CCC के समकक्ष के संबंध में उत्तर प्रदेश शासनादेश
▪️ हाई स्कूल या इंटर में यदि अलग से कंप्यूटर विषय लिया गया था तो उसे CCC प्रमाणपत्र के समकक्ष माना जाएगा ।
▪️यदि किसी के पास कम्प्यूटर साइंस में कोई डिप्लोमा या डिग्री है तो उसे भी CCC प्रमाणपत्र के समकक्ष माना जाएगा । (जूनियर क्लर्क और शॉर्टहैंड पद के लिए)
▪️ हाई स्कूल या इंटर में यदि अलग से कंप्यूटर विषय लिया गया था तो उसे CCC प्रमाणपत्र के समकक्ष माना जाएगा ।
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विभिन्न विधिशास्त्रियों ने विधि के स्रोतों को अपने-अपने दृष्टिकोण से वर्गीकृत किया है।
सामंड के अनुसार वर्गीकरण
ऑस्टिन के अनुसार वर्गीकरण
अन्य स्त्रोत
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विधिशास्त्र - विधि के स्रोत
विभिन्न विधिशास्त्रियों ने विधि के स्रोतों को अपने-अपने दृष्टिकोण से वर्गीकृत किया है।
सामंड के अनुसार वर्गीकरण
सामंड ने विधि के स्रोतों को दो मुख्य भागों में बांटा है:
1. औपचारिक स्रोत (Formal Sources) : यह वह स्रोत है जिससे कानून अपनी शक्ति और वैधता प्राप्त करता है। सामंड के अनुसार, राज्य की इच्छा ही एकमात्र औपचारिक स्रोत है।
2. भौतिक स्रोत (Material Sources): यह वह स्रोत है जहाँ से कानून की विषय-वस्तु ली जाती है। इसके दो उप-भाग हैं:
▪️ऐतिहासिक स्रोत: इनका कानूनी रूप से बाध्यकारी बल नहीं होता, लेकिन ये कानून निर्माण को प्रभावित करते हैं (जैसे- विधिक ग्रंथ, विदेशी निर्णय)।
▪️विधिक स्रोत: ये कानून के वे स्रोत हैं जिन्हें अदालतें अधिकार और मान्यता देती हैं। ये मुख्य रूप से तीन हैं:
1. रूढ़ि एवं प्रथा
2. पूर्व निर्णय / नाजीर
3. विधायन
ऑस्टिन के अनुसार वर्गीकरण
▪️ऑस्टिन के अनुसार कानून का एकमात्र स्रोत संप्रभु है।
▪️उनके अनुसार, "कमांड (आदेश), संप्रभु और शास्ति" ही विधि के मूल तत्व हैं।
अन्य स्त्रोत
▪️न्याय, साम्या और सद्विवेक
▫️जब किसी मामले में कोई स्पष्ट लिखित कानून या पूर्व-निर्णय उपलब्ध नहीं होता, तब न्यायाधीश इस स्रोत का उपयोग करते हैं।
▫️उत्पत्ति: यह मुख्य रूप से अंग्रेजी कानून की देन है, जहाँ चांसरी कोर्ट साम्या के आधार पर निर्णय देते थे।
▫️भारतीय संदर्भ: भारत में अंग्रेजों के समय से ही अदालतों को यह निर्देश था कि जहाँ कानून मौन हो, वहाँ न्याय, साम्या और सद्विवेक के आधार पर फैसला किया जाए। आज भी न्यायाधीश अपने विवेक का उपयोग करके नए विधिक सिद्धांतों को जन्म देते हैं।
▪️धर्म एवं नैतिकता
▫️धर्म और नैतिकता ने ऐतिहासिक रूप से विधि के विकास को प्रभावित किया।
▫️प्रत्येक नैतिक या धार्मिक नियम स्वतः विधि नहीं बन जाता।
▪️विधिशास्त्रियों के ग्रंथ एवं विद्वानों की राय
▫️विभिन्न देशों के प्रख्यात कानूनविदों, प्राध्यापकों और न्यायविदों द्वारा लिखी गई पुस्तकें और उनकी टिप्पणियाँ भी विधि के विकास में सहायक होती हैं।
▫️प्रभाव: इनका कोई सीधा बाध्यकारी बल नहीं होता, लेकिन इनका अनुनायात्मक मूल्य बहुत अधिक होता है।
▫️उदाहरण: भारत में प्राचीन काल में जीमूतवाहन की दायभाग और विज्ञानेश्वर की मिताक्षरा जैसे विधिक ग्रंथों ने हिंदू कानून के स्रोत के रूप में काम किया। आधुनिक काल में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के निर्णयों में भी नामी न्यायविदों के लेखों का संदर्भ लिया जाता है।
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लड़कियों को अक्सर सलाह दी जाती है कि अपनी फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड न करें, जोकि उनके हित के लिए होती है । लेकिन कुछ लड़कियों एक अहंकार भरा जवाब देती है माय लाइफ माय रूल...
किसी को मना करो तो पुरुषों की छोटी सोच बोलकर उन्हें ही दोषी बना दिया जाता है ।
अभी हाल ही में 80 के दशक की फोटो का ट्रेंड चला....अधिकांश लोग पगला गए थे और भारी मात्रा में अपनी फोटोज AI को दी । जैसे पूरी सल्तनत उन्होंने प्राप्त कर ली हो ।
किसी को मना करो तो पुरुषों की छोटी सोच बोलकर उन्हें ही दोषी बना दिया जाता है ।
अभी हाल ही में 80 के दशक की फोटो का ट्रेंड चला....अधिकांश लोग पगला गए थे और भारी मात्रा में अपनी फोटोज AI को दी । जैसे पूरी सल्तनत उन्होंने प्राप्त कर ली हो ।
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