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✅ गवर्नर/गवर्नर जनरल/वायसराय द्वारा किए गए प्रमुख कार्य 👇👇

• अंग्रेजी शिक्षा - विलियम बैंटिंक

• सामाजिक सुधार - विलियम बैंटिंक

• ठगों का दमन - कैप्टन स्लीमन

• प्रेस पर प्रतिबंध हटाना - चार्ल्स मेटकॉफ

• सिन्ध का विलय - लॉर्ड एलनबरो

• दास प्रथा का अंत - लॉर्ड एनलबरो

• राज्य अपहरण की नीति - लॉर्ड डलहौजी

• व्यपगत का सिद्धान्त - लॉर्ड डलहौजी

• राज्य हड़प नीति - लॉर्ड डलहौजी

• ड्राक्सिन ऑफ लैप्स - लॉर्ड डलहौजी

• अवध का विलय - लॉर्ड डलहौजी

• चतुराईपूर्ण निष्क्रियता की नीति - जान लॉरेंस

• वर्नाकुलर प्रेस एक्ट - लॉर्ड लिटन

• अग्रफारवर्ड नीति - लॉर्ड रिपन

• स्थानीय स्वशासन - लॉर्ड रिपन


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🔰संविधान में संशोधन की प्रक्रिया

👉संविधान के भाग 20 के अनुच्छेद 368 में संसद को संविधान एवं इसकी व्यवस्था में संशोधन की शक्ति प्रदान करता है।

यह प्रावधान करता है कि संसद अपनी संवैधानिक शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के किसी उपबंध कापरिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के रूप में संशोधन कर सकती है।

👉हलाकि संसद उन व्यवस्थाओ को संशोधित नही कर सकती जो संविधान के मूल ढांचे की संरचना से सम्बद्ध हो यह व्यवस्था उच्चतम न्यायलय द्वारा केशवानंद भारती मामले (1973) में की।

👉अनुछेद 368 के अंतर्गत यह निम्नलिखित तरीके से हो सकती है-

👉 संविधान के संशोधन का आरम्भ संसद के किसी भी सदन में किया जा सकता है किन्तु राज्य विधान मंडल में नही।

👉 विधेयक को मंत्री या गैर सरकारी सदस्यों द्वारा पुर्स्थापित किया जा सकता है।

👉विधेयक को दोनो सदनों में विशेष बहुमत से पारित कराना अनिवार्य है।

👉दोनों ही सदनों में विधेयक अलग अलग पारित होना चाहिए और असहमति या गतिरोध की की स्थिति में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नही है।

👉 विधेयक के संघीय व्यवस्था से सम्बंधित होने पर उसे आधे राज्यों के विधानमंडल से भी सामान्य बहुमत से पारित होना चाहिए।

👉 राष्ट्रपति विधेयक को सहमती देंगे क्यूंकि वे विधेयक को न तो अपने पास रख सकते है और न ही संसद के पास पुनर्विचार के लिये भेज सकते है। राष्ट्रपति की सहमति के बाद विधेयक अधिनियम बन जाता है।

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👉
52वाँ संशोधन (1985):

संसद और विधान मंडलों के सदस्यों को दल-बदल के आधार पर वर्गीकरण की व्यवस्था दी गई और इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए एक नई अनुसूची (दसवीं अनुसूची) को जोड़ा गया।

👉61वाँ संशोधन (1988)

विपक्ष और राज्य विधान सभा के चुनाव में मतदान की आयु 21 वर्ष से 18 वर्ष कर दी गई।

👉73वाँ और 74वाँ संशोधन (1992):

73वाँ संशोधन अधिनियम:
इस संशोधन के माध्यम से अलौकिक राज संस्था को संवैधानिक बनाया गया।

👉इस अधिनियम में भारत के संविधान का एक नया भाग-IX जोड़ा गया है तथा इसमें 243 से 243O तक के जुलूस शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त अधिनियम में संविधान द्वारा एक नई 11वीं अनुसूची का भी मिलान किया गया है और इसमें परियोजना के 29 संरचनात्मक विषयों को शामिल किया गया है।

👉74वाँ संशोधन अधिनियम:

👉शहरी स्थानीय संस्था 1992 में पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान 74वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से इसे संवैधानिक बनाया गया था। यह 1 जून, 1993 को लागू हुआ।
इसमें भाग IX-A को जोड़ा गया है और इसमें 243-पी से 243-जेडजी तक के प्रॉजेक्ट को शामिल किया गया है।

👉इसके अलावा इस अधिनियम द्वारा संविधान में 12वीं अनुसूची का भी मिलान किया गया । नगर पालिकाओं के 18 कार्यात्मक मद शामिल हैं।


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👉102वां संशोधन अधिनियम, 2018-

