UPSSSC, LOWER PCS, PET ,UPSI, CTET, SUPER TET, UPTET ,TGT ,PGT , TEACHING , Other Exam.
2.58K subscribers
4.98K photos
36 videos
475 files
5.09K links
Way to Success
🟢 Amogh classess में आप सभी का स्वागत है
🔴 ONLYPCS ONE ऐप से जुड़ने - https://play.google.com/store/apps/details?id=com.onlypcs.one
🟠 YouTube चैनल से जुड़े https://www.youtube.com/@amoghclasses95
Download Telegram
📕आपदा प्रबंधन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते और संधियाँ

​1. सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework 2015-2030)

​यह वर्तमान में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए सबसे प्रमुख वैश्विक ढांचा है। इसे मार्च 2015 में जापान के सेंडाई में आयोजित तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में अपनाया गया था।

​उद्देश्य: 2030 तक आपदाओं से होने वाले नुकसान (जीवन, स्वास्थ्य और आर्थिक) में महत्वपूर्ण कमी लाना।

​सात लक्ष्य: इसमें सात विशिष्ट वैश्विक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
​चार प्राथमिकताएं:

​आपदा जोखिम को समझना।
​आपदा जोखिम के प्रबंधन के लिए शासन (Governance) को मजबूत करना।
​लचीलेपन (Resilience) के लिए आपदा न्यूनीकरण में निवेश करना।

​प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए तैयारी बढ़ाना और पुनर्प्राप्ति में "Build Back Better" (बेहतर पुनर्निर्माण) को अपनाना।


​2. ह्योगो फ्रेमवर्क फॉर एक्शन (Hyogo Framework for Action - HFA 2005-2015)

​सेंडाई फ्रेमवर्क से पहले यह समझौता लागू था। इसे 2005 में जापान के कोबे (ह्योगो प्रांत) में अपनाया गया था।

​महत्व: यह आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए देशों और समुदायों की क्षमता निर्माण पर केंद्रित था।

​विरासत: इसने आपदा प्रबंधन को केवल 'राहत और प्रतिक्रिया' से हटाकर 'पूर्व-तैयारी और रोकथाम' की ओर मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।

​3. योकोहामा रणनीति (Yokohama Strategy, 1994)

​यह आपदा न्यूनीकरण पर पहला महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज था।

​केंद्र: इसमें यह स्वीकार किया गया कि विकासशील देश और गरीब समुदाय आपदाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। इसने आपदाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया।


​4. पेरिस जलवायु समझौता (Paris Agreement, 2015)

​हालांकि यह मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन से संबंधित है, लेकिन इसका आपदा प्रबंधन से सीधा संबंध है।

​जुड़ाव: जलवायु परिवर्तन के कारण चक्रवात, बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। पेरिस समझौता इन चरम मौसम की घटनाओं के अनुकूलन (Adaptation) और उनके प्रभाव को कम करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता की बात करता है।


Join 👉https://t.me/Amoghclasses
#targetlekhpal #lowerpcs
❤2
📕भारत में आपदा प्रबंधन "प्रतिक्रिया-केंद्रित" (Response-centric) दृष्टिकोण से हटकर "निवारण और तैयारी" (Prevention and Preparedness) के मॉडल को अपनाया है।
​
​1. विधायी प्रावधान: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005

​यह भारत में आपदा प्रबंधन के लिए कानूनी आधार प्रदान करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कानून है।

​परिभाषा: यह अधिनियम आपदा को एक "तबाही या दुर्घटना" के रूप में परिभाषित करता है जो मानवीय या प्राकृतिक कारणों से होती है।
​शक्तियाँ:
यह केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं को अनिवार्य बनाता है।

​दंड का प्रावधान:

इसमें आपदा के समय राहत सामग्री के दुरुपयोग या बाधा डालने पर दंड और जुर्माने की व्यवस्था है।


​2. संस्थागत ढांचा (Institutional Framework)

​भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक त्रि-स्तरीय (Three-tier) संरचना अपनाई गई है:

​A. राष्ट्रीय स्तर (National Level)
​राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA):

