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भारत में बैंकिंग तंत्र(Banking System in India):–

०बैंक ऑफ हिंदुस्तान–1770:
०भारत का पहला बैंक।
०अंग्रेजों द्वारा प्रारम्भ।
०कलकत्ता में।

०बैंक ऑफ बंगाल –1809
०बैंक ऑफ बॉम्बे –1840
०बैंक ऑफ मद्रास –1843
:
०1921 में तीनों का विलय।
० इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का गठन।

०इलाहबाद बैंक– 1865:
०इलाहाबाद में स्थापना।
०बाद में hq कलकत्ता बनाया गया।

०अवध कॉमर्शियल बैंक–1881:
०सीमित देयता के साथ।
०भारतीयों द्वारा स्थापित।
०फैजाबाद में स्थापना।

०पंजाब नेशनल बैंक–1894 :
०पूर्ण देयता के साथ।
०भारतीयों द्वारा स्थापित पहला बैंक।
० लाहौर में स्थापना।
०HQ–नई दिल्ली।

०आरबीआई(RBI)–1935:
०RBI Act,1934 के तहत।
०कलकत्ता में स्थापना।
०बाद में बम्बई स्थानांतरित।
०1 जनवरी 1949 को राष्ट्रीयकरण।

०बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट–1949:
०बैंकिंग फर्मों को नियंत्रित करने हेतु।


०स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)–1955:
०इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का नाम SBI कर दिया गया।
०1 जुलाई 1955 को राष्ट्रीयकरण।
०गोरेवाला समिति की सिफारिश पर।
०मुख्यालय–मुंबई।

नोट:–
०भारत का पहला बैंक “बैंक ऑफ हिंदुस्तान“ है।
०पूर्ण रूप से भारतीयों द्वारा स्थापित पहला बैंक “पंजाब नेशनल बैंक" है।
०19 जुलाई 1969(4th पंचवर्षीय योजना) में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा ’14 बैंकों’ का राष्ट्रीयकरण किया गया।
०1980(6th FYP) में “6 बैंकों" का राष्ट्रीयकरण किया गया।

#Prelims Facts"
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*गुप्त कालीन शिक्षा एवं साहित्य*

इस काल में कालीदास, शूद्रक, विशाखदत, भारवि, भोट्ट, भास, विष्णु शर्मा आदि जैसे कई साहित्यकार हुए।

पुराणों के वर्तमान स्वरूप का विकास गुप्तकाल में ही हुआ।

रामायण एवं महाभारत की अंतिम रचना भी गुप्तकाल में ही हुई।

याज्ञवल्यक्य, नारद, कात्यायन एवं बृहस्पति स्मृतियों की रचना भी गुप्तकाल में ही हुई।

गुप्तकाल की तुलना पेरीक्लीज युग (एथेंस के इतिहास में) तथा एलिजाबेथ युग (अंग्रेजी साहित्य के इतिहास में) से की जाती है।

गुप्त कालीन कला

गुप्त युग में मूर्तिकला ने अपने-आप को गंधार शैली से मुक्त कर लिया। UGC NET June 2022

तत्कालीन मूर्तिकला का सबसे भव्य नमूना है सारनाथ से प्राप्त धर्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा में बुद्ध की मूर्ति।

बिहार के भागलपुर से मिली बुद्ध की ताम्रमूर्ति एवं मथुरा से मिली बुद्ध की खड़ी मूर्ति विशेष हैं।

गुप्तकाल में हरेक शिक्षित एवं सुसंस्कृत व्यक्ति चित्रकला में दिलचस्पी रखता था।

अजन्ता की गुफाओं के भित्तिचित्र उस युग के कलाकारों की अद्भुत प्रतिभा का परिचय देते हैं।

अजंता शैली के अन्य चित्र मालवा के बाध नामक स्थान से भी प्राप्त हुए हैं।


*गुप्त कालीन विज्ञान (Science)*

गणित के क्षेत्र में नवीन सिद्धांतों का विकास हुआ तथा प्रसिद्ध गणितज्ञ आर्यभट्ट ने दशमलव पद्धति का आविष्कार किया।


आर्यभट्ट ने पहली बार बताया कि पृथ्वी गोल है एवं अपनी धुरी पर घूमती है तथा पृथ्वी एवं चंद्रमा की स्थिति के कारण ग्रहण लगता है।

