अमित आर्यावर्त (भारत योगी)
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वैदिक धर्म का प्रचार ही हमारा मकसद होना चाहिए वैदिक धर्म बचेगा तभी देश बचेगा

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🌏 क्या दीपावली के पटाखे ही प्रदूषण का कारण हैं? — एक तथ्यपूर्ण तुलना

हर साल दीपावली आते ही “पटाखे मत फोड़ो, हवा ज़हरीली हो जाएगी” जैसी बातें चलने लगती हैं।
लेकिन क्या सच में केवल एक दिन के पटाखे हमारी हवा को बिगाड़ देते हैं?
या फिर हमारे दैनिक कर्म ही सालभर धरती को दूषित करते हैं?
आइए, साक्ष्यों के साथ जानते हैं।




🚗 1. वाहन प्रदूषण (सबसे बड़ा कारण)

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार,
दिल्ली जैसे शहरों में हवा के कुल प्रदूषण का लगभग 40% हिस्सा वाहनों से आता है।
(स्रोत: CPCB – Central Pollution Control Board Report, 2023)


एक पेट्रोल कार सालभर में औसतन 4,000 किलोग्राम CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) छोड़ती है।
(स्रोत: U.S. Environmental Protection Agency)



केवल दिल्ली में रोज़ 1 करोड़ से ज़्यादा वाहन चलते हैं।
इससे निकलने वाला धुआँ पूरे वर्ष वातावरण में घुला रहता है।




👉 तुलना करें — एक व्यक्ति अगर दीपावली पर 1 घंटे पटाखे जलाता है,
तो वह कार्बन उत्सर्जन एक कार के 15 मिनट के चलने जितना होता है।
यानी वाहन प्रदूषण सालभर पटाखों से हजारों गुना अधिक है।




🏠 2. घरों का कचरा और प्लास्टिक प्रदूषण

भारत में रोज़ लगभग 1.6 लाख टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है।
(स्रोत: NITI Aayog, Swachh Bharat Mission Data 2023)

इनमें से करीब 60% जैव-अविघटनीय (non-biodegradable) होता है —
यानी प्लास्टिक, पॉलीथीन, थर्मोकोल, डिस्पोज़ेबल कप, बोतलें आदि।

यही प्लास्टिक जलाने या फेंकने से डायऑक्सिन और फ्यूरान जैसी विषैली गैसें निकलती हैं
जो मानव स्वास्थ्य और ओज़ोन परत दोनों के लिए खतरनाक हैं।
(स्रोत: WHO Report on Open Burning, 2022)




👉 पटाखे एक बार फूटकर खत्म हो जाते हैं,
पर प्लास्टिक सालों तक धरती और नदियों में ज़हर घोलता रहता है।



⚡️ 3. बिजली उत्पादन और ऊर्जा का दुरुपयोग

भारत में बिजली उत्पादन का लगभग 70% हिस्सा कोयले से होता है।
(स्रोत: Ministry of Power, 2024)



1 यूनिट (kWh) बिजली बनाने से लगभग 0.8 किलोग्राम CO₂ वायुमंडल में जाती है।

एक औसत भारतीय परिवार महीने में 200 यूनिट बिजली खर्च करता है,
यानी सालभर में लगभग 1.9 टन CO₂ उत्सर्जन।




👉 यह उत्सर्जन 100 पटाखों से निकलने वाले धुएँ के बराबर हर महीने होता है।







🏭 4. औद्योगिक प्रदूषण



CPCB की रिपोर्ट (2023) के अनुसार भारत के कुल वायु प्रदूषण का
लगभग 30% हिस्सा उद्योगों से आता है।



स्टील, सीमेंट, और टेक्सटाइल उद्योगों से निकलने वाली गैसों में
सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, और पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) शामिल हैं,
जो मानव फेफड़ों और पर्यावरण दोनों के लिए सबसे खतरनाक हैं।



👉 दीपावली पर कुछ घंटे में जितना PM2.5 बढ़ता है,
उससे कहीं अधिक मात्रा रोज़ाना फैक्ट्रियों से निकलती रहती है।





🚬 5. तंबाकू और धूम्रपान से प्रदूषण

भारत में हर साल करीब 26 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं।
(स्रोत: Global Adult Tobacco Survey, 2022)



एक सिगरेट से निकलने वाला धुआँ PM2.5 स्तर को 200 µg/m³ तक बढ़ा देता है —
जो WHO मानक (25 µg/m³) से 8 गुना अधिक है।




👉 यानी अगर एक व्यक्ति दिनभर धूम्रपान करता है,
तो वह अकेले में 10 से अधिक पटाखों जितना धुआँ रोज़ हवा में छोड़ता है।




🎇 तो पटाखों का वास्तविक योगदान कितना है?

