्य जयमल और कल्ला जी राठौड़ की छतरियाँ बनी हुई है।
सातवें द्वारा रामपोल के पास फत्ता सिसोदिया की छतरी बनी हुई है।
#important ❤️☘
वसंतगढ़ दुर्ग - सिरोही
विजयमंदिर का किला- बयाना (भरतपुर)
शेरगढ़ (कोषवर्धन) का किला-बारां
शेरगढ़ का किला-धौलपुर
आमेर का किला - जयपुर
सोजत दुर्ग-पाली
सज्जनगढ़ दुर्ग - उदयपुर
भाद्राजूण का किला-जालौर
खंडार का किला-सवाईमाधोपुर
कांकोड़ किला-टोंक
मंडरायल दुर्ग - करौली
मचान दुर्ग-सिरोही
तवनगढ़ / त्रिभुवनगढ़ / तिमनगढ़ किला-करौली
कुचामन किला-डीडवाना-कुचामन
कांकवाड़ी किला - सरिस्का अभ्यारण्य (अलवर)
बाला दुर्ग (कुंवारा किला) / अलवर का किला- अलवर
#important #फैक्ट #दुर्ग ❤️☘
विजयमंदिर का किला- बयाना (भरतपुर)
शेरगढ़ (कोषवर्धन) का किला-बारां
शेरगढ़ का किला-धौलपुर
आमेर का किला - जयपुर
सोजत दुर्ग-पाली
सज्जनगढ़ दुर्ग - उदयपुर
भाद्राजूण का किला-जालौर
खंडार का किला-सवाईमाधोपुर
कांकोड़ किला-टोंक
मंडरायल दुर्ग - करौली
मचान दुर्ग-सिरोही
तवनगढ़ / त्रिभुवनगढ़ / तिमनगढ़ किला-करौली
कुचामन किला-डीडवाना-कुचामन
कांकवाड़ी किला - सरिस्का अभ्यारण्य (अलवर)
बाला दुर्ग (कुंवारा किला) / अलवर का किला- अलवर
#important #फैक्ट #दुर्ग ❤️☘
❤3🔥1
मेवाड़, सिसोदिया राजवंश_:आहड़ की छतरियां,
(2) राठौड़, बीकानेर - देवी कुण्ड की छतरियां (राव कल्याणमल की छतरी सबसे पुरानी प्रसिद्ध),
(3) राठौड़, जोधपुर_:मण्डौर की छतरियां,
(4) भाटी, जैसलमेर - बड़ा बाग की छतरियां,
(5) हाड़ा चौहान, कोटा -क्षार बाग की छतरियां,
(6) हाड़ा चौहान,:_ बूंदी केसर बाग की छतरियां
(7) कच्छवाह जयपुर - गैटोर की छतरियां (प्रसिद्ध सवाई जयसिंह की छतरी)
#फैक्ट #important ❤️👍🏼
(2) राठौड़, बीकानेर - देवी कुण्ड की छतरियां (राव कल्याणमल की छतरी सबसे पुरानी प्रसिद्ध),
(3) राठौड़, जोधपुर_:मण्डौर की छतरियां,
(4) भाटी, जैसलमेर - बड़ा बाग की छतरियां,
(5) हाड़ा चौहान, कोटा -क्षार बाग की छतरियां,
(6) हाड़ा चौहान,:_ बूंदी केसर बाग की छतरियां
(7) कच्छवाह जयपुर - गैटोर की छतरियां (प्रसिद्ध सवाई जयसिंह की छतरी)
#फैक्ट #important ❤️👍🏼
❤4
जयसिंह प्रथम (मिर्जा राजा जयसिंह)के प्रमुख अभियान...
अहमद नगर अभियान.....1623 ई.
उज़्बेक विद्रोह का दमन....1629 ई.
गोलकुंडा और बीजापुर घेरा.... 1636ई.
कंधार अभियान.......1651 ई.
मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने 14 अप्रैल 1665 (2 माह) तक ब्रजगढ़, माँची, पुरन्दर पर घेराव के बाद शिवाजी ने संधि का प्रस्ताव भेजा था.....
11 जून 1665 को पुरंदर की संधि आखिरकार सम्पन्न होती है.....
#important ❤️👆
अहमद नगर अभियान.....1623 ई.
उज़्बेक विद्रोह का दमन....1629 ई.
गोलकुंडा और बीजापुर घेरा.... 1636ई.
कंधार अभियान.......1651 ई.
मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने 14 अप्रैल 1665 (2 माह) तक ब्रजगढ़, माँची, पुरन्दर पर घेराव के बाद शिवाजी ने संधि का प्रस्ताव भेजा था.....
