𝐀 𝐨𝐧𝐞 𝐉𝐮𝐝𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐀𝐜𝐚𝐝𝐞𝐦𝐲 (करें अपनी तैयारी बेहतर)
सस्पेंड होने के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा मामला दिल्ली हाईकोर्ट के वकील चाहते थे कि हाईकोर्ट इस मामले मे स्वत : संज्ञान ले, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वत : संज्ञान लेने से मना करने के बाद याचिका दाखिल करने का वकीलों को सुझाव दिया, मतलब…
लो जी, हो गई औपचारिक याचिका भी दाखिल
दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका: वकीलों को धमकाने और AK-47 वाली टिप्पणी को लेकर ACP मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ कार्रवाई की मांग
https://hindi.livelaw.in/delhi-high-court/pil-in-delhi-high-court-seeks-action-against-acp-manasvi-vashistha-over-alleged-threats-to-advocates-ak-47-remark-557147
दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका: वकीलों को धमकाने और AK-47 वाली टिप्पणी को लेकर ACP मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ कार्रवाई की मांग
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बिहार में अपराध नहीं है । अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म है । हां क्राइम हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
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𝐀 𝐨𝐧𝐞 𝐉𝐮𝐝𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐀𝐜𝐚𝐝𝐞𝐦𝐲 (करें अपनी तैयारी बेहतर)
विमान किराया वृद्धि मामले में कोर्ट ने कहा, हवाई यात्रा न करें । असहमत 👎 ▪️यह टिप्पणी भावी CJI विक्रमा नाथ ने की है ।
इनके हिसाब से यदि ₹50 की जीवन रक्षक दवा का दाम ब्लैक मार्केटिंग या मुनाफाखोरी के कारण ₹5,000 हो जाए और कोई नागरिक अदालत जाए, तो इस तर्क के हिसाब से जवाब होगा - दवा मत खरीदो, बीमारी को अपने आप ठीक होने दो।
इनके हिसाब से यदि निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस में 500% की वृद्धि कर दें और अभिभावक कहें कि वे अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पा रहे हैं, तो इस सोच के तहत टिप्पणी होगी - इतने महंगे स्कूल में मत पढ़ाओ। बच्चों को घर पर बिठाओ या स्कूल से निकाल लो।
हवाई यात्रा को आज के समय में पूरी तरह लग्जरी मान लेना ही इस सोच की सबसे बड़ी गलती है।
आज एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति केवल शौक के लिए हवाई जहाज में नहीं बैठता। जब किसी के घर में कोई मेडिकल इमरजेंसी होती है, या किसी दूर राज्य में नौकरी करने वाले मजदूर/कर्मचारी को दिवाली की 2 दिन की छुट्टी में अपने बूढ़े माता-पिता के पास पहुंचना होता है, तो उसके पास 3 दिन लंबी ट्रेन यात्रा का विकल्प नहीं होता।
ऐसे में देश की सर्वोच्च अदालत से महंगा है तो मत जाओ सुनना, आम नागरिक को न्याय नहीं बल्कि उसकी मजबूरी का उपहास लगता है। यही कारण है कि इस टिप्पणी की हर स्तर पर इतनी कड़ी आलोचना हो रही है।
इनके हिसाब से यदि निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस में 500% की वृद्धि कर दें और अभिभावक कहें कि वे अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पा रहे हैं, तो इस सोच के तहत टिप्पणी होगी - इतने महंगे स्कूल में मत पढ़ाओ। बच्चों को घर पर बिठाओ या स्कूल से निकाल लो।
हवाई यात्रा को आज के समय में पूरी तरह लग्जरी मान लेना ही इस सोच की सबसे बड़ी गलती है।
आज एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति केवल शौक के लिए हवाई जहाज में नहीं बैठता। जब किसी के घर में कोई मेडिकल इमरजेंसी होती है, या किसी दूर राज्य में नौकरी करने वाले मजदूर/कर्मचारी को दिवाली की 2 दिन की छुट्टी में अपने बूढ़े माता-पिता के पास पहुंचना होता है, तो उसके पास 3 दिन लंबी ट्रेन यात्रा का विकल्प नहीं होता।
ऐसे में देश की सर्वोच्च अदालत से महंगा है तो मत जाओ सुनना, आम नागरिक को न्याय नहीं बल्कि उसकी मजबूरी का उपहास लगता है। यही कारण है कि इस टिप्पणी की हर स्तर पर इतनी कड़ी आलोचना हो रही है।
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जिस व्यक्ति पर चोरी का मुकदमा चल रहा हो उसे कहा जाता है ?