आर्यभट्ट ने सूर्य सिद्धांत नामक ग्रंथ की रचना की जो नक्षत्र विज्ञान से संबंधित थी, यह ग्रंथ उपलब्ध नहीं है, उन्होंने गणित के ग्रंथ आर्यभट्टेयी की रचना की।

ब्रह्मगुप्त इस काल के प्रसिद्ध गणितज्ञ थे।
उन्होंने ब्रह्म सिद्धांत नामक ग्रंथ की रचना की।

ब्रह्मगुप्त ने खगोलीय समस्याओं के लिए बीजगणित का प्रयोग करना आरंभ किया।

वराहमिहिर गुप्तकाल के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थे। उन्होंने प्रसिद्ध ग्रंथों वृहत् संहिता एवं पंचसिद्धांतिका की रचना की।

वृहत्संहिता में नक्षत्र विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, प्राकृतिक इतिहास एवं भौतिक भूगोल से संबंधित विषयों का वर्णन दिया हुआ है।

आर्यभट्ट के ग्रंथ पर भास्कर-ने इसी काल में टीका लिखी जो महाभास्कर्य,लघुभास्कर्य एवं भाष्य के रूप में प्रसिद्ध हैं।

चिकित्सा क्षेत्र में आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ अष्टांग संग्रह की रचना बाग्भट्ट ने गुप्तकाल में ही की।

आयुर्वेद के एक अन्य प्रसिद्ध ग्रंथ नवनीतकम् की रचना भी इसी काल में हुई।

पाल्काप्य नामक पशु चिकित्सक ने ‘हाथियों’ के रोगों से संबंधित चिकित्सा हेतु हस्त्यायुर्वेद नामक ग्रंथ की रचना की। UP PGT

प्रसिद्ध चिकित्सक धन्वंतरि चंद्रगुप्त-II के दरबार में था।

नागार्जुन इस काल का एक प्रसिद्ध चिकित्सक था, उसने रस चिकित्सा नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की।

इस काल में औषधि निर्माण के कार्य में तेजी आई।

धातु विज्ञान की इस युग में अत्यधिक तरक्की हुई।

लगभग 1.5 हजार वर्ष पूर्व निर्मित दिल्ली में एक लौह-स्तंभ में अभी तक जंग नहीं लगा है, जो तत्कालीन धातुकर्म विज्ञान के काफी विकसित होने का संकेत है।

इस प्रकार भौतिक एवं सांस्कृतिक श्रेष्ठता के कारण गुप्त युग को प्राचीन भारतीय इतिहास का स्वर्णयुग (Golden Age) कहा गया है।

#Prelims Fact
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UPPCS PYQ 2017+16


लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान कहां स्थित है?
उत्तर : लखनऊ,

उत्तर प्रदेश राज्य चमड़ा विकास एवं विपणन निगम लिमिटेड
उत्तर : आगरा,

(यू.पी.एफ.सी.) उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम
उत्तर : कानपुर,

एक सुरंग में 100 वॉट क्षमता वाले पांच बल्ब लगातार 20 घण्टे तक जलाए जाते है। सम्पूर्ण विद्यूत खर्च होगी
उत्तर : दस यूनिट,

मानव शरीर में विद्यमान रहता है
उत्तर : स्टार्च-अपघटक, एन्जाइम, डायस्टेस ,

फलों के मीठे स्वाद का कारण है
उत्तर : फ्रेक्टोज,

दियासलाई के निर्माण में उत्तर प्रदेश का कौन-सा जिला प्रमुख है?
उत्तर : बरेली ,

मुरादाबाद और सहारनपुर किन वस्तुओं के निर्माण के लिए जाने जाते हैं?
उत्तर : पीतल का सामान और लकड़ी पर नक्काशी ,

कौन सा आनुवंशिक रोग नहीं है?
उत्तर : रतौंधी ,

‘महाधान’ (सुपर राइस) विकसित किया
उत्तर : जी.एस. खुश ने ,

आयोडीन की कमी से होता है
उत्तर : घेंघा रोग ,

विटामिन K
उत्तर : प्रतिरक्तस्रावी कारक ,

किसका मस्तिष्क उसके शरीर के अनुपात में सबसे बड़ा होता है?
उत्तर : चींटी

सुई चुभाने पर निम्नलिखित अंगों में कौन-सा दर्द महसूस नहीं करेगा?
उत्तर : मस्तिष्क,