CPCB और IIT Kanpur की संयुक्त रिपोर्ट (2022) के अनुसार,
दीपावली के बाद हवा की गुणवत्ता 1-2 दिन के लिए खराब होती है,
पर 72 घंटे के अंदर स्तर सामान्य हो जाता है।

प्रदूषण का 90% हिस्सा पूरे वर्ष के स्रोतों से आता है,
और दीपावली का योगदान केवल 5-7% तक ही होता है,
वह भी अस्थायी रूप से।




👉 यानी वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो
एक दिन के पटाखे पूरे साल के प्रदूषण की तुलना में नगण्य हैं।








📊 निष्कर्ष — तथ्य जो खुद बोलते हैं

स्रोत प्रदूषण योगदान अवधि

वाहन 40% 365 दिन
उद्योग 30% 365 दिन
घरेलू कचरा 15% 365 दिन
बिजली/ऊर्जा 10% 365 दिन
पटाखे (दीपावली) 5% से कम 1–2 दिन



🔅 संदेश

👉 प्रदूषण का असली कारण हमारे रोज़मर्रा के कर्म हैं,
ना कि एक दिन पटाखे ।

अगर हम पूरे साल जागरूक रहें —
साइकिल चलाएँ, पैदल चले , प्लास्टिक त्यागें, और बिजली की बचत करें —
तो हमारी जीवनशैली ही धरती को प्रदूषण मुक्त बना सकती है।



निचोड़ - बम फोड़ने की इच्छा हो तो फोड़ें किन्तु कम मात्रा में , पटाखे फोड़ने से ख़ुशी जरुर मिलती है किन्तु ये धर्म नहीं है और ना ही हमेशा हमारे त्योहारों का स्थाई हिस्सा रहा है , हवन ही हमारे त्योहारों का स्थाई हिस्सा है यदि आप और दुनियाभर के कर्म करेंगे किन्तु हवन नहीं करेंगे तो एसा करने से आपका पक्का नाश होगा इसमें कोई संदेह नहीं है

✍️ आर्यपुत्र
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🌼 शुभ दीपावली एवं ऋषि दयानंद बलिदान दिवस 🙏🚩🌼

दीपों का यह पावन पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की और अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने का संदेश देता है।

ये हमे संदेश देता है कि मौसम बदलने लगा है फसल पक चुकी है नई फसल बोने की तैयारी है , प्राचीन काल से ही हमारे त्यौहार खेती से जुड़े हैं दीपावली का संदेश है हवन करो नए अन की आहुति सर्वप्रथम अग्नि को दो , मौसम बदलने से होने वाले रोगों को अग्नि से मार भगाओ

आज ही के दिन हम महान ऋषि दयानंद सरस्वती जी के अद्वितीय बलिदान को भी स्मरण करते हैं — जिन्होंने अपने जीवन से सत्य, स्वाधीनता और वेदज्ञान की ज्योति पूरे भारत में प्रज्वलित की।

जिस प्रकार दीपक का प्रकाश अंधकार को मिटा देता है, उसी प्रकार आर्यसमाज के संस्थापक स्वामी दयानंद जी ने अंधविश्वास, मूर्खता और पराधीनता के अंधकार को मिटाकर समाज को जागरूक किया।

वो ऋषि दयानंद ही थे जिनकी सत्यार्थ प्रकाश पढ़ कर अनेकों युवा क्रांतिकारी बने ओर अनेकों धर्म रक्षक बने आर्यसमाज को ही ये गौरव प्राप्त है कि देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले अधिकतर क्रांतिकारी आर्यसमाजी थे और आर्यसमाज से संबंध रखते थे जेलो में बंद अधिकतर क्रांतिकारी आर्यसमाजी ही थे क्रांतिकारियों का संबंध आर्यसमाज से किसी ना किसी रूप में रहा ही है

