उत्तर प्रदेश में भूमि सुधारों की दिशा में 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006' (UP Revenue Code, 2006) एक मील का पत्थर है। इसने स्वतंत्रता के बाद के दर्जनों जटिल कानूनों (जैसे UPZALR Act 1950) को समाहित कर एक सरल व्यवस्था दी है। इसे 11 फरवरी 2016 से प्रभावी रूप से लागू किया गया।
1. जोतदारों (Tenure Holders) का सरलीकरण
संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर (Bhumidhar with Transferable Rights):
इन्हें भूमि पर पूर्ण अधिकार प्राप्त है। ये भूमि बेच सकते हैं, उपहार में दे सकते हैं या बंधक रख सकते हैं।
असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर
2. भूमि उपयोग का परिवर्तन (धारा 80)
शर्त: अनुमति तभी मिलती है जब विक्रेता के पास बिक्री के बाद कम से कम 1.26 हेक्टेयर भूमि शेष बच रही हो, या कोई गंभीर आपात स्थिति (बीमारी, शिक्षा) हो।
4. पट्टेदारी (Leasing) में ढील
5. स्वामित्व और उत्तराधिकार के नियम
वसीयत:
6. विवादों का निपटारा और डिजिटल रिकॉर्ड
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1. जोतदारों (Tenure Holders) का सरलीकरण
इस संहिता के तहत भूमि धारकों को मुख्यतः चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर (Bhumidhar with Transferable Rights):
इन्हें भूमि पर पूर्ण अधिकार प्राप्त है। ये भूमि बेच सकते हैं, उपहार में दे सकते हैं या बंधक रख सकते हैं।
असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर
(Bhumidhar with Non-Transferable Rights): इन्हें खेती का अधिकार है, लेकिन ये भूमि बेच नहीं सकते। हालांकि, 5 वर्ष की अवधि के बाद इन्हें संक्रमणीय अधिकार मिल सकते हैं।
असामी (Asami): ये आमतौर पर पट्टेदार होते हैं जिन्हें विशिष्ट अवधि के लिए भूमि दी जाती है।
सरकारी पट्टेदार: जिन्हें सरकार द्वारा विशेष उद्देश्यों के लिए भूमि आवंटित की जाती है।
2. भूमि उपयोग का परिवर्तन (धारा 80)
पुराने कानूनों में कृषि भूमि को गैर-कृषि (आवासीय या औद्योगिक) घोषित कराना बहुत कठिन था।3. दलितों और पिछड़ों की भूमि का संरक्षण
प्रावधान: अब कृषि भूमि का उपयोग गैर-कृषि कार्य के लिए करने हेतु एसडीएम (SDM) से अनुमति लेने की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बना दिया गया है।
भूमिहीनों और कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं:
धारा 98: अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति अपनी भूमि गैर-SC व्यक्ति को जिलाधिकारी (DM) की पूर्व अनुमति के बिना नहीं बेच सकता।
शर्त: अनुमति तभी मिलती है जब विक्रेता के पास बिक्री के बाद कम से कम 1.26 हेक्टेयर भूमि शेष बच रही हो, या कोई गंभीर आपात स्थिति (बीमारी, शिक्षा) हो।
4. पट्टेदारी (Leasing) में ढील
पुराने कानूनों में भूमि को पट्टे पर देना (बटाई पर देना) कानूनी रूप से प्रतिबंधित था, जिससे भू-स्वामी को भूमि छिन जाने का डर रहता था।
नया प्रावधान: अब कोई भी भू-स्वामी अपनी भूमि को खेती के लिए कानूनी रूप से पट्टे पर दे सकता है। इससे 'बटाई' व्यवस्था को कानूनी मान्यता मिली है और भूमि मालिक का स्वामित्व सुरक्षित रहता है।
5. स्वामित्व और उत्तराधिकार के नियम
वसीयत:
संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर अपनी भूमि की वसीयत कर सकता है।
उत्तराधिकार: यदि किसी किसान की मृत्यु बिना वसीयत के होती है, तो उत्तराधिकार की एक स्पष्ट वरीयता सूची (Order of Succession) दी गई है, जिसमें अब बेटियों और विधवाओं के अधिकारों को अधिक स्पष्टता दी गई है।
6. विवादों का निपटारा और डिजिटल रिकॉर्ड
राजस्व न्यायालय: मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित किया गया है।
सीमा विवाद (धारा 24): मेड़ या सीमा संबंधी विवादों के लिए SDM को त्वरित पैमाइश कराने का अधिकार दिया गया है।