विंध्य क्षेत्र के किस शिलाश्रय से सर्वाधिक मानव कंकाल मिले हैं?
उत्तर : लेखहिया,

एक ही कब्र से तीन मानव कंकाल निकले हैं
उत्तर : दमदमा से,

14 वीं शदी ई-पू- का एक अभिलेख जिसमें वैदिक देवताओं का वर्णन है, प्राप्त हुआ है
उत्तर : बोगज-कोई से,

जैन ‘तीर्थंकर’ पार्श्वनाथ किस स्थानों से संबंधित थे?
उत्तर : वाराणसी,

किस अभिलेख में अशोक का अभिलेख भी पाया गया है?
उत्तर : महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख,

अशोक के अभिलेखों में से किसमें दक्षिण भारतीय राज्यों का उल्लेख हुआ है?
उत्तर : द्वितीय मुख्य शिलालेख,

#prelims
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👉 अक्टूबर----- दिसंबर

2023 में हुए महत्वपूर्ण महोत्सव / सम्मेलन/ बैठक


पांचवा वैश्विक आयुर्वेद महोत्सव - केरल

इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फ़ोरम की बैठक - नई दिल्ली

आसियान भारत श्री अन्न महोत्सव -नई दिल्ली

खादी माटी कला महोत्सव -गुजरात

पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक - पटना

जनजातीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आदि व्याख्यान- नई दिल्ली

ग्लोबल पार्टनर on AI सम्मेलन - नई दिल्ली

28 व सिंधी सम्मेलन - दुबई

आयुर्वेद फॉर वन हेल्थ अभियान - नई दिल्ली

साइलेंट कंजर्वेशन प्रदर्शनी - दिल्ली

बोयत वंदना समारोह - उड़ीसा

छाउ पर्व - जम्मू एंड कश्मीर

हिंद प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2023 - दिल्ली

आसियान भारत बाजार महोत्सव 2023 - जकार्ता

दूसरा वर्ल्ड लोकल प्रोडक्शन फोरम की बैठक - हेग

आयुर्वेद ज्ञान रायपुर नेपुनय पहल - दिल्ली

पोषण भी पढ़ाई भी कार्यक्रम का आयोजन - इंदौर

मिलेट्स महोत्सव - हमीरपुर

नारी शक्ति बंधन सम्मेलन - लखीमपुर खीरी

शहरी गैस पाइपलाइन योजना - फतेहपुर

मोबाइल मेडिकल व्हेन लॉन्च - मिर्जापुर

देवा मेला का आयोजन - बाराबंकी

बदलापुर महोत्सव -जौनपुर

सोनपुर मेला - बिहार

बैकुंठ चतुर्दशी मेला का आयोजन - उत्तराखंड

उत्तराखंड महोत्सव का आयोजन - लखनऊ

नर्मदा महोत्सव - मध्य प्रदेश

बहुभाषी माइक्रोसॉफ्ट शुरू - केरल

#Prelims Facts
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ब्रिटिश काल में बने प्रमुख आयोग:–

आयोग (वर्ष) क्षेत्र

०कैम्पबेल आयोग(1866)–अकाल
०स्ट्रैची कमीशन(1878)–अकाल
०वेल्बी आयोग(1895)–व्यय
०लायल आयोग(1896)–अकाल
०मैकडॉनेल आयोग(1900)–अकाल
०कोलिन स्कॉट मानक्रीफ आयोग (1901)–सिंचाई
०थॉमस राबर्टसन आयोग(1901)–रेलवे
०एंड्रयू फेजर आयोग(1902-03)–पुलिस
०बटलर समिति(1927)–भारत सरकार एवं देशी रियासतों के बीच संबंध सुधारना।


#Prelims Facts
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भारत में प्रमुख सूफी सिलसिले एवम भारत में इनके संस्थापक:–

सूफी सिलसिला संस्थापक

०चिश्ती–ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती
०सुहरावर्दी–बहाउद्दीन जकारिया
०कादिरी–सैय्यद मखदूम मुहम्मद जिलानी
०शत्तारी–शाह अब्दुल्ला शत्तारी
०फिरदौसी–शेख बदरूद्दीन समरकंदी
०नक्शबंदी–बाकी बिल्लाह