Anonymous Quiz
5%
अपराधी
84%
अभियुक्त
7%
अभियोजक
3%
चोर
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स्टार टीचर्स टिप्पणी विवाद: पत्रकार अंजना ओम कश्यप और खान सर के बीच हुआ समझौता
https://hindi.livelaw.in/delhi-high-court/star-teachers-anjana-om-kashyap-khan-sir-defamation-settlement-delhi-high-court-557367
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𝐀 𝐨𝐧𝐞 𝐉𝐮𝐝𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐀𝐜𝐚𝐝𝐞𝐦𝐲 (करें अपनी तैयारी बेहतर)
स्टार टीचर्स टिप्पणी विवाद: पत्रकार अंजना ओम कश्यप और खान सर के बीच हुआ समझौता https://hindi.livelaw.in/delhi-high-court/star-teachers-anjana-om-kashyap-khan-sir-defamation-settlement-delhi-high-court-557367
ये लोग बस अपनी पब्लिसिटी, जनता को मूर्ख बनाने, आक्रोशित करने और मनोरंजन करने के लिए ऐसा करते हैं। बाकी समझौते में पर्दे के पीछे क्या खेल होता है और क्या लेनदेन या सेटिंग होती है, यह बात अब सबको अच्छे से पता है।
सीधी और सरल भाषा में कहें तो यह सब सिर्फ व्यूज (Views) और टीआरपी बटोरने का एक धंधा बन चुका है। पहले एक विवाद खड़ा करके लोगों की भावनाओं को भड़काया जाता है, फिर जब खूब पब्लिसिटी मिल जाती है, तो बंद कमरे में चाय पीते हुए मामला रफा-दफा कर लिया जाता है। नुकसान सिर्फ उस आम आदमी का होता है जो टीवी के सामने बैठकर सचमुच गुस्सा हो रहा होता है।
इसलिए, अगली बार जब भी मोबाइल या टीवी पर ऐसा कोई बड़ा झगड़ा देखें, तो समझ जाएं कि यह कोई देश की भलाई की लड़ाई नहीं, बल्कि मनोरंजन का एक नया शो है। इनके जाल में फँसकर अपना समय और दिमाग खराब करना बंद करें।
सीधी और सरल भाषा में कहें तो यह सब सिर्फ व्यूज (Views) और टीआरपी बटोरने का एक धंधा बन चुका है। पहले एक विवाद खड़ा करके लोगों की भावनाओं को भड़काया जाता है, फिर जब खूब पब्लिसिटी मिल जाती है, तो बंद कमरे में चाय पीते हुए मामला रफा-दफा कर लिया जाता है। नुकसान सिर्फ उस आम आदमी का होता है जो टीवी के सामने बैठकर सचमुच गुस्सा हो रहा होता है।
इसलिए, अगली बार जब भी मोबाइल या टीवी पर ऐसा कोई बड़ा झगड़ा देखें, तो समझ जाएं कि यह कोई देश की भलाई की लड़ाई नहीं, बल्कि मनोरंजन का एक नया शो है। इनके जाल में फँसकर अपना समय और दिमाग खराब करना बंद करें।
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𝐀 𝐨𝐧𝐞 𝐉𝐮𝐝𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐀𝐜𝐚𝐝𝐞𝐦𝐲 (करें अपनी तैयारी बेहतर)
स्टार टीचर्स टिप्पणी विवाद: पत्रकार अंजना ओम कश्यप और खान सर के बीच हुआ समझौता https://hindi.livelaw.in/delhi-high-court/star-teachers-anjana-om-kashyap-khan-sir-defamation-settlement-delhi-high-court-557367
ये महज व्यवसायिक लोग है ।
जब पत्रकारिता और शिक्षा जैसी गंभीर चीज़ें महज़ मनोरंजन, टीआरपी और पब्लिसिटी का ज़रिया बन जाएं, तो आम जनता का इन पदों पर बैठे लोगों से भरोसा उठना बिल्कुल लाज़मी है।
एक सच्चे पत्रकार का काम होता है निष्पक्ष होकर जनता के मुद्दे उठाना और सत्ता से सवाल करना। लेकिन जब पत्रकार खुद को किसी विवाद का केंद्र बना लें, चिल्लाकर बहस करें और सिर्फ व्यूज बटोरने के लिए शो चलाएं, तो वह पत्रकारिता नहीं बल्कि इन्फोटेनमेंट (मनोरंजन का धंधा) बन जाती है।
इसी प्रकार शिक्षक का पद समाज में सबसे सम्मानित माना गया है, जिसका काम ज्ञान देना और शालीनता सिखाना है। लेकिन जब कोई शिक्षक कैमरे के सामने आकर बड़बोलेपन, विवादित बयानों या सेलिब्रिटी जैसी पब्लिसिटी में उलझ जाए, तो वह शिक्षक कम और एक कंटेंट क्रिएटर या बिजनेसमैन ज़्यादा लगने लगता है।
