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CBI APO vacancy
जब तुम वो बन जाओ...
जो बनना चाहते हो ।
तब उनके लिए कुछ जरूर करना
जो तुम कभी हुआ करते थे।
जो बनना चाहते हो ।
तब उनके लिए कुछ जरूर करना
जो तुम कभी हुआ करते थे।
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Source: Amar Ujala
https://share.google/cQUCRxphHEBUPQ90y
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Amar Ujala
सु्प्रीम कोर्ट अपडेट: जन सूचना सेवा शुरू करने का एलान, फैसलों के सार के साथ हिंदी में मिलेंगे ऑडियो-वीडियो
सु्प्रीम कोर्ट अपडेट: जन सूचना सेवा शुरू करने का एलान, फैसलों के सार के साथ हिंदी में मिलेंगे ऑडियो-वीडियो supreme-court-updates-launches-jan-soochna-seva-hindi-public-information-service-other-cases
MPADPO और UPPCS-J के कॉमन सब्जेक्ट
1. दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम, 1961
2. गर्भ का चिकित्सीय समापन, 1971
3. स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986
4.गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्ण निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994
5.घरेलू हिंसाओं से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005
6.माता पिता और वरिष्ठ नागरिको का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007
7. लैंगिक अपराधो से बालको का संरक्षण अधिनियम, 2012
8. महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013
इन सबकी क्लास YOU TUBE पर चल रही है ।
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हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया है। मुझे भरोसा है कि हम भाजपा/NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करेंगे : गृह मंत्री अमित शाह
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#mains_GS_CA@AoneJA
सुप्रीम कोर्ट की जन सूचना सेवा देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा 14 सितंबर 2026 (राष्ट्रीय हिंदी दिवस) के अवसर पर घोषित की गई एक प्रगतिशील और महत्वपूर्ण पहल है। इस सेवा का मुख्य उद्देश्य न्याय व्यवस्था को आम लोगों के लिए अधिक समावेशी, सरल और सुलभ बनाना है।
इस सेवा से जुड़ी प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
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सुप्रीम कोर्ट ने शुरू की जन सूचना सेवा पहल
सुप्रीम कोर्ट की जन सूचना सेवा देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा 14 सितंबर 2026 (राष्ट्रीय हिंदी दिवस) के अवसर पर घोषित की गई एक प्रगतिशील और महत्वपूर्ण पहल है। इस सेवा का मुख्य उद्देश्य न्याय व्यवस्था को आम लोगों के लिए अधिक समावेशी, सरल और सुलभ बनाना है।
इस सेवा से जुड़ी प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
▪️सरल भाषा में फैसलों का सार: इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के चयनित और महत्वपूर्ण निर्णयों व आदेशों का जटिल कानूनी भाषा के बजाय बहुत ही आसान और सरल हिंदी में सार उपलब्ध कराया जाएगा।
▪️ऑडियो और वीडियो बुलेटिन: आम लोगों को जानकारी आसानी से समझ आए, इसके लिए रोजाना करीब 15 से 30 मिनट का हिंदी ऑडियो और वीडियो बुलेटिन भी जारी किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित आधिकारिक फैसलों के ओरिजिनल लिंक भी दिए जाएंगे।
▪️किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा: यह पहल मुख्य रूप से आम नागरिकों, वादकारियों और विशेष रूप से दिव्यांगजनों (जिन्हें लंबे कानूनी दस्तावेज पढ़ने या समझने में कठिनाई होती है) को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
▪️अन्य भाषाओं में विस्तार: हालांकि इस सेवा की शुरुआत हिंदी से की जा रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य भारतीय भाषाओं में भी विस्तारित किया जाएगा, ताकि देश के अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लोग अपनी भाषा में अदालती फैसलों को समझ सकें।
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हम तो तुम्हारी हर बेरुखी को भी मोहब्बत समझ बैठे, PCS-J
और तुम हमारी बेपनाह चाहत को भी नज़रअंदाज़ कर बैठे।
😊😊
और तुम हमारी बेपनाह चाहत को भी नज़रअंदाज़ कर बैठे।
😊😊
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UP APO 2025
आज की सुनवाई का अपडेट
आज मामले में लगभग 2 घंटे तक सुनवाई हुई। सरकार की ओर से AAG श्री मनीष गोयल ने अपना पक्ष रखा।
माइग्रेशन के मुद्दे पर सरकार की ओर से इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ के निर्णय के उस हिस्से का उल्लेख किया गया, जिसमें 50% आरक्षण की सीमा (50% ceiling) से संबंधित चर्चा है।
सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय की ओर से पुनः महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया कि “अनारक्षित वर्ग” से क्या केवल सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को ही समझा जाएगा?