#Prelims Facts
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वैदिक कालीन नदियाँ:–

प्राचीन नाम वर्तमान नाम

०सिंधु–इन्दुस या इन्डस
०शुतुद्रि–सतलुज
०सरस्वती–सरस्वती
०विपाशा–व्यास
०पुरुष्णी–रावी
०अस्किनी–चिनाब
०वितस्ता–झेलम
०दृषद्वती–घग्घर
०गोमल–गोमती
०कुंभा–काबुल
०सुवास्तु–स्वात
०सदानीरा–गंडक

#Prelims Facts
👍3
ब्राह्मण ग्रन्थ:–

०ऋग्वेद:
०ऐतरेय ब्राह्मण
० कौशीतकी ब्राह्मण

०यजुर्वेद:
० शतपथ ब्राह्मण
० तैत्तिरीय ब्राह्मण

०सामवेद:
०पंचविश ब्राह्मण

०अथर्ववेद:
०गोपथ ब्राह्मण

#Prelims Facts
👍2
वेद की शाखाएँ:–

०ऋग्वेद:
०साकल
०बालखिल्य
०वाष्कल

०यजुर्वेद:

शुक्ल यजुर्वेद कृष्ण यजुर्वेद
०काण्व। ०तैत्तिरीय, काठक ०माध्यन्दिन ० कपिष्ठल
०मैत्रायणी


०सामवेद:
०कौथुमीय
०राणायनीय
०जैमिनीय

०अथर्वेद:
०पिप्पलाद
०शौनक

#Prelims Facts
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विश्व के घास प्रदेश(Grasslands of the World):–

०उष्णकटिबन्धीय घास प्रदेश (Tropical Grasslands):
०सवाना– अफ्रीका
०लानोस–वेनेजुएला
०कम्पास–द०पू० ब्राजील
०पार्कलैंड–दक्षिणी अफ्रीका

०शीतोष्ण घास प्रदेश (Temperate Grasslands):
०पम्पास –
अर्जेंटीना
०प्रेयरीज–उ० अमेरिका
०डाउन्स–आस्ट्रेलिया
०वेल्ड –दक्षिण अफ्रीका
०स्टेपीज–यूरेशिया
०पुस्टाज –हंगरी
०कैंटरबरी– न्यूजीलैंड

#Prelims Facts
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विश्व के घास प्रदेश(Grasslands of the World):–

०उष्णकटिबन्धीय घास प्रदेश (Tropical Grasslands):
०सवाना– अफ्रीका
०लानोस–वेनेजुएला
०कम्पास–द०पू० ब्राजील
०पार्कलैंड–दक्षिणी अफ्रीका

०शीतोष्ण घास प्रदेश (Temperate Grasslands):
०पम्पास –
अर्जेंटीना
०प्रेयरीज–उ० अमेरिका
०डाउन्स–आस्ट्रेलिया
०वेल्ड –दक्षिण अफ्रीका
०स्टेपीज–यूरेशिया
०पुस्टाज –हंगरी
०कैंटरबरी– न्यूजीलैंड

#Prelims Facts
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अलाउद्दीन खिलजी का विजय अभियान;–

राज्य(वर्ष) – शासक

०गुजरात(1299)–कर्ण देव
०रणथंभौर (1301)–हमीर देव
०चित्तौड़ (1303)–रतन सिंह
०देवगिरि (1306-07)–रामचंद्र देव
०वारंगल (1308)–प्रताप रुद्र देव
०द्वार समुद्र (1310)–वीर बल्लाल
०मदुरा (1311)–वीर पंड्या

नोट:–०
०प्रसिद्ध सूफी कवि अमीर खुसरो चित्तौड़ पर युद्ध के समय अलाउद्दीन के साथ था।
०इस जीत के बाद चित्तौड़ किले का नाम खिजराबाद रख दिया गया।
०अलाउद्दीन को वारंगल राज्य से कोहिनूर हीरा उपहार में मिला।

#Prelims Facts
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प्रमुख अभिलेख एवम संबंधित शासक