डिजिटलीकरण: खतौनी और खसरा का कंप्यूटरीकरण अनिवार्य किया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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📕 लेखपाल (Lekhpal) मुख्य कार्य
1. भू-अभिलेखों का रखरखाव (Maintenance of Land Records)
2. सर्वेक्षण और निरीक्षण (Survey and Inspection)
3. आपदा और राहत कार्य (Disaster Relief)
4. प्रमाण पत्र जारी करने में सहायता
)
5. भूमि विवाद और सीमांकन
6. अन्य सरकारी कार्य
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1. भू-अभिलेखों का रखरखाव (Maintenance of Land Records)
लेखपाल का प्राथमिक कार्य अपने क्षेत्र (हलके) के भूमि रिकॉर्ड को अपडेट रखना है।
खसरा और खतौनी: भूमि के मालिकाना हक और उपयोग का विवरण तैयार करना।
नक्शा: गांव के नक्शे में बदलावों को दर्ज करना।
2. सर्वेक्षण और निरीक्षण (Survey and Inspection)
पड़ताल: साल में तीन बार (रबी, खरीफ और जायद की फसल के समय) खेतों का निरीक्षण करना।
फसल का ब्यौरा: यह दर्ज करना कि किस खेत में कौन सी फसल बोई गई है और उसका स्वास्थ्य कैसा है।
3. आपदा और राहत कार्य (Disaster Relief)
बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या आगजनी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय नुकसान का आकलन करना।
प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा दिलाने के लिए रिपोर्ट तैयार कर तहसील में जमा करना।
4. प्रमाण पत्र जारी करने में सहायता
विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जांच करना:
आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)
जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)
निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate
)
5. भूमि विवाद और सीमांकन
गाँव में भूमि संबंधी छोटे-मोटे विवादों को सुलझाना।
भूमि की पैमाइश (नाप-जोख) में कानूनगो और तहसीलदार की मदद करना।
अवैध कब्जों की सूचना उच्च अधिकारियों को देना।
6. अन्य सरकारी कार्य
जनगणना: पशु गणना या कृषि गणना में भाग लेना।Join 👉https://t.me/Amoghclasses
चुनाव: चुनाव के दौरान बीएलओ (BLO) या अन्य प्रशासनिक ड्यूटी निभाना।
सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन: पेंशन, किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करना।
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📕भूमि मापन इकाइयां (Land Measurement Units)
यूपी में भूमि मापन की पारंपरिक इकाइयां अक्सर पूछी जाती हैं:
1. छोटे पैमाने (इकाई)
2. बिसवा और बीघा (सबसे प्रचलित)
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में "बीघा" का माप थोड़ा बदल सकता है, लेकिन मानक माप इस प्रकार हैं:
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यूपी में भूमि मापन की पारंपरिक इकाइयां अक्सर पूछी जाती हैं:
1 बीघा = 20 बिस्वा
1 बिस्वा = 20 बिस्वांसी
1 लाठा = 99 इंच या 8 फीट 3 इंच
1 एकड़ = 4840 वर्ग गज
1 हेक्टेयर = 2.47 एकड़ (लगभग)
1. छोटे पैमाने (इकाई)
1 लाठा (Latha): 99 इंच या 8 फीट 3 इंच
1 उनवांसी (Unwansi): 24.5025 वर्ग इंच
1 कचवांसी (Kachwansi): 20 उनवांसी
1 बिसवांसी (Biswansi): 20 कचवांसी (या 1 वर्ग लाठा)
2. बिसवा और बीघा (सबसे प्रचलित)
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में "बीघा" का माप थोड़ा बदल सकता है, लेकिन मानक माप इस प्रकार हैं:
1 बिसवा (Biswa): 20 बिसवांसी (लगभग 125 वर्ग मीटर या 1350 वर्ग फुट)
1 कच्चा बीघा (Kachcha Bigha): 6.66 बिसवा (यह पक्के बीघे का एक-तिहाई होता है)
1 पक्का बीघा (Pakka Bigha): 20 बिसवा
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“याद रखिए —