यह भारत की शीर्ष संस्था है। इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। यह नीतियां और दिशानिर्देश तैयार करता है।


​राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF):
यह आपदा के समय तत्काल कार्रवाई करने वाला विशेषज्ञ बल है।

​राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM):
यह प्रशिक्षण, शोध और क्षमता निर्माण का कार्य करता है।
​राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC): यह NDMA को सहायता प्रदान करती है और मंत्रालयों के बीच समन्वय करती है।

​B. राज्य स्तर (State Level)
​राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA):
इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं। यह राज्य की आपदा योजना बनाता है और राष्ट्रीय दिशानिर्देशों को लागू करता है।

​C. जिला स्तर (District Level)
​जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA):

इसके अध्यक्ष जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर होते हैं। यह आपदा प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है जो स्थानीय स्तर पर योजनाओं का कार्यान्वयन सुनिश्चित करती है।

​3. वित्तीय प्रावधान (Financial Provisions)

​आपदाओं से निपटने के लिए दो विशेष निधियों का प्रावधान किया गया है:

​आपदा मोचन निधि (DRF):

यह आपातकालीन प्रतिक्रिया और राहत कार्यों के लिए है (NDRF और SDRF)।

​आपदा शमन निधि (DMF):

यह आपदा के जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक रोकथाम परियोजनाओं के लिए है (NDMF और SDMF)।

​4. प्रमुख राष्ट्रीय योजनाएं और नीतियां
​राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति (2009):

यह नीति "सुरक्षित और आपदा-प्रतिरोधी भारत" के निर्माण पर केंद्रित है।

​राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP):

इसे 2016 में जारी किया गया था। यह सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework) के लक्ष्यों के अनुरूप भारत की पहली राष्ट्रीय योजना है।


Join 👉https://t.me/Amoghclasses
#targetlekhpal #lowerpcs
❤6
है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में?
खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़, मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है
।"

#Targetlekhpal, मात्र 7 दिन शेष

❤️
❤3💯2🙏1
कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।"

लेखपाल मात्र 6 दिन शेष



#targetlekhpal
❤3💯2
📕हिंदी व्याकरण 'काल' (Tense)

👉​काल (Tense): परिभाषा

​क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने के समय और उसकी पूर्णता या अपूर्णता का बोध हो, उसे काल कहते हैं।

📕भेद कुल 6

​1. वर्तमान काल (Present Tense)
​जो समय अभी चल रहा है। इसके मुख्य 5 भेद माने जाते हैं:

1-​सामान्य वर्तमान: क्रिया का वर्तमान में होना (जैसे- वह पढ़ता है)।

२- ​तत्कालिक (अपूर्ण) वर्तमान: क्रिया अभी चल रही है (जैसे- वह पढ़ रहा है)।

3-​पूर्ण वर्तमान: कार्य अभी-अभी पूरा हुआ है (जैसे- उसने पुस्तक पढ़ी है)।

4- ​संदिग्ध वर्तमान: क्रिया के होने में संदेह हो (जैसे- वह पढ़ता होगा)।

5- ​संभाव्य वर्तमान: कार्य के होने की संभावना हो (जैसे- वह आया हो, वह पढ़ता हो)।


📕 भविष्यत काल (Future Tense)

इसके मुख्य 3 भेद हैं:

१-सामान्य भविष्यत: भविष्य में सामान्य रूप से होना (जैसे- हम कल स्कूल जाएंगे)।

2-संभाव्य भविष्यत: होने की संभावना (जैसे- शायद आज वर्षा हो)।

3-हेतु-हेतुमद भविष्यत:

एक कार्य का होना दूसरे पर निर्भर करे (जैसे- वह आए तो मैं जाऊं)।


Join 👉https://t.me/Amoghclasses
#targetlekhpal #lowerpcs
❤4
📕​भूतकाल के मुख्य 6 भेद होते हैं:


​1. सामान्य भूतकाल (Simple Past)
​जब क्रिया के समाप्त होने के विशेष समय का बोध न हो, बल्कि यह पता चले कि काम बीते समय में हुआ है।

