कुछ नहीं होगा इन वृद्धों से ये सब केवल भाषण देते हैं ओर उसमें भी राक्षसों से मर्यादा में व्यवहार करना है ये बोलते हैं ,
किसी भी संगठन का मुखिया एक योग्य युवा को होना चाहिए वृद्ध जनों को केवल सलाहकार होना चाहिए क्योंकि साहस केवल युवा में होता है और समझ वृद्ध में
हिंदुओं के सभी संगठनों का यही हाल है आर्यसमाज हो या rss, आर्यसमाज को देख लो बोलने को बड़ा संगठन है किंतु कब्जा उनका है जिनकी 1 टांग श्मशान की चिता में रखी हुई है ,
युवाओं को तो मौका ही नहीं देना है जमीनों पर धन पर कुंडली बांधे बैठें हैं
वहीं दूसरी तरफ लूली कटे सियार झुंड में निर्दोष हिंदुओ की निर्ममता से हत्याएं कर रहे हैं , भारत में अलग रूप से देखने को मिलता है और पाकिस्तान बंगला देश में अलग
किसी भी संगठन का मुखिया एक योग्य युवा को होना चाहिए वृद्ध जनों को केवल सलाहकार होना चाहिए क्योंकि साहस केवल युवा में होता है और समझ वृद्ध में
हिंदुओं के सभी संगठनों का यही हाल है आर्यसमाज हो या rss, आर्यसमाज को देख लो बोलने को बड़ा संगठन है किंतु कब्जा उनका है जिनकी 1 टांग श्मशान की चिता में रखी हुई है ,
युवाओं को तो मौका ही नहीं देना है जमीनों पर धन पर कुंडली बांधे बैठें हैं
वहीं दूसरी तरफ लूली कटे सियार झुंड में निर्दोष हिंदुओ की निर्ममता से हत्याएं कर रहे हैं , भारत में अलग रूप से देखने को मिलता है और पाकिस्तान बंगला देश में अलग
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हिंदू माने मूर्ख अपने बच्चों को लाला जोकर सेंटा के कपड़े पहनाकर बचपन से ही सेक्युलर नाम की बीमारी के कीड़े से कटवाता है, फिर ये बच्चे ना देश के ना धर्म के, बनेंगे केवल मानसिक गुलाम
ओर तुम्हारी ये सेक्युलर वाली बीमारी जो खानग्रेस ने तुम्हे दी है धीमे विष की तरह भारत के मूल को खा रही है
हर साल बहुत प्रयास होते हैं तुम्हे समझाने के किंतु तुम शपथ लिए बैठे हो की अपने पैरों तले कुआं खोदोगे
⚔️🚩✍️ आर्य पुत्र⚔️🚩
ओर तुम्हारी ये सेक्युलर वाली बीमारी जो खानग्रेस ने तुम्हे दी है धीमे विष की तरह भारत के मूल को खा रही है
हर साल बहुत प्रयास होते हैं तुम्हे समझाने के किंतु तुम शपथ लिए बैठे हो की अपने पैरों तले कुआं खोदोगे
⚔️🚩✍️ आर्य पुत्र⚔️🚩
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80 वर्ष की आयु में भी माँ भारती का यह सिंहपुत्र आज राष्ट्र के लिए तन–मन–प्राण से युद्धरत है। कई बार कदम लड़खड़ाते हैं किंतु हौसला आज भी युवा की भांति है।
जिस आयु में शरीर शिथिल हो जाता है, इंद्रियाँ शिथिल पड़ जाती हैं—उसी आयु में यह वीर भारत माता की सेवा में अडिग खड़ा है।
भारत की धरती सदा से वीरों की जननी रही है। इतिहास गवाह है—जब इस्लामिक आक्रांताओं ने भारत माता की पावन भूमि को रौंदने का प्रयास किया, तब 90 वर्ष के वयोवृद्ध पहलवान भी रणभूमि में गर्जना करते हुए उतरे और शत्रुओं के छक्के छुड़ा दिए।