11 जून 1665 को पुरंदर की संधि आखिरकार सम्पन्न होती है.....
#important ❤️👆
1857 की क्रान्ति के समय राजस्थान में छः सैनिक छावनियाँ थी-
(1) नसीराबाद (अजमेर) : 15वीं बंगाल नेटिव इन्फन्ट्री
(2) नीमच (मध्यप्रदेश) : फर्स्ट बंगाल केवेलरी
(3) ब्यावर (ब्यावर) : मेरवाड़ा बटालियन
(4) देवली (टोंक) : कोटा कन्टिनजेन्ट
(5) एरिनपुरा (पाली) : जोधपुर लीजियन
(6) खैरवाड़ा (उदयपुर) : मेवाड़ भील कोर
नोट : 1857 की क्रान्ति के समय 6 सैनिक छावनियों में 5000 सैनिक थे, परन्तु उनमें एक भी युरोपीय नहीं था
#important ❤️👍🏼
(1) नसीराबाद (अजमेर) : 15वीं बंगाल नेटिव इन्फन्ट्री
(2) नीमच (मध्यप्रदेश) : फर्स्ट बंगाल केवेलरी
(3) ब्यावर (ब्यावर) : मेरवाड़ा बटालियन
(4) देवली (टोंक) : कोटा कन्टिनजेन्ट
(5) एरिनपुरा (पाली) : जोधपुर लीजियन
(6) खैरवाड़ा (उदयपुर) : मेवाड़ भील कोर
नोट : 1857 की क्रान्ति के समय 6 सैनिक छावनियों में 5000 सैनिक थे, परन्तु उनमें एक भी युरोपीय नहीं था
#important ❤️👍🏼
तलवारों के लिए प्रसिद्ध...... सिरोही
तीर कमान..... चंदूजी का गढ़ा (बांसवाड़ा) ओर बोढ़ीगामा (डूंगरपुर)
कोफ्तगिरी.... जयपुर और अलवर
#important ❤️👆
तीर कमान..... चंदूजी का गढ़ा (बांसवाड़ा) ओर बोढ़ीगामा (डूंगरपुर)
कोफ्तगिरी.... जयपुर और अलवर
#important ❤️👆
ब्लू पॉटरी......( मुख्य कलाकार)
कृपाल सिंह शेखावत, नाथी बाई, मीनाक्षी राठौड़, गोपाल सैनी, दुर्गालाल,
#important ❤️👍
कृपाल सिंह शेखावत, नाथी बाई, मीनाक्षी राठौड़, गोपाल सैनी, दुर्गालाल,
#important ❤️👍
मीनाकारी कला......
कलाकार... मुन्नालाल, दुर्गा सिंह, कैलाशचंद्र, काशीनाथ
सोने पर मीनाकारी... प्रतापगढ़
चांदी पर मीनाकारी.... नाथद्वारा
पीतल पर मीनाकारी... अलवर
तांबे पर मीनाकारी.... भीलवाड़ा
कांच पर मीनाकारी.... कोटा
#important ❤️👍
कलाकार... मुन्नालाल, दुर्गा सिंह, कैलाशचंद्र, काशीनाथ
सोने पर मीनाकारी... प्रतापगढ़
चांदी पर मीनाकारी.... नाथद्वारा
पीतल पर मीनाकारी... अलवर
तांबे पर मीनाकारी.... भीलवाड़ा
कांच पर मीनाकारी.... कोटा
#important ❤️👍
मीनाकारी कला......