👉​पहचान: वाक्य के अंत में आ, ई, ए, या, यी, ये आता है।

👉​उदाहरण: * राम ने पत्र लिखा।
​बच्चे स्कूल गए।

​2. आसन्न भूतकाल (Immediate Past)
​
इससे यह पता चलता है कि क्रिया अभी-अभी या निकट भूतकाल में समाप्त हुई है।
👉​पहचान: सामान्य भूतकाल के क्रिया रूप के साथ 'है/हैं' जुड़ा होता है।

👉​उदाहरण: * मैंने खाना खाया है।
​वह अभी आई है।

​3. पूर्ण भूतकाल (Past Perfect)
​क्रिया के उस रूप को पूर्ण भूतकाल कहते हैं जिससे यह स्पष्ट हो कि कार्य बहुत समय पहले समाप्त हो चुका था।

👉​पहचान: क्रिया के अंत में था, थी, थे आता है।

👉​उदाहरण: * अंग्रेजों ने भारत पर राज किया था।
​उसने अपनी पुस्तक पढ़ ली थी।

​4. अपूर्ण भूतकाल (Past Continuous)
​
इससे यह पता चलता है कि क्रिया भूतकाल में हो रही थी, किंतु उसकी समाप्ति का पता नहीं चलता।

​पहचान: 👉वाक्य के अंत में रहा था, रही थी, रहे थे आता है।

​उदाहरण: 👉* बच्चे मैदान में खेल रहे थे।
​सीता गाना गा रही थी।


​5. संदिग्ध भूतकाल (Doubtful Past)
​जहाँ भूतकाल की क्रिया के होने में संदेह (Doubt) हो कि कार्य पूरा हुआ या नहीं।

​पहचान:👉 क्रिया के अंत में होगा, होगी, होंगे आता है।

​उदाहरण: 👉 बस छूट गई होगी।
👉​उसने खाना खा लिया होगा।

​6. हेतुहेतुमद् भूतकाल (Conditional Past)

​जहाँ भूतकाल की एक क्रिया दूसरी क्रिया पर निर्भर हो। इसमें कार्य होने वाला था, पर किसी कारणवश नहीं हो सका।

​पहचान:👉 यदि... तो... (वाक्य में शर्त होती है)।

​उदाहरण: 👉 यदि वर्षा होती, तो फसल अच्छी होती।
​यदि तुम पढ़ते, तो पास हो जाते।


Join 👉https://t.me/Amoghclasses
#targetlekhpal #lowerpcs
❤2
📕आपदा प्रबंधन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते और संधियाँ

​1. सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework 2015-2030)

​यह वर्तमान में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए सबसे प्रमुख वैश्विक ढांचा है। इसे मार्च 2015 में जापान के सेंडाई में आयोजित तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में अपनाया गया था।

​उद्देश्य: 2030 तक आपदाओं से होने वाले नुकसान (जीवन, स्वास्थ्य और आर्थिक) में महत्वपूर्ण कमी लाना।

​सात लक्ष्य: इसमें सात विशिष्ट वैश्विक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
​चार प्राथमिकताएं:

​आपदा जोखिम को समझना।
​आपदा जोखिम के प्रबंधन के लिए शासन (Governance) को मजबूत करना।
​लचीलेपन (Resilience) के लिए आपदा न्यूनीकरण में निवेश करना।

​प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए तैयारी बढ़ाना और पुनर्प्राप्ति में "Build Back Better" (बेहतर पुनर्निर्माण) को अपनाना।


​2. ह्योगो फ्रेमवर्क फॉर एक्शन (Hyogo Framework for Action - HFA 2005-2015)

​सेंडाई फ्रेमवर्क से पहले यह समझौता लागू था। इसे 2005 में जापान के कोबे (ह्योगो प्रांत) में अपनाया गया था।

​महत्व: यह आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए देशों और समुदायों की क्षमता निर्माण पर केंद्रित था।

​विरासत: इसने आपदा प्रबंधन को केवल 'राहत और प्रतिक्रिया' से हटाकर 'पूर्व-तैयारी और रोकथाम' की ओर मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।