उस काल के आर्यसमाज मंदिर ओर आर्यसमाजियों में ही वो साहस था जो क्रांतिकारियों को अपने घरों में छिपा लिया करते थे ये जानते हुए भी कि अंग्रेजो को पता चला तो उन्हें भी मार दिया जाएगा किंतु जिनके हृदय में वेद ज्योति जल रही हो उनका लहू पानी नहीं होता

इस दीपावली पर संकल्प लें —
कि हम कम से कम महीने में 1 बार हवन किया करेंगे , अपने भीतर ज्ञान का दीप जलाएँगे,
, ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे बल बढ़ाने वाले व्यायाम करेंगे और भारतभूमि को पुनः वैदिक तेज से आलोकित करेंगे।

🪔 "जय आर्यावर्त! जय वेदज्ञान!"
शुभ दीपावली एवं ऋषि दयानंद बलिदान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌺

✍️आर्यपुत्र
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“उद् उत्तमं ज्योतिर् आसादयेम नः पुनर् अस्तमितं न पार्थिवम्।”
(ऋग्वेद १.५०.१०)
— “हे प्रकाशस्वरूप ईश्वर! हमें ऐसे उत्तम प्रकाश की प्राप्ति हो जो कभी मिटे न — न अस्त हो।”

“आप सभी सनातनी आर्य वीरों और वीरांगनाओं को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏”
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राजीव भाई ने 18 साल पहले ही बता दिया था कि अर्जुन की छाल हाई बीपी ठीक करती है हृदय रोग ठीक करती है फिर भी ये भारतवासी जीवन भर दवाओं के भरोसे दूसरे रोगों को शरीर में बढ़ाते रहते हैं

एक सत्य घटना का जिक्र करता हूं ध्यान से पढ़ना

एक बार एक भाई मिला उसने बताया कि वो जिस हॉस्पिटल में काम करता है उसका मालिक मुख्य डाक्टर अपना हाई बीपी ठीक रखने के लिए अर्जुन की छाल का प्रयोग करता है

इसी प्रकार एक होमियोपैथी वाले डॉक्टर ने बताया था कि उसके पास एलोपैथी वाले डॉक्टर अपने बच्चों की खांसी जुखाम ठीक करवाने आते हैं (आज खांसी ने एक अलग ही रूप ले लिया है)

इसे पढ़ कर कुछ सोचेंगे कि मैं एलोपैथी का विरोधी हूं तो बता दूं ऐसा बिल्कुल नहीं है मैं हमेशा संतुलन बनाकर रखने में विश्वास करता हूं

जब अचानक से किसी के जीवन को बचाने की बात आएगी तो उस काल के लिए मैं एलोपैथी चुनूंगा ,

जब लम्बी चलने वाली बीमारी जैसे शुगर, बीपी, ह्रदय रोग, कैंसर, लकवा, मिर्गी के दौरे, पोलियो, कुबड़ा पन, सोराइसिस या कोई भी भयंकर चरम रोग, पागलपन, भूत प्रेत बाधा (वास्तविकता कारण ऊर्जा का असंतुलन) , पथरी, सर्वाइकल, स्लिपडिस्क, पैर छोटा बड़ा, मोतियाबिंद, जन्म से गूंगा बेहरा, पीलिया, बवासीर, कोमा , रेबीज के बाद उत्पन हुए लक्षण जिसमें मृत्यु निश्चित मानी जाती है

आदि आदि समस्याओं को जड़ से दूर करने के लिए मैं सबसे पहले एक्यूप्रेशर साथ में कुछ औषधियों का चुनाव करूंगा ओर सबसे मुख्य बात मैं किसी मूर्ख की नकारात्मक बात पर चिंतन नहीं करूंगा क्योंकि मेरा मानना है कुछ असंभव नहीं बस अपना प्राण बल बढ़ाओ

✍️आर्य पुत्र
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भारत में हिंदुओं के कई संगठन हैं जैसे मुख्य, सबसे बड़े संगठन आर्य समाज और संघ (RSS)।

