📕 आपात उपबंध
👉 भारतीय संविधान में तीन प्रकार के आपातकाल की व्यवस्था की गई है –
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📕 राष्ट्रीय आपात :–
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👉 भारतीय संविधान में तीन प्रकार के आपातकाल की व्यवस्था की गई है –
राष्ट्रीय आपात , राष्ट्रपति शासन ,वित्तीय आपात
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📕 राष्ट्रीय आपात :–
▪️ अनुच्छेद 352 में राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा संबंधित प्रावधान दिए गए।📕 राष्ट्रपति शासन :—
▪️ इसकी उद्घोषणा निम्न आधार पर की जाती है –युद्ध, वाह्य आक्रमण और सशस्त्र विद्रोह।
▪️ 44वे संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा *सशस्त्र विद्रोह शब्द को आंतरिक अशांति शब्द से प्रतिस्थापित* किया गया।
▪️ राष्ट्रपति आपात की घोषणा तभी करता है जबकि मंत्रिमंडल इस आशय के विषय के लिखित सूचना उसे देता है।
📕अब तक तीन बार लग चुका है
▪️ एक बार अनुमोदित हो जाने पर आपात की उद्घोषणा 6 माह तक प्रवर्तन में रहती है।
▪️ यदि लोकसभा साधारण बहुमत से आपात उद्घोषणा को वापस लेने का प्रस्ताव पारित कर देती है तो राष्ट्रपति को उद्घोषणा वापस लेनी पड़ती है।
▪️ अनुच्छेद 356 के अधीन राष्ट्रपति किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है।📕 वित्तीय आपात :—
▪️ किसी राज्य में राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाने पर की राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो गया है,तो आपात स्थिति की घोषणा कर सकता है।
▪️ राज्य में आपात उद्घोषणा की अवधि 2 माह होती है।
▪️ यदि संसद के दोनों सदन इसे साधारण बहुमत से दो माह के भीतर अनुमोदित कर देते हैं तो ऐसी घोषणा जारी किए जाने की तिथि से 6 माह तक प्रवर्तन में रहती है।
▪️ राष्ट्रपति शासन की *अधिकतम अवधि 3 वर्ष तक* हो सकती है ।
▪️ अनुच्छेद-360 के तहत वित्तीय आपात की उद्घोषणा राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
▪️यदि राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाए की ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे कि भारत या उसके किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व संकट में है तो वह वित्तीय आपात की उद्घोषणा कर सकता है।
▪️ राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर ही वित्तीय आपात की उद्घोषणा करता है।
▪️ वित्तीय आपात की उद्घोषणा संसद के अनुमोदन के बिना दो माह तक प्रवर्तन में रहती है।
📕अब तक एक बार भी नहीं लगा
▪️ संसद द्वारा साधारण बहुमत से दो माह के पूर्व उद्घोषणा को अनुमोदित करने पर यह अनिश्चितकाल तक प्रवर्तन में बनी रहेगी।
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📕polity 👉20_22 प्रश्नबस इतना ही पढ़ना है
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📕science👉 22_25 प्रश्न
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📕स्वदेशी आंदोलन
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👉7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता टाउनहॉल में आयोजित एक विशाल बैठक में बहिष्कार प्रस्ताव के पारित होने के साथ, स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा की गई।
👉क्रोध करने के लि स्वदेशी आंदोलन की जड़ें विभाजन विरोधी आंदोलन में थीं, जो लॉर्ड कर्ज़न के बंगाल प्रांत को विभाजित करने के फैसले का विरोध करने के लिये शुरू किया गया था।
वर्ष 1906 में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कलकत्ता में कॉन्ग्रेस का अधिवेशन आयोजित किया गया, जिसमें स्वशासन या स्वराज को INC के लक्ष्य के रूप में घोषित किया गया।