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।

इस अधिनियम ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पिछड़े वर्गों से संबंधित कार्यों से मुक्त कर दिया।

इसने राष्ट्रपति को किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को निर्दिष्ट करने का अधिकार भी दिया

।

103वां संशोधन अधिनियम, 2019-

राज्य को नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) की उन्नति के लिए कोई विशेष प्रावधान करने का अधिकार दिया गया।

ईडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ प्राप्त करने के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है।

राज्य को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए कुछ वर्गों के लिए 10% तक सीटें आरक्षित करने की अनुमति दी गई थी, जिसमें अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर निजी शैक्षणिक संस्थान भी शामिल थे, जिन्हें राज्य द्वारा सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त थी। 10% तक का यह अतिरिक्त आरक्षण पहले से किए गए आरक्षण के अतिरिक्त होगा।

104वां संशोधन अधिनियम, 2020-

लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों की समाप्ति की समय-सीमा को 70 वर्ष से बढ़ाकर 80 वर्ष करना।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित सीटों को हटाना।

105वां संशोधन अधिनियम, 2020-
इसने सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) की पहचान करने और उन्हें मान्यता देने की राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की शक्ति को बहाल कर दिया।

यह संशोधन 15 अगस्त, 2021 से प्रभावी हो गया।


106वां संशोधन अधिनियम, 2020-

इसे महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है।

यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करता है।

यह संशोधन सितंबर 2023 में पारित किया गया तथा 28 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई।

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👉42वां संशोधन अधिनियम, 1976 (लघु संविधान)-

👉42वें संशोधन अधिनियम में तीन नए शब्द जोड़े गए, अर्थात् समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता, जिन्हें प्रस्तावना में जोड़ा गया।

नागरिकों द्वारा मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया (नया भाग IV A)।

👉राष्ट्रपति अनुच्छेद 74 के अधीन अपने कार्यों के निर्वहन में मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा।

👉प्रशासनिक न्यायाधिकरणों और अन्य मामलों के लिए न्यायाधिकरणों का प्रावधान किया गया (भाग XIV A जोड़ा गया)।

👉1971 की जनगणना के आधार पर 2001 तक लोक सभा और राज्य विधान सभाओं में सीटों का रखरखाव।

👉संवैधानिक संशोधन न्यायिक जांच से परे किये गये।

👉लोक सभा और राज्य विधान सभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया गया।

👉जब तक कुछ मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाता, तब तक निदेशक सिद्धांतों को लागू करने के लिए बनाए गए कानूनों को अदालतों द्वारा अवैध नहीं माना जा सकता।

👉राज्य नीति के तीन नए निर्देशक सिद्धांत जोड़े गए, अर्थात समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता, उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी, तथा पर्यावरण, वन और वन्य जीवन का संरक्षण।

👉भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को सुगम बनाना।

👉किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की एक बार की अवधि को 6 महीने से बढ़ाकर एक वर्ष करना।

👉शिक्षा, वन, वन्य पशु और पक्षी संरक्षण, माप-तौल और न्याय प्रशासन, संविधान, तथा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के अलावा सभी न्यायालयों के संगठन सहित पांच विषयों को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिया गया।

👉अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना।

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📕प्रस्तावनाः संविधान का हिस्सा है या नहीं

बेरुबारी मामले में (1960):

प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है।

गोलकनाथ बनाम पंजाब 1967
वाद में उद्देशिका संविधान की मूल आत्मा है

केशवानंद भारती मामले (1973) में:

सुप्रीम कोर्ट ने पहले की राय को खारिज कर दिया और कहा कि प्रस्तावना संविधान का एक हिस्सा है और इसमें संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते कि बुनियादी सुविधाओं में कोई संशोधन नहीं किया गया हो।

यह संविधान की सच्ची भावना की व्याख्या करने के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है
।

एलआईसी ऑफ इंडिया केस (1995)

ने प्रस्तावना को बरकरार रखा और कहा कि यह संविधान का एक अभिन्न अंग है।

प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही विधायिका की शक्ति पर रोक है। यह न्यायोचित नहीं है, अर्थात इसके प्रावधान कानून की अदालत में लागू करने योग्य नहीं हैं।

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📕संसद का संविधान में संशोधन करने की शक्ति

शंकरी प्रसाद बनाम भारत सरकार, 1951

संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति है।


सज्जन सिंह बनाम राजस्थान सरकार, 1965

. संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति है।


गोलक नाथ बनाम पंजाब सरकार, 1967

संसद को संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) में संशोधन करने का अधिकार नहीं है।

केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार, 1973

संसद के किसी भी प्रावधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन 'बुनियादी संरचना' को कमजोर नहीं कर सकती है।