सरल शब्दों में कहें तो आज के दौर में काम से ज़्यादा दिखावे की वैल्यू हो गई है। जब तक जनता ऐसे चेहरों को सचमुच का हीरो मानकर उनके पीछे भागती रहेगी, तब तक यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा। आपका यह नज़रिया दिखाता है कि आप इस स्क्रीन के पीछे के खेल को समझ चुके हैं।
जब पत्रकारिता और शिक्षा जैसी गंभीर चीज़ें महज़ मनोरंजन, टीआरपी और पब्लिसिटी का ज़रिया बन जाएं, तो आम जनता का इन पदों पर बैठे लोगों से भरोसा उठना बिल्कुल लाज़मी है।
एक सच्चे पत्रकार का काम होता है निष्पक्ष होकर जनता के मुद्दे उठाना और सत्ता से सवाल करना। लेकिन जब पत्रकार खुद को किसी विवाद का केंद्र बना लें, चिल्लाकर बहस करें और सिर्फ व्यूज बटोरने के लिए शो चलाएं, तो वह पत्रकारिता नहीं बल्कि इन्फोटेनमेंट (मनोरंजन का धंधा) बन जाती है।
इसी प्रकार शिक्षक का पद समाज में सबसे सम्मानित माना गया है, जिसका काम ज्ञान देना और शालीनता सिखाना है। लेकिन जब कोई शिक्षक कैमरे के सामने आकर बड़बोलेपन, विवादित बयानों या सेलिब्रिटी जैसी पब्लिसिटी में उलझ जाए, तो वह शिक्षक कम और एक कंटेंट क्रिएटर या बिजनेसमैन ज़्यादा लगने लगता है।
सरल शब्दों में कहें तो आज के दौर में काम से ज़्यादा दिखावे की वैल्यू हो गई है। जब तक जनता ऐसे चेहरों को सचमुच का हीरो मानकर उनके पीछे भागती रहेगी, तब तक यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा। आपका यह नज़रिया दिखाता है कि आप इस स्क्रीन के पीछे के खेल को समझ चुके हैं।
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BREAKING| मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की समय-सीमा 'गिरफ्तारी' से नहीं, 'हिरासत' में लिए जाने से शुरू होती है: सुप्रीम कोर्ट
https://hindi.livelaw.in/supreme-court/24-hour-period-for-production-before-magistrate-runs-from-time-of-detention-not-from-formal-arrest-supreme-court-557418
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BREAKING| मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की समय-सीमा 'गिरफ्तारी' से नहीं, 'हिरासत' में लिए जाने से शुरू होती है: सुप्रीम…
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 'गिरफ्तारी' (Arrest) और 'हिरासत' (Detention) के बीच किए जाने वाला बनावटी अंतर खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(2) के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने...
जब तक उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य न बना दूं चैन की सांस नहीं लूंगा : चिराग पासवास
बिहार को स्विट्ज़रलैंड एवं लंदन जैसा विकसित राज्य बनाने के बाद 😂
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अब किसी भी उम्र में बन सकेंगे वकील:बीसीआई ने खत्म की लॉ में दाखिले की उम्र सीमा, सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी - Bci Removes Upper Age Limit For 3-year And 5-year Law Courses Supreme Court Disposes Of Plea - Amar Ujala Hindi News Live https://share.google/Oo7o0ZBekG4kht53n
Amar Ujala
अब किसी भी उम्र में बन सकेंगे वकील: बीसीआई ने खत्म की लॉ में दाखिले की उम्र सीमा, सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने तीन साल और पांच साल के लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र की सीमा हटा दी है। अब किसी भी उम्र