ओर आज तो सत्ता में पार्टी भी हिंदू वादी है

किंतु फिर भी यदि कोई हिंदू किसी जिहादी आतंकी का वध कर दे या फिर आतंकियों के खेमे में खलबली मचा दे तो उसका केस लड़ने वाले नहीं मिलते; या कोई गौ रक्षक अपनी जान दे दे तो सोशल मीडिया से उसके परिवार के लिए चंदा इकट्ठा करना पड़ता है। प्रत्यक्ष छोड़िए कोई संगठन अप्रत्यक्ष रूप से मदद करता नहीं दिखता।

वही दूसरी तरफ सभी संगठन दिखावे के लिए बड़े-बड़े कार्यक्रम करते हैं, करोड़ों करोड़ों रूपये खर्च कर देते हैं—यानी धन का धर्म युद्ध के लिए प्रयोग नहीं हुआ, केवल दिखावे के लिए हुआ है।

पता नहीं इतना दोगलापन लेकर कैसे जीते हैं लोग? क्या उन्होंने अपनी आत्मा की हत्या कर दी है?
खुद को ऋषि दयानंद का शिष्य बोलने वाले भी नहीं बच सके इस बीमारी से।

बड़े-बड़े कार्यक्रम तब सही लगेंगे जब हिंदू योद्धाओं के लिए केस लड़ने वाले और आर्थिक सहयोग करने वाले संगठन होंगे, वरना सब कुछ केवल और केवल बकवास है।

वही दूसरी तरफ जिहादियों के लिए देश के बड़े से बड़े वकील किए जाते हैं; उन्हें मालूम है — तुम कांड करो, तुम्हारे पीछे तुम्हारे लोगों का धन संगठन मजबूती से खड़ा है।

वही दूसरी ओर धर्म के लिए बलिदान होने वालों के लिए या इच्छा रखने वालों के पीछे कोई नहीं। इतिहास में देखिए — अपना घर जला कर बलिदानियों ने क्रांति जलाए रखी थी; हालत बहुत बुरे हैं।
2050 तक सब बदल चूका होगा उस समय अपने इसी धन को छोड़ छोड़ कर भागोगे धन पद के लोभीयों

इस छोटे से लेख को केवल ऋषि के सच्चे शिष्य ही समझ पाएंगे

✍️आर्य पुत्र
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क्या आपने कभी सुना है — किसी एक बीमारी की चिकित्सा करो और दूसरी बीमारियाँ भी ठीक होने लगें?
एक्यूप्रेशर में ऐसा होता है।

मेरे पास एक माताजी कमर दर्द की चिकित्सा करवाने आईं थी। उन्हें भयंकर दर्द था — न बैठा जाए, न खड़ा रहा जाए; केवल लेटने पर ही थोड़ी राहत मिलती थी।

मैंने उनकी समस्या के अनुसार एक्यूप्रेशर पॉइंट लगाए। लगभग एक घंटे बाद उन्हें आराम मिला और रात को वे आराम से सोईं।

अगले दिन जब उन्हें फिर से पॉइंट लगाए, तो उन्होंने बताया कि उन्हें कई सालों से दमा है। सोते समय खांसी उठती है और सांस लेने में तकलीफ रहती है — हालांकि सांस छोड़ने में कोई दिक्कत नहीं होती।

उन्होंने बताया कि कल प्वाइंट लगाने के बाद रात को सांस लेने में बिल्कुल तकलीफ नहीं हुई और खांसी भी नहीं उठी। यानी मैंने जो कमर दर्द की चिकित्सा की थी, उससे उन्हें खांसी और सांस लेने में भी राहत मिली दमे में।

तब मैंने उन्हें बताया कि कमर दर्द के लिए मैंने किडनी के प्वाइंट भी लगाए थे — जो न केवल कमर दर्द को ठीक करते हैं, बल्कि सांस लेने की समस्या में भी आराम पहुंचाते हैं।

लगातार चार दिन तक उपचार के बाद वे पूरी तरह ठीक हो गईं। फिर मैंने उन्हें कुछ पॉइंट बताए कि अब इन्हें रोज़ लगाते रहना।

क्या यह अद्भुत नहीं है?
एक्यूप्रेशर — न कोई साइड इफेक्ट, न दवा, न चीरा — केवल लाभ ही लाभ!