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📕 जम्मू-कश्मीर_ घाटी

1 मर्खा घाटी_लद्दाख की प्रसिद्ध घाटी है, हेमि राष्ट्रीय उद्याने हेतु मार्ग उपलब्ध कराती है।



📕2 कश्मीर घाटी-
महान हिमालय एवं पीरपंजाल श्रेणियों के मध्य अवस्थित बनिहाल दरें द्वारा जम्मू से जुड़ी हुई है। इसकी रचना एक समभिनति में हुई है।

📕3 नुब्रा
घाटी_सियाचिन हिमनद से निकलने वाली नुब्रा नदी द्वारा निर्मित है।


📕4 शुरू
_इसका कारगिल कस्बे के लिये काफी महत्त्व है।


📕 हिमाचल प्रदेश

📕 1 किन्नौर घाटी

यह घाटी हिमाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है जो तिब्बत की सीमा के समीप है। यह हिमाचल प्रदेश के अंतिम गाँव 'चिटकुल' को मार्ग प्रदान करता है।


📕2 पार्वती घाटी
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू स्थित यह घाटी हिंदू एवं सिख तीर्थ यात्रियों को मणिकरण शहर जाने के लिये मार्ग प्रदान करती है (मणिकरण गर्म पानी के फव्वारों के लिये प्रसिद्ध है)।

📕3 सांगला घाटी_
इसे 'बास्पा घाटी' के नाम से भी जाना जाता है।

📕 4 मालना घाटी_
यह हिमाचल प्रदेश में 'छोटा यूनान' के रूप में प्रसिद्ध है।

📕5 कुल्लू घाटी

इसे 'देवताओं की घाटी' कहा जाता है। इसे सात दिवसीय दुशहरा त्योहार के लिये भी जाना जाता है। यह धौलाधर एवं पीर पंजाल श्रेणियों के मध्य अवस्थित है।

📕6 पांगी घाटी

लाहुल, पंगवाला और भोटिया लोगों का आवास क्षेत्र है।

📕 7 स्पीति घाटी

बौद्धों का प्रसिद्ध 'ताबो मठ इसी घाटी में अवस्थित है।

📕8 लाहुल घाटी

इसी घाटी से होकर ही चंद्र एवं भागा नदियाँ प्रवाहित होती हैं।


📕 9 कांगड़ा घाटी _
प्रमुख सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थल 'धर्मशाला' इसी घाटी में अवस्थित है।

📕10 chamba

भारमौर, डलहौजी एवं खज्जियार प्रमुख पर्यटन स्थल इसी घाटी में अवस्थित हैं।



📕उत्तराखंड

📕दून घाटी

यह घाटी शिवालिक हिमालय एवं लघु हिमालय के मध्य स्थित है। यह हिमालय के अनुदैर्ध्य घाटी का उदाहरण है।

📕 जोहर घाटी

इसे मिलाम घाटी एवं गौरी गंगा घाटी के नाम से भी जाना जाता है।


📕 फूलों की घाटी

चमोली जिले में स्थित, वन्य जीवों के लिये प्रसिद्ध है। इसे यूनेस्को के बायोस्फियर नेटवर्क में 2004 में शामिल किया गया।


📕 धर्मा घाटी

इसका निर्माण धर्मागंगा नदी द्वारा होता है।

📕सोर घाटी

यह घाटी पिथौरागढ़ में स्थित है। यहाँ कत्यूरी राजवंश का शासन था; ये अयोध्या से यहाँ आये थे

।

📕 नेलांग घाटी

यह घाटी उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री नेशनल पार्क में अवस्थित है। यह भारत-चीन सीमा के निकट स्थित है, जिसे वर्ष 1962 के युद्ध के बाद बंद कर दिया गया था। मई 2015 में इसे पर्यटकों के लिये खोल दिया गया है।

📕पश्चिम बंगाल

[ ] न्योरा घाट

यह दार्जिलिंग के कलिम्पोंग में स्थित है। इसे 1986 में 'राष्ट्रीय पार्क' घोषित किया गया।

📕सिक्किम

चुंबी घाटी

चुंबी घाटी के भारत (सिक्किम), भूटान व चीन (तिब्बत) तीनों के मिलन बिंदु पर स्थित होने के कारण सामरिक महत्त्व अधिक है। 'डोकलाम' क्षेत्र इसी के अंतर्गत आता है। यह घाटी सिलीगुड़ी (भारत का चिकेन नेक) से लगभग 500 किमी. की दूरी पर है। ■ चुंबी घाटी पहले सिक्किम का हिस्सा था, जो वर्ष 1792 में तिब्बत का अंग बना। यहाँ के स्थानीय निवासियों को 'प्रोमोवा' कहा जाता है, जो तिब्बती वंश के हैं। वर्ष 1904 में अंग्रेज़ी शासन और तिब्बत के बीच हुए समझौते के बाद यह ऊन, याक उत्पाद, सुहागा एवं अन्य स्थानीय उत्पादों का बड़ा व्यापारिक मार्ग बनकर उभरा
है।