यह रक्त हमारी नसों में बहता है।
मित्रों! अब जागने का समय है। 100 करोड़ भारतवासी यदि ब्रह्मचर्य को जीवन का मूलमंत्र बनाएं, प्रतिदिन व्यायाम और योग को अपना शस्त्र बनाएं—तो हम 100 वर्ष की आयु में भी ऐसे प्रचंड रहेंगे कि आवश्यकता पड़ने पर शत्रुओं का शीश धड़ से अलग करने में एक क्षण भी न लगे।
✍️आर्य पुत्र
जिस आयु में शरीर शिथिल हो जाता है, इंद्रियाँ शिथिल पड़ जाती हैं—उसी आयु में यह वीर भारत माता की सेवा में अडिग खड़ा है।
भारत की धरती सदा से वीरों की जननी रही है। इतिहास गवाह है—जब इस्लामिक आक्रांताओं ने भारत माता की पावन भूमि को रौंदने का प्रयास किया, तब 90 वर्ष के वयोवृद्ध पहलवान भी रणभूमि में गर्जना करते हुए उतरे और शत्रुओं के छक्के छुड़ा दिए।
यह रक्त हमारी नसों में बहता है।
मित्रों! अब जागने का समय है। 100 करोड़ भारतवासी यदि ब्रह्मचर्य को जीवन का मूलमंत्र बनाएं, प्रतिदिन व्यायाम और योग को अपना शस्त्र बनाएं—तो हम 100 वर्ष की आयु में भी ऐसे प्रचंड रहेंगे कि आवश्यकता पड़ने पर शत्रुओं का शीश धड़ से अलग करने में एक क्षण भी न लगे।
✍️आर्य पुत्र
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लिवर ट्रांसप्लांट के पेशेंट का लिवर ठीक हुआ एक्यूप्रेशर से ये है मर्म दाब चिकित्सा, आज बहुत ही ज्यादा उन्नति हो चुकी है इस मार्ग की
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मैं अपनी जान-पहचान के जितने भी लोगों को जानता हूँ, उनमें आर्यसमाजियों को छोड़कर शायद ही किसी के पास हमारा सच्चा इतिहास—महाभारत—हो।
रोज़ हम कई-कई घंटे मोबाइल फोन में व्यर्थ बिता देते हैं। क्या अपने गौरवशाली इतिहास को पढ़ने के लिए दिन का सिर्फ़ एक घंटा भी नहीं निकाल सकते?
महाभारत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि असीम ज्ञान का महासागर है। जैसे ही आप महाभारत पढ़ना शुरू करते हैं, आपकी रुचि स्वयं बढ़ती जाती है—यह जानने की उत्कंठा रहती है कि आगे क्या होगा। और फिर पता ही नहीं चलता कि कब पूरी महाभारत पढ़ ली।
टीवी पर जो महाभारत दिखाई जाती है, उसमें बहुत सी बाते मनगढ़ंत होती है। उसे असली महाभारत मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। टीवी वालों ने अपनी कल्पना से बहुत कुछ जोड़ दिया है।
इस बार मैं गीता प्रेस, गोरखपुर वाली महाभारत मंगवाने की सोच रहा हूँ। शायद उसके 6 भाग हैं और कीमत लगभग 4000 रुपये के आसपास है।
अब तक मैंने जो महाभारत पढ़ी है, वह आर्यसमाज से प्राप्त थी, जिसमें बाद के मिलावटी अंशों को हटा दिया गया था। वह अध्ययन के लिए उत्तम थी।
लेकिन अब मन है कि पूरा ग्रंथ, बिना कुछ छोड़े, जैसा उपलब्ध है, वैसा ही पढ़ा जाए—और इसके लिए गीता प्रेस की महाभारत उपयुक्त प्रतीत होती है।
✍️ आर्य पुत्र
रोज़ हम कई-कई घंटे मोबाइल फोन में व्यर्थ बिता देते हैं। क्या अपने गौरवशाली इतिहास को पढ़ने के लिए दिन का सिर्फ़ एक घंटा भी नहीं निकाल सकते?