यह संकट किसी एक देश का नहीं, पूरी दुनिया का है।युद्ध जब सीमाओं पर होता है, असर पूरी दुनिया की रसोई और जेब पर पड़ता है।”
अमेरिका–इज़रायल–ईरान तनाव के कारण
तेल सप्लाई, समुद्री रास्ते और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुए।इसी वजह से दुनिया के बड़े-बड़े देश भी सख्त कदम उठाने पर मजबूर हुए।
अब भारत को देखिए…140 करोड़ आबादी वाला देश।अगर इतनी बड़ी आबादी सिर्फ सरकार के भरोसे बैठ जाए,तो कोई भी व्यवस्था दबाव में आ सकती है।
अगर भारत की आबादी जर्मनी जितनी होती,
तो सरकार आराम से कुछ निकम्मों (यहां निकम्मा कुछ चूतियां इन्फ्लूएंसर, लुटियन पत्रकार, सो कॉल्ड बुद्धिजीवी ) को बैठाकर भी खिला देती।
लेकिन यहाँ 140 करोड़ लोगों का देश है —
यहाँ हर नागरिक की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है।
इसलिए समय की मांग है —
देश को कमजोर करने वाली बहस नहीं,
बल्कि जिम्मेदारी निभाने वाली सोच।
भारत हर संकट से निकला है,
और इस बार भी निकलेगा —
अगर युवा जिम्मेदारी समझेंगे। 🇮🇳
जय हिंद जय भारत 🇮🇳🙏
यह संकट किसी एक देश का नहीं, पूरी दुनिया का है।युद्ध जब सीमाओं पर होता है, असर पूरी दुनिया की रसोई और जेब पर पड़ता है।”
अमेरिका–इज़रायल–ईरान तनाव के कारण
तेल सप्लाई, समुद्री रास्ते और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुए।इसी वजह से दुनिया के बड़े-बड़े देश भी सख्त कदम उठाने पर मजबूर हुए।
🇩🇪 जर्मनी
जिस देश की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे मजबूत मानी जाती है,
वहाँ सरकार ने लोगों से गैस और बिजली बचाने की अपील की।सड़क और सार्वजनिक जगहों की लाइटिंग कम की गई,हीटिंग सिस्टम सीमित किए गए,और उद्योगों में ऊर्जा खपत नियंत्रित करनी पड़ी।
🇺🇸 अमेरिका
अमेरिका को अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) तक खोलने पड़े
ताकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में रखा जा सके।
कई जगह ईंधन बचाने और अनावश्यक यात्रा कम करने की सलाह दी गई।
🇫🇷 फ्रांस
फ्रांस ने सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक भवनों में बिजली उपयोग कम किया,
रात की लाइटिंग सीमित की
और लोगों से “Energy Discipline” अपनाने की अपील की।
🇬🇧 ब्रिटेन
ब्रिटेन में बढ़ती महंगाई और ऊर्जा संकट के कारण सरकार को जनता को राहत पैकेज देने पड़े।बिजली बिल नियंत्रित करने के लिए विशेषयोजनाएँ लागू करनी पड़ीं।
अब भारत को देखिए…140 करोड़ आबादी वाला देश।अगर इतनी बड़ी आबादी सिर्फ सरकार के भरोसे बैठ जाए,तो कोई भी व्यवस्था दबाव में आ सकती है।
अगर भारत की आबादी जर्मनी जितनी होती,
तो सरकार आराम से कुछ निकम्मों (यहां निकम्मा कुछ चूतियां इन्फ्लूएंसर, लुटियन पत्रकार, सो कॉल्ड बुद्धिजीवी ) को बैठाकर भी खिला देती।
लेकिन यहाँ 140 करोड़ लोगों का देश है —
यहाँ हर नागरिक की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है।
इसलिए समय की मांग है —
देश को कमजोर करने वाली बहस नहीं,
बल्कि जिम्मेदारी निभाने वाली सोच।
✔️ ईंधन बचाइए
✔️ काम और पढ़ाई कोऑनलाइन प्राथमिकता दीजिए
✔️ अफवाह नहीं, अनुशासन फैलाइए
✔️ क्योंकि यह सामान्य समय नहीं, वैश्विक संकट का दौर है।
भारत हर संकट से निकला है,
और इस बार भी निकलेगा —
अगर युवा जिम्मेदारी समझेंगे। 🇮🇳
जय हिंद जय भारत 🇮🇳🙏
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UPSSSC, LOWER PCS, PET ,UPSI, CTET, SUPER TET, UPTET ,TGT ,PGT , TEACHING , Other Exam.
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इनकी रियल्टी ये है कि ये बाजार से टमाटर और आलू नहीं खरीद सकते, ,चले है वैश्विक संकट के समय लाभ बनाने
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UPSSSC, LOWER PCS, PET ,UPSI, CTET, SUPER TET, UPTET ,TGT ,PGT , TEACHING , Other Exam.