👉यूथांग घाटी

हॉट स्प्रिंग के लिये प्रसिद्ध यूथांग घाटी रोडोडेंड़ान झाड़ियों व अन्य वनस्पति प्रजातियों से ढँकी हुई है।

📕नागालैंड
[ ] जुकू घाटी
भारत के पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में स्थित, जून एवं सितंबर माह में संपूर्ण घाटी जंगली फूलों से ढँक जाती है।

📕 आंध्र प्रदेश
[ ] अराकु घाटी
[ ] यह घाटी गलीकोंडा, राक्ताकौंडा, सुंकरीमेट्टा एवं बांगर चितामोगोंडीनामक पहाड़ियों से घिरी है

📕 तमिलनाडु

कंबम घाटी
यह थेक्काड़ी, वरुसनादु एवं कोडाइकनाल पहाड़ियों इन से घिरी है।

📕केरल
[ ] शांत घाटी
जैव विविधता हेतु प्रसिद्ध, यह केरल के पलक्कड़ जिले में नीलगिरी की पहाड़ियों पर स्थित है। 1847 क में शोध हेतु रॉबर्ट वाइट यहाँ आने वाले प्रथम अंग्रेज थे। कुन्थी नदी यहाँ के वन क्षेत्र से उद्गमित होती है


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👉 अंग्रेज-मराठा संघर्ष के अन्तर्गत होने वाली प्रमुख संधियाँ

सूरत की संधि - 1775
पुरन्दर की संधि -1776
बड़गाँव की संधि-1779
सालाबाई की संधि-1782
बसीन की संधि-1802
देवगाँव की संधि -1803
सुर्जी अर्जुनगाँव की संधि -1803
राजापुर घाट की संधि -1804
नागपुर  की संधि -1816
ग्वालियर की संधि -1817
पूना की संधि -1817
मंदसौर की संधि -1818

👉 प्रथम अंगल मराठा युद्ध -
1782 ई. में सालबाई की संधि से समाप्त हुआ


👉 द्वितीय आंग्ल मराठा युद्ध -
1803 से 1805 तक लड़ा गया यह 1803 में देवगांव की संधि से समाप्त हुआ


👉 तृतीय अंगल मराठा युद्ध  -
1817 1819 में लड़ा गया और इसके द्वारा मराठा शक्ति और
पेशवा के वंशानुगत पद को खत्म कर दिया गया


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हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल :–

🔰 हड़प्पा–
   खोजकर्ता:- दयाराम साहनी (1921)।
   नदी:- रावी।
   स्थान:- पंजाब(पाकिस्तान)।
   प्रमुख साक्ष्य:- ग्रेनरी (अन्नागार), पक्की ईंटों के घर, तांबे की मूर्ति, मुहरें।

🔰 मोहनजोदड़ो–
  खोजकर्ता:- R.D. बनर्जी (1922)
  नदी:- सिंधु
  स्थान:- सिंध(पाकिस्तान)
  प्रमुख साक्ष्य:- महान स्नानागार, नृत्य करती महिला की कांस्य मूर्ति, पाशुपति मुहर, अन्नागार

🔰 चन्हूदड़ो–
  खोजकर्ता:- एन.जी. मजूमदार (1931)
  नदी:- सिन्धु
  स्थान:- सिंध(पाकिस्तान)
  प्रमुख साक्ष्य:- मनके बनाने का कारखाना, पशु की आकृति वाली मुहरें, लघु अश्व स्तूप
🔰 लोथल–
  खोजकर्ता:- एस.आर. राव (1954)।
  नदी:- भोगवा नदी।
  स्थान:- गुजरात।
  प्रमुख साक्ष्य:- डॉकयार्ड (गोदी), चावल के अवशेष, जल निकासी व्यवस्था

🔰 कालीबंगा–
  खोजकर्ता:- अमलानंद घोष (1953)।
  नदी:- घग्गर-हकरा।
  स्थान:- राजस्थान।
  प्रमुख साक्ष्य:- जले हुए घर, हल चलाने के निशान, कंकाल, तांबे के औजार

🔰 धोलावीरा–
  खोजकर्ता:- J.P. जोशी (1967-68)
  स्थान:- गुजरात के कच्छ जिले में मनसर और मानसरोवर झील के पास।
  प्रमुख साक्ष्य:- जल संचयन प्रणाली, तीन भागों में बसा नगर, सबसे बड़ा हड़प्पाई लेख