महाभारत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि असीम ज्ञान का महासागर है। जैसे ही आप महाभारत पढ़ना शुरू करते हैं, आपकी रुचि स्वयं बढ़ती जाती है—यह जानने की उत्कंठा रहती है कि आगे क्या होगा। और फिर पता ही नहीं चलता कि कब पूरी महाभारत पढ़ ली।
टीवी पर जो महाभारत दिखाई जाती है, उसमें बहुत सी बाते मनगढ़ंत होती है। उसे असली महाभारत मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। टीवी वालों ने अपनी कल्पना से बहुत कुछ जोड़ दिया है।
इस बार मैं गीता प्रेस, गोरखपुर वाली महाभारत मंगवाने की सोच रहा हूँ। शायद उसके 6 भाग हैं और कीमत लगभग 4000 रुपये के आसपास है।
अब तक मैंने जो महाभारत पढ़ी है, वह आर्यसमाज से प्राप्त थी, जिसमें बाद के मिलावटी अंशों को हटा दिया गया था। वह अध्ययन के लिए उत्तम थी।
लेकिन अब मन है कि पूरा ग्रंथ, बिना कुछ छोड़े, जैसा उपलब्ध है, वैसा ही पढ़ा जाए—और इसके लिए गीता प्रेस की महाभारत उपयुक्त प्रतीत होती है।
✍️ आर्य पुत्र
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इन्होंने कितने सुंदर तरीके से चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य जी की विजय यात्रा को बताया है 🚩🙏 सच में धन्य हैं वे लोग जो सम्राट विक्रम के समय जन्मे
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ये वीडियो देखिए देश के सबस बडे डॉक्टर ने सर्जरी में एक्यूप्रेशर से बचाई जान https://youtu.be/4fqN3CHfi4w?si=-fDOSv-2zQToJ91l
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एलोपैथी चिकित्सा पद्धति विदेशी है, इसी कारण इसे सीखने वाले ज़्यादातर लोग प्राकृतिक चिकित्साओं के विरोधी होते हैं और नास्तिक भी, तथा ब्रह्मचर्य के महत्व को नहीं समझते और उसकी निंदा करते हैं।
किंतु योग, आयुर्वेद, एक्यूप्रेशर, प्राकृतिक चिकित्सा, हवन चिकित्सा आदि को सीखने वाले ज़्यादातर लोग आस्तिक होते हैं और अपनी संस्कृति का अधिक सम्मान करते हैं।
मूल बात यह है कि शिक्षा से ही तय होता है कि समाज कैसा बनेगा, और मुख्य प्रश्न यह है कि शिक्षा का मूल क्या है।
क्योंकि भारत और विश्व में फैली प्राचीन, प्रकृति अनुकूल सभी शिक्षाओं का मूल वेद है, इसी कारण यहाँ ब्रह्मचर्य, ईश्वर-भक्ति, परोपकार, करुणा, यम नियम, पर अधिक ज़ोर दिया जाता है।
एक सच यह भी है कि वर्तमान समय में एलोपैथी जैसा फैलाव किसी अन्य चिकित्सा पद्धति का नहीं है। इसलिए आपातकाल में यह आज जीवन-रक्षक का कार्य करती है और आवश्यकता अनुसार इसका प्रयोग करना चाहिए, किंतु इसके साथ थोड़ी सावधानी भी रखनी चाहिए।
एक्यूट रोग में एलोपैथी और क्रोनिक रोगों में एक्यूप्रेशर चिकित्सा।
और यदि कोई जानकार मिल जाए, तो एक्यूट में भी एक्यूप्रेशर बहुत बढ़िया और तेज़ी से काम करता है।
इसी प्रकार आयुर्वेदिक औषधियां भी बहुत बहुत बढ़िया कार्य करती हैं, मेरी जानकारी में किसी को गले में कोई गांठ हुई अंदर की तरफ दर्द होता खाना भी ठीक से ना खाया जाता , कही दिखवाया तो कैंसर बताया किंतु उसने उसमें कोई चीरा फाड़ नहीं करवाई, उसने अपनी चिकित्सा एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से करवाई और वो आज ठीक है , ओर बहुत सस्ते में चिकित्सा हो गई, ना उसका घर बिका ना कर्जा हुआ
✍️ आर्यपुत्र
किंतु योग, आयुर्वेद, एक्यूप्रेशर, प्राकृतिक चिकित्सा, हवन चिकित्सा आदि को सीखने वाले ज़्यादातर लोग आस्तिक होते हैं और अपनी संस्कृति का अधिक सम्मान करते हैं।
