एक पेड़ मां के नाम
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रैयतवाड़ी व्यवस्था
रैयतवाड़ी व्यवस्था: किसानों के साथ व्यक्तिगत रूप से किए गए लगान समझौते को रैयतवाड़ी कहा गया है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत ब्रिटिश भारत की 51% भूमि आई। 1792 ई० में रैयतवाड़ी व्यवस्था वारामहल जिले में पहली बार कर्नल रीड द्वारा लागू की गई। 1820 में यह व्यवस्था मद्रास में लागू कर दी गई और इसे सुचारु रूप से चलाने के लिए मुनरो को मद्रास का गवर्नर नियुक्त किया गया। 1825 में यह व्यवस्था बम्बई में लागू कर दी गई तथा 1858 तक यह व्यवस्था सम्पूर्ण दक्कन और अन्य क्षेत्रों में लागू कर दी गई।
इस व्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ निम्न थीं-
👉सरकार और किसान के बीच कोई बिचौलिया वर्ग नहीं था।
👉भूमि का स्वामित्व किसानों को दिया गया जिससे वे भूमि का विक्रय कर सकते थे एवं गिरवी रख सकते थे।
👉लगान की अदायगी न होने पर भूमि जब्त की जा सकती थी।
👉लगान अदाएगी की प्रत्येक 30 वर्ष बाद पुनर्समीक्षा करने की व्यवस्था की गई थी।
👉राजस्व के रूप में किसानों को उपज का 1/2 भाग देना था, जो धन के रूप में देना होता था।
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कैबिनेट मिशन योजना (1946)
👉कैबिनेट मिशन 24 मार्च, 1946 को दिल्ली आया
👉 इसके अध्यक्ष भारत मंत्री लॉर्ड पैथिक लॉरेंस थे तथा अन्य दो सदस्य स्टैफोर्ड क्रिप्स (अध्यक्ष बोर्ड ऑफ ट्रेड) तथा ए.वी. एलेक्जेंडर (नौसेना मंत्री) थे।
👉कैबिनेट मिशन ने त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था को सुझाया।
👉 प्रांतों के छोटे अथवा बड़े गुट बनाने के अधिकार की पुष्टि की तथा प्रांतों को अ, ब और स तीन श्रेणियों में विभक्त किया।
👉 कैबिनेट मिशन ने अपने प्रस्तावों की घोषणा की, इसके प्रमुख प्रस्ताव थे-
(1) भारत की एकता बनाई रखी जाए।
(2) मुस्लिम लीग की पाकिस्तान कीमांग ठुकरा दी गई।
(3) भारत एक संघ होगा जिसमें ब्रिटिश प्रांत तथा देशी रियासतें शामिल होंगी।
(4) संविधान निर्मात्री संस्था या संविधान सभा का गठन प्रांतीय विधानसभाओं तथा देशी रियासतों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाए।
कैबिनेट मिशन, 1946 ने वायसराय की एक्जीक्यूटिव काउंसिल का पुनर्गठन कर अंतरिम सरकार के गठन का सुझाव दिया
👉कैबिनेट मिशन योजना के पक्ष में गांधीजी पूरी तरह से थे।
👉 इस योजना के संदर्भ में गांधीजी ने कहा-' यह योजना उस समय की परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में सबसे उत्कृष्ट योजना थी, जिसमें ऐसे बीज थे, जिनसे दुःख की मारी भारत भूमि यातना से मुक्त हो सकती थी।"
👉 मौलाना अबुल कलाम आजाद कैबिनेट मिशन के भारत आगमन के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे।
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🛑 *भारत का उपराष्ट्रपति*
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▪️ यह भारत का दूसरा सर्वोच्च पद होता है।
▪️ उपराष्ट्रपति का पद अमेरिका के संविधान से लिया गया है।
▪️ अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
▪️ भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
▪️ उपराष्ट्रपति पद के लिए योग्यता :
🎯 भारत का नागरिक ।
🎯 35 वर्ष की आयु ।
🎯 राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
🎯 किसी लाभ के पद पर ना हो।
▪️ अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के निर्वाचित तथा मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं।
▪️ उपराष्ट्रपति के चुनाव के नामांकन के लिए उम्मीदवार के लिए कम से कम 20 प्रस्तावक और 20 अनुमोदक होने आवश्यक है।
▪️ उपराष्ट्रपति का निर्वाचन सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमण मत द्वारा और निर्वाचन गुप्त मतदान द्वारा होता है।
▪️अनुच्छेद 69 के अनुसार उपराष्ट्रपति को पद ग्रहण करने से पूर्व राष्ट्रपति अथवा उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ लेनी पड़ती है।
▪️ अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति की पदावधि सामान्यतः 5 वर्ष होती है।
▪️ 5 वर्ष के पूर्व भी यह अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को दे सकता है।
▪️ उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत द्वारा संकल्प पारित कर हटाया जा सकता है।
▪️ उपराष्ट्रपति अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी तब तक पद पर बना रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।
▪️ उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित विवादों का निपटारा उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाता है ,निर्वाचन अवैध होने पर उसके द्वारा किए गए कार्य अवैध नहीं होते हैं।
▪️ उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के सभापति का वेतन तथा भत्ता प्रदान किया जाता है।
▪️ राष्ट्रपति के पद खाली रहने पर उपराष्ट्रपति ,राष्ट्रपति की हैसियत से कार्य करता है।
▪️ राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सब शक्तियां उपलब्धियां और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।
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UPSSSC | LOWER PCS 2026 | पर्यावरणीय सम्मेलन, प्रोटोकॉल व आंदोलन | 50+ नंबर पक्के 🎯 | Environment Marathon👇👇
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