कलाकार... मुन्नालाल, दुर्गा सिंह, कैलाशचंद्र, काशीनाथ
सोने पर मीनाकारी... प्रतापगढ़
चांदी पर मीनाकारी.... नाथद्वारा
पीतल पर मीनाकारी... अलवर
तांबे पर मीनाकारी.... भीलवाड़ा
कांच पर मीनाकारी.... कोटा
#important ❤️👍
कलाकार... मुन्नालाल, दुर्गा सिंह, कैलाशचंद्र, काशीनाथ
सोने पर मीनाकारी... प्रतापगढ़
चांदी पर मीनाकारी.... नाथद्वारा
पीतल पर मीनाकारी... अलवर
तांबे पर मीनाकारी.... भीलवाड़ा
कांच पर मीनाकारी.... कोटा
#important ❤️👍
❤2
1857 की क्रान्ति के समय राजस्थान में छः सैनिक छावनियाँ थी-
(1) नसीराबाद (अजमेर) : 15वीं बंगाल नेटिव इन्फन्ट्री
(2) नीमच (मध्यप्रदेश) : फर्स्ट बंगाल केवेलरी
(3) ब्यावर (ब्यावर) : मेरवाड़ा बटालियन
(4) देवली (टोंक) : कोटा कन्टिनजेन्ट
(5) एरिनपुरा (पाली) : जोधपुर लीजियन
(6) खैरवाड़ा (उदयपुर) : मेवाड़ भील कोर
नोट : 1857 की क्रान्ति के समय 6 सैनिक छावनियों में 5000 सैनिक थे, परन्तु उनमें एक भी युरोपीय नहीं था
#important ❤️👍🏼
(1) नसीराबाद (अजमेर) : 15वीं बंगाल नेटिव इन्फन्ट्री
(2) नीमच (मध्यप्रदेश) : फर्स्ट बंगाल केवेलरी
(3) ब्यावर (ब्यावर) : मेरवाड़ा बटालियन
(4) देवली (टोंक) : कोटा कन्टिनजेन्ट
(5) एरिनपुरा (पाली) : जोधपुर लीजियन
(6) खैरवाड़ा (उदयपुर) : मेवाड़ भील कोर
नोट : 1857 की क्रान्ति के समय 6 सैनिक छावनियों में 5000 सैनिक थे, परन्तु उनमें एक भी युरोपीय नहीं था
#important ❤️👍🏼
❤2
मेवाड़, सिसोदिया राजवंश_:आहड़ की छतरियां,
(2) राठौड़, बीकानेर - देवी कुण्ड की छतरियां (राव कल्याणमल की छतरी सबसे पुरानी प्रसिद्ध),
(3) राठौड़, जोधपुर_:मण्डौर की छतरियां,
(4) भाटी, जैसलमेर - बड़ा बाग की छतरियां,
(5) हाड़ा चौहान, कोटा -क्षार बाग की छतरियां,
(6) हाड़ा चौहान,:_ बूंदी केसर बाग की छतरियां
(7) कच्छवाह जयपुर - गैटोर की छतरियां (प्रसिद्ध सवाई जयसिंह की छतरी)
#फैक्ट #important ❤️👍🏼
(2) राठौड़, बीकानेर - देवी कुण्ड की छतरियां (राव कल्याणमल की छतरी सबसे पुरानी प्रसिद्ध),
(3) राठौड़, जोधपुर_:मण्डौर की छतरियां,
(4) भाटी, जैसलमेर - बड़ा बाग की छतरियां,
(5) हाड़ा चौहान, कोटा -क्षार बाग की छतरियां,
(6) हाड़ा चौहान,:_ बूंदी केसर बाग की छतरियां
(7) कच्छवाह जयपुर - गैटोर की छतरियां (प्रसिद्ध सवाई जयसिंह की छतरी)
#फैक्ट #important ❤️👍🏼
❤2
दर 'भरतपुर'-कुछ चित्रित शैलाश्रय खोजे गए हैं जिनमें व्याघ्र, बारहसिंघा, मानव आकृति एवं सूर्य का चित्रांकन किया गया है
आलनिया, मानपुरा, तिपटिया 'कोटा' स्थानों पर शैलचित्र मिले हैं डॉ. जगतनारायण श्रीवास्तव ने 1978 में हाड़ौती के घने जंगलों और पथरीली कंदराओं में शैलचित्रों की खोज की थी।
इन्द्रगढ़ 'कोटा' यहाँ से 1870 ई. में सी.ए.हैकेट को पत्थर के औजार हैण्डएक्स, एश्यूलियन, क्लीवर मिले है।
गरदड़ा सभ्यता 'बूंदी'- यहाँ छाजा नदी किनारे पहली बर्ड की पेटिंग है
बांका भीलवाड़ा_यहां राज्य कि पहली अलंकृत गुफा मिली थी,
#important ❤️👆
आलनिया, मानपुरा, तिपटिया 'कोटा' स्थानों पर शैलचित्र मिले हैं डॉ. जगतनारायण श्रीवास्तव ने 1978 में हाड़ौती के घने जंगलों और पथरीली कंदराओं में शैलचित्रों की खोज की थी।
इन्द्रगढ़ 'कोटा' यहाँ से 1870 ई. में सी.ए.हैकेट को पत्थर के औजार हैण्डएक्स, एश्यूलियन, क्लीवर मिले है।
गरदड़ा सभ्यता 'बूंदी'- यहाँ छाजा नदी किनारे पहली बर्ड की पेटिंग है
बांका भीलवाड़ा_यहां राज्य कि पहली अलंकृत गुफा मिली थी,
#important ❤️👆
❤1👍1