🔰 राखीगढ़ी–
  खोजकर्ता:- 1963 में खोजा गया
  नदी:- घग्गर-हकरा।
  स्थान:- हरियाणा।
  प्रमुख साक्ष्य:- सबसे बड़ा हड़प्पाई स्थल, पक्की ईंटों के मकान, मिट्टी के बर्तन।
🔰 बनवाली–
  खोजकर्ता:- आर.एस. बिष्ट (1973)
  नदी:- रंगोई नदी।
  स्थान:- हरियाणा।
  प्रमुख साक्ष्य:- मिट्टी के बर्तन, कृषि के अवशेष, अन्न भंडारण स्थल।


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🔰 प्रथम जैन संगीति या सभा

▪️शासनकाल – चन्द्रगुप्त मौर्य
▪️स्थान – पाटलिपुत्र
▪️अध्यक्ष – स्थूलभद्र
▪️कार्य – जैन धर्म के १२ अंगों का सम्पादन किया गया।
▪️विवाद – जैन धर्म दो सम्प्रदायों में बँट गया —
     पहला - दिगम्बर, द्वितीय- श्वेताम्बर
▪️इस संगीति की सबसे बड़ी घटना थी कि जैन धर्म दो सम्प्रदायों में बंट गया।

🔰द्वितीय जैन संगीति या सभा

▪️शासनकाल – गुप्तकाल
▪️स्थान – वल्लभी या बलभी, गुजरात
▪️अध्यक्ष – देवर्षि क्षमाश्रवण
▪️कार्य – जैन साहित्य का अंतिम संकलन जो आज तक विद्यमान है।
▪️तृतीय जैन सभा बलभी में हुई और इसमें जैन धर्म और साहित्यों को अंतिम रूप दिया


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📕 जम्मू-कश्मीर_ घाटी

1 मर्खा घाटी_लद्दाख की प्रसिद्ध घाटी है, हेमि राष्ट्रीय उद्याने हेतु मार्ग उपलब्ध कराती है।



📕2 कश्मीर घाटी-
महान हिमालय एवं पीरपंजाल श्रेणियों के मध्य अवस्थित बनिहाल दरें द्वारा जम्मू से जुड़ी हुई है। इसकी रचना एक समभिनति में हुई है।

📕3 नुब्रा
घाटी_सियाचिन हिमनद से निकलने वाली नुब्रा नदी द्वारा निर्मित है।


📕4 शुरू
_इसका कारगिल कस्बे के लिये काफी महत्त्व है।


📕 हिमाचल प्रदेश

📕 1 किन्नौर घाटी

यह घाटी हिमाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है जो तिब्बत की सीमा के समीप है। यह हिमाचल प्रदेश के अंतिम गाँव 'चिटकुल' को मार्ग प्रदान करता है।


📕2 पार्वती घाटी
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू स्थित यह घाटी हिंदू एवं सिख तीर्थ यात्रियों को मणिकरण शहर जाने के लिये मार्ग प्रदान करती है (मणिकरण गर्म पानी के फव्वारों के लिये प्रसिद्ध है)।

📕3 सांगला घाटी_
इसे 'बास्पा घाटी' के नाम से भी जाना जाता है।

📕 4 मालना घाटी_
यह हिमाचल प्रदेश में 'छोटा यूनान' के रूप में प्रसिद्ध है।

📕5 कुल्लू घाटी

इसे 'देवताओं की घाटी' कहा जाता है। इसे सात दिवसीय दुशहरा त्योहार के लिये भी जाना जाता है। यह धौलाधर एवं पीर पंजाल श्रेणियों के मध्य अवस्थित है।

📕6 पांगी घाटी

लाहुल, पंगवाला और भोटिया लोगों का आवास क्षेत्र है।

📕 7 स्पीति घाटी

बौद्धों का प्रसिद्ध 'ताबो मठ इसी घाटी में अवस्थित है।

📕8 लाहुल घाटी

इसी घाटी से होकर ही चंद्र एवं भागा नदियाँ प्रवाहित होती हैं।


📕 9 कांगड़ा घाटी _
प्रमुख सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थल 'धर्मशाला' इसी घाटी में अवस्थित है।

📕10 chamba

भारमौर, डलहौजी एवं खज्जियार प्रमुख पर्यटन स्थल इसी घाटी में अवस्थित हैं।



📕उत्तराखंड

📕दून घाटी

यह घाटी शिवालिक हिमालय एवं लघु हिमालय के मध्य स्थित है। यह हिमालय के अनुदैर्ध्य घाटी का उदाहरण है।