सबसे मुख्य बात तो यही है कि इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता

✍️आर्यपुत्र
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🙏😔आजाद🙏😔 उनके सपनों का भारत हम कब बना पाएंगे
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अद्भुत अद्भुत जानकारी जीवन बचाने वाली

एक भाई मिला, उसने बताया कि लॉकडाउन के समय उसे भी सांस लेने में बहुत परेशानी हुई थी। अस्पतालों में जगह नहीं थी, ऑक्सीजन सिलेंडर भी कम थे, इसलिए वह अस्पताल के बाहर ही पड़ा था — बेहद तकलीफ में।

उसी समय वहां एक एक्यूप्रेशर चिकित्सक आए। उन्होंने उसकी दोनों बाहों पर पेपर टेप से सफेद मटर चिपका दीं और उसके साथ वालों से कहा —
“इन्हें लगातार दबाते रहो, यानी दबाना–छोड़ना, दबाना–छोड़ना... जैसे पंप करते हैं। या फिर हल्का दबाव बनाए रखो। हर दो से तीन घंटे बाद मटर बदल देना।”

वह भाई बोला — “इसके बाद धीरे-धीरे मेरी ऑक्सीजन बढ़ने लगी। जो स्तर बहुत नीचे चला गया था, उसमें सुधार आने लगा।”

मैंने उसे बताया —
“एक्यूप्रेशर में बाजू पर LU4 नाम का एक बिंदु होता है, जो शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।” वही आपको लगाया गया था

✍️ आर्यपुत्र
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29 वर्ष के ये युवा धीरेन्द्र शास्त्री जी आज हिंदुओं को एक करने के लिए बड़ा ही उत्तम कार्य कर रहे हैं, सभी आर्य भाइयों बहनों को इनका समर्थन करना चाहिए

ओर जो ये जादू चमत्कार दिखाते हैं वे उन लोगों को जोड़ने के लिए उत्म विधि है जिन्हें वही भाषा समझ आती है क्योंकि तुम नहीं दिखाओगे तो वे वीर्यहीन ईसाइयों के पाले में चले जाएंगे

आप केवल एक लकीर खींच कर उसी पर चल कर भारत को सनातनी राष्ट्र हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं कर पाएंगे

मुझे बाबा बागेश्वर जी की विधि आज के लोगो के मस्तिष्क की अवस्था को देख कर उत्तम लगी लक्ष्य अपने लोगों को जोड़ने का है

जो वीर हैं वे तो आखिरी सांस तक साथ नहीं छोड़ेंगे सनातन का ओर जो वीर्यहीन कायर है उन्हें चमत्कार जोड़ कर रखेगा , ओर विद्यावान तो कोई विरला ही बनना चाहता है

हम सभी को हर उस बाबा सन्यासी साधु या आम आमदी का समर्थन करना चाहिए जो हिंदुओ को एक करने के लिए कर्म कर रहे हैं , आने वाले 25 वर्ष में ये एकता बहुत काम आएगी

आखिरी बात अपनो की काट सार्वजनिक कभी मत करना ये ही नाश का मार्ग है

✍️आर्य पुत्र
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एक नंबर रागनी सुन कर देखो
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ये विधि हमारे आर्य पूर्वजों की प्राचीन काल से आज भी चली आती है, इस विधि से व्यायाम करने से हाथों में विशेष बल बढ़ता है, पहले के पहलवान तो इसका विशेष अभ्यास किया करते थे और योद्धा भी हाथों को ताकत देने के लिए विशेष अभ्यास किया करते थे इसका, व्यक्ति को अपना लक्ष्य देखते हुए विशेष बल के लिए अभ्यास भी अत्यधिक विशेष करना होता है

किंतु हमारे जैसे साधारण लोगों के लिए साधारण अभ्यास ही काफी है तो देखिए ये विधि ओर स्वस्थ मजबूत रहें और विधि भी जीवित रहे यही उद्वेश्य है

https://youtu.be/IoKBVRWHyRo?si=UVFpuYq2pYTDnlLD

✍️ आर्यपुत्र
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मैने चैनल पर वीडियो डाल दी है यदि आप इस पूरी वीडियो को ध्यानपूर्वक देखेंगे, तो पाएँगे कि इसमें कुछ अत्यंत गूढ़ रहस्य छिपे हुए हैं। ये बातें केवल उसी साधक को समझ में आएँगी जो गंभीरता, धैर्य और सूक्ष्म दृष्टि से इसे देखेगा। पहली नज़र में सब कुछ साधारण प्रतीत होगा, और साधारण ही ग्रहण होगा; परंतु वास्तविक ज्ञान तो वही पकड़ पाता है जिसकी अंतर-दृष्टि जागृत हो।