मूल बात यह है कि शिक्षा से ही तय होता है कि समाज कैसा बनेगा, और मुख्य प्रश्न यह है कि शिक्षा का मूल क्या है।
क्योंकि भारत और विश्व में फैली प्राचीन, प्रकृति अनुकूल सभी शिक्षाओं का मूल वेद है, इसी कारण यहाँ ब्रह्मचर्य, ईश्वर-भक्ति, परोपकार, करुणा, यम नियम, पर अधिक ज़ोर दिया जाता है।
एक सच यह भी है कि वर्तमान समय में एलोपैथी जैसा फैलाव किसी अन्य चिकित्सा पद्धति का नहीं है। इसलिए आपातकाल में यह आज जीवन-रक्षक का कार्य करती है और आवश्यकता अनुसार इसका प्रयोग करना चाहिए, किंतु इसके साथ थोड़ी सावधानी भी रखनी चाहिए।
एक्यूट रोग में एलोपैथी और क्रोनिक रोगों में एक्यूप्रेशर चिकित्सा।
और यदि कोई जानकार मिल जाए, तो एक्यूट में भी एक्यूप्रेशर बहुत बढ़िया और तेज़ी से काम करता है।
इसी प्रकार आयुर्वेदिक औषधियां भी बहुत बहुत बढ़िया कार्य करती हैं, मेरी जानकारी में किसी को गले में कोई गांठ हुई अंदर की तरफ दर्द होता खाना भी ठीक से ना खाया जाता , कही दिखवाया तो कैंसर बताया किंतु उसने उसमें कोई चीरा फाड़ नहीं करवाई, उसने अपनी चिकित्सा एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से करवाई और वो आज ठीक है , ओर बहुत सस्ते में चिकित्सा हो गई, ना उसका घर बिका ना कर्जा हुआ
✍️ आर्यपुत्र
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शक्कातिशाली काले तिल के लड्डू , हड्डियाँ मज़बूत , पाचन मज़बूत , आँतों को चिकनाई देते हैं, https://youtu.be/UOBIyhAiFcQ?si=CJgjjiUaRUZnESaO
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शक्कातिशाली काले तिल के लड्डू , हड्डियाँ मज़बूत , पाचन मज़बूत , आँतों को चिकनाई देते हैं,
🌿 काले तिल के फायदे
हड्डियाँ मज़बूत करते हैं – कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस भरपूर
जोड़ों के दर्द में सहायक – वात दोष को शांत करते हैं
कमज़ोरी दूर करते हैं – ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाते हैं
पाचन सुधारते हैं – कब्ज में लाभकारी
आँतों को चिकनाई देते हैं…
हड्डियाँ मज़बूत करते हैं – कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस भरपूर
जोड़ों के दर्द में सहायक – वात दोष को शांत करते हैं
कमज़ोरी दूर करते हैं – ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाते हैं
पाचन सुधारते हैं – कब्ज में लाभकारी
आँतों को चिकनाई देते हैं…
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“आप सभी कृपया यह वीडियो देखिए और समझिए। इससे आपको स्पष्ट हो जाएगा कि आने वाले समय में, और अभी भी, हमें भयंकर रोगों से कैसे लड़ना है। आयुर्वेद का ही भाग यह विद्या आपके जीवन को हर प्रकार से सुरक्षित रखने में सक्षम है और इसका कोई दुष्परिणाम नहीं है। अब तो देश के बड़े-बड़े डॉक्टर, विशेष रूप से वे जो सच्चे भारतीय हैं, स्वयं इसका प्रयोग करके मरीजों को ठीक कर रहे हैं।”
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दमा 7 प्रकार का होता है ओर ये एक्यूप्रेशर से ठीक हो सकता है देखिए नीचे ओर पहचानिए आपको किस प्रकार का दमा है
1, उग्र श्वांस नली का दमा दौरा दमे का एकाएक, जब पड़ जाये ऐसे में रोगी जब, लेट न पाये बैठे बैठे झुककर, वो रात बिताये
(इसमें एकाएक सांस छोड़ने में तकलीफ होती है तथा खांसी आती है तथा बलगम निकलता है।)