अभिलेख शासक

०हाथीगुम्फा अभिलेख–कलिंग नरेश खारवेल
०एहोल अभिलेख–पुलकेशिन-ii
०नासिक अभिलेख–गौतमी बलश्री
०जूनागढ़ अभिलेख–रुद्रदामन
०प्रयाग स्तम्भ अभिलेख–समुद्रगुप्त
०मन्दसौर अभिलेख–मालवा नरेश यशोवर्मन
०ग्वालियर अभिलेख–प्रतिहार नरेश भोज
०देवपाड़ा अभिलेख–बंगाल शासक विजयसेन
०भितरी व जूनागढ़ अभिलेख–स्कंदगुप्त

#Prelims Facts
प्रमुख पर्वतमाला एवम उनकी लंबाई:–

पर्वतमाला लंबाई(KM)

०एंडीज पर्वतमाला–7000Km
०रॉकी पर्वतमाला–4800Km
०ग्रेट डिवाइडिंग रेंज–3500Km
०कुनलुन पर्वतमाला–3000km
०यूराल पर्वतमाला/एटलस पर्वतमाला/हिमालय पर्वतमला –2500km
०ग्रेट बैरियर रीफ–2300km

#Prelims Facts
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सल्तनत कालीन प्रशासनिक विभाग

विभाग(संबंधित क्षेत्र) शासक

०दीवाने अर्ज(सैन्य विभाग)– बलबन
०दीवान-ए-मुस्तखराज (राजस्व विभाग)- अलाउद्दीन खिलजी
०दीवान-ए-रियासत (बाजार नियंत्रण विभाग)- अलाउद्दीन खिलजी
०दीवान-ए-अमीरकोही (कृषि विभाग) - मुहम्मद बिन तुगलक
०दीवान-ए-खैरात (दान विभाग)- फिरोज तुगलक
०दीवान-ए-बंदगान(दासविभाग)- फिरोज तुगलक

#Prelims Facts
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अन्य विभाग:–
०दीवाने रिसालत– धार्मिक मुद्दों से संबंधित/ विदेशी मामलों की देख-रेख से संबंधित।
०दीवाने इन्शा–सरकारी पत्रव्यवहार से संबंधित
०दीवाने वजारत–वित्तीय मामलात से संबंधित/राजस्व विभाग
०सराय-ए-अदल–' ऐसा बाजार, जहां पर वस्त्र, शक्कर, जड़ी-बूटी, मेवा, दीपक जलाने का तेल एवं अन्य निर्मित वस्तुएं बिकने के लिए आती थीं।
०अमीर ए बहर –जल बेड़े का प्रधान अधिकारी
०बरीद ए मुमालिक –गुप्तचर विभाग का प्रमुख।

#Prelims Facts
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कालिदास की प्रमुख रचनाएं:–

०नाटक –मालविकाग्निमित्रम् अभिज्ञानशाकुन्तलम्, विक्रमोर्वशीयम।
०महाकाव्य - रघुवंशम् और कुमारसंभवम्।
०खण्डकाव्य - मेघदूतम् और ऋतुसंहार।

नोट:–मालविकाग्निमित्रम् कालिदास की पहली रचना है जबकि अभिज्ञानशाकुन्तलम् दूसरी।

#Prelims Facts
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संगम कालीन ग्रन्थ:–

ग्रन्थ(विषय) लेखक

०तोलकाप्पियम्(व्याकरण)–तोलकाप्पियर
०शिल्पादिकारम्(प्रेम कथा)–इलंगो अडिगल
०तिरुक्कुरल(दर्शन)–तिरुवल्लुवर
०मणिमेखले(वणिक कथा)–शीतले सत्तनार

#Prelims Facts
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मध्यपाषाण काल:–

०पशुपालन के साक्ष्य
०आदमगढ़ (मध्य प्रदेश)
०बागोर (राजस्थान)

०अस्थि निर्मित उपकरण
०सरायनाहर राय
०महदहा

#Prelims Facts
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*गुप्त कालीन शिक्षा एवं साहित्य*

इस काल में कालीदास, शूद्रक, विशाखदत, भारवि, भोट्ट, भास, विष्णु शर्मा आदि जैसे कई साहित्यकार हुए।

पुराणों के वर्तमान स्वरूप का विकास गुप्तकाल में ही हुआ।

रामायण एवं महाभारत की अंतिम रचना भी गुप्तकाल में ही हुई।

याज्ञवल्यक्य, नारद, कात्यायन एवं बृहस्पति स्मृतियों की रचना भी गुप्तकाल में ही हुई।