यह प्रश्न इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे में अनारक्षित श्रेणी के संबंध में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को ही शामिल किए जाने की बात सामने आती है, जबकि आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी, जो मेरिट के आधार पर अनारक्षित सीटों पर आ सकते हैं, उन्हें उस गणना में शामिल किए जाने का प्रश्न उठ रहा है।
आज की बहस का मूल सार यही रहा कि “अनारक्षित” की वास्तविक संवैधानिक/कानूनी अवधारणा क्या है और माइग्रेशन की प्रक्रिया में उसका सही अनुप्रयोग किस प्रकार होना चाहिए।
अगली सुनवाई:
कल दोपहर 2:00 बजे से सुनवाई पुनः शुरू होगी।
हार नहीं माननी है।
यह मामला लगातार सुनवाई के महत्वपूर्ण चरण में है। लगातार हो रही सुनवाई से आप सभी अंदाजा लगा सकते हैं कि मामला कितना गंभीर और महत्वपूर्ण है।
माननीय न्यायालय के समक्ष अनेक मामले होते हैं और समय सीमित होता है, लेकिन आप सभी की एकजुटता, धैर्य और मजबूती ही इस लड़ाई की सबसे बड़ी ताकत है।
मजबूती के साथ डटे रहिए। संघर्ष जारी रखिए।
न्याय की लड़ाई में धैर्य मत खोइए।
एकजुटता ही हमारी ताकत है।
~Copied
आज की सुनवाई का अपडेट
आज मामले में लगभग 2 घंटे तक सुनवाई हुई। सरकार की ओर से AAG श्री मनीष गोयल ने अपना पक्ष रखा।
माइग्रेशन के मुद्दे पर सरकार की ओर से इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ के निर्णय के उस हिस्से का उल्लेख किया गया, जिसमें 50% आरक्षण की सीमा (50% ceiling) से संबंधित चर्चा है।
सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय की ओर से पुनः महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया कि “अनारक्षित वर्ग” से क्या केवल सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को ही समझा जाएगा?
यह प्रश्न इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे में अनारक्षित श्रेणी के संबंध में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को ही शामिल किए जाने की बात सामने आती है, जबकि आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी, जो मेरिट के आधार पर अनारक्षित सीटों पर आ सकते हैं, उन्हें उस गणना में शामिल किए जाने का प्रश्न उठ रहा है।
आज की बहस का मूल सार यही रहा कि “अनारक्षित” की वास्तविक संवैधानिक/कानूनी अवधारणा क्या है और माइग्रेशन की प्रक्रिया में उसका सही अनुप्रयोग किस प्रकार होना चाहिए।
अगली सुनवाई:
कल दोपहर 2:00 बजे से सुनवाई पुनः शुरू होगी।
हार नहीं माननी है।
यह मामला लगातार सुनवाई के महत्वपूर्ण चरण में है। लगातार हो रही सुनवाई से आप सभी अंदाजा लगा सकते हैं कि मामला कितना गंभीर और महत्वपूर्ण है।
माननीय न्यायालय के समक्ष अनेक मामले होते हैं और समय सीमित होता है, लेकिन आप सभी की एकजुटता, धैर्य और मजबूती ही इस लड़ाई की सबसे बड़ी ताकत है।
मजबूती के साथ डटे रहिए। संघर्ष जारी रखिए।
न्याय की लड़ाई में धैर्य मत खोइए।
एकजुटता ही हमारी ताकत है।
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