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किसी राजनेता को क्यों लगता है, सत्ता उसकी बाप की बपौती है
,जनता को समझना होगा ,ये लोग केवल अपनी सत्ता के लिए मर रहे है इनको आपके लाभ या हानि का मतलब नहीं ही , राजनीति में नए लोगों को आने की आवश्यकता है,
हमें परम्परागत राजनेताओं का पिछलग्गू होना छोड़ना होगा, और बल्कि खुद आगे बढ़कर नेतृत्व करना होगा
,जनता को समझना होगा ,ये लोग केवल अपनी सत्ता के लिए मर रहे है इनको आपके लाभ या हानि का मतलब नहीं ही , राजनीति में नए लोगों को आने की आवश्यकता है,
हमें परम्परागत राजनेताओं का पिछलग्गू होना छोड़ना होगा, और बल्कि खुद आगे बढ़कर नेतृत्व करना होगा
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📕 परीक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण
👉 निंदा प्रस्ताव
📕 विश्वास प्रस्ताव
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👉 निंदा प्रस्ताव
◼️ लोकसभा में इसे स्वीकारने का कारण बताना अनिवार्य है📕 अविश्वास प्रस्ताव
◼️ यह किसी एक मंत्री या मंत्रियों के समूह है या पूरे मंत्रिपरिषद के विरुद्ध लाया जा सकता है
◼️ यह मंत्री परिषद की कुछ नीतियों या कार्य के खिलाफ निंदा के लिए लाया जाता है
◼️ यदि यह लोकसभा में पारित हो जाए तो मंत्री परिषद को त्यागपत्र देना आवश्यक नहीं है
◼️ लोकसभा में इसे स्वीकार करने का कारण बताना आवश्यक नहीं है
◼️ यह सिर्फ पूरे मंत्री परिषद के विरुद्ध ही लाया जा सकता है
◼️ यह मंत्री परिषद में लोकसभा के विश्वास के निर्धारण हेतु लाया जाता है
◼️ यदि लोकसभा में पारित हो जाए तो मंत्री परिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है
◼️ इस प्रस्ताव के समर्थन में 50 सदस्यों की सहमति अनिवार्य है
📕 विश्वास प्रस्ताव
◼️ त्रिशंकु दल,अल्पमत सरकार या गठबंधन सरकार आदि परिस्थितियों से निपटने के लिए इस विश्वास प्रस्ताव का प्रावधान किया गया है
◼️ इसे सरकार को सदन में बहुमत सिद्ध करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित किया जाता है
◼️ यदि विश्वास प्रस्ताव गिर जाता है तब सरकार भी गिर जाती है
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उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ
👉उत्तर प्रदेश भारत में सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है और कई आदिवासी समुदायों का घर भी है। राज्य में कुछ मुख्य जनजातियाँ बैगा, अगरिया, बुक्सा, कोल और अधिक हैं और उनमें से कुछ को भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी गई है।
👉उत्तर प्रदेश की जनजातीय आबादी ज्यादातर उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों से आती है और पूरे राज्य में सबसे कमजोर समुदायों में से एक है।
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👉जनगणना 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल जनजातियों की संख्या 11,34,273 है।
संविधान के अनुच्छेद 342 में जनजातियां उल्लेखित हैं।
👉सबसे ज्यादा जनसंख्या थारू जनजाति की है।
👉उत्तर प्रदेश में कुल 12 जनजातियां हैं।
सबसे पुरानी जनजाति थारू तथा बुक्सा है।
सबसे ज्यादा जनजाति सोनभद्र जनपद में तथा सबसे कम जनजाति बागपत में हैं।
संविधान के अनुच्छेद 342 में जनजातियां उल्लेखित हैं।
👉सबसे ज्यादा जनसंख्या थारू जनजाति की है।
👉उत्तर प्रदेश में कुल 12 जनजातियां हैं।
सबसे पुरानी जनजाति थारू तथा बुक्सा है।
सबसे ज्यादा जनजाति सोनभद्र जनपद में तथा सबसे कम जनजाति बागपत में हैं।
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✅थारू जनजाति उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति है|
थारू जनजाति के लोग उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के तराई भाग में निवास करते है
✅थारू जनजाति के लोग किरात वंश से सम्बंधित है
थारुओ द्वारा बजहर नामक त्यौहार मनाया जाता है दीपावली को ये शोक पर्व के रूप में मनाते है , थारू जनजाति द्वारा होली के मौके पर खिचड़ी नृत्य किया जाता है
✅थारू जनजाती के लोगो में बदला विवाह प्रथा तथा तीन टिकठी विवाह प्रथा प्रचलित है , थारुओ में दोनों पक्षो से विवाह तय हो जाने को पक्की पोड़ी कहा जाता है