गुप्तकाल की तुलना पेरीक्लीज युग (एथेंस के इतिहास में) तथा एलिजाबेथ युग (अंग्रेजी साहित्य के इतिहास में) से की जाती है।

गुप्त कालीन कला

गुप्त युग में मूर्तिकला ने अपने-आप को गंधार शैली से मुक्त कर लिया। UGC NET June 2022

तत्कालीन मूर्तिकला का सबसे भव्य नमूना है सारनाथ से प्राप्त धर्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा में बुद्ध की मूर्ति।

बिहार के भागलपुर से मिली बुद्ध की ताम्रमूर्ति एवं मथुरा से मिली बुद्ध की खड़ी मूर्ति विशेष हैं।

गुप्तकाल में हरेक शिक्षित एवं सुसंस्कृत व्यक्ति चित्रकला में दिलचस्पी रखता था।

अजन्ता की गुफाओं के भित्तिचित्र उस युग के कलाकारों की अद्भुत प्रतिभा का परिचय देते हैं।

अजंता शैली के अन्य चित्र मालवा के बाध नामक स्थान से भी प्राप्त हुए हैं।


*गुप्त कालीन विज्ञान (Science)*

गणित के क्षेत्र में नवीन सिद्धांतों का विकास हुआ तथा प्रसिद्ध गणितज्ञ आर्यभट्ट ने दशमलव पद्धति का आविष्कार किया।


आर्यभट्ट ने पहली बार बताया कि पृथ्वी गोल है एवं अपनी धुरी पर घूमती है तथा पृथ्वी एवं चंद्रमा की स्थिति के कारण ग्रहण लगता है।

आर्यभट्ट ने सूर्य सिद्धांत नामक ग्रंथ की रचना की जो नक्षत्र विज्ञान से संबंधित थी, यह ग्रंथ उपलब्ध नहीं है, उन्होंने गणित के ग्रंथ आर्यभट्टेयी की रचना की।

ब्रह्मगुप्त इस काल के प्रसिद्ध गणितज्ञ थे।
उन्होंने ब्रह्म सिद्धांत नामक ग्रंथ की रचना की।

ब्रह्मगुप्त ने खगोलीय समस्याओं के लिए बीजगणित का प्रयोग करना आरंभ किया।

वराहमिहिर गुप्तकाल के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थे। उन्होंने प्रसिद्ध ग्रंथों वृहत् संहिता एवं पंचसिद्धांतिका की रचना की।

वृहत्संहिता में नक्षत्र विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, प्राकृतिक इतिहास एवं भौतिक भूगोल से संबंधित विषयों का वर्णन दिया हुआ है।

आर्यभट्ट के ग्रंथ पर भास्कर-ने इसी काल में टीका लिखी जो महाभास्कर्य,लघुभास्कर्य एवं भाष्य के रूप में प्रसिद्ध हैं।

चिकित्सा क्षेत्र में आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ अष्टांग संग्रह की रचना बाग्भट्ट ने गुप्तकाल में ही की।

आयुर्वेद के एक अन्य प्रसिद्ध ग्रंथ नवनीतकम् की रचना भी इसी काल में हुई।

पाल्काप्य नामक पशु चिकित्सक ने ‘हाथियों’ के रोगों से संबंधित चिकित्सा हेतु हस्त्यायुर्वेद नामक ग्रंथ की रचना की। UP PGT

प्रसिद्ध चिकित्सक धन्वंतरि चंद्रगुप्त-II के दरबार में था।

नागार्जुन इस काल का एक प्रसिद्ध चिकित्सक था, उसने रस चिकित्सा नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की।

इस काल में औषधि निर्माण के कार्य में तेजी आई।

धातु विज्ञान की इस युग में अत्यधिक तरक्की हुई।

लगभग 1.5 हजार वर्ष पूर्व निर्मित दिल्ली में एक लौह-स्तंभ में अभी तक जंग नहीं लगा है, जो तत्कालीन धातुकर्म विज्ञान के काफी विकसित होने का संकेत है।

इस प्रकार भौतिक एवं सांस्कृतिक श्रेष्ठता के कारण गुप्त युग को प्राचीन भारतीय इतिहास का स्वर्णयुग (Golden Age) कहा गया है।

#Prelims Fact
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