2, पुराना श्वांस नली का दमा फेफेड़े जनित अस्थमा, जब पुराना हो जाता बैठे में भी सांस फूलना, प्रातः ही प्रारम्भ हो जाता Chronic Bronchial अस्थमा, ये कहलाता (इसमें पुरानी सांस छोड़ने की परेशानी होती तथा खांसी आती है तथा बलगम निकलता है।)
3, Cardiac Asthama हृदय जनित दमा हृदयजनित अस्थमा, जब हो जाता चलने चढ़ने में सांस फूलने, तब लग जाता डाक्टरी भाषा में, Cardiac Asthama ये कहलाता (Cardiac Asthama में exertion से सांस फूलती है)
4, Renal Asthama
किडनी जनित अस्थमा, किडनी जनित अस्थमा, जब हो जाता लेने में सांस, कष्ट तब होने लग जाता डाक्टरी भाषा में Renal Asthama, ये कहलाता (Renal Asthama में सांस लेने में तकलीफ होती है)
5, Asthama caused by Liver लीवर जनित दमा लीवर जनित अस्थमा, व्यक्ति को जब हो जाता ओंठ नाखुन काले, Cyanosis तब हो जाता डाक्टरी भाषा में, Cyanotic Asthma ये कहलाता
6, Allergic Asthama
एलर्जी जनित दमा एलर्जी जनित अस्थमा, व्यक्ति जब हो जाता छींके आती, सांस फूलता, esinophillia भी हो जाता डाक्टरी भाषा में allergic asthama, ये कहलाता
7, . Asthama caused by Spleen प्लीहा जनित दमा प्लीहा जनित अस्थमा, व्यक्ति को जब हो जाता अग्नि मद्य से छाती में गैस, बलगम अवरूद्ध हो जाता डाक्टरी भाषा में Dyspeptic Asthama ये कहलाता
(इसमें बलगम बहुत ज्यादा मात्रा में निकलता है तथा सांस फूलती है। सारा खाया पिया बलगम बन जाता है)
विशेष – , एक्यूप्रेशर से तो ये सब ठीक होगा ही, किंतु यदि आप अनुलोम विलोम शुरू करें शुरुआत अपने अनुसार 5 मिनट से बढ़कर धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे समय बढ़ाते हुए कुछ महीने में 40 मिनट लेकर जाइए इससे बहुत लाभ होता है, किंतु बिना हिले डुले करें एक दम स्थिर
ओर साथ में सांसो पर ध्यान लगाना सीखिये ओर अंत में ब्रह्मास्त्र साँस के साथ ओ३म् को जोड़ लीजिए ओ३म् की जो ऊर्जा है वो ओर किसी में नहीं है इसे जोड़िए ओर देखिये फिर इन सबका जादू
🚩आर्यपुत्र मनुवादी 🚩
1, उग्र श्वांस नली का दमा दौरा दमे का एकाएक, जब पड़ जाये ऐसे में रोगी जब, लेट न पाये बैठे बैठे झुककर, वो रात बिताये
(इसमें एकाएक सांस छोड़ने में तकलीफ होती है तथा खांसी आती है तथा बलगम निकलता है।)
2, पुराना श्वांस नली का दमा फेफेड़े जनित अस्थमा, जब पुराना हो जाता बैठे में भी सांस फूलना, प्रातः ही प्रारम्भ हो जाता Chronic Bronchial अस्थमा, ये कहलाता (इसमें पुरानी सांस छोड़ने की परेशानी होती तथा खांसी आती है तथा बलगम निकलता है।)
3, Cardiac Asthama हृदय जनित दमा हृदयजनित अस्थमा, जब हो जाता चलने चढ़ने में सांस फूलने, तब लग जाता डाक्टरी भाषा में, Cardiac Asthama ये कहलाता (Cardiac Asthama में exertion से सांस फूलती है)
4, Renal Asthama
किडनी जनित अस्थमा, किडनी जनित अस्थमा, जब हो जाता लेने में सांस, कष्ट तब होने लग जाता डाक्टरी भाषा में Renal Asthama, ये कहलाता (Renal Asthama में सांस लेने में तकलीफ होती है)
5, Asthama caused by Liver लीवर जनित दमा लीवर जनित अस्थमा, व्यक्ति को जब हो जाता ओंठ नाखुन काले, Cyanosis तब हो जाता डाक्टरी भाषा में, Cyanotic Asthma ये कहलाता
6, Allergic Asthama
एलर्जी जनित दमा एलर्जी जनित अस्थमा, व्यक्ति जब हो जाता छींके आती, सांस फूलता, esinophillia भी हो जाता डाक्टरी भाषा में allergic asthama, ये कहलाता
7, . Asthama caused by Spleen प्लीहा जनित दमा प्लीहा जनित अस्थमा, व्यक्ति को जब हो जाता अग्नि मद्य से छाती में गैस, बलगम अवरूद्ध हो जाता डाक्टरी भाषा में Dyspeptic Asthama ये कहलाता