​3. योकोहामा रणनीति (Yokohama Strategy, 1994)

​यह आपदा न्यूनीकरण पर पहला महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज था।

​केंद्र: इसमें यह स्वीकार किया गया कि विकासशील देश और गरीब समुदाय आपदाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। इसने आपदाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया।


​4. पेरिस जलवायु समझौता (Paris Agreement, 2015)

​हालांकि यह मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन से संबंधित है, लेकिन इसका आपदा प्रबंधन से सीधा संबंध है।

​जुड़ाव: जलवायु परिवर्तन के कारण चक्रवात, बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। पेरिस समझौता इन चरम मौसम की घटनाओं के अनुकूलन (Adaptation) और उनके प्रभाव को कम करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता की बात करता है।


Join 👉https://t.me/Amoghclasses
#targetlekhpal #lowerpcs
❤5
📕भारत में आपदा प्रबंधन "प्रतिक्रिया-केंद्रित" (Response-centric) दृष्टिकोण से हटकर "निवारण और तैयारी" (Prevention and Preparedness) के मॉडल को अपनाया है।
​
​1. विधायी प्रावधान: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005

​यह भारत में आपदा प्रबंधन के लिए कानूनी आधार प्रदान करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कानून है।

​परिभाषा: यह अधिनियम आपदा को एक "तबाही या दुर्घटना" के रूप में परिभाषित करता है जो मानवीय या प्राकृतिक कारणों से होती है।
​शक्तियाँ:
यह केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं को अनिवार्य बनाता है।

​दंड का प्रावधान:

इसमें आपदा के समय राहत सामग्री के दुरुपयोग या बाधा डालने पर दंड और जुर्माने की व्यवस्था है।


​2. संस्थागत ढांचा (Institutional Framework)

​भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक त्रि-स्तरीय (Three-tier) संरचना अपनाई गई है:

​A. राष्ट्रीय स्तर (National Level)
​राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA):

यह भारत की शीर्ष संस्था है। इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। यह नीतियां और दिशानिर्देश तैयार करता है।


​राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF):
यह आपदा के समय तत्काल कार्रवाई करने वाला विशेषज्ञ बल है।

​राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM):
यह प्रशिक्षण, शोध और क्षमता निर्माण का कार्य करता है।
​राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC): यह NDMA को सहायता प्रदान करती है और मंत्रालयों के बीच समन्वय करती है।

​B. राज्य स्तर (State Level)
​राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA):
इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं। यह राज्य की आपदा योजना बनाता है और राष्ट्रीय दिशानिर्देशों को लागू करता है।

​C. जिला स्तर (District Level)
​जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA):

इसके अध्यक्ष जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर होते हैं। यह आपदा प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है जो स्थानीय स्तर पर योजनाओं का कार्यान्वयन सुनिश्चित करती है।

​3. वित्तीय प्रावधान (Financial Provisions)

​आपदाओं से निपटने के लिए दो विशेष निधियों का प्रावधान किया गया है:

​आपदा मोचन निधि (DRF):

यह आपातकालीन प्रतिक्रिया और राहत कार्यों के लिए है (NDRF और SDRF)।

​आपदा शमन निधि (DMF):

यह आपदा के जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक रोकथाम परियोजनाओं के लिए है (NDMF और SDMF)।

​4. प्रमुख राष्ट्रीय योजनाएं और नीतियां
​राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति (2009):

यह नीति "सुरक्षित और आपदा-प्रतिरोधी भारत" के निर्माण पर केंद्रित है।

​राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP):

इसे 2016 में जारी किया गया था। यह सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework) के लक्ष्यों के अनुरूप भारत की पहली राष्ट्रीय योजना है।


Join 👉https://t.me/Amoghclasses
#targetlekhpal #lowerpcs
🔰अवध के नवाब -क्रम‌

👉सफदरजंग (1739-54 ई.)

👉शुजाउद्दौला (1754-75 ई.)

👉आसफ उद्दौला (1775-97 ई.)