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📕होम रूल लीग आंदोलन
👉 तिलक की होमरूल लीग (1916)
📕 एनी बेसेन्ट की होमरूल लीग (1916)
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👉 तिलक की होमरूल लीग (1916)
👉बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 में अपनी इंडियन होमरूल लीग' की स्थापना की। इसकी पहली बैठक बेलगाम में हुई और पूना को इसका मुख्यालय बनाया गया।
यह संगठन मुख्यतः महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार क्षेत्रों में सक्रिय था। तिलक की लीग को छह शाखाओं में संगठित किया गया था। इसके प्रमुख लक्ष्य थेः स्वराज्य की मांग को बल देना, भाषायी आधार पर प्रांतों की स्थापना करना और शिक्षा का प्रसार करना। तिलक ने अपने लीग के प्रचार के लिए अपने समाचार पत्रों मराठा और केसरी का इस्तेमाल किया।
👉तिलक द्वारा स्थापित होमरूल लीग के पहले अध्यक्ष जोसेफ बैष्ठिस्टा थे और एन. सी. केलकर इसके सचिव थे।
📕 एनी बेसेन्ट की होमरूल लीग (1916)
👉 सितंबर 1916 में एनी बेसेंट ने मद्रास से 'ऑल इंडिया होमरूल लीग' की शुरुआत की। यह संगठन पूरे भारत में फैला और इसकी लगभग 200 शाखाएं बनीं।Join 👉https://t.me/Amoghclasses
👉 संगठनात्मक दृष्टि से यह लीग तिलक की तुलना में कमजोर थी, लेकिन सदस्य संख्या अधिक थी। इसमें बी. एम. वाडिया और सी.पी. रामास्वामी अय्यर जैसे नेताओं की भी सक्रिय भूमिका रही।
👉 एनी बेसेंट ने कॉमनवील और न्यू इंडिया के माध्यम से अपनी लीग का प्रचार किया। एनी बेसेंट द्वारा स्थापित होम रूल लीग के प्रथम अध्यक्ष सचिव जॉर्ज अरुंडले थे।
👉अरुंडले के अलावा इस संगठन का मुख्य कार्य बी.डब्ल्यू. वाडिया और सी.पी. रामास्वामी आईयर के द्वारा संभाला जाता था।
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📕असहयोग आंदोलन -
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👉 गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन । अगस्त 1920 को प्रारंभ किया गया। पश्चिमी भारत, बंगाल तथा उत्तरी भारत में असहयोग आंदोलन को अभूतपूर्व सफलता मिली।
👉असहयोग आंदोलन के दौरान ही मोतीलाल नेहरू, लाला लाजपत राय, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू तथा राजेंद्र प्रसाद न्यायालय का बहिष्कार कर आंदोलन में कूद पड़े थे।
👉5 नवंबर 1920 को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन शुरू होने के ' 1 वर्ष के भीतर स्वराज' प्राप्त करने का नारा दिया। इसके साथ ही सरकारी उपाधि, स्कूल न्यायालयों तथा विदेशी सामानों का पूर्णतः बहिष्कार की योजना भी थी। असहयोग आंदोलन की अनेक सफलताएं है, इसी आंदोलन ने पहली बार देश की जनता को इकट्ठा किया।
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📕साइमन कमीशन (1927)
📕नेहरु रिपोर्ट -
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👉साइमन कमीशन की नियुक्ति ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने सर जॉन साइमन के नेतृत्व में की थी।
👉 इस कमीशन में सात सदस्य थे, जो सभी ब्रिटेन की संसद के मनोनीत सदस्य थे। यही कारण था कि इसे 'श्वेत कमीशन' कहा गया।
👉ब्रिटेन में होने वाले 1929 ईस्वी में आम चुनाव को ध्यान में रखकर सरकार ने 9 नवम्बर 1927 ईस्वी में साइमन कमीशन की नियुक्ति की।
👉 इस कमीशन में अध्यक्ष सहित कुल 7 सदस्य थे 1. जॉन साइमन 2. मि. बाथम 3. स्ट्रैथ कोना 4. लेन फोक्स 5. कैडेगन 6. एटली 7. बर्नोन हार्ट शोन
👉साइमन कमीशन की घोषणा 8 नवम्बर, 1927 ईस्वी को की गई। कमीशन को इस बात की जाँच करनी थी कि क्या भारत इस लायक़ हो गया है कि यहाँ लोगों को संवैधानिक अधिकार दिये जाएँ। इस कमीशन में किसी भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया, जिस कारण इसका बहुत ही तीव्र विरोध हुआ।