(इसमें बलगम बहुत ज्यादा मात्रा में निकलता है तथा सांस फूलती है। सारा खाया पिया बलगम बन जाता है)
विशेष – , एक्यूप्रेशर से तो ये सब ठीक होगा ही, किंतु यदि आप अनुलोम विलोम शुरू करें शुरुआत अपने अनुसार 5 मिनट से बढ़कर धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे समय बढ़ाते हुए कुछ महीने में 40 मिनट लेकर जाइए इससे बहुत लाभ होता है, किंतु बिना हिले डुले करें एक दम स्थिर
ओर साथ में सांसो पर ध्यान लगाना सीखिये ओर अंत में ब्रह्मास्त्र साँस के साथ ओ३म् को जोड़ लीजिए ओ३म् की जो ऊर्जा है वो ओर किसी में नहीं है इसे जोड़िए ओर देखिये फिर इन सबका जादू
🚩आर्यपुत्र मनुवादी 🚩
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मैं तो ऐसे हिंदुओं से कहता हूँ कि भाई, ये फेरों का ढोंग भी क्यों कर रहे हो? मुसलमानों की तरह तीन बार “कबूल” बोल लो, और भी जल्दी विवाह हो जाएगा तुम्हारा।
बात ये है कि हिंदुओं की शादी में एक बड़ा ही गलत काम चल रहा है। हिंदू गंदे-भद्दे गानों पर नाचने में कई घंटे बर्बाद कर देता है। दारू पीने में और दुनिया भर की बकवास नौटंकी में बहुत ज्यादा समय खराब कर देता है।
किंतु जब बात फेरों की आती है तो कहता है — “पंडित जी, जल्दी करवा दो फेरे।”
अरे, ज़रूरत क्या है? फेरों की जगह “कबूल” बोलकर काम चला लो! वैसे भी तुम रात को विवाह करके पिशाच कर्म कर रहे हो, ये कोई विवाह थोड़े ही रह गया है।
विवाह तो बहुत ही पवित्र होता है। तुम तो विवाह के नाम पर न जाने क्या गंद मचा रहे हो।
खैर, मचाते रहो… क्योंकि अब गिनती के ही सनातनी बचे हैं। जो श्रद्धा से अपनी परम्पराओं का पालन करते होंगे
🚩आर्यपुत्र मनुवादी🚩
बात ये है कि हिंदुओं की शादी में एक बड़ा ही गलत काम चल रहा है। हिंदू गंदे-भद्दे गानों पर नाचने में कई घंटे बर्बाद कर देता है। दारू पीने में और दुनिया भर की बकवास नौटंकी में बहुत ज्यादा समय खराब कर देता है।
किंतु जब बात फेरों की आती है तो कहता है — “पंडित जी, जल्दी करवा दो फेरे।”
अरे, ज़रूरत क्या है? फेरों की जगह “कबूल” बोलकर काम चला लो! वैसे भी तुम रात को विवाह करके पिशाच कर्म कर रहे हो, ये कोई विवाह थोड़े ही रह गया है।
विवाह तो बहुत ही पवित्र होता है। तुम तो विवाह के नाम पर न जाने क्या गंद मचा रहे हो।
खैर, मचाते रहो… क्योंकि अब गिनती के ही सनातनी बचे हैं। जो श्रद्धा से अपनी परम्पराओं का पालन करते होंगे
🚩आर्यपुत्र मनुवादी🚩
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🙏🚩सादर नमस्ते जी🙏🚩
आपको एवं आपके समस्त परिजनों व प्रियजनों को वासन्तीय नवशस्येष्टि (होलिकोत्सव) पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ
परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि यह पर्व आपके जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव और नव उमंग भर दे एवं आप अपने जीवन में निरंतर उत्तरोत्तर उन्नति को प्राप्त हों
आपको एवं आपके समस्त परिजनों व प्रियजनों को वासन्तीय नवशस्येष्टि (होलिकोत्सव) पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ
परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि यह पर्व आपके जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव और नव उमंग भर दे एवं आप अपने जीवन में निरंतर उत्तरोत्तर उन्नति को प्राप्त हों
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सर्वाइकल वेक्सीन से हुई थी लड़कियों की मौत?