📕 जोहर घाटी

इसे मिलाम घाटी एवं गौरी गंगा घाटी के नाम से भी जाना जाता है।


📕 फूलों की घाटी

चमोली जिले में स्थित, वन्य जीवों के लिये प्रसिद्ध है। इसे यूनेस्को के बायोस्फियर नेटवर्क में 2004 में शामिल किया गया।


📕 धर्मा घाटी

इसका निर्माण धर्मागंगा नदी द्वारा होता है।

📕सोर घाटी

यह घाटी पिथौरागढ़ में स्थित है। यहाँ कत्यूरी राजवंश का शासन था; ये अयोध्या से यहाँ आये थे

।

📕 नेलांग घाटी

यह घाटी उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री नेशनल पार्क में अवस्थित है। यह भारत-चीन सीमा के निकट स्थित है, जिसे वर्ष 1962 के युद्ध के बाद बंद कर दिया गया था। मई 2015 में इसे पर्यटकों के लिये खोल दिया गया है।

📕पश्चिम बंगाल

[ ] न्योरा घाट

यह दार्जिलिंग के कलिम्पोंग में स्थित है। इसे 1986 में 'राष्ट्रीय पार्क' घोषित किया गया।

📕सिक्किम

चुंबी घाटी

चुंबी घाटी के भारत (सिक्किम), भूटान व चीन (तिब्बत) तीनों के मिलन बिंदु पर स्थित होने के कारण सामरिक महत्त्व अधिक है। 'डोकलाम' क्षेत्र इसी के अंतर्गत आता है। यह घाटी सिलीगुड़ी (भारत का चिकेन नेक) से लगभग 500 किमी. की दूरी पर है। ■ चुंबी घाटी पहले सिक्किम का हिस्सा था, जो वर्ष 1792 में तिब्बत का अंग बना। यहाँ के स्थानीय निवासियों को 'प्रोमोवा' कहा जाता है, जो तिब्बती वंश के हैं। वर्ष 1904 में अंग्रेज़ी शासन और तिब्बत के बीच हुए समझौते के बाद यह ऊन, याक उत्पाद, सुहागा एवं अन्य स्थानीय उत्पादों का बड़ा व्यापारिक मार्ग बनकर उभरा
है।

👉यूथांग घाटी

हॉट स्प्रिंग के लिये प्रसिद्ध यूथांग घाटी रोडोडेंड़ान झाड़ियों व अन्य वनस्पति प्रजातियों से ढँकी हुई है।

📕नागालैंड
[ ] जुकू घाटी
भारत के पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में स्थित, जून एवं सितंबर माह में संपूर्ण घाटी जंगली फूलों से ढँक जाती है।

📕 आंध्र प्रदेश
[ ] अराकु घाटी
[ ] यह घाटी गलीकोंडा, राक्ताकौंडा, सुंकरीमेट्टा एवं बांगर चितामोगोंडीनामक पहाड़ियों से घिरी है

📕 तमिलनाडु

कंबम घाटी
यह थेक्काड़ी, वरुसनादु एवं कोडाइकनाल पहाड़ियों इन से घिरी है।

📕केरल
[ ] शांत घाटी
जैव विविधता हेतु प्रसिद्ध, यह केरल के पलक्कड़ जिले में नीलगिरी की पहाड़ियों पर स्थित है। 1847 क में शोध हेतु रॉबर्ट वाइट यहाँ आने वाले प्रथम अंग्रेज थे। कुन्थी नदी यहाँ के वन क्षेत्र से उद्गमित होती है


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🔰राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां

👉 राष्ट्रपति संसद का एक अभिन्न अंग है।
👉राष्ट्रपति भारतीय निर्वाचन आयोग से परामर्श कर संसद के किसी सदस्य की निर्हरता के प्रश्न पर निर्णय करता है

👉संसद को आहूत करता है

👉लोकसभा को विघटित कर सकता है।

👉संसद के संयुक्त अधिवेशन अनु०108 का आह्वान कर सकता है जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष अनु०118(4) करता है।

👉 प्रत्येक नए चुनाव के बाद तथा प्रत्येक वर्ष संसद के प्रथम अधिवेशन को संबोधित कर सकता है।

👉संसद में लंबित किसी विधेयक या अन्यथा किसी संबंध में संसद को संदेश भेज सकता है।

👉यदि लोकसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष दोनों के पद रिक्त हों तो वह लोकसभा के किसी भी सदस्य को सदन की अध्यक्षता सौंप सकता है।

👉इसी प्रकार यदि राज्यसभा के सभापति व उप-सभापति दोनों पद रिक्त हों तो वह राज्यसभा के किसी भी सदस्य को सदन की अध्यक्षता सौंप सकता है।