👉वजीर अली (1797-98 ई.)

👉सआदत अली खाँ (1798-1814 ई.)

👉गाजीउद्दीन हैदरअली खाँ (1814-27 ई.)

👉नासिरुद्दीन मुहम्मद अली (1827-42 ई.)

👉अमजद अली (1842-47 ई.)

👉वाजिद अली शाह (1847-56 ई.)


join👉https://t.me/Amoghclasses

#uppcs #pcs #uppcspre2026 #mppsc #ukpcs #bpsc ,#uppcs #upsssc #pet2026 #LT #gs #gk
#targetlekhpal #lowerpcs
❤5
​📕ओजोन की अवस्थिति (Location)

👉​वायुमंडल की परत:

ओजोन गैस का लगभग 90% भाग समताप मंडल (Stratosphere) में पाया जाता है, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 15 से 35 किमी की ऊँचाई पर स्थित है।


👉​समताप मंडलीय ओजोन (Good Ozone): यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV rays) को रोकती है।

👉​क्षोभमंडलीय ओजोन (Bad Ozone):

पृथ्वी की सतह के पास (Troposphere) यह एक प्रदूषक के रूप में कार्य करती है और स्मॉग (Smog) का हिस्सा बनती है।


📕मापन की इकाई: ओजोन परत की मोटाई डॉबसन यूनिट (Dobson Unit - DU) में मापी जाती है।


👉खोज: ओजोन परत की खोज 1913 में फ्रांसीसी भौतिकविदों चार्ल्स फैब्री और हेनरी बुइसन ने की थी।


📕ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले प्रमुख पदार्थों (ODS) में शामिल हैं:

👉क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs): रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर से निकलने वाली गैस।

👉हैलोन (Halons): अग्निशामक यंत्रों में उपयोग।

👉मिथाइल ब्रोमाइड: कीटनाशकों में प्रयुक्त।

👉नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO_x): सुपरसोनिक जेट विमानों से निकलने वाला उत्सर्जन।

📕ओजोन छिद्र (Ozone Hole): सबसे पहले 1985 में जोसेफ फॉरमैन और उनकी टीम द्वारा अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र की पुष्टि की गई थी।

📕अंतर्राष्ट्रीय प्रयास एवं सम्मेलन

👉वियना कन्वेंशन (1985):

👉ओजोन परत के संरक्षण के लिए पहला अंतर्राष्ट्रीय ढांचा।


👉मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (16 सितंबर 1987):

यह सबसे सफल वैश्विक पर्यावरण संधि मानी जाती है, जिसका उद्देश्य CFC जैसे ओजोन क्षयकारी पदार्थों के उत्पादन पर रोक लगाना है।

नोट: इसी कारण 16 सितंबर को 'विश्व ओजोन दिवस' मनाया जाता है।

👉किगाली संशोधन (2016):

यह मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का एक संशोधन है, जिसका लक्ष्य हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से कम करना है (HFCs ओजोन को नुकसान नहीं पहुँचाते लेकिन ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाते हैं)।


📕 स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव

UV-B किरणों का प्रभाव: ओजोन की कमी से पृथ्वी पर पहुंचने वाली पराबैंगनी किरणें त्वचा कैंसर (Skin Cancer), मोतियाबिंद, और प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) के कमजोर होने का कारण बनती हैं।

👉पारिस्थितिक तंत्र: यह समुद्री प्लवक (Phytoplankton) को नष्ट करती है, जिससे जलीय खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है।


👉सर्वाधिक सांद्रता: 20-30 किमी की ऊँचाई पर।

👉ओजोन क्षरण का मुख्य कारक: क्लोरीन परमाणु (एक क्लोरीन परमाणु ओजोन के 1 लाख अणुओं को नष्ट कर सकता है)।


👉ओजोन परत का सर्वाधिक विनाश ध्रुवों (विशेषकर दक्षिण ध्रुव) पर होता है क्योंकि वहाँ 'ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल' (PSCs) बनते हैं।


Join 👉https://t.me/Amoghclasses
#targetlekhpal #lowerpcs