पिछली बार कुछ ही दिन पहले जब मैंने यह विषय साझा किया था, तब मेरी दौड़ केवल 3.5 किलोमीटर थी। किन्तु कुछ ही दिनों में यह बढ़कर 7–8 किलोमीटर हो चुकी है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि शीघ्र ही यह 10 और फिर 20 किलोमीटर तक पहुँच जाएगी।

विशेष बात यह है कि दौड़ के पश्चात न थकान होती है, न मांसपेशियों में किसी प्रकार का तनाव या खिंचाव। शरीर स्वाभाविक रूप से हल्का और संतुलित बना रहता है।

इसके बाद शक्ति-वृद्धि के लिए कुछ विशिष्ट व्यायाम करने चाहिए—
• 30 से 50 किलो की बोरी उठाकर स्थिर खड़े रहना
• लेटकर पैरों को मोड़कर हवा में वजन को देर तक स्थिर रखना
• हाथों से खाली बोरी को निचोड़ना
• दाँतों से 10, 20, 30 किलो तक वजन को कुछ समय तक थामे रखना
• एक-एक उँगली से मध्यम वजन रोककर अभ्यास करना
ताकत बढ़ाने वाले प्रत्येक व्यायाम में रुकने के समय को बढ़ाते जाना है

हर अभ्यास में सावधानी अत्यंत आवश्यक है। लंगोट का दृढ़ बंधन अनिवार्य है, अन्यथा हानि सम्भव है।

संपूर्ण विद्या का आधार उसी रहस्य को समझना है जिसे प्राचीन आर्यों ने ‘प्राण-वायु’ कहा है—
वही शक्ति, वही बल, वही जीवन की मूल धारा।

प्रत्येक व्यायाम उसी प्रकार करना है जो रहस्य वीडियो में समझाया है

https://youtu.be/o3kapdRIwAE

✍️ आर्यपुत्र
❤15
पिछले 16–17 वर्षों से मैं कभी भी किसी भी दाँत पर टूथपेस्ट नहीं लगाता और न ही ब्रश करता हूँ, फिर भी मेरे दाँत बहुत—मतलब बहुत—मजबूत हैं।

दाँत साफ करने का मेरे पास कोई एक तरीका या एक ही मंजन नहीं है। मैं परिस्थितियों और उपलब्ध चीज़ों के अनुसार अलग-अलग तरीकों से दाँत साफ कर लेता हूँ। देखिए नीचे:

लौंग, अम्बा हल्दी और थोड़ा सा सेंधा नमक — इन सबके चूर्ण में सरसों का तेल मिलाकर इतना पेस्ट बना लेता हूँ कि उससे दाँत साफ किए जा सकें।

कभी नींबू के पत्तों को रगड़ लेता हूँ।

कभी नींबू को निचोड़ने के बाद उसे उल्टा करके, उस पर सेंधा नमक लगाकर दाँत साफ कर लेता हूँ।

कभी नीम आदि की दातून कर लेता हूँ।

कभी ऐसे ही उँगलियों से दाँत रगड़ लेता हूँ।

और दाँतों को मजबूत रखने के लिए मैं अपने सामर्थ्य अनुसार दाँतों से वजन उठाकर 1–2 मिनट तक रोककर रखता हूँ। इससे दाँत और जबड़ा बहुत मजबूत बने रहते हैं।
(लेकिन आप यह मत करना — कहीं ऐसा न हो कि दाँत ही सारे बाहर आ जाएँ! 😂)

अच्छा भाई, ये सब राजीव दीक्षित जी का ही उपकार है मुझ पर, और मैं ये सब नियमित रूप से करता रहता हूँ।