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🔰 प्रथम जैन संगीति या सभा

▪️शासनकाल – चन्द्रगुप्त मौर्य
▪️स्थान – पाटलिपुत्र
▪️अध्यक्ष – स्थूलभद्र
▪️कार्य – जैन धर्म के १२ अंगों का सम्पादन किया गया।
▪️विवाद – जैन धर्म दो सम्प्रदायों में बँट गया —
     पहला - दिगम्बर, द्वितीय- श्वेताम्बर
▪️इस संगीति की सबसे बड़ी घटना थी कि जैन धर्म दो सम्प्रदायों में बंट गया।

🔰द्वितीय जैन संगीति या सभा

▪️शासनकाल – गुप्तकाल
▪️स्थान – वल्लभी या बलभी, गुजरात
▪️अध्यक्ष – देवर्षि क्षमाश्रवण
▪️कार्य – जैन साहित्य का अंतिम संकलन जो आज तक विद्यमान है।
▪️तृतीय जैन सभा बलभी में हुई और इसमें जैन धर्म और साहित्यों को अंतिम रूप दिया


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🔆 प्राचीन भारत में साहित्यिक गतिविधियाँ

📍 प्रारंभिक व्याकरण और कानून की पुस्तकें
✅ अष्टाध्यायी – पाणिनी (5वीं शताब्दी ईसा पूर्व) , सबसे प्रारंभिक व्याकरण पुस्तक, जिसे भगवती सूत्र भी कहा जाता है
✅ महाभाष्य – पतंजलि द्वारा लिखित
✅ मनुस्मृति – एक कानून की किताब
✅ अर्थशास्त्र – कौटिल्य द्वारा लिखित
✅ इंडिका – मेगस्थनीज द्वारा , मौर्य समाज और प्रशासन का एक स्रोत
✅ चण्डसूत्र – पिंगला द्वारा लिखित

📍 बौद्ध एवं शास्त्रीय साहित्यिक कृतियाँ
✅ बुद्धचरित – अश्वघोष द्वारा
✅ रघुवंश – कालिदास द्वारा
✅ नैषध चरित – श्री हर्ष द्वारा

📍 शास्त्रीय एवं काव्य साहित्य
✅ कामसूत्र और आर्य मंजुश्री – वात्स्यायन द्वारा
✅ पवनधूत – धोयी द्वारा
✅ स्वप्न वासवदत्ता – भासा द्वारा
✅ मतविलास प्रहसन – महेंद्रवर्मन प्रथम द्वारा
✅ हर्षचरित – बाणभट्ट द्वारा लिखित
✅ विक्रमदेव चरित – बिल्हण द्वारा लिखित

📍 संस्कृत एवं अन्य शास्त्रीय कृतियाँ
✅ दशकुमारचरित – दण्डिन द्वारा
✅ वासवदत्ता – सुबांडु द्वारा
✅ बृहत् कथामंजरी – क्षेमेन्द्र द्वारा
✅ कथासरित्सागर – सोमदेव द्वारा
✅ पंचतंत्र – विष्णुशर्मा द्वारा
✅ हितोपदेश – नारायण पंडित द्वारा

📍 यात्रा एवं ऐतिहासिक विवरण
✅ फ़ो-क्यो-की – फ़ा-हिएन द्वारा
✅ सी-यू-की – ह्वेन त्सांग द्वारा

📍 वैज्ञानिक एवं खगोलीय ग्रंथ
✅ पंचसिद्धांतिका – वराहमिहिर द्वारा
✅ सूर्यसिद्धांतिका और आर्यभट्टीयम – आर्यभट्ट द्वारा
✅ नीतिसार – कामन्दका द्वारा
✅ चरक संहिता – चरक द्वारा
✅ हस्तायुर्वेद – पालकाप्य द्वारा

📍 कानूनी और चिकित्सा ग्रंथ
✅ मिताक्षरा – विग्नेश्वर द्वारा
✅ दायभाग – जीमूतवाहन द्वारा
✅ सिद्धांत सिरोमणि – भास्कराचार्य द्वारा
✅ निगाहन्तु – धन्वन्तरि द्वारा

📍 ऐतिहासिक एवं राजनीतिक कार्य
✅ मुद्राराक्षस – विशाखदत्त द्वारा
✅ प्रबंध चिंतामणि – मेरुथुंगा द्वारा
✅ भारत का भूगोल – टॉलेमी द्वारा
✅ बृहत् कथाकोश – हरिषेण द्वारा
✅ मृचकटिका – शूद्रक द्वारा
✅ पृथ्वीराज विजया – जयानक द्वारा
✅ नाला वेम्बा – पुगालेंडी द्वारा

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52वाँ संशोधन (1985):

संसद और विधान मंडलों के सदस्यों को दल-बदल के आधार पर वर्गीकरण की व्यवस्था दी गई और इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए एक नई अनुसूची (दसवीं अनुसूची) को जोड़ा गया।

