𝐀 𝐨𝐧𝐞 𝐉𝐮𝐝𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐀𝐜𝐚𝐝𝐞𝐦𝐲 (करें अपनी तैयारी बेहतर)
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A one Judicial Academy-Hindi
विधि संबंधी परीक्षाओं की "करें अपनी तैयारी बेहतर"

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अब देश में पांच यूनिवर्सिटी 'क्लासिकल लैंग्वेज' पढ़ाएंगी:शिक्षा मंत्रालय ने असमिया, बंगाली, मराठी, पाली और प्राकृत भाषा को मंजूरी दी

शिक्षा मंत्रालय 3 अक्टूबर को शास्त्रीय भाषाओं यानी क्लासकिल लैंग्वेज के लिए पांच हायर एजुकेशन सेंटर स्थापित करने की मंजूरी दी। हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के मुताबिक, ये सेंटर क्लासिकल असमिया, क्लासिकल बंगाली, क्लासिकल मराठी, क्लासिकल पाली और क्लासिकल प्राकृत के अध्ययन के लिए बनाए जाएंगे।
UP पुलिस की हालत दयनीय: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अचानक तबीयत बिगाड़ने से 75 वर्ष की आयु में नाना पाटेकर का निधन
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जेवर एयरपोर्ट का नया नाम नरेंद्र मोदी इंटरनेशन एयरपोर्ट ❤️👍
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ज्ञानेश के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन आज : दिल्ली बंद
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अब CJI ने बोला मक्खी मारने के लिए हथौड़े का प्रयोग नहीं : संभवतः उनका इशारा आज के CJP प्रदर्शन को रोकने के लिए तीखा तंज है ।
बिना इंटरनेट, केवल ब्लूटूथ के जरिए काम करने वाले मैसेजिंग ऐप Bitchat को भारत में Google प्ले स्टोर और Apple ऐप स्टोर से हटा दिया गया है ।
बिहार APO प्रारंभिक परीक्षा

Final Answer key जारी
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गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया

दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिश पर जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है।

▪️नए प्रदर्शन स्थल: जंतर-मंतर की जगह अब दिल्ली में तीन नए वैकल्पिक स्थल तय किए गए हैं:
• रामलीला मैदान
• बुराड़ी मैदान
• पूर्वी दिल्ली का सीबीडी (CBD) ग्राउंड
▪️गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति ने नागरिकों की सुविधा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों और सुरक्षा व यातायात संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
▪️विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर पाबंदी बताया है।
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केरलम विधान सभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव किया पारित

हाल ही में केरलम विधानसभा द्वारा भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया है । यद्यपि राज्य विधानसभा का यह कदम कानूनी रूप से प्रभावी नहीं है, परंतु यह घटना भारतीय लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को बनाए रखने की चुनौती को रेखांकित करती है।


मुख्य चुनाव आयुक्त की संवैधानिक स्थिति और सुरक्षा
भारतीय संविधान के भाग XV (अनुच्छेद 324 से 329) में निर्वाचन प्रणाली का उल्लेख है। अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद की सुरक्षा प्रदान की गई है:
▪️हटाने की प्रक्रिया: मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है।
▪️ संसद का एकाधिकार: इस प्रक्रिया (महाभियोग जैसी प्रक्रिया) को शुरू करने और पारित करने का अधिकार केवल देश की संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के पास है, जिसमें विशेष बहुमत (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 और कुल सदस्यता का बहुमत) की आवश्यकता होती है।


राज्य विधानसभा के प्रस्ताव का विधिक व संवैधानिक विश्लेषण
न्यायिक दृष्टिकोण से, किसी राज्य विधानसभा द्वारा पारित ऐसे प्रस्ताव का मूल्यांकन दो स्तरों पर किया जा सकता है:
▪️विधिक शून्यता : चूंकि संविधान में राज्य विधायिकाओं को केंद्रीय निर्वाचन आयोग के नियंत्रण या उसके पदाधिकारियों को हटाने के संबंध में कोई शक्ति नहीं दी गई है, इसलिए यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यह केवल एक राजनीतिक या नैतिक अभिव्यक्ति मात्र है।
▪️शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत: संविधान ने केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया है। राज्य सूची या समवर्ती सूची के दायरे से बाहर जाकर केंद्रीय संस्थाओं के आंतरिक कामकाज या उनकी नियुक्तियों पर इस प्रकार का प्रस्ताव पारित करना संवैधानिक मर्यादा और संघीय संतुलन के सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है।

अन्य महत्वपूर्ण विधिक बिंदु
▪️अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2023) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का आधारभूत ढांचा माना था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग का निष्पक्ष होना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए अनिवार्य है।
▪️इस विवाद की जड़ में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां हैं। अनुच्छेद 326 (वयस्क मताधिकार) के तहत मतदान का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है। यदि प्रक्रियात्मक खामियों (जैसे विशेष गहन पुनरीक्षण या SIR) के कारण बड़े पैमाने पर नागरिकों के नाम कटते हैं, तो यह न्यायिक समीक्षा का विषय बन जाता है।
▪️मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं। इसमें देश के मुख्य न्यायाधीश को शामिल न किए जाने पर लगातार कानूनी और संवैधानिक बहस चल रही है, जिसका प्रतिबिंब राज्यों के इस तरह के प्रस्तावों में दिखाई देता है।


निष्कर्ष
केरल विधानसभा द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए पारित किए गए प्रस्ताव से कानूनी रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर कोई सीधा फर्क नहीं पड़ेगा। भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार किसी राज्य की विधानसभा ने मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित किया है। इससे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर एक बड़ा नैतिक और राजनीतिक दबाव बनता है।

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र का मूल ढांचा हैं। अतः, जहाँ एक ओर राज्य विधायिकाओं को संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करना चाहिए, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन आयोग जैसी शीर्ष संस्था को भी अपनी कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि जनता और सभी राजनीतिक हितधारकों का उस पर अटूट विश्वास बना रहे। अंततः, संविधान की सर्वोच्चता और कानून का शासन (Rule of Law) ही सर्वोपरि है।
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UP RO/ARO
▪️502 पदों पर विज्ञापन जल्द
▪️पाठ्यक्रम भी संशोधित होगा