👉साइमन कमीशन 3 फरवरी, 1928 को बंबई पहुंचा और मार्च 1928 तक यहाँ रहा था। अपनी दूसरी यात्रा (11 अक्टूबर, 1928 से 13 अप्रैल, 1929) के दौरान, साइमन कमीशन ने देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और लाहौर, कराची, पेशावर, पूना, पटना, कलकत्ता, शिलांग, मद्रास, नागपुर और रंगून में अपने सत्र आयोजित किए। अंततः यह कमिशन दिल्ली आ गया।
📕नेहरु रिपोर्ट -
👉साइमन कमीशन (1927) के प्रत्युत्तर में नेहरू रिपोर्ट (1928) तैयार की गई थी, जिसमें भारत के नए डोमिनियन संविधान का खाका था।Join 👉https://t.me/Amoghclasses
👉इसे तैयार करने वाली सर्वदलीय समिति के अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू थे। जवाहरलाल नेहरु इस के सचिव थे। 2 मुस्लिमों सहित कुल 9 अन्य लोग इस समिति के सदस्य थे।
👉भारतीय संविधान का मसविदा तैयार करने की दिशा में भारतीयों का प्रथम प्रयास। भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य का दर्जा दिये जाने की मांग।
👉पृथक निर्वाचन व्यवस्था का विरोध, अल्पसंख्यकों हेतु पृथक स्थान आरक्षित किये जाने का विरोध करते हुए संयुक्त निर्वाचन पद्धति की मांग।
👉भाषायी आधार पर प्रांतों के गठन की मांग। 19 मौलिक अधिकारों की मांग। केंद्र एवं प्रांतो में उत्तरदायी सरकार की स्थापना की मांग।
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📕सल्तनतकालीन प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत
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▪️तारीख उल हिंद – इस पुस्तक की रचना अलबरूनी द्वारा की गई।Join 👉https://t.me/Amoghclasses
▪️चचनामा – यह पुस्तक अरबी भाषा में लिखी गई है।
▪️ताज उल मासिर – इसकी रचना हसन निजामी द्वारा की गई।
▪️तारीख ए फिरोजशाही – इसकी रचना जियाउद्दीन बरनी द्वारा की गई।
▪️ फुतूहात ए फिरोजशाही – फिरोजशाह तुगलक द्वारा लिखा गया।
▪️जैनुल अखबार – इस पुस्तक के लेखक अबू सईद थे।
▪️तबकात ए नासिर – इस पुस्तक के लेखक मिनहाज उस सिराज हैं।
▪️किताब उल रेहला –इसका लेखक अफ्रीकन यात्री इब्नबतूता था।
▪️किताब उल यामिनी – इसकी रचना "उत्बी" के द्वारा की गई थी।
▪️फतवा ए जहादारी – इस पुस्तक की रचना जियाउद्दीन बरनी ने की थी।
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📕 स्वराज्य पार्टी की स्थापना (1923)
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👉 स्वराज पार्टी को उत्तर भारत के सम्पन्न वकीलों में से एक मोतीलाल नेहरू (1861-1931 ई.) ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर से शुरू किया था। 'स्वराज' शब्द का वास्तविक अर्थ है- 'अपना स्वयं का शासन'।
👉सी.आर. दास ने (इस दौरान वे कांग्रेस के अध्यक्ष थे) कांग्रेस की अध्यक्षता से त्यागपत्र दे दिया और 1 जनवरी 1923 को मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की।
👉इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य चुनावों के माध्यम से काउंसिलो में प्रवेश कर तथा उन्हें काम न करने देकर 1919 के भारत शासन अधिनियम का उच्छेदन करना था।
👉सीआर दास स्वराज पार्टी के अध्यक्ष तथा मोतीलाल नेहरू इसके महासचिव थे। श्रीनिवास अयंगर (मद्रास प्रांत स्वराज पार्टी के संस्थापक) तथा एन. सी. केलकर स्वराज दल के मुख्य नेता थे।
👉1925 में विठ्ठल भाई पटेल का सेंट्रल लेजिस्लेटिव (केंद्रीय विधानमंडल) असेंबली का अध्यक्ष चुना जाना स्वराजियों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
👉चितरंजन दास को 'देशबंधु' के नाम से जाना जाता था।
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