👉61वाँ संशोधन (1988)

विपक्ष और राज्य विधान सभा के चुनाव में मतदान की आयु 21 वर्ष से 18 वर्ष कर दी गई।

👉73वाँ और 74वाँ संशोधन (1992):

73वाँ संशोधन अधिनियम:
इस संशोधन के माध्यम से अलौकिक राज संस्था को संवैधानिक बनाया गया।

👉इस अधिनियम में भारत के संविधान का एक नया भाग-IX जोड़ा गया है तथा इसमें 243 से 243O तक के जुलूस शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त अधिनियम में संविधान द्वारा एक नई 11वीं अनुसूची का भी मिलान किया गया है और इसमें परियोजना के 29 संरचनात्मक विषयों को शामिल किया गया है।

👉74वाँ संशोधन अधिनियम:

👉शहरी स्थानीय संस्था 1992 में पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान 74वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से इसे संवैधानिक बनाया गया था। यह 1 जून, 1993 को लागू हुआ।
इसमें भाग IX-A को जोड़ा गया है और इसमें 243-पी से 243-जेडजी तक के प्रॉजेक्ट को शामिल किया गया है।

👉इसके अलावा इस अधिनियम द्वारा संविधान में 12वीं अनुसूची का भी मिलान किया गया । नगर पालिकाओं के 18 कार्यात्मक मद शामिल हैं।


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👉102वां संशोधन अधिनियम, 2018-

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।

इस अधिनियम ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पिछड़े वर्गों से संबंधित कार्यों से मुक्त कर दिया।

इसने राष्ट्रपति को किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को निर्दिष्ट करने का अधिकार भी दिया

।

103वां संशोधन अधिनियम, 2019-

राज्य को नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) की उन्नति के लिए कोई विशेष प्रावधान करने का अधिकार दिया गया।

ईडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ प्राप्त करने के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है।

राज्य को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए कुछ वर्गों के लिए 10% तक सीटें आरक्षित करने की अनुमति दी गई थी, जिसमें अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर निजी शैक्षणिक संस्थान भी शामिल थे, जिन्हें राज्य द्वारा सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त थी। 10% तक का यह अतिरिक्त आरक्षण पहले से किए गए आरक्षण के अतिरिक्त होगा।

104वां संशोधन अधिनियम, 2020-

लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों की समाप्ति की समय-सीमा को 70 वर्ष से बढ़ाकर 80 वर्ष करना।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित सीटों को हटाना।

105वां संशोधन अधिनियम, 2020-
इसने सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) की पहचान करने और उन्हें मान्यता देने की राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की शक्ति को बहाल कर दिया।

यह संशोधन 15 अगस्त, 2021 से प्रभावी हो गया।


106वां संशोधन अधिनियम, 2020-

इसे महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है।

यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करता है।

यह संशोधन सितंबर 2023 में पारित किया गया तथा 28 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई।

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👉42वां संशोधन अधिनियम, 1976 (लघु संविधान)-

👉42वें संशोधन अधिनियम में तीन नए शब्द जोड़े गए, अर्थात् समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता, जिन्हें प्रस्तावना में जोड़ा गया।

नागरिकों द्वारा मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया (नया भाग IV A)।

👉राष्ट्रपति अनुच्छेद 74 के अधीन अपने कार्यों के निर्वहन में मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा।

👉प्रशासनिक न्यायाधिकरणों और अन्य मामलों के लिए न्यायाधिकरणों का प्रावधान किया गया (भाग XIV A जोड़ा गया)।

👉1971 की जनगणना के आधार पर 2001 तक लोक सभा और राज्य विधान सभाओं में सीटों का रखरखाव।

👉संवैधानिक संशोधन न्यायिक जांच से परे किये गये।

👉लोक सभा और राज्य विधान सभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया गया।

👉जब तक कुछ मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाता, तब तक निदेशक सिद्धांतों को लागू करने के लिए बनाए गए कानूनों को अदालतों द्वारा अवैध नहीं माना जा सकता।

👉राज्य नीति के तीन नए निर्देशक सिद्धांत जोड़े गए, अर्थात समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता, उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी, तथा पर्यावरण, वन और वन्य जीवन का संरक्षण।

👉भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को सुगम बनाना।

👉किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की एक बार की अवधि को 6 महीने से बढ़ाकर एक वर्ष करना।

👉शिक्षा, वन, वन्य पशु और पक्षी संरक्षण, माप-तौल और न्याय प्रशासन, संविधान, तथा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के अलावा सभी न्यायालयों के संगठन सहित पांच विषयों को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिया गया।

👉अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना।

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