चेतावनी :– बिल्गेट ने एक पॉडकास्ट में बोला था कि भारत उसके लिए एक प्रयोगशाला है, सफल हुए तो दुनिया में चला देते हैं , यानी उसकी नजर में हम कीड़े मकोड़े से ज्यादा कुछ नहीं हैं
वर्ष 2009 में भारत के आंध्र प्रदेश (खम्मम जिला) और गुजरात (वडोदरा) में लड़कियों पर HPV वैक्सीन प्रोजेक्ट चलाया गया।
इसमें लगभग 10–14 साल की आदिवासी व गरीब परिवारों की लड़कियाँ शामिल थीं।
यह प्रोजेक्ट PATH (Program for Appropriate Technology in Health) नाम की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था चला रही थी।
इस प्रोजेक्ट को Bill & Melinda Gates Foundation से फंडिंग (अनुदान) मिला था।
ट्रायल के दौरान 14लड़कियों की मौत की खबर आई:
नोट:– ध्यान रहे आपका शरीर आपका है किसी की प्रयोगशाला नहीं है, पता नहीं कितने अनगिनत मनुष्यों की हत्या की गई है अब तक
ये सब जानकारी सार्वजनिक है खुद खोज लीजिए विश्वास ना हो तो ओर हां कुछ अपना दिमाग भी लगा लेना क्योंकि बहुत सी बाते दबा ली जाती हैं
🚩आर्यपुत्र मनुवादी🚩
चेतावनी :– बिल्गेट ने एक पॉडकास्ट में बोला था कि भारत उसके लिए एक प्रयोगशाला है, सफल हुए तो दुनिया में चला देते हैं , यानी उसकी नजर में हम कीड़े मकोड़े से ज्यादा कुछ नहीं हैं
वर्ष 2009 में भारत के आंध्र प्रदेश (खम्मम जिला) और गुजरात (वडोदरा) में लड़कियों पर HPV वैक्सीन प्रोजेक्ट चलाया गया।
इसमें लगभग 10–14 साल की आदिवासी व गरीब परिवारों की लड़कियाँ शामिल थीं।
यह प्रोजेक्ट PATH (Program for Appropriate Technology in Health) नाम की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था चला रही थी।
इस प्रोजेक्ट को Bill & Melinda Gates Foundation से फंडिंग (अनुदान) मिला था।
ट्रायल के दौरान 14लड़कियों की मौत की खबर आई:
नोट:– ध्यान रहे आपका शरीर आपका है किसी की प्रयोगशाला नहीं है, पता नहीं कितने अनगिनत मनुष्यों की हत्या की गई है अब तक
ये सब जानकारी सार्वजनिक है खुद खोज लीजिए विश्वास ना हो तो ओर हां कुछ अपना दिमाग भी लगा लेना क्योंकि बहुत सी बाते दबा ली जाती हैं
🚩आर्यपुत्र मनुवादी🚩
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जब कोई पुरुष चरित्रहीन हो जाता है तो वह कितना गिर जाता है। मेरी जानकारी में एक व्यक्ति जो चरित्रहीन हो गया, उसने अपनी पत्नी, अपनी बेटी और अपने बेटे को छोड़ दिया, और फिर अपना धर्म भी छोड़ दिया केवल अपने जैसी चरित्रहीन महिला के लिए।
मतलब यह क्या है? केवल सेक्स के लिए, ताकि वह अब दूसरी महिला से सम्भोग कर सके। उसे वह अपनी पत्नी से ज्यादा जवान लगी।
आखिर है तो वही मांस का लोथड़ा। मृत्यु के बाद तुम उस प्यारे समझने वाले शरीर को 2 दिन भी अपने साथ नहीं रख पाओगे, तो यह कैसी वासना?
यदि यह गंदा काम प्राचीन काल के भारत में किसी नीच ने किया होता, तो उस पुरुष को जलते हुए लोहे के पलंग पर लिटाकर भस्म कर देते और उस स्त्री को कुत्तों से नुचवा कर मारते। क्योंकि चरित्रहीन मनुष्य उस सड़े हुए फल की तरह है, जिसके कारण सही फल भी खराब होने लगते हैं। देखलो परिणाम आज समाज में ऐसे स्त्री पुरुषों की भरमार हो चुकी है।
आज हमारे भारत का संविधान भारत के लोगों के घरों को नहीं बचा पा रहा है, और सबसे बड़ी बात यह है कि भारत के लोगों को कोई अंतर नहीं पड़ता। इस विषय पर कभी भी कोई ट्रेंड नहीं चलता या चर्चा नहीं होती।
मुझे हमेशा से ही लगता है कि हमें अपना जीवन भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि धर्म के आधार पर जीना चाहिए। केवल धर्म ही है जो हमें बचाकर रखता है और आसानी से यह जीवन यात्रा पूरी करवा देता है।
तुम अपने माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी और बच्चों की सेवा इसलिए मत करो कि वे तुम्हारे अपने हैं और तुम्हारी भावना उनसे जुड़ी है, बल्कि उनकी सेवा इसलिए करो क्योंकि यह तुम्हारा धर्म है। भावनाओं का क्या है, वे तो बदल सकती हैं; किन्तु यदि कुछ नहीं बदलता, तो वह है धर्म।
🚩आर्य पुत्र मनुवादी🚩
मतलब यह क्या है? केवल सेक्स के लिए, ताकि वह अब दूसरी महिला से सम्भोग कर सके। उसे वह अपनी पत्नी से ज्यादा जवान लगी।
आखिर है तो वही मांस का लोथड़ा। मृत्यु के बाद तुम उस प्यारे समझने वाले शरीर को 2 दिन भी अपने साथ नहीं रख पाओगे, तो यह कैसी वासना?
यदि यह गंदा काम प्राचीन काल के भारत में किसी नीच ने किया होता, तो उस पुरुष को जलते हुए लोहे के पलंग पर लिटाकर भस्म कर देते और उस स्त्री को कुत्तों से नुचवा कर मारते। क्योंकि चरित्रहीन मनुष्य उस सड़े हुए फल की तरह है, जिसके कारण सही फल भी खराब होने लगते हैं। देखलो परिणाम आज समाज में ऐसे स्त्री पुरुषों की भरमार हो चुकी है।
आज हमारे भारत का संविधान भारत के लोगों के घरों को नहीं बचा पा रहा है, और सबसे बड़ी बात यह है कि भारत के लोगों को कोई अंतर नहीं पड़ता। इस विषय पर कभी भी कोई ट्रेंड नहीं चलता या चर्चा नहीं होती।
मुझे हमेशा से ही लगता है कि हमें अपना जीवन भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि धर्म के आधार पर जीना चाहिए। केवल धर्म ही है जो हमें बचाकर रखता है और आसानी से यह जीवन यात्रा पूरी करवा देता है।
तुम अपने माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी और बच्चों की सेवा इसलिए मत करो कि वे तुम्हारे अपने हैं और तुम्हारी भावना उनसे जुड़ी है, बल्कि उनकी सेवा इसलिए करो क्योंकि यह तुम्हारा धर्म है। भावनाओं का क्या है, वे तो बदल सकती हैं; किन्तु यदि कुछ नहीं बदलता, तो वह है धर्म।
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