वैसे एक ओर अद्भुत क्रिया है जिससे आपके दांत और हड्डियों को बहुत लाभ मिलेगा उसके लिए आप ये वीडियो देखो ओर सीखो

https://youtu.be/o3kapdRIwAE


✍️ आर्य पुत्र
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जर्मनी के एक एलोपैथी डॉक्टर थे, जिन्हें डॉ. वॉल के नाम से जाना जाता है। उनके पास एक महिला अपने घुटने के दर्द का इलाज करवाने आती थी। काफी समय तक इलाज चलने के बाद भी उसकी समस्या ठीक नहीं हो रही थी और अंत में उसे ऑपरेशन की सलाह दी गई।

उस महिला ने फिर एक्यूप्रेशर से उपचार करवाया, जिससे उसके घुटनों के दर्द में गहरा आराम मिला। बाद में वह महिला वापस डॉ. वॉल के पास गई और उन्हें पूरा अनुभव बताया।

यह सुनकर डॉ. वॉल आश्चर्यचकित हो गए। एक्यूप्रेशर को गलत सिद्ध करने के उद्देश्य से उन्होंने एक विशेष मशीन बनाई, जिससे शरीर के एक्यूप्रेशर बिंदुओं की जांच की जा सके। परीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि हर बिंदु से संबंधित अंगों में ऊर्जा का प्रवाह सचमुच प्रभावित होता है। ओर शरीर के अंगों की ऊर्जा संतुलित होने लगती है यानी बीमारी भागने लगती है।

इसी शोध के दौरान उन्होंने कुछ नए बिंदुओं की खोज भी की, और यह पद्धति आगे चलकर Electro-Acupuncture के नाम से प्रसिद्ध हुई। इसके बाद डॉ. वॉल ने इसी क्षेत्र को अपना मुख्य चिकित्सा क्षेत्र बना लिया।

वैसे आपको बता दूं कि जिसे हम आज एक्यूप्रेशर कहते हैं, भारत में इसे मर्म-दाब चिकित्सा कहा जाता है। यह विद्या आयुर्वेद की अनमोल देन है, और ऋषियों ने सभी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियाँ सम्पूर्ण मानवता के हित के लिए ही बनाई गई हैं ओर भारत से समस्त ज्ञान विश्व में गया है

🚩 सभी का भला हो, सभी का मंगल हो, सभी सुखी हों। 🚩
✍️ आर्यपुत्र
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पेट के रोगों का रामबाण उपाय — यानी बीमारी की जड़ को ही हिला दो।

आपको चाहे कोई भी पेट का रोग क्यों न हो, यदि आप क्रोध करना, दूसरों से जलना, पीठ पीछे चुगली करना और किसी की बुराई में आनंद लेना जैसे नकारात्मक कर्मों का त्याग कर दें, तो आप देखेंगे कि आश्चर्यजनक रूप से आपके पेट संबंधी रोग स्वतः ही ठीक होने लगेंगे। तब औषधियाँ भी अपना कार्य सही ढंग से करने लगती हैं।

इसके बाद आप जो भी चिकित्सा करेंगे, वह अपना पूरा प्रभाव दिखाएगी।
इसके लिए दो कार्य ज़रूर करें —

1) वे सभी प्वाइंट लगाएँ जो मैंने तनाव आदि के लिए अपनी वीडियो में बताए हैं। मेरे युटुब चैनल bharat yogi पर इस नाम से वो वीडियो है "5 मिनट में दिमाग हल्का करने की विधि" मैं जब किसी रोगी की चिकित्सा करता हूं तो ये वाले पॉइंट जरूर लगाता हूं

2) प्रतिदिन ध्यान का अभ्यास करें।

और हमेशा अपने उन्नति के कार्यों में लगे रहें, खाली न बैठें।

✍️ आर्यपुत्र
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वन्दे मातरम् , निश्चित ही भारत आज शक्तिशाली हुआ है मोदी जी के नेतृत्व में, किंतु देश के अंदर की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा जो कि देश के लिए बहुत घातक होगा।

मैं सोचता हूं जब ये बात आपको मुझे हम सब 100 करोड़ भारतीयों को मालूम है तो क्या मोदी जी को नहीं मालूम होगी? , निश्चित ही उन्हें भी मालूम होगी ओर हमसे कई कई गुना बेहतर तरीके से मालूम होगी। देखना है होता है क्या जो होगा उसके लिए हमें खुद को हर दिन त्यार करना चाहिए क्योंकि आग लगने पर कुंए नहीं खोदे जाते

✍️आर्यपुत्र
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