उत्तर प्रदेश में 2 अक्टूबर 1980 को थारू विकास परियोजना का प्रारंभ किया गया
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थारू जनजाति के लोग उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के तराई भाग में निवास करते है
✅थारू जनजाति के लोग किरात वंश से सम्बंधित है
थारुओ द्वारा बजहर नामक त्यौहार मनाया जाता है दीपावली को ये शोक पर्व के रूप में मनाते है , थारू जनजाति द्वारा होली के मौके पर खिचड़ी नृत्य किया जाता है
✅थारू जनजाती के लोगो में बदला विवाह प्रथा तथा तीन टिकठी विवाह प्रथा प्रचलित है , थारुओ में दोनों पक्षो से विवाह तय हो जाने को पक्की पोड़ी कहा जाता है
उत्तर प्रदेश में 2 अक्टूबर 1980 को थारू विकास परियोजना का प्रारंभ किया गया
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📕 भारत में पशु गणना
👉भारत में पहली पशु गणना 1919-20 में की गई थी।
अवधि: यह हर 5 वर्ष में एक बार होती है।
20वीं पशु गणना: पिछली गणना 2019 में हुई थी।
📕20वीं पशु गणना (2019) के मुख्य आंकड़े (Key Stats
विवरण (Description) संख्या/वृद्धि (Stats)
📕राज्यवार रैंकिंग (State-wise Ranking)
विभिन्न राज्यों की स्थिति इस प्रकार है:
📕पशुओं के प्रकार और प्रतिशत (Category-wise Share)
भारत में पशुओं का वितरण लगभग इस प्रकार है:
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👉भारत में पहली पशु गणना 1919-20 में की गई थी।
अवधि: यह हर 5 वर्ष में एक बार होती है।
20वीं पशु गणना: पिछली गणना 2019 में हुई थी।
📕20वीं पशु गणना (2019) के मुख्य आंकड़े (Key Stats
विवरण (Description) संख्या/वृद्धि (Stats)
कुल पशुधन (Total Livestock) 535.78 मिलियन
वृद्धि (Increase) 2012 के मुकाबले 4.6% की वृद्धि
कुल मवेशी (Total Cattle) 192.49 मिलियन (0.8% वृद्धि)
भैंसों की संख्या (Buffaloes) 109.85 मिलियन (1% वृद्धि)
भेड़-बकरी (Sheep & Goat) बकरियों
📕राज्यवार रैंकिंग (State-wise Ranking)
विभिन्न राज्यों की स्थिति इस प्रकार है:
👉उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh): कुल पशुधन संख्या में प्रथम (1st) स्थान पर है (लगभग 67.8 मिलियन)।
👉राजस्थान (Rajasthan): दूसरे (2nd) स्थान पर।
👉मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh): तीसरे (3rd) स्थान पर।
👉पश्चिम बंगाल: मवेशियों (Cattle) की संख्या में सबसे आगे है।
📕पशुओं के प्रकार और प्रतिशत (Category-wise Share)
भारत में पशुओं का वितरण लगभग इस प्रकार है:
मवेशी (Cattle): ~35.94%
बकरियां (Goats): ~27.80%
भैंस (Buffaloes): ~20.45%
भेड़ (Sheep): ~13.87%
सूअर (Pigs): ~1.69%
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📕यूपी राज्य पक्षी सारस की आबादी बढ़कर 9,918 हो गई |
✍ 10 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश के वन विभाग द्वारा जारी नवीनतम 2024 ग्रीष्मकालीन जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, राज्य पक्षी, सारस की कुल आबादी राज्य में बढ़कर 19,918 हो गई है |
✍जो पिछले वर्ष की तुलना में 396 की वृद्धि दर्शाता है।
✍उत्तर प्रदेश वन विभाग की 2024 ग्रीष्मकालीन जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, किस वन प्रभाग में सारस पक्षी की संख्या सबसे अधिक है
👉 इटावा वन प्रभाग(3289,पक्षी),
👉उसके बाद मैनपुरी वन प्रभाग(2945)
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✍ 10 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश के वन विभाग द्वारा जारी नवीनतम 2024 ग्रीष्मकालीन जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, राज्य पक्षी, सारस की कुल आबादी राज्य में बढ़कर 19,918 हो गई है |
✍जो पिछले वर्ष की तुलना में 396 की वृद्धि दर्शाता है।
✍उत्तर प्रदेश वन विभाग की 2024 ग्रीष्मकालीन जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, किस वन प्रभाग में सारस पक्षी की संख्या सबसे अधिक है
👉 इटावा वन प्रभाग(3289,पक्षी),
👉उसके बाद मैनपुरी वन प